Monday, April 4, 2016

Job Promotion की बातें Office में

job promotion

अगर आप चाहते है कि आपको time पर office में promotion मिलता रहे तो आपको छोटी-छोटी बातो पर जरुर गौर करना चाहिए। यह सच है कि हर professional promotion शब्द को जल्दी-जल्दी सुनना चाहता है। हालाकि सभी के साथ ऐसा नही हो पाता और कई बार बेहतरीन काम करने वाले भी promotion पाने से वंचित रह जाते है। इसके पीछे कई कारण हो सकते है। अगर आप तरक्की पाना चाहते है तो बेहतर होगा कि office में कुछ छोटी-छोटी चीजो को नजरंदाज न किया जाए और कुछ खास बातो का विशेष ध्यान रखा जाए-

लक्ष्य निश्चित हो

हर office में आपका boss आपसे कुछ अपेक्षाए रखता है। आपकी हर ईमानदार कोशिश आपको तरक्की की ओर बढाती है। आपको भी कोई जिम्मेदारी मिले, उसके लिए लक्ष्य निश्चित करे। boss को अपनी योजनाओ के बारे में बताएं और उद्देश्यों को पाने के लिए जुट जाए।

Feedback

अक्सर देखा गया है कि boss की तरफ से एक छोटे से भी negative feedback से झुंझलाने लगते है, वही जब boss आपके काम की तारीफ़ करते है तो आप ख़ुशी से फुले नही समाते। आपको अपनी body language से साबित करना चाहिए कि आप आलोचना भी बर्दाश्त कर सकते है। इससे आपको future में मदद मिलेगी। अगर आप negative feedback पर गौर करे तो आप उसमे सुधार के लिए सोचना शुरू करेगे तो कल से बेहतर होते चले जायेंगे।

सक्रियता

ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग अप्रैजल से कुछ महीने पहले अधिक active हो जाते है। उन्हें लगता है कि इन दिनों अधिक काम किया तो boss को याद रहेगा। study बताती है कि यह सोच गलत होती है। तरक्की जैसे अहम फैसलों में boss इस बात पर गौर करते है कि office में जब अहम मौके आये है तो employee ने कैसी भूमिका निभाई। किसी विशेष project में कौन हमेशा सबसे बेहतर रहा।

सिर्फ Marketing ही नही..

कुछ लोगो का सोचना होता है कि अपने काम की चर्चा करते रहने से वे boss के चहेते बने रहेगे। हां, कुछ कुछ यह सही भी होता है, मगर हर वक्त काम को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की habit आपको परेशानी में डाल सकती है। याद रहे, जो आपके boss है, उन्हें आपकी खूबियां और कमियों की जानकारी है और experience में वे आपसे अधिक है। हां, यदि आप अपनी योजनाओ, काम करने के ढंग आदि की boss से चर्चा करते रहते है और सफलतापूर्वक उसे निभाते है तो आपकी यही खूबी boss को effect करने के लिए काफी होती है। अपने काम की चर्चा अपने seniors के साथ करे, साथ ही उनसे अपने काम का feedback ले, और अगर काम में कोई कमी है, तो उसमे सुधार करना भी शुरू कर दे।

Allrounder बनने का प्रयास

आपने गौर किया होगा कि office में कुछ लोग ऐसे होते है, जिन्हें जो भी काम दिया जाए वे पूरी तल्लीनता से पूरा करते है। उस काम में वे अपना सौ फीसदी देते है और बेहतर परिणाम सामने आते है। career विशेषज्ञों का मानना है कि promotion का सबसे पहला हकदार वही होता है, जो किसी भी परिस्थिति में किसी भी काम को time से करने में माहिर होता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने काम के अलावा दूसरो का काम को भी समझे और allrounder बने।

Career Mapping

कोई भी company किसी को promotion देकर अतिरिक्त जिम्मेदारी तभी देती है, जब वह सुनिश्चित कर लेती है कि आपको दी गई हर भूमिका में आप fit रहते है। company आपको वह अतिरिक्त जिम्मेदारी देगी, जिसमे company का risk नही, बल्कि फायदा होगा। इसलिए आपको चाहिए कि आप अपने कौशल, ज्ञान व् दक्षता को समय से साबित कर दे कि नई जिम्मेदारी को संभालने के लिए आप पूरी तरह तैयार और सक्षम है।

छवि बनाकर रखे

तरक्की के मापदंडो में सिर्फ आपकी कार्यशैली ही नही, बल्कि office में आपका व्यवहार भी सबसे उपर होता है। आमतौर पर देखा गया है कि कई बार लोग काम तो बहुत अच्छा करते है, लेकिन अपने व्यवहार की वजह से promotion का मौका गंवा देते है। इसलिए office में अपने सभी सहयोगियों व् seniors के साथ अच्छा व्यवहार रखे। ऑफिस में होने वाली राजनीति से जितना संभव हो दूर रहने का प्रयास करे। management को हमेशा success कर्मचारी नही, प्रयत्नशील कर्मचारियों की भी जरूरत रहती है, जिन पर वह अपनी नई परियोजनाओ का भार डाल सके। ऐसे में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर अपने आगे बढने की संभावनाओ का द्वार खोलने का प्रयास करे।

Skill बढाये

अगर आप सिर्फ यह सोच-सोच के परेशान हो रहे है कि अप्रैजल का समय नजदीक आ रहा है तो कुछ नही होने वाला।  आप अपनी और रूचि के अनुसार कोई short term कर अपनी skills बढाये। ऐसा कर आप अन्य के मुकाबले काफी बेहतर दिखाई देगे। आज भले ही वर्तमान company में इसका फायदा न हो, लेकिन future में दूसरी company में किसी ऐसे काम को करने का प्रयास करे, जो आपसे उपर के cadre  का हो। अपने boss से बात करे और चुनौती को आगे बढकर स्वीकार करे। हो सकता है कि company और management आपके प्रयास को स्वीकारते हुए आपके आगे बढने का रास्ता ही खोल दे।

कब उम्मीद की जा सकती है

1-  आगे बढकर खुद जिम्मेदारी ली हो।

2-  कार्य से सम्बंधित नये सम्बन्ध स्थापित किये हो।

3-  कार्य के दौरान deadline का ध्यान रखा हो। 

4-  आपकी performance को लेकर अच्छे review मिले हो।

5-  दिए गये लक्ष्यों को पाने में सफल रहे हो या लक्ष्यों को पाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हो।

6-  team के साथ कार्य करने में सहज हो और नेतृत्व करने की क्षमता रखते हो। 

7-  company के हित में, जैसे कोई बचत आदि के बारे में कोई सुझाव दिया हो। 


  












Friday, April 1, 2016

Most Popular thing



मेरी मां मुझसे पूछा करती कि body का सबसे जरूरी हिस्सा कौन सा है। वे पूछती और जो मुझे सही लगता, मै कह देती। जब छोटी थी, तो लगता कि हमारे लिए आवाज सबसे जरूरी है। इसलिए मां ने जब पूछा तो मैंने कहा,’मेरे कान।‘

मां बोली,’नही, दुनिया में बहुत से लोग है, जो सुन नही सकते। खैर तुम इस पर सोचती रहो।‘
कुछ साल बीत गये। मां ने फिर वही सवाल पूछा। चूँकि मै पहले जवाब में गलती कर चुकी थी, अबकी बार मैंने अधिक संभलते हुए जवाब दिया। इस बार मैंने कहा, ‘दृष्टि के बिना सब बेकार है। बस अँधेरा ही अँधेरा। हमारी आँखे ही सबसे जरूरी अंग है।‘

उन्होंने कहा,’ तुम बहुत जल्दी सीख रही हो। लेकिन अभी भी तुम्हारा जवाब सही नही है। दुनिया में बहुत से लोगो को दिखायी नही देता।‘

मै फिर निरुत्तर हो गयी। उत्तर की खोज जारी थी।

माँ ने उसके बाद भी कई बार प्रश्न पूछा और अंत में कहती,’नही, लेकिन तुम बहुत जल्दी सीख रही हो।‘

फिर एक साल ऐसा आया, मेरे दादा इस दुनिया से चले गये। सब बहुत दुखी थे। रो रहे थे। यहाँ तक कि मैंने अपने पिता को भी पहली बार रोते हुए देखा। जब मै दादाजी को अंतिम प्रणाम कर रही थी। मेरी माँ ने मुझसे पूछा,’मेरी बच्ची क्या तुम जानती हो कि कौन सा अंग सबसे जरूरी होता है?’ मुझे आश्चर्य हुआ कि माँ इस समय यह पूछ रही है। मुझे लगा था कि ये मेरे और माँ के बीच चलने वाला एक खेल है।

माँ ने मेरे चेहरे की उलझन को पढ़ लिया। वे बोली,’ये प्रश्न बहुत जरूरी है। ये दिखाता है कि तुम अपनी life को भरपूर जी रही हो। आज वो दिन है, जब तुम्हे इसका उत्तर जान लेना चाहिए। body का जरूरी हिस्सा कंधा है।‘

मैंने पूछा,’क्योकि यह मेरे सिर को संभालकर रखता है।‘

माँ ने कहा,’नही। क्योकि यह किसी friend और करीबी के सिर को उस समय सहारा देता है, जब वे दुःख में होते है। हर किसी को कभी न कभी इसकी जरूरत होती है। मुझे उम्मीद है कि जब भी तुम्हे इसकी जरूरत हो, तुम्हे वह मिल जाए।‘

उस दिन पता चला कि सबसे जरूरी चीजे स्वार्थ सुख से नही जुडती, ये वो होती है जो दूसरो के काम आ सकती है।









Monday, March 28, 2016

Bad Habits जो नही रहने देती Happy

Habits


होते है कुछ लोग जिन्हें लगता है कि life में ख़ुशी है ही नही। बेचैनी रहता है कि सब जल्दी से ठीक हो जाए, पर घबराहट में कुछ ऐसा कर बैठते है जो उन्हें ख़ुशी से दूर ले जाता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो जाने कौन सी बाते है जो दुःख का कारण हो सकती है।

Time व्यर्थ करना

घंटो tv देखना, video games खेलने, social sites खंगालते रहने में भले ही आपको उपलब्धि महसूस होती हो, पर इसमे time भी नष्ट होता है। कौन friends क्या पहन और खा रहा है ये देखते रहना, tv के सामने बैठे-बैठे खाना और फिर वही सो जाना, घंटो phone पर चुगली व् gossip करते रहना आदि काम आपके जरूरी समय को बेकार में जाया कर देते है।

खराब का Attraction

positive चीजो या बातो से भागना, सही पक्ष को देखने की कोशिश न करना। केवल कमियां देखना, गुण नही। हर सुझाव, सलाह और कार्य में खराबी देखना, अपने अभावो और बुरी बातो के लिए खुद को कोसते रहना। ऐसी बातो की लम्बी list है, जो आपको आगे बढने से रोक देती है।

तुरंत आपा खोना

बार-बार क्रोध करने की habit केवल दूसरो को नही आपको भी दुखी करती है। पर आप है कि उसे अपना हथियार मान लेते है। दूसरो की सुने बिना अपनी ही अपनी कहते रहते है। जो मन में आया बोल दिया। दूसरो की उपेक्षा और उन्हें नीचा दिखाने में जीत का अनुभव अंततः आपको सबसे दूर कर देता है।

खुद को प्यार न करना

दूसरो में ही नही, खुद में भी बस कमियां देखना। शीशे में अपना चेहरा देखकर दुखी रहना। खुद पर believe न करना। इतने उंचे मानक बना लेना कि काम को 100% success न मिलने पर उसे अपनी हार मान लेना। याद रखे कि खुद को गलतियाँ करने की छूट न देना कुछ नया नही सीखने देता।

Complain करना

बीते समय में किसी ने आपके साथ क्या बुरा क्या, खुद को उसे भूलने न देना। दुसरे को माफ़ करने जैसी बातों के बारे में सोचना तक नही, हर बात को अपने उपर कटाक्ष मानकर दुखी होना, प्रतिशोध में जलते रहना।

जिम्मेदारी से भागना

दूसरो के सहारे अपने काम सिद्द करना, झूठ बोलना, दूसरो को धोखा देना। केवल अपना फायदा ही सोचना। अपने life की जिम्मेदारी न लेना। अपनी गलतियों से कोई सबक सीखने की कोशिश न करना। हर चीज से बस बचकर निकलना और इस बात का इंतजार करना कि कोई और आपको ख़ुशी देगा, व्यर्थ की कल्पना है।

अकेले रहना

कही आपका अहं आपको दूसरो से जुड़ने से रोक तो नही रहा। किसी से असहमति होने पर यदि आप उससे हमेशा के लिए छोड़ देते है तो यह अकेलेपन की ओर ही ले जायेगा। नये लोगो से न मिलना और कुछ नही अपने suport system को कम करना है।


अंत में, यदि आप वाकई दुखी होना नही चाहते तो उपर लिखी बातो से बचे, क्योकि हम दो बातो से ही सीखते है- एक क्या और कैसे करना है और दूसरा क्या नही करना है।







Friday, March 25, 2016

If Not Now When अब नही तो कब

अतीत में experience है तो future में ढेर सारी कल्पनाये और आज में संघर्ष। यही वजह है कि हमे आज में जीना पसंद नही करते। हम कामो को टालते रहते है। फिर एक समय आता है, जब इच्छाओ की टोकरी में सपनों की जगह हताशा भरने लगती है।
हममे में से अधिकतर अधूरे सपनों के साथ जी रहे है। हम कुछ करने, कही घूमने या कुछ और कुछ होने होने की बस कल्पनाये करते है। हमारे सपने, सपने बनकर रह जाते है और अंत में टीस बनकर ताउम्र कचोटते रहते है। क्यों ऐसा होता है कि जिसके बारे में हम लम्बे समय तक सोचते जो बाते दिल और आत्मा के करीब होती है, हम उनकी आसानी से उपेक्षा कर देते है?

एक कदम में एवेरेस्ट की चढाई

हो सकता है कि आप किसी चीज को जूनून की हद तक चाहते है, जिसे पूरी तरह पाना अभी संभव नही दिख रहा है। इसलिए आप सही दिन का इंतजार कर रहे है। पर किसने कहा है कि एक ही कदम में एवेरेस्ट पार हो जायेगा। ऐसा नही होता। कदम-दर-कदम बढ़ाने से ही success मिलती है। उस दिशा में किये गये आधे-अधूरे काम भी आपको उसके लिए तैयार करते है। जो कर सकते है, उसे तो कम से कम न टाले। हम अक्सर फिजूल कारणों की आड़ में योजनाओं को टाले रखते है। हमारे सपने ‘क्या होगा’ कैसे होगा?’ आदि विचारो में ही दम तोड़ते रहते है।

क्या चुनौती स्वीकार है?

आज मै आपको चुनौती स्वीकार करने के लिए कहता हूँ कि आप वह करे जो आप हमेशा से करना चाहते थे। वह सीखे, जिसे सीखने की इच्छा है। या किसी ऐसी जगह घुमने जाए, जहां आप जाना चाहते थे। कदम बढाये, उस प्रतिभा की ओर, जिसे आप अपने भीतर देखना चाहते है, एक skill जिसे आप खुद में विकसित करना चाहते है, शौक, जो आपको पसंद है। लेकिन wait न करे। आज से ही शुरू कर दे। अगले साल, अगले सप्ताह या कुछ दिन के लिए उसे टाले नही। अभी से कुछ शुरुआत जरुर कर दे। अपने संकल्प के प्रति निष्ठावान बने। दूसरो को बताये कि आप यह करने जा रहे है। स्पष्टता रखे। निडर रहे। खुद को बांधे नही। शुरुआत करे। अभी ही। कोई बहाना न बनाये। अपने friends की सहमति का इंतजार न करे। इस बात की प्रतीक्षा न करे कि कोई और आपको कही घुमाने ले जायेगा। बस अपने मन का काम शुरू करे।

 Unsuccess का भय

life का मतलब स्वप्नावस्था नही है। यही वजह है कि सपने सुप्तावस्था में आते है। दिन के उजाले में हमसे उन्हें सच में बदलने की अपेक्षा रखी जाती है। पर, नाकामयाबी का डर इतना हावी हो जाता है कि हम सफल होने की कोशिश ही नही करते। पहले से हार सुनिश्चित कर देते है। यह भय हो सकता है कि सफल नही हुए तो क्या होगा? दूसरो को कैसे मुंह दिखायेगे? पर क्या खुद को पहले से हारे हुए रूप में देखना स्वीकार कर सकेगे? आखिर आपके लिए अधिक सम्मानजनक कौन सी बात होगी, वह व्यक्ति जिसने सुरक्षित दायरे से बाहर निकलने का जोखिम ही नही लिया या फिर वह जिसने लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में मेहनत की पर सफलता नही मिली? मै जानता हूँ कि आपका उत्तर क्या होगा।

अच्छा बहाना भी बहाना ही है

जिम्मेदार बने और उनका सम्मान करे, जिन पर आपके फैसलों का प्रभाव पड़ेगा। अपने पुराने-घिसे-पिटे बहानो से कुए के मेढक न बने रहे। कोई बहाना न बनाये। कोई बहाना स्वीकार न करे। रोये नही। इस बात में खुश रहे कि आप अपनी इच्छित दिशा में कदम बढ़ा रहे है। एक बार decision करे और अपने सपनों में जीवन भर दे।

जोश भी और होश भी

मै यं नही कह रहा कि आप ओलंपियन, CEO, गुरु या अरबपति बन जायेंगे। हो सकता है कि जो आप बनना चाहते है, उस क्षेत्र में आप पर्याप्त कौशल न रखते हो। पर आप उस दिशा में कार्य करेगे। आज से ही, अभी से ही। मै यह भी नही कह रहा कि आप future के लिए जमा की गई तमाम पूंजी को आज ही बिना सोचे-समझे, किसी बेकार सी योजना में निवेश कर दे। लेकिन कुछ तो करे। कही से कही पहुंचने की शुरुआत करे।



“इस article के writer ‘केन वर्ट’ मेंट टू हैप्पी के संस्थापक, motivational speaker व् blogger. life की संभावनाओ को तलाशकर निरंतर अपनी क्षमताओ में विस्तार करना उन्हें प्रेरित करता है।


                                                                                                  
                                            www.meanttobehappy.com



             
                 Failure को अलविदा




Tuesday, March 22, 2016

World Water Day विश्व जल दिवस

world water day
रियो डि जेनेरियो में 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCED) विश्व जल दिवस की पहल में की गई। 22 मार्च याने विश्व जल दिवस। पानी बचाने के संकल्प का दिन। पानी के महत्व को जानने का दिन और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नही मिल रहा है। प्रकृति जीवनदायी संपदा जल हमें एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, हम भी इस चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना हमारी ज़िम्मेदारी है, चक्र के थमने का अर्थ है, हमारे जीवन का थम जाना। प्रकृति के ख़ज़ाने से हम जितना पानी लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है। हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते अतः प्राकृतिक संसाधनों को दूषित न होने दें और पानी को व्यर्थ न गँवाएँ यह प्रण लेना आज के दिन बहुत आवश्यक है।

जल ही जीवन है जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है हम सब जानते हैं हमारे लिए जल कितना महत्वपूर्ण है लेकिन यह सब बातें हम तब भूल जाते हैं जब अपनी टंकी के सामने मुंह धोते हुए पानी को बर्बाद करते रहते हैं और तब जब हम कई लीटर मूल्यवान पानी अपनी कीमती कार को नहलाने में बर्बाद कर देते हैं किताबी दुनिया और किताबी ज्ञान को हममें से बहुत कम ही असल जिंदगी में उतार पाते हैं और इसी का नतीजा है कि आज भारत और विश्व के सामने पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है



पानी के बारे में एक नहीं, कई चौंकाने वाले तथ्य हैं। विश्व में और विशेष रुप से भारत में पानी किस प्रकार नष्ट होता है इस विषय में जो तथ्य सामने आए हैं उस पर जागरूकता से ध्यान देकर हम पानी के अपव्यय को रोक सकते हैं। अनेक तथ्य ऐसे हैं जो हमें आने वाले ख़तरे से तो सावधान करते ही हैं, दूसरों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और पानी के महत्व व इसके अनजाने स्रोतों की जानकारी भी देते हैं।

मुंबई में रोज़ वाहन धोने में ही 50 लाख लीटर पानी खर्च हो जाता है।
दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में पाइप लाइनों के वॉल्व की खराबी के कारण रोज़ 17 से 44 प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है।
इज़राइल में औसतन मात्र 10 सेंटी मीटर वर्षा होती है, इस वर्षा से वह इतना अनाज पैदा कर लेता है कि वह उसका निर्यात कर सकता है। दूसरी ओर भारत में औसतन 50 सेंटी मीटर से भी अधिक वर्षा होने के बावजूद अनाज की कमी बनी रहती है।
पिछले 50 वर्षों में पानी के लिए 37 भीषण हत्याकांड हुए हैं।
भारतीय नारी पीने के पानी के लिए रोज ही औसतन चार मील पैदल चलती है।
पानीजन्य रोगों से विश्व में हर वर्ष 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
हमारी पृथ्वी पर एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी है। इसमें से 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो खारा है, शेष 1.5 प्रतिशत पानी बर्फ़ के रूप में ध्रुव प्रदेशों में है। इसमें से बचा एक प्रतिशत पानी नदी, सरोवर, कुओं, झरनों और झीलों में है जो पीने के लायक है। इस एक प्रतिशत पानी का 60 वाँ हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में खपत होता है। बाकी का 40 वाँ हिस्सा हम पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ़-सफ़ाई में खर्च करते हैं।
यदि ब्रश करते समय नल खुला रह गया है, तो पाँच मिनट में करीब 25 से 30 लीटर पानी बरबाद होता है।
बाथ टब में नहाते समय 300 से 500 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि सामान्य रूप से नहाने में 100 से 150 पानी लीटर खर्च होता है।
विश्व में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल पाता है।
प्रति वर्ष 3 अरब लीटर बोतल पैक पानी मनुष्य द्वारा पीने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
नदियाँ पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। जहाँ एक ओर नदियों में बढ़ते प्रदूषण रोकने के लिए विशेषज्ञ उपाय खोज रहे हैं वहीं कल कारखानों से बहते हुए रसायन उन्हें भारी मात्रा में दूषित कर रहे हैं। ऐसी अवस्था में जब तक कानून में सख्ती नहीं बरती जाएगी, अधिक से अधिक लोगों को दूषित पानी पीने को मजबूर हो सकते है।
पृथ्वी पर पैदा होने वाली सभी वनस्पतियाँ से हमें पानी मिलता है।
आलू में और अनन्नास में 80 प्रतिशत और टमाटर में 15 प्रतिशत पानी है।
पीने के लिए मानव को प्रतिदिन ३ लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी चाहिए।
• 1 लीटर गाय का दूध प्राप्त करने के लिए 800 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है, एक किलो गेहूँ उगाने के लिए 1 हजार लीटर और एक किलो चावल उगाने के लिए 4 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार भारत में 83 प्रतिशत पानी खेती और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।

समय आ गया है जब हम वर्षा का पानी अधिक से अधिक बचाने की कोशिश करें। बारिश की एक-एक बूँद कीमती है। इन्हें सहेजना बहुत ही आवश्यक है। यदि अभी पानी नहीं सहेजा गया, तो संभव है पानी केवल हमारी आँखों में ही बच पाएगा। पहले कहा गया था कि हमारा देश वह देश है जिसकी गोदी में हज़ारों नदियाँ खेलती थी, आज वे नदियाँ हज़ारों में से केवल सैकड़ों में ही बची हैं। कहाँ गई वे नदियाँ, कोई नहीं बता सकता। नदियों की बात छोड़ दो, हमारे गाँव-मोहल्लों से तालाब आज गायब हो गए हैं, इनके रख-रखाव और संरक्षण के विषय में बहुत कम कार्य किया गया है।

पानी का महत्व भारत के लिए कितना है यह हम इसी बात से जान सकते हैं कि हमारी भाषा में पानी के कितने अधिक मुहावरे हैं। आज पानी की स्थिति देखकर हमारे चेहरों का पानी तो उतर ही गया है, मरने के लिए भी अब चुल्लू भर पानी भी नहीं बचा, अब तो शर्म से चेहरा भी पानी-पानी नहीं होता, हमने बहुतों को पानी पिलाया, पर अब पानी हमें रुलाएगा, यह तय है। सोचो तो वह रोना कैसा होगा, जब हमारी आँखों में ही पानी नहीं रहेगा? वह दिन दूर नहीं, जब सारा पानी हमारी आँखों के सामने से बह जाएगा और हम कुछ नहीं कर पाएँगे।

लेकिन कहा है ना कि आस का दामन कभी नहीं छूटना चाहिए तो ईश्वर से यही कामना है कि वह दिन कभी न आए जब इंसान को पानी की कमी हो। विज्ञान और पर्यावरण के ज्ञान से मानव ने जो प्रगति की है उसे प्रकृति संरक्षण में लगाना भी ज़रूरी है। पिछले सालों में तमिलनाडु ने वर्षाजल संरक्षण कर जो मिसाल कायम की है उसे सारे देश में विकसित करने की आवश्यकता है।



आज समय आ गया है कि समय रहते हम जल के प्रति अपने को सचेत हो जाए, कही ऐसा न हो कि हमे रोने के अलावा कोई चारा न बचे, तो आज 22 मार्च को हम लोग संकल्प करे कि किसी भी तरीके से जल की बचत करेगे और जल का अनावश्यक खर्च नही करेगे। इसलिए ऐसा कि आने वाली पीढ़ी को जल की किल्लत न हो। नही तो आने वाले पीढ़ी को तकलीफ के अलावा कुछ नही दे पायेगे।