Thursday, December 8, 2016

Diversified Fund में निवेश से मोटा Return

Diversified Fund




Share में निवेश से ऊँचा return मिलने की सम्भावना रहती है। लेकिन इसमें जोखिम भी बहुत अधिक होता है। ऐसे में diversified equity fund में निवेश से आप कम जोखिम में share की तरह हासिल कर सकते है। इसमे आप छोटी पूंजी से भी निवेश की शुरुआत कर सकते है।
क्या है Diversified Fund

यह mutual fund की scheme equity fund का हिस्सा है। लेकिन इसके निवेश में विविधता रहती है और इसकी पूंजी विभिन्न क्षेत्रो में काम करने वाली company के share में लगाई जाती है। इसकी वजह से इसमें जोखिम कम होता है और return मिलने की गुंजाइश रहती है। इसके तहत focus fund, फ्लेक्सी fund और multi-cap fund आदि आते है। यह लम्बी अवधि का निवेश विकल्प माना जाता है और एक साल की बजाय तीन साल की अवधि में बेहतर return देता है।

कितना मिलेगा Return

diversified fund की चुनिंदा scheme में पिछले एक साल में 32.4% तक का return दिया है। जबकि एक साल में इसमें 7.8% का औसत return मिला है। mutual fund की scheme होने के बाद भी इस अवधि में इसने सेंसेक्स के करीब return दिया है। इस अवधि में बाँम्बे स्टॉक एक्सचेंज(BSE) के सेंसेक्स ने 8% return दिया है। जबकि इस अवधि में इसकी चुनिंदा scheme में 37.9% तक का ऊँचा return मिला है।

Focus Fund में क्या है खास

इसमें fund किसी खास क्षेत्र पर आधारित होता है, जिसमें निवेश किया जाता है। इसे sector fund भी कहते है। focus fund का प्रदर्शन उस क्षेत्र के प्रदर्शन के आधार पर ही depend होता है। यदि क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर है तो निवेशक को बेहतरीन return मिलेगा अन्यथा उसके return पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। वैसे mutual fund में निवेश का एक फायदा यह है कि प्रशिक्षित fund manager की देखरेख में होता है, जिससे आपको ज्यादा चिंता की जरूरत नही होती, क्योंकि उन्हें क्षेत्र विशेष की संभावनाओ के विषय में technical रूप से बेहतर जानकारी होती है। fund manager IT, फार्मा, banking, इन्फ्रा और अन्य क्षेत्रों की सम्भावनाओ के आधार पर निवेश करते है। पिछले एक साल में banking क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर रहा है जबकि इसके पहले के वर्षो में इसमें सुस्ती देखी गई थी।

फ्लेक्सी Fund का फायदा

इस fund का सबसे बड़ी विशेषता निवेश के लिहाज से इसका लचीलापन है। फ्लेक्सी fund को large cap (बड़ी पूंजी वाली company), mid cap या small cap किसी में भी सुविधानुसार निवेश किया जा सकता है। यदि fund manager को लगता है market की चाल large cap company के लिए ज्यादा बेहतर है तो वह fund की पूंजी का ज्यादा हिस्सा उन company में निवेश कर सकते है। इसी तरह यदि fund manager को लगता है कि market में mid cap या small cap company के लिए बेहतर मौके है तो वह सुविधानुसार fund की अधिकांश पूंजी उसी में निवेश कर देते है। फ्लेक्सी fund में return अधिक मिलने की सम्भावना रहती है।

Multi Cap Fund में संतुलन

इस fund में पूंजी को market पूंजीकरण के हिसाब से बंटी हुई company में पहले से निर्धारित सीमा के आधार पर निवेश किया जाता है। इसकी शुरुआत करते समय ही इसकी जानकारी निवेशकों को दे दी जाती है कि large cap, mid cap और small cap में कितना हिस्सा निवेश किया जायेगा। बेहतर return के साथ ही निवेश पर जोखिम को कम करने के मद्देनजर ऐसा किया जाता है।

शुल्क और प्रदर्शन जरुर देखें

mutual fund में company management शुल्क भी वसूलती है। equity से जुड़े fund में इसकी दर 2.37% तक है। हालाकिं, कुछ company महज 1.25% वसूलती है। ऐसे में शुल्क और स्क्रीम के पिछले प्रदर्शन से तुलना करने के बाद भी निवेश का फैसला करें। यदि किसी दो स्क्रीम में शुल्क 2.37% है तो उसका अंतिम return घटकर 7.63% हो जायेगा। वही दूसरी स्क्रीम में शुल्क 1.25% है तो उसका return 8.75% होगा।


Monday, December 5, 2016

Motivational Story- Asali Labh

असली लाभ

किसी समय एक आदमी के पास बहुत से पशु-पक्षी थे। उसने सुना था कि गांव के बाहर एक संत आये हुए है, जो पशु-पक्षियों की भाषा समझते है। वह उनके पास गया और उनसे उस कला को सीखने की हठ करने लगा।

संत ने शुरुआत में कई बार टालने की कोशिश भी की, पर वह आदमी संत की सेवा में जुटा रहा। अंत में प्रसन्न होकर संत ने व्यक्ति को वह कला सिखा दी। उसके बाद से वह व्यक्ति पशु-पक्षियों की बातें सुनने लगा।

एक दिन मुर्गे ने कुत्ते से कहा कि घोड़ा शीघ्र मर जायेगा। यह सुनकर उस व्यक्ति ने घोड़े को बेच दिया। इस तरह वह नुकसान से बच गया। कुछ दिनों के बाद उसने उसी मुर्गे को कुत्ते से कहते सुना कि जल्द ही खच्चर मरने वाला है। उसने नुकसान से बचने की आशा में वह खच्चर भी बेंच दिया। फिर मुर्गे ने कहा कि नौकर की मृत्यु होने वाली है। बाद में उसके family को कुछ ने देना पड़े, इसलिए उस व्यक्ति ने नौकर को नौकरी से हटा दिया। वह बहुत खुश हो रहा था कि उसे उसके ज्ञान का इतना फल प्राप्त हो रहा है। तब एक दिन उसने मुर्गे को कुत्ते से कहते सुना कि वह आदमी भी मर जाने वाला है। अब वह भय से कांपने लगा। वह दौड़ता हुआ संत के पास गया। पूछा कि अब क्या करूं?

संत ने कहा, ‘जो अब तक कर रहे थे।‘

व्यक्ति ने कहा, ‘आप क्या कह रहे है, मैं समझा नही?’

संत ने कहा, ‘जाओ और  स्वयं को भी बेच डालो।‘

व्यक्ति ने कहा, ‘आप मजाक क्यों कर रहे हैं? मैं परेशान हूँ और आपसे पूछ रहा हूँ कि क्या करूं?

संत ने कहा, ‘जो तुम्हारे अपने थे, तुमने उनका अंत जानकर उन्हें बेच दिया। उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा। तुम खुश हुए कि हानि से बच गये। तर्क के हिसाब से अभी भी वही करो, जो अब तक किया है। अब तक तुम भौतिक हानि से बचने के लिए सब कर रहे थे। फिर अब भय क्यों? अभी समय है, खुद को बेच लो। जो भी मिल जाएँ, बचा लो, लाभ कर लो। बाद में तो वो भी नही मिलेगा। तुमने कभी मुर्गे से जानने की कोशिश नही की कि मैं कब मरूँगा।? अगर यह जानते तो life को इस इस तरह से न बिताते, जैसे बिता रहे थे। अपने अंत को जानने वाले व्यर्थ के लाभ में नही पड़ते। वे असली लाभ कमाने में लगे रहते है।





Thursday, December 1, 2016

खर्च जो लाते हैं खुशियां


The Cost to bring Happiness

जब तक भीतर से बुद्ध या महावीर नही हो जाते, तब तक जरूरतों की चिंता सताती ही है। जमा और खर्च का हिसाब चलता रहता है। और जब हाथ में ही कम हो तो हर नया खर्च मुसीबत लगता है। पर कुछ खर्च ऐसे होते है, जिनमें कंजूसी ना करना ही अच्छा होता है।

खर्च डराते हैं। कुछ को पैसे की कमी तंग कर रही होती है, तो कुछ नीयत की कमी से लाचार होते है। पर बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो खर्च की सही समझ न होने की वजह से जूझते रहते है। उन छोटे-छोटे खर्चों में कटौती करते है, जिनमें saving कम और नुकसान अधिक होता है। ये अलग बात है कि वह बचत भी कुछ अधिक नही होती।

अरब देशों में कहा जाता है कि या खुदा! मेरे खर्चे बढ़ा। हर कदम पर कंजूसी करने वालों को यह बात अजीब लग सकती है। पर यह एक प्रार्थना है, जो खुद के खर्चो से अधिक सक्षम बनाने पर जोर देती है। यह सोच है, जो आय को बढ़ाने की जमीन तैयार करती है। Robin Sharma कहते है, “मैं कम, लेकिन अच्छी गुणवत्ता की चीजें खरीदता हूँ। अच्छी गुणवत्ता, निवेश है, जो आप खुद को बेहतर बनाने के लिए करते हैं।‘

चीनी दार्शनिक लाओत्से तो यहाँ तक कहते है कि सब तरह की सम्पत्ति खो जाने के बाद जो आप बचते हैं, वही आपकी असली जमा पूंजी है।

अपनी जरूरतों को समझें

खर्च करने की सही समझ का अर्थ है अपनी जरूरत को समझना। जरूरतें, जो आपके जीवन मूल्यों से तय होती है। किसी के लिए career, तरक्की व् promotion की अहमियत होती है, तो किसी के लिए प्यार, family और रिश्तों की। किसी के लिए ईमानदारी और customer संतुष्टि मुख्य है, तो किसी के लिए किसी भी कीमत पर आगे बढ़ना जरूरी है। एक बार जब अपने मूल्यों की समझ आ जाती है तो अपनी जरूरतें और खर्चो की समझ आते हुए देर नही लगती। फिर आप दिखावे या व्यर्थ की चीजों पर खर्च नही करते, बल्कि उन मूल्यों पर खर्च करते है, जो आगे चलकर ख़ुशी देते है। अपनी saving को इन्हीं खुशियों की दिशा दें।

अपने अनुभवों को बढायें

सेन फ्रांसिस्को stat university में हुए एक research के अनुसार, चीजों को बटोरने से अधिक experience पर खर्च करना संतुष्टि और ख़ुशी देता है। यह experience हमारी मानसिक जरूरत और सम्पूर्ण बेहतरी से जुड़े होते है। motivational speaker ‘Deepak Chopra’ कहते है, ‘experience हमारी पहचान होते है, हमें दूसरों से जोड़ते है और विकसित होने का मौका देते हैं।‘
हजारी प्रसाद द्धिवेदी ‘आलोक पर्व की ज्योतिमर्य देवी’ में लिखते है कि भौतिक लक्ष्मी इच्छा के रूप में व्यक्त होती है। यह इच्छा जब ज्ञान से उपजती है और क्रिया के रूप में आगे बढ़ती है तो जगत का कल्याण करती है। लक्ष्मी के इस रूप का वाहन गरूड़ होता है, जो शक्ति, वेग और सेवा का प्रतीक होता है।

ये खर्च अच्छें हैं

1-  अपने या family की health से समझौता न करें। footwear, इनरवियर, medicine, doctor की फीस, रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों में कटौती करना सेहत पर भारी साबित होता है।

2-  दूसरों की खुशियों पर खर्च करें। कई बार छोटा सा उपहार, कुछ देर का साथ, छोटी-छोटी मदद आपके रिश्तों को ताउम्र चलने वाली life दे देते है।

3-  अच्छी education और career पर खर्च करें। सपनों को पूरा करने के लिए नई skill सीखने पर खर्च करना आगे ले जाता है।



   



Tuesday, November 29, 2016

जगाएं समृद्धि की चेतना

jagaen samrddhi kee chetana

Wake prosperity consciousness


ये तो आप मानते ही होगें कि पैसा समृद्धि का एक प्रमुख अंग हैं। पैसा हम सब कमाना चाहते हैं, पर कोई खुलकर बोल नही पाता। कुछ भी बोलने से पहले दिमाग में सवालों की बौछार हो जाती है-लोग क्या कहेंगे? हाय! किसी ने हमें लालची समझ लिया तो? अपनी इसी गलत सोच से निकलना और अपनी बेहतरी के प्रयास करना ही इस लेख का purpose है। मेरा यह मानना है कि success प्राप्ति के लिए सही समझ, सही कदम और समृद्धि के बीच तालमेल होना बेहद जरूरी है।

अपने seminar में कभी-कभी मैं 100 dollar का नोट लेकर खड़ा हो जाता हूँ और बोलता हूँ कि यह नोट मुझे किसी को देना है, क्या किसी को चाहिए? बहुत लोग हाथ उठाते है, पर करते कुछ नही है। मैं नोट को हवा में तब तक हिलाता रहता हूँ, जब तक कोई भागकर स्टेज तक नही आ जाता।

अब यहां दो सीख मिलती है। पहली, पैसा उसी को मिलता है, जो मौके पर कदम उठाता या फैसला लेता है। दूसरी, हमारी अपनी चेतना का एक level होता है, जो हमें काम करने के लिए सही फैसला लेने या उसे टालने के लिए प्रेरित करता है।

जब मैं लोगो से पूछता हूँ कि वो उपर क्यों नही आये तो हमेशा एक ही जवाब मिलता है- हमें शर्म आ रही थी। उन्हें लगा कि लोग क्या कहेंगे। उन्होंने सोचा, ये कोई चाल है। ये सभी जवाब उनके डर, न्यूनता और निराशावाद से प्रभावित समझ की देन होते हैं।

ये सभी power हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी को हर स्तर पर प्रभावित कर सकती हैं। हर क्षण या तो हम अपने उपर पड़ने वाले दबावों को पोषित करते रहते है या फिर उन्हें किसी बेहतर विचार से बदल देते है। नीचे दिए गये उपायों से आप अपनी समृद्धि की समझ को बढ़ा सकते हैं। अपने हिस्से की समृद्धि को बुलावा दे सकतें है।

बातचीत पर ध्यान दें

अब बातों के समन्दर में तैरते है। कोई भी समय हो, चाहे आप meetings में हो, कोई phone कर रहे हो, कोई email भेज रहे हो, किसी से बात कर रहे हों, गाने सुन रहे हों या कोई book ही क्यों न पढ़ रहे हों, आप किसी न किसी से संवाद ही कर रहे होते हैं। और तो और जब आप कुछ लिखने बैठें या कुछ समय के लिए कुछ सोचने ही क्यों न लगें, तब भी आप अपने आप से संवाद कर रहे होते है। इन सभी संवादों के मिले-जुले असर पर विचार करें। मेरे friend ‘जिम रॉन तो कहते है कि जिन पांच लोगों के साथ हम सबसे अधिक समय गुजारते है, हम उन्हीं का मिला-जुला रूप होते है। हमारी बातचीत का स्तर ही हमारे life का स्तर बनाता है।

सोचें कि आपके life में वो पांच लोग कौन है, जिनसे आप सबसे अधिक बात करते हैं? इन सबसे हुई आखिरी बातचीत किस विषय पर हुई थी? और क्या उस बातचीत ने आपकी समृद्धि की समझ में इजाफा किया या उसे खत्म कर दिया?

समृद्धि की ओर ले जाने वाली बातें करें

ऐसे लोगों से दूर रहने का निश्चय करें, जो हर समय ‌द्धेश के शिकार होते है। केवल शिकायतें करते रहते है। बातचीत के लिए ऐसे लोगों का साथ चुनें, जो आपको समृद्धि के पथ पर आगे ले जाएँ। उन लोगों के साथ समय बिताएं, जो वह काम कर रहे है, जो आप भी करना चाहते है। उनसे पूछें कि वो इस इस क्षेत्र में कैसे आये और किस तरह उन्होंने success प्राप्त की।

इसके साथ-साथ हफ्ते में कम से कम एक book जरुर पढ़ें। सफल लोगों की प्रेरक story और life के बारे में पढ़ें। खूब पढ़ें और अपने पैसे के सही उपयोग, बच्चों के पालन-पोषण, स्नेहपूर्ण रिश्तों के निर्माण और स्वस्थ रहने के तरीके सीखें।

अपने सपनों को कभी न छोड़े

क्या कभी आप ऐसे व्यक्ति से मिले हैं, जिसने आपकी क्षमताओं पर शक किया हो? ‘chicken soup for the soul’ के प्रकाशक के साथ बातचीत के दौरान ऐसा अनुभव मेरे और मार्क विक्टर हैनसन के साथ हो चुका है। हमने उनसे पूछा कि अंदाजन कितनी books बिक जाएँगी? जवाब मिला अगर 20,000 कॉपियाँ बिक गई तो आप बहुत भाग्यशाली होंगे।

यकीन मानिये, ये हमारा सपना नही था। हमारा लक्ष्य तो इससे काफी उपर था- 6 माह में 1,50,000 कॉपियाँ और 18 माह में 15 लाख प्रतियाँ। प्रकाशक जोर से हंसा और बोला- ये तो असंभव है।

पर मैं आपको बताउं 1,35,000 प्रतियाँ 6 महीनों में और 13 लाख कापियां 18 महीनों में बिकीं। हमने न केवल अपने लक्ष्य के आसपास बिक्री की, बल्कि अपने प्रकाशक के अनुमान से कई गुना ज्यादा की बिक्री की। हमारी उस पहली books की कापियां पूरे world में 1 करोड़ और अमेरिका में 80 लाख से अधिक बिकीं।

जब भी आप किसी ऐसे संवाद में होते है, जिससे आपके सपने पर बुरा असर पड़ता है तो आपके पास दो रास्ते होते है- या तो अपने सपने को वहीं मार दो या और अधिक जोश और दृढ़ विश्वास के साथ उसे पूरा करने में लग जाओ। अपने वास्तविक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते ही दिमाग ढंग से काम करने लगता है। उसे सूचना मिल जाती है, ‘मैं तब तक हार नही मानूंगा, जब तक मेरा सपना न पूरा हो जाए। मैं फिर से परिश्रम करने के लिए तैयार हूँ।

लक्ष्य के इस गहन स्तर को दृढ बनाये रखें, बार-बार दोहरायें...

1-  मैं हमेशा उन लोगो को attract करता हूँ, जिनकी मैं मदद कर सकता हूँ और जो मेरी मदद कर सकते हैं।

2-  मैं हमेशा अपने साथ बेहतरीन लोगों को काम करने के लिए आकर्षित करता हूँ।

3-  हमारे उपभोक्ता का वर्ग बढ़ रहा है।

4-  मैं लक्ष्य की ओर ले जाने वाले अवसरों का स्वागत करता हूँ।

अब कुछ और imagine करें। जो बातें ख़ुशी दे सकती है, जो success का एहसास कराती है, खुद को उन्हें जीते हुए देखें।

दान करें

उपर दिए गये इन सपनों के साथ ये भी जरुर देखें कि अपनी समृद्धि को दूसरों के साथ भी बांट रहे है। world के अधिकतर अमीर अपनी कमाई का 10% दान में दे देते है। आप अपने को उसी स्थान पर वही काम करते हुए महसूस करें। जो दान करते है, वो पाते भी है और पुण्य का फल हमेशा बढ़कर ही मिलता है।



# इस article के writer ‘जैक कैनफील्डअमेरिका के famous writer और motivational speaker है। bestseller book ‘chicken soup for soul’ श्रृंखला के सह-लेखक है।












Saturday, November 26, 2016

Meetings के नायाब तरीके

meetings

एक स्पष्ट रणनीति के तहत काम करने और भावी योजनायें तैयार करने के लिए office में meetings करना आवश्यक है। लेकिन अकसर देखने में आता है कि इसके लिए बेहतर planning नही होने की वजह से इस प्रक्रिया में भी काफी समय बर्बाद हो जाता है। तो क्यों न इस प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए कुछ प्रभावी को कारगर बनाने के लिए कुछ प्रभावी तरीकों पर विचार किया जाये। इस लिहाज से meeting से जुड़ी कुछ चीजों पर focus करना बेहद जरूरी है:

लगायें Timer

meeting के दौरान बिना वक्त की परवाह किये बोलते जाना या विषय से भटक जाना आम बात है। meetings में समय बर्बाद न हो, इसके लिए smartphone में timer लगाये जा सकते है। इससे meetings तय समय में पूरी होगी और विषय से भटकाव की गुंजाइश भी कम रहेगी। google की physical clock इन दिनों काफी चर्चित है। इसे तैयार करने वाले जैक नैप का मानना है कि अन्य timer apps की तुलना में यह कही ज्यादा प्रभावी है।

प्रभावशाली एजेंडा बनाएं

कामयाब उधमी मानते है कि प्रभावी meetings प्रभावी एजेंडे के साथ शुरू होती है। प्रभावशाली एजेंडा तय करने के सीक्रेट इन चीजों में छिपे है-

1-  एजेंडे का input meeting से पहले ही प्रतिभागियों से मांग लीजिये, ताकि नये विषय पर चर्चा की जा सके

2-  meeting का purpose स्पष्ट रखें।

3-  पहले से ही साफ कर लें कि समन्वयक कौन है।

4-  meeting में मौजूद सभी प्रतिभागियों से पहचान होनी चाहिए, न होने की स्थिति में परिचय कराया जाना चाहिए। हो सकें तो meeting में चुनिंदा लोग ही रखें। स्टीव जॉब्स खासतौर से इस चीज के लिए जाने जाते थे कि अगर कोई शख्स एक वाजिब कारण और बेहतर idea के साथ वहां नही है तो उसे meeting से बाहर भेज देते थे।

5-  विषय से जुड़ी decision making पर अधिक focus करें।

6-  हर एजेंडे का एक समय तय करें, ताकि प्रतिभागी focus कर सकें।

Stand-up Meetings ज्यादा बेहतर

साल 1999 में मनोवैज्ञानिकों की एक team ने खड़े होकर और बैठकर, दोनों तरह से होने वाली meetings पर research किया था। 56 अलग-अलग समूहों पर हुई इस research में यह बात निकलकर आई कि खड़े होकर चलने वाली meetings के मुकाबले बैठकर की जाने वाली meetings 34% ज्यादा लम्बी खिंचती है। उनके नतीजे standing meetings के मुकाबले अच्छे फैसले लिए जाते है। वाशिंगटन university के एक अन्य study में भी standing meetings को बेहतर बताया गया।