Friday, October 7, 2016

आपकी जिन्दगी की दिशा

the direction of your life

The Direction of your Life

जो बदलाव आप ला सकते है, वह और कोई नही ला सकता। अगर आप अपना योगदान नही देते तो आपके सिवा उसे कोई और भी नही दे सकता। हमारी विशिष्ट क्षमताएं ही दुनिया को कुछ नया देने की सामर्थ्य रखती है।

आपने कभी न कभी यह बात जरुर सोची होगी कि आपकी जिन्दगी मायने रखती है या नही। हम सभी अपनी मर्जी के मालिक है और इस विषय में भी हम यह सोचने के लिए आजाद है कि हमारी life दुनिया में कोई नया बदलाव ला रही है या नही। पर इतना जरुर है कि हमारे ये विचार हमारी पसंद और कार्यो को रोजाना प्रभावित करते है। अगर हम इस पर विचार न करें तो हम हमेशा ही अपनी सोच की बनी-बनाई परिपाटी पर चलते रहेंगे। फिर चाहे वह हमें किसी भी दिशा में ले जाए या हमारी जिन्दगी के मायनों को किसी भी तरह से परिभाषित करें।

कई बार मैंने पूरे विश्वास के साथ जीवन जीया है, जीवन को दिशा दी है, अपने परिजनों से मीलों दूर रहा हूँ, ऐसी भूमिकाओं में रहा हूँ, जिनसे दुनिया के लिए कुछ कर संकू और इन सभी चीजों में मैंने अपने जीवन को अर्थपूर्ण पाया है। इसके बावजूद अन्य कई मौकों पर मैं खुद को हर चीज से विमुख भी पाता हूँ। हेनरी फोर्ड ने कहा है,’ आप चाहे खुद पर विश्वास करें या अविश्वास, आप सही होते है।‘ यहा भी कुछ ऐसा ही है। अगर आपको लगता है कि आपकी जिन्दगी के मायने है, तो निश्चित रूप से है।

अलग नजरिया है आपका

आपका दृष्टिकोण आपके व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है, जिन्हें आपने शिद्दत से महसूस किया है। दुनिया के बारे में जो आपका नजरिया है, वैसा किसी और का नही हो सकता। आपकी क्षमताएं, जो कि आपके विशिष्ट दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है, दुनिया को कुछ नया देने की सामर्थ्य रखती है और यह भी अपने आप में अनूठा है। आपकी अपनी जिन्दगी, फिर चाहे वह आनन्द से भरपूर हो, विचारपूर्ण हो, धाराप्रवाह हो या कार्यो की गतिशीलता से भरी हुई हो, यह सब कुछ आपके महसूस करने पर ही निर्भर है। एक बार अपनी खासियत पर गौर करें, थोड़ा गहरे उतरें और खुद से पूछें कि क्यों आप अपना योगदान देने से पीछे हट रहे हैं?

प्रेम का जरिया है आप

कवियों ने कहा है, प्रेम ही दुनिया की पोशाक है। हम प्रेम पाते है, प्रेम ही देते है। जब प्रेम हमारे विचारों,शब्दों और कार्यो के जरिये बहने लगता है, तब हम प्रेम से भर जाते हैं। मैं हर दिन wife के जरिये life में प्रेम को घटित होते हुए देखता हूँ। उसके चेहरे पर एक मुस्कान रहती है। मैंने उसे driver,guard,दुकानदार व् दोस्तों से जुड़ते, उन्हें हंसाते और उनके सुख-दुःख बांटते देखा है। वह लोगो को उनके बारे में अच्छा महसूस कराती है। दूसरों को प्रेम से छूने से जिन्दगी के मायने बढ़ जाते है।

सच को पहचानें

हमारा विवेक उस समय कान में बुदबुदाता है, जब हम जिन्दगी में सच के रास्ते से भटकने लगते है। ऐसा इंसान होना कम बड़ी बात नही है, जो अपने भीतर की आवाज को सुन पाए और उस अनुसार प्रतिक्रिया दे सके। गांधीजी ने नाउम्मीदी में अकेले खड़े रहने के साहस की बात की थी। जिन्दगी हममें से कुछ लोगों को मानवता की सेवा के लिए बुला सकती है। हम उस आवाज का अनुसरण कर अपने life का उद्दार कर सकते है। अर्थ डे के संस्थापक गेलार्ड नेल्सन कहते है,’विवेक की सबसे बड़ी कसौटी वर्तमान में भावी पीढ़ी की भलाई के लिए कुछ करना है, जिनके शुक्रिया के शब्द भी हम सुन पायेंगे।‘ दूसरों के लिए कुछ करने की तीव्र इच्छा एक उपहार है, जिसके लिए हमें कृतज्ञ होना चाहिए।

आत्मसम्मान की रक्षा

आत्मसम्मान से जीने का हक हम सबको है। दुनिया में लाखों-करोडो लोग सम्मान से जीने के मौलिक से वंचित है। आधारभूत जरूरतों तक से महरूम है। अपने व दूसरों के लिए खड़े होना सीखें। दूसरो के हक की बात करना आपकी अपनी आवाज को मायने देता है।

तुम्हें धरती की परवाह है

आपने कभी इस धरती के साथ अपना जुड़ाव महसूस किया है? मैंने उस जुड़ाव तब महसूस किया, जब मैं family के साथ ब्रिटेन में पहाड़ों की यात्रा पर गया था। जब आप nature का अभिनंदन करते है तो अपनी जिन्दगी के मायने भी समझते है। आप इस धरती की परवाह करते है, जो हमारा दायित्व भी है। इस धरती, इस प्रकृति ने ही कई रूपों में हमारे जीवन को पूर्णता दी है।


                                             www.jonsymes.com



# इस article के writer ‘जॉन साइम्स’ जो writer,poet,coach और teacher है। ‘योर प्लेनेट नीड्स यू’ उनकी famous book है। life की अनंत संभावनाओं को खोजना उनका प्रिय विषय है।







                                   Taking things to Heart (बातों को दिल पर लेना)









Wednesday, October 5, 2016

Motivational Article


कैसे मिलेगी कामयाबी

एक बार एक युवा सुकरात के पास पहुंचा और कामयाबी का मंत्र पूछने लगा। सुकरात ने उसे अगले दिन नदी किनारे मिलने को कहा। अगले दिन दोनों तय समय पर मिले और नदी में प्रवेश करने लगे। जब पानी गले तक आ गया तो सुकरात ने आश्चर्यजनक तरीके से उस युवा का मुंह पानी के नीचे दबा दिया। युवा पानी से मुंह बाहर निकालने के लिए छटपटाने लगा, लेकिन सुकरात काफी मजबूती से उस लड़के को पकड़े रहे। जब लड़के का शरीर नीला पड़ने लगा, तब सुकरात ने उसका मुंह पानी से बाहर निकाला। तब उस लड़के की जान में जान आई और उसने लगभग हाँफते हुए एक लम्बी सांस् ली। सुकरात ने पूछा,’जब तुम पानी के अंदर थे सबसे ज्यादा तुम क्या चाहते थे?’ लड़के ने जवाब दिया,’साँसें।‘ तब सुकरात ने कहा, ‘यही कामयाबी का मंत्र है। सांसों की तरह जब तुम कामयाबी भी शिद्दत से चाहोगे तो वह कामयाबी तुम्हें जरुर मिलेगी।‘

गौर करे

workplace पर कामयाबी हासिल करने के लिए लक्ष्य तय होना सबसे जरूरी है। नेपोलियन ने कहा है,’जब इंसान का मस्तिष्क ने कहा है,’ जब इंसान का मस्तिष्क किसी अवधारणा को विकसित कर सकता है और उस पर विश्वास कर सकता है तो दिमाग भी उसको हासिल कर सकता है।‘ लक्ष्य हासिल करने की इच्छा होना सफलता का शुरूआती कदम है। लक्ष्य तय करने के बाद उसे हासिल करने के लिए नियमित रूप से कड़ी मेहनत भी जरूरी है। एक important बात भी है कि कामयाबी की कोई समय-सीमा नही होती, पूरे धैर्य के साथ अपने काम पर focus करें और positivity रवैया बनाये रखें। कई बार लक्ष्य हासिल करने में चूक भी होती है, लेकिन उसे सबक मानकर नये सिरे से संघर्ष करना चाहिए।










Saturday, October 1, 2016

Professional Life में दायरा बढ़ाने से मिलेंगे मौके

opportunities in professional life

Meet Expanding Opportunities In Professional Life

आज के दौर में अच्छे अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपनी कार्यकुशलता के बारे में बताना बेहद जरूरी है। इसके लिए professional समूहों में अपनी भागेदारी सुनिश्चित करें। social media पर नियमित update कर लोगो को अपनी मौजूदगी का एहसास कराएँ। networking से जुड़ी कुछ अहम बातें-

professional लोगो से मेल-जोल कर अपना दायरा बढ़ाने में आप कितने माहिर है? क्या आप पहली बार मिल रहे professionals से स्वाभाविक रूप से सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बातचीत कर पाने में सक्षम है?अगर आप इसमें खुद को बेहतर नही मानते तो मायूस न हों। networking की कला विकसित कर आप अपने इस कमजोर पक्ष को मजबूत कर future में मिलने वाले अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकते हैं।

अगर आप शर्मीले स्वभाव के है और networking करने में असहज महसूस करते है तो रणनीति बनाकर आप इस मुश्किल को हल कर सकते है। सबसे पहले आप एक योजना तैयार करें कि दूसरे professional से आप किस बारे में बातचीत करेगे। इससे आप तनावग्रस्त नही होगे और नये व्यक्ति से सार्थक बातचीत करने में भी आपको आसानी होगी। इन उपायों पर भी विचार करें-

अभ्यास करें: शुरुआत ऐसे अवसरों से करें, जहां जोखिम की गुंजाइश न के बराबर हो। अपने comfort zone से बाहर निकलें और नये लोगो से मेल-जोल बढ़ाएं। networking को रोजमर्रा की जिन्दगी का हिस्सा बनाएं।

योजना बनाएं: पहली बार मिल रहे लोगो से पूछे जा सकने वाले सवालों की एक सूची बना लें। किसी problem या important subject पर विमर्श के जरिये आप बातचीत के दरवाजे खोल सकते है।

तय करे अपने लक्ष्य: अपनी अगली meeting के लिए लक्ष्य तय कर लें, मसलन आपको पांच नये लोगो से बात करनी है। इसमें आपको दो लोग तो काम के मिल ही जायेगे, जिन्हें आपसे बात करके मजा आएगा या जो आपके काम आ सकते है। यहाँ मुद्दा सिर्फ important लोगो से मिलने का नही है। कोई भी नया व्यक्ति आपके लिए important साबित हो सकता है, इसलिए जुड़ने का सिलसिला जारी रखें। जब एक बार आप अपना लक्ष्य तय कर लें, तो उसे पाने के तरीकों पर काम करना शुरू कर दें।

अच्छे श्रोता बनें: अच्छे श्रोता बमुश्किल मिलते हैं। networking सिर्फ अपनी marketing करना भर नही है। अच्छे सवाल पूछना और दूसरों की बातें ध्यानपूर्वक सुनना भी जरूरी है। आमतौर पर ज्यादातर लोग वैसा ही सोचते है जैसा कि आप सोच रहे होते है। आपकी तरफ से बातचीत शुरू होने पर मुमकिन है कि दूसरा व्यक्ति यह सोचकर खुश हो कि आपने पहल की।

नकार देने के डर से बाहर आयें: ज्यादातर लोग यह सोचते है कि नया व्यक्ति उनके विचारों को ख़ारिज न कर दे, उन्हें सिरे से नकार न दे। इस डर को भीतर से निकाल दें। खुलकर अपने विचार जाहिर करें और अपनी प्रेरणाओं के बारे में बताएं।

Online जुड़ने के उपायों पर विचार करें: social media और दूसरे online communication माध्यमों के जरिये अंतरमुखी लोग भी आसानी से दूसरे लोगो के साथ contact स्थापित कर सकते है। इन अनौपचारिक platform से आप दूसरे professional की गतिविधियों पर नजर रख अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं।

क्यों जरूरी है Networking

ernst and young में हाल ही में प्रकाशित एक study में networking को core business skill का हिस्सा माना गया। इस study के अनुसार चार में से एक professional networking करता ही नही है, वही 65% professionals सिर्फ व्यक्तिगत रूप से ही networking करना पसंद करते है। यानी social media पर दिनभर मसरूफ रहने और linked-in पर हजारों लोगो से बारे में जानने के बावजूद हम में से ज्यादातर लोगो से व्यक्तिगत रूप से जुड़ना पसंद करते है।

सिर्फ मेहनत करने से आप शायद उस मुकाम तक न पहुंच पायें, जहां तक पहुंचने का आप सपना देखते है। अगर आप अपनी क्षमताओं से वाकिफ है और अपने वर्तमान से संतुष्ट नही है तो networking आपको आपके गंतव्य तक पहुँचाने में important भूमिका निभाती है। यह एक तरह से professional रिश्ते विकसित करने की कला है। अच्छी job पाने की यह सबसे बेहतर रणनीति है। networking की professional life का एक अभिन्न हिस्सा बनाएं। यह आपके लिए रोजाना चाय-कॉफ़ी पीने जितना important होना चाहिए।

बड़े काम की Networking

office के employee द्वारा refer किये गये आज भी भर्ती का सबसे बड़ा हिस्सा है। खुद को इतना सक्षम बनाएं कि office में नई vacancy के बारे में सूचना सार्वजनिक होने से पहले आपको अपने network के जरिये मिल जाएँ।

समूह विकसित करें

ऐसा माना जाता है कि आप किसी व्यक्ति से 6 degree ही दूर होते है। यानी ज्यादातर लोग ऐसे व्यक्ति के बारे में जानते है, जिसके बारे में आप जानना चाहते है। ‘how too be a power connector’ के writer जूडी रॉबीनेट के अनुसार एक व्यक्ति आमतौर पर 632 लोगो को जानता है, जो अपने आप में काफी बड़ा समूह है। अपने जैसे लोगो का एक समूह विकसित करें और समय-समय पर उनसे सूचनाओं और जानकारियों का आदान-प्रदान करें।

तीन की तरकीब

1-  दूसरे व्यक्ति की बातों में स्वाभाविक दिलचस्पी लें।

2-  अपनी योग्ताओं और talent के बारे में अन्य professionals से बात करें।

3-  नियमित रूप से जुड़े रहने के लिए creative तरीकों पर विचार करें।

कुछ Important Tips

1-  रोजाना अपने comfort zone से कम से कम एक बार बाहर जाने का प्रयास करें।

2-  किसी परिचित professional के साथ ऐसे लोगो से मिलें, जिनसे जुड़ने पर दायरा बढ़ाने की संभावना हो।

3-  दूसरे के सामने छवि खराब होने की चिंता छोड़े। यह डर सबके मन में होता है। नये लोगो से मिलते समय उन्हें उचित सम्मान दें और उनकी बातचीत में दिलचस्पी लें।

4-  किसी अन्य की मदद की बात करके भी आप नये व्यक्ति से जुड़ सकते है। नये सामाजिक परिवेश में असहज महसूस करने वाले को इससे अपनी ओर से ध्यान हटाने में मदद मिलती है। दूसरा व्यक्ति भी इस बात से खुश होता है कि वह किसी के काम आ सकता है।


5-  अंतरमुखी लोग अक्सर विस्तार से चर्चा करने की इच्छा रखते है। ऐसे लोग संक्षिप्त बातचीत के बजाय ज्यादा अर्थपूर्ण बातचीत कर सकते है। कामकाज से इतर विचारपूर्ण सवाल पूछें। बातचीत के दौरान ऐसी छोटी-छोटी चीजों पर बात करें, जिन पर विस्तार में बातचीत करना संभव हो। 


  


                                   Interview में Failed, आगे success कैसे !


    
    

Wednesday, September 28, 2016

डायबिटीज को कम करने के लिए पांच व्यायाम

control of diabetes

Five Exercises to Reduce Diabetes

नियमित व्यायाम के फायदों से हम सब वाकिफ है, फिर भी व्यायाम बहुत कम लोगो की lifestyle का हिस्सा बन पाता है। diabetes पीड़ितों के लिए medicine और खानपान के साथ कौन से व्यायाम रहते है फायदेमंद आईये जानते है-

विभिन्न research, diabetes को control में रखने में व्यायाम को भूमिका को accept करते है। नियमित व्यायाम न केवल activity बढ़ाता है, बल्कि टाइप-2 diabetes को पूरी तरह control रखने में भी मदद कर सकता है। सही व्यायाम blood में sugar की ज्यादा मात्रा होने के बावजूद कई problem को बढ़ने से रोक देता है। व्यायाम शुरू करने से पहले अपने doctor से परामर्श जरुर करें। diabetes के मरीज की आयु व् sugar की स्थिति के अलावा दिल की सेहत भी मायने रखती है। इसी आधार पर हर किसी की जरूरत के अनुरूप व्यायाम की सलाह दी जाती है। एक सप्ताह में कम से कम 200 से 250 minute aerobics व् अन्य व्यायाम करें।

क्या-क्या है व्यायाम के फायदे

1-  दिल से जुड़ी बीमारियाँ व् heart stroke का खतरा कम होता है।

2-  नियमित रूप से व्यायाम करने से नीद अच्छी आती है।

3-  tension से लड़ने में मदद मिलती है।

4-  हानिकारक cholesterol और रक्तचाप कम होता है।

5-  दैनिक कार्यो के लिए पर्याप्त energy मिलती है।

6-  diabetes के मरीजों के लिए अपना weight control में रखना जरूरी होता है। नियमित व्यायाम से यह संभव है।

7-  blood में sugar के बढ़े हुए स्तर से body का रक्तचाप प्रभावित होता है। नियमित व्यायाम से रक्तचाप बेहतर होता है और blood पुरे body में आसानी से पहुंच पाता है।

ये पांच व्यायाम करेगे मदद

Walking: टाइप-2 diabetes से निबटने में नियमित टहलने को सबसे उपयोगी माना जाता है। सप्ताह में कम से कम 250 minute जरुर टहलें। इसके लिए सप्ताह में छह दिन 40 से 45 minute तक आपको टहलना होगा। office में भी active रहने की कोशिश करें। हर दो घंटे पर पांच minute जरुर टहलें।

Weight Training: weight training मांशपेशियों को मजबूत बनाती है। टाइप-2 diabetes के मरीजों के लिए मजबूत मांशपेशियां बहुत जरूरी होती है। अपने diabetes management plan के तहत सप्ताह में पांच दिन तीन किलो तक के weight से पांच से दस minute weight training करें।

योगासन: नियमित रूप से योगासन करने से fat कम होती है, insulin control में रहता है और तंत्रिका तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। योगासन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसे किसी भी time कर सकते है।

Cycling: नियमित रूप से cycling करने से दिल मजबूत बनता है और फेफड़े बेहतर तरीके से काम कर पाते है। cycling चलाने से body के विभिन्न हिस्सों में रक्तसंचार बेहतर होता है और weight को control रखने में भी मदद मिलती है।

तैराकी: diabetes के मरीजों में खासतौर पर पैर की ओर रक्तसंचार कम हो जाता है। तैराकी में टहलने या jogging की तरह पैरों पर ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नही पड़ती और पूरे body का  व्यायाम भी हो जाता है।









Sunday, September 25, 2016

घुटने का दर्द धीमा न कर दे चाल

knee pain
 Knee pain, slow running will not make

युवाओं में घुटनों के दर्द के मामले तेजी से बढ़ रहे है। सही जाँच व् उपचार में देरी का नतीजा होता है कि हल्का मांसपेशीय दर्द बढ़कर घुटने, जांघ व् कूल्हे की movement पर असर डालने लगता है।

तीस के age के करीब की एक school teacher है। घर और काम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हुई वह बेहद व्यस्त रहती है। वह जानती है कि सेहतमंद और fit रहना उनके लिए कितना जरूरी है, बावजूद इसके व्यायाम के लिए समय निकालना उनके लिए मुश्किल होता है। व्यायाम की भरपाई के तौर पर उन्होंने कुछ समय पहले खुद को अधिक active बनाये रखने का फैसला किया, जिसके चलते वह lift की जगह सीढियों का इस्तेमाल करने लगी और रिक्शा की जगह पैदल घर और बाज़ार जाने लगी। वह तीसरी मंजिल पर रहती है। शुरुआत में सीढियां चढ़ने में थकान होती थी, पर habit हो जाने के बाद अब problem नही होती।

लेकिन एक माह बाद ही उन्हें सीढियां उतरते हुए सीधे पैर के घुटने में सामने के हिस्से में कुछ परेशानी महसूस होने लगी, पर उन्होंने ज्यादा ध्यान नही दिया। करीब एक सप्ताह गुजरने के बाद यह परेशानी हल्के pain में बदल गयी। धीरे-धीरे सीढियां चढ़ते हुए भी पैरों में pain होने लगा। doctor ने इसे घुटने के सामने वाले हिस्से का pain बताया, जिसे medical language में पेटेलोफीमोरल पेन सिंड्रोम/ एंटीरियर नी पेन या फिर कॉन्ड्रोमलेसिया पटेला कहते है। doctor ने उन्हें कुछ दर्द निवारक medicine लेने को कहा है। साथ ही सीढियां चढ़ने-उतरने से बचने की सलाह दी है। pain दोबारा न हो, इसलिए मांशपेशियों को मजबूत बनाने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के पास जाने की सलाह भी दी है।

Pain का कारण

जांघ की हड्डी को femur, जोड़ की मुख्य बड़ी हड्डी को tibia और नी कैप को पटेला कहते है। जांघ की हड्डी और नी कैप से मिलकर जो जोड़ बनता है, उसे पेटेलोफीमोरल जॉइंट कहते है। लगभग 20% मरीज पेटेलोफीमोरल पेन सिंड्रोम (PFPS) के शिकार होते है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह problem अधिक होती है। यह pain नी कैप और जांघ की हड्डी के बीच अधिक घर्षण होने के कारण होता है। इस वजह से पंजे की एड़ियो का पिछला हिस्सा, टखना,कुल्हे का उपरी हिस्सा,पेडू और पैरो के मध्य में pain बढ़ जाता है। नी कैप के जांघ की हड्डी से टकराने के कई कारण होते है।

PFPS के अधिक होने के मुख्य कारण पैर की मांशपेशियों का प्रभावित होना है। ये मांशपेशियां एक तरह से हमारे body का engine room होता है, जिनकी activity के कारण ही हमारी activity बनी रहती है। चलने से लेकर दौड़ने जैसी हर गतिविधि इन्ही मांशपेशियों पर काफी वजन पड़ता है, जिससे कई बार ये मांशपेशियां चोटिल हो जाती है व् उनमे खिंचाव आ जाता है। उनका लचीलापन भी कम होने लगता है। मांशपेशियों में अकड़न बढने से दर्द बढ़ने लगता है और मांशपेशियों की कुशलता कम होने लगती है। घुटने के जोड़ में pain भी होता है। आमतौर पर जांघ के भीतरी हिस्से की मांशपेशियों की तुलना में बाहरी मांशपेशियां अधिक कड़ी हो जाती है। इस असंतुलन के कारण नी कैप बाहर की ओर उठने लगती है और चलते समय जांघ वाली हड्डी से टकराती है। इसी वजह से नी कैप और जांघ की हड्डी के बीच swelling और pain बढ़ जाता है।

उपचार का तरीका

फिजियोथेरेपिस्ट pain में आराम देने के लिए acupressure या cross friction मसाज तकनीक का इस्तेमाल करते है, जिसमें pain वाले हिस्से पर थोड़ा जोर देकर pressure दिया जाता है। इसके अलावा मालिश से भी काफी आराम मिलता है। नियमित मालिश से मांशपेशियों की अकड़न वाले हिस्से में लचीलापन आ जाता है। कुछ आराम आ जाने पर मांशपेशियों में मजबूती लाने के लिए stretching कराई जाती है। अपने doctor और फिजियोथेरेपिस्ट से आप घर में किये जाने वाले exercise से राहत पा सकते है।

आमतौर पर आराम आने में 12 से 16 सप्ताह का समय लग जाता है। घर में exercise, doctor द्वारा की गयी जाँच और फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा अपनाई गयी विभिन्न तकनीक और मसाज कूल्हे और टखने के लचीलापन को बढ़ा देते है। स्थायी निजात पाने के लिए नियमित exercise करना ही सबसे बेहतर उपाय है। ऐसा करने पर घुटने के आसपास की सभी मांशपेशियां मजबूत हो जाती हैं।

ये Exercise देगे मांशपेशियों के दर्द से आराम

इलियोटिबियल बैंड को दे मजबूती

इलियोटिबियल बैंड की कूल्हे, जांघ के भीतरी हिस्से की मांशपेशियों का समूह समझा जा सकता है। इस हिस्से में होने वाले दर्द में राहत पाने के लिए फोम रोलिंग एक प्रभावी तरीका है। इसके लिए आपको एक tube की जरूरत होगी, जिसे फोम रोलर कहते है। यह आसानी से आपको किसी आसपास के sports store से मिल जायेगा। फोम रोलर पर इस तरह लेटें, जिससे आपके body का पूरा weight जांघ के बाहरी हिस्से पर रहे। जांघ के निचले हिस्से से शुरू कर रोलर को move करते हुए धीरे-धीरे उपरी हिस्से तक जाएँ। हर पैर से ऐसा पांच minute तक करें। लगातार pain वाली जगह पर इस तरह रोल करना मांशपेशियों को आराम पहुंचाएगा।

जांघ की सामने वाली मांशपेशियां

फोम रोलर पर इस तरह लेटे कि रोलर आपके दोनों घुटनों यानी नी कैप से थोड़ा उपर रहें। धीरे-धीरे उपर से नीचे और नीचे से उपर तक लायें। ऐसा 5 से 10 minute तक करें।

घुटने को लचीलापन बढायें

पेट के बल लेटें। पेट की मांशपेशियों को भीतर की ओर खीचे। एक घुटने को मोड़ते हुए पीछे की ओर ले जाएँ और पैर से पंजे को पकड़ते हुए एड़ी को कूल्हे पर टिकाने का प्रयास करें। 30 से 60 seconds तक इस मुद्रा में रहें। फिर इसे दूसरे पैर से दोहरायें। ऐसा तीन बार करें।

फोम रोलिंग, बाहरी कूल्हे के लिए

फोम रोलर पर इस तरह लेटे कि ये आपकी कूल्हे की हड्डी के पास हो। थोड़ा आगे और पीछे धीरे-धीरे move करें। हर तरफ से पांच minute ऐसा करें। इससे कूल्हे व् कमर दोनों की मांशपेशियों मजबूत बनेगी। दर्द कम होगा।


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