Saturday, March 12, 2016

Respect and Disrespect

एक समय की बात है कि किसी university में कुलपति का पहला दिन था। सभी स्टाफ के लोग एकत्रित हुए। अपने पहले सम्बोधन में वे office में खड़े थे कि तभी वहां उपस्थित एक वरिष्ठकर्मी ने व्यंग्य करते हुए कहा,’ कुलपति महोदय, आपको यह नही भूलना चाहिए कि आपके पिता, हमारे family के जूते बनाया करते थे।‘ यह कहकर वह कर्मी हंसने लगा और उसके साथ वहां उपस्थित कुछ अन्य कर्मी व् शिक्षक भी। वे खुश थे कि उन्होंने सबके सामने कुलपति की हंसी उड़ाई है। वहां उपस्थित कुछ लोगो को इस बात का बुरा भी लगा। वे चिंतित हो गये कि पता नही अब क्या होगा? कुलपति क्या करेगे?

कुलपति ने सीधा उस व्यक्ति की ओर देखा और कहा,’ Sir, मै जानता हूँ कि मेरे पिता आपके family के लिए जूते बनाया करते थे, और हो सकता है कि यहाँ और भी कई लोग होगे, जो उनके हाथ से बने जूते पहन चुके होगे। इसका कारण यह है कि जैसे जूते वे बनाया करते थे, वैसे कोई बना नही सकता।

वे रचनाकार थे। वे मात्र जूते नही बनाते थे, उस प्रक्रिया में पूरी तरह डूब जाते थे। मै आपसे पूछना चाहता हूँ कि क्या आपको उनके बने हुए जूतों से किसी तरह की शिकायत है? मै यह इसलिए पूछ रहा हूँ, क्योकि मै स्वयं भी जूते बनाना जानता हूँ। यदि आपको कोई भी शिकायत होगी, तो मै आपके लिए नये जूते बना दूंगा। लेकिन जितना मै जनता हूँ अब तक मेरे पिता के हाथ के बने हुए जूतों की किसी ने शिकायत नही की है। वे महान थे, अपने काम में दक्ष थे। मुझे अपने पिता पर गर्व है।

वहां उपस्थित सभी लोग चुप हो गये। पूरी सभा में शांति छा गयी। वे हैरान थे कि यह कुलपति किस धातु का बना है। कुलपति को इस बात का अभिमान था कि उनके पिता इतनी कुशलता से अपने काम करते थे कि कोई एक शिकायत उनके काम के लिए सुनने को नही मिली।

हमे भी यह ध्यान रखने की जरूरत है कि हमारी इजाजत के बिना कोई भी हमे ठेस नही पहुंचा सकता। अक्सर परिस्थितियों दुखदायी नही होती। हमारी अपनी प्रतिक्रियाये उन्हें दुखद बना देती है।







Thursday, March 10, 2016

Mutation को गले लगायें


परिवर्तन को accept करना आसान नही होता। यही वजह है कि अपनी परिस्थितियों में बदलाव ला पाना भी दूर की कौड़ी बना रहता है। छोटे-छोटे बदलाव ख़ुशी बाद में देते है, पहले बेचैन कर जाते है। किस्मत का पहिया विपरीत दिशा में घूमता रहता है और मन अच्छी और बुरी शंका और आशंका में घिरने लगता है।

प्रवाह के साथ बहना

motivational speaker लुई एल हे कहती है,’ कोई व्यक्ति, स्थान और वस्तु हमारी स्वीकृति के बिना हम पर हावी नही हो सकते। अपने मन के भीतर हम ही अकेले चिंतक होते है। जब हम मन में शांति, समन्वय और संतुलन बनाने लगते है, तो ये बातें life में भी दिखने लगती है।‘ चीनी दार्शनिक लाउ-ज इसे बदलावों के साथ तैरना कहते है। उनके अनुसार,’ life सहज और स्वाभाविक बदलावों की एक श्रृंखला है। चीजो को स्वाभाविक रूप से आगे की ओर बढने देना जरूरी होता है।‘

विकास के लिए बदलाव को स्वीकारना जरूरी है। ‘द ऐल्कमी ऑफ़ द डेजर्ट’ में लेखिका सिंथिया एथीना इसे ‘विंड एंड स्टॉर्म’ formula का नाम देती है। वे कहती है,’ रेगिस्तान में रेत व् धूल भरी आँधियों की रफ्तार बड़ी तेज होती है। ये तूफानी हवाएं positive ‘आयन’ से charge होती है। उनकी energy के दबाव से संतुलन गड़बड़ाने लगता है। हम खुद को उखड़ता हुआ महसूस करते है। ऐसे में जरूरी यह है कि हम ये विश्वास रखे कि तूफ़ान हमेशा उजाड़ने के लिए नही आते। यह स्वीकारते ही हम आंधियो से लड़खड़ाने की जगह संतुलन बनाने में कामयाब होने लगते है।‘

विवेक का यही लचीलापन हमे बदलाव व् विपत्ति के समय जमीन से जुड़े रहने की ताकत देता है और तनकर काम करने की क्षमता भी।

जानना, लेना और छोड़ना

निरंतर विकास की कड़ी में जैन मुनि आचार्य महाप्रज्ञ हेय, ज्ञेय और उपादेय पर जोर देते है। वे कहते है,’जानने, ग्रहण करने व् छोड़ने की प्रक्रिया जब लगातार चलती है, तभी life संतुलन की ओर बढ़ता है।‘

प्रश्न है कि क्या जाने, क्या ले और क्या छोड़े?

क्या जाने:

यह जानने की कोशिश करे कि आप क्या चाहते है, आपकी ख़ुशी कहाँ पर है? जाने परिवेश और परिस्थितियों को, आसपास के बदलावों व् नई तकनीक को। इस मायने में जानना, हो रही चीजो की मौजूदगी को स्वीकारना और समझना है।

क्या ले:

सूचना, विचार, वस्तु और ज्ञान का अथाह सागर मौजूद है। पर जरुरी नही कि संपर्क में आने वाली चीज को life का हिस्सा बनाया जाए। अपने life की जिम्मेदारी लेते हुए यह चुनाव आपको करना है कि आपके लिए क्या और कितना जरूरी है? हर चीज पर पकड़ बनाने की कोशिश बेचैन करेगी, उर्जा व् संसाधन का व्यय होगा और लक्ष्य से दूरी भी बढ़ेगी। जो जरूरी है, उसे और बेहतर बनाने की योजना बनाये। मेहनत करे।

क्या छोड़े:

अपने पास मौजूद अनावश्यक विचारो, वस्तुओ और भावों के प्रदुषण को कम करे। दुःख पहुंचाने वाली बीती बातों और रिश्तो से खुद को मुक्त करे। क्षमा करे। नये रिश्तो के लिए जगह बनाये। अपने ज्ञान व् वस्तुओ को दूसरो में बाटें।






Tuesday, March 8, 2016

Failure को अलविदा


खुद पर विश्वास करना सभी का महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए। कुछ मूल क्षमताये सभी के भीतर होती है, जैसे प्यार, विश्वास, ईमानदारी, खुद पर भरोसा आदि। ये बातें सुकून की ओर ले जाती है। धीरे-धीरे आप गौर करना, सही decision लेना, सराहना और आगे बढना सीख जाते है। ऐसे लोग अच्छे दिनों में हवा में नही उड़ते और कठिन दिनों में ढेर नही होते।

कई लोग बड़े-बड़े झटके झेलने के बाद भी success होने का हुनर सीख लेते है। उनके चेहरे पर एक मुस्कान हमेशा झलकती रहती है। ख़ुशी, खुद को खास समझने की और यह विश्वास कि वे आने वाला कल बेहतर बना लेगे।

कभी-कभी career में पिछड़ना भी बेहतरी का संकेत होता है। कुछ लोग अपनी unsuccess को भी success में बदलने में कामयाब हो जाते है। दरअसल उन्हें सैटबैक यानि झटका लगना और failure का भेद पता होता है। दोनों को समान समझने की भूल नही करना चाहिए। धक्का पहुंचना या झटका लगना पूरी तरह टूटना नही है, कुछ निशान और हिम्मत बचे ही रहते है, जो किसी भी स्थिति में फिर से खड़े होने का आत्मविश्वास देते है। यकीन मानिए कि कई ऐसी बाते है, जिन्हें बड़े leader भी नजरंदाज कर जाते है। success कोई टीका नही, जिससे कभी भी unsuccess का मुंह न देखना पड़े। success के साथ पीछे हटने की चुनौतियां भी बराबर आती रहेगी। हालाकिं इनका सामना करने से न केवल आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि आप दिनों दिन अधिक मजबूत होते चले जायेगे।

खुद को Success देखे

खुद से प्यार करने वाले लोग अपने आप को हर स्थिति में बेहतर पाते है। उन पर झटको का असर कम होता है। वे उनसे जल्दी उबरकर आगे बढ़ जाते है। ऐसे लोग, जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि अच्छी होती है, संबंधो में मजबूती होती है, उनकी सफल होने की सम्भावना भी अधिक होती है। आप आत्मसम्मान बढाने के लिए जितने प्रयास करेगे, जिन्दगी में गिरने पर कम घाव पायेगे। आज आत्मसम्मान पर बहुत सी books है। किसी अच्छी book का चयन करे और उसमे लिखी बातो का अपनाना शुरू करे।

Weakness और उनसे लड़ना

अधिकतर व्यस्क जानते है कि वे कहाँ पीछे है। मगर आज के कड़े प्रतियोगी माहौल में अपनी कमजोरियों को accept करना भी पिछड़ने जैसा संकेत देने लगता है। लेकिन अपनी कमजोरियों की पहचान करनी ही होगी। कोई भी superman या superwoman नही होता। हम आईने के सामने खड़े होकर अपनी खामियों को साफ-साफ देख सकते है। भले ही वह गुस्सैल स्वभाव हो या तुनकमिजाजी। खुद को स्वीकार करना ही success की ओर बढना है।

डर से मुकाबला

tension को दूर करने वाली विभिन्न medicine के बिक्री आंकड़ो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर depression के मरीजो में लगातार इजाफा हो रहा है। चिंताओ से छुटकारा पाने के लिए medicine का सहारा सही है या गलत, मगर निस्संदेह इन्हे नियमित रूप से लेना निदान नही है। यह आपको समझना होगा कि व्यग्रता, tension आदि एक naturally प्रतिक्रिया है। कार्यस्थल पर काम के दबाव को कम करना एक अच्छी पहल हो सकती है। भले इसके लिए शुरुआत में medicine फिर exercise या बाहर कही जाकर relax होने होने जैसे उपाय हो सकते है। अपनी शरीर की सुने। उन इन स्थितियों को पहचाने जो चिंतित करती है।

अपने काम में मगन रहे

कोई भी धक्का तब अधिक गहराई से असर दिखाता है, जब वह किसी सदमे की तरह होता है। अगर आपको इन हालातो का अंदाजा पहले ही हो तो मुश्किल जरुर कुछ कम हो सकती है। सिर्फ भाग्य के भरोसे न बैठे रहे। और ऐसा भी न सोचें कि आप हर खतरा झेल लेगे। अपने कार्यो को मन से करे। वह करे, जो आप कर सकते है।

Family के साथ

आज कई family में पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी है। दोनों एक-दुसरे के साथी है। जीवनसाथी के कार्यस्थल में अच्छा-बुरा जो भी चल रहा है, उसके लिए उनके भागीदार बने। हम सभी जहाँ प्रोत्साहन मिलने पर चहक उठते है, वही निराशा में मुरझा जाते है। अगर आपका साथी आपके कार्य में रूचि लेता व् प्रोत्साहित करता है, आपके पास घर में ही एक भरोसेमंद सहारा है।

मददगार Team का हिस्सा

हर team का अपना एक अंदाज व् वातावरण होता है। अगर आप एक अच्छी team का हिस्सा है, तो यकीन माने, member न सिर्फ आपका आदर करेगा, बल्कि हर कोई आपकी बात पर गौर भी करेगा। लगातार मिल रही success का श्रेय team को दिया जाता है, न किसी एक को। किसी भी बड़े धक्के के खिलाफ team का हिस्सा होना संजीवनी का काम करता है।

काम से इतर अपनी रुचियाँ ढूंढे

काम और मस्ती के बीच के तालमेल को आपको समझना होगा। आपका brain और body संतुलन की मांग करते है। research कहते है कि कार्यस्थल पर महज अपनी डेस्क से उठकर कुछ चहलकदमी करना भर आपके blood pressure और दिल की धडकन को काबू रख सकता है। मनोरंजन के लिए भी समय निकाले।



 # इस article के writer दीपक चोपड़ा international ख्याति प्राप्त भारतीय मूल के अमेरिकी writer, modern motivational गुरु व् physician है। उनका प्रिय subject मेटाफिजिक्स है। वह 75 से अधिक books लिख चुके है।



     



Friday, March 4, 2016

Disease से डरें नही, लड़े


health से जुड़े लेखो में आपने imunity शब्द कई बार पढ़ा होगा। immunity यानि body की रोगों से लड़ने की क्षमता। वह रक्षा कवच, जो खांसी-जुकाम और पेट व् liver के संक्रमण से तो दूर रखता ही है, साथ ही cancer जैसे रोगों से भी body का बचाव करता है।

बार-बार बीमार पड़ने के कारण क्या आपको अक्सर school,college या office से छुट्टिया लेनी पडती है? मौसम में जरा-सा बदलाव भी खांसी-जुकाम का कारण बन जाता है? हालाकिं इसके कई और भी कारण हो सकते है, लेकिन एक प्रमुख वजह immune system का कमजोर होना है, जो body की रोगों से लड़ने की क्षमता को कम कर देता है।

Immunity क्या है?

immunity यानि प्रतिरोधक क्षमता, जो body को विभिन्न कीटाणुओं व् virus के संक्रमण से बचाती है। immune system वह अंदरूनी ताकत है, जिसमे body की कोशिकाए, उतक व् अंग भाग लेते है तथा संक्रमित कीटाणुओं या रोगवाहको की पहचान कर उन्हें नष्ट करने में help करते है। साधारण शब्दों में body का वह naturally system, जो body को रोगों से दूर रखता है और body की किसी रोग से शीघ्र बाहर निकलने में help करता है।

immunity बढाने में body के लिंफेटिक system की बड़ी भूमिका होती है, जिसमे अस्थि-मज्जा, तिल्ली, थायमस और लिम्फ नोड्स आते है। लिंफोसाइट्स और ल्यकोसाइट्स, ये छोटी सफेद रक्त कोशिकाए होती है, जो body को रोगों से बचाती है। body में बी-सेल और टी-सेल दो तरह के लिंफोसाइट्स होते है। बी-सेल body में उन antibody का निर्माण करते है, जो बेक्टीरिया व् toxin पर हमला करते है। वही टी-सेल संक्रमित और कैंसरजनित कोशिकाओ को नष्ट करते है। immunity बढाने की प्रकिया में इसी पुरे तंत्र को मजबूत करने की जरूरत होती है।

क्यों नही लड़ पाते रोगों से

हमारा immune system एक दिन में कमजोर नही होता। लम्बे समय तक अस्वस्थ जीवनशैली व् असंतुलित खान-पान body की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर कर देते है। समय-असमय खाना, बहुत अधिक junk food खाना, धुम्रपान करना, शराब का सेवन व् अन्य नशे की लत, शारीरिक शारीरिक व्यायाम न करना, vitamin व् खनिज पदार्थो की कमी होना, ज्यादा तनाव, नीद पूरा न होना, प्रदुषण व् कुछ बीमारियां body के immune system को कमजोर बना देते है।

छोटे बच्चो का immune system मां के गर्भ से ही बनना शुरू हो जाता है। यही वजह है कि गर्भवती महिलाओ को अधिक से अधिक पौष्टिक आहार के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जाता है। प्रत्यक्ष व् अप्रत्यक्ष धुम्रपान से बचने की सलाह दी जाती है। युवाओं के मुकाबले बच्चो और बुजुर्गो का immune system कमजोर होता है। इसी कारण वे बदलते मौसम में रोगों के चपेट में अधिक आते है। हालांकि अस्वस्थ दिनचर्या और व्यायाम की कमी के कारण युवा भी कम उम्र में जीवनशैली से जुड़े रोगों की चपेट में आ रहे है। युवाओं में immune system के कमजोर होने के कारण धुम्रपान, शराब, अधिक तनाव और शारीरिक गतिविधियां न करना है।

क्यों जरूरी है body का मजबूत होना

immune system कमजोर होने पर person रोगों के प्रति अधिक सवेंदनशील हो जाता है। इससे केवल सर्दी, जुकाम या खांसी आदि रोग ही जल्दी-जल्दी नही होते, बल्कि सांस की problem, ह्रदय रोग, cancer आदि होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। कई बार आनुवंशिक रोगों या कुछ खास medicine को लम्बे समय तक लेते रहना भी body के रक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है। immune system हो जाने पर body की क्षतिगस्त अंगो की मरम्मत करने की क्षमता घट जाती है। ऐसे लोगो में allergy,liver,cancer, पेट व् रक्त सम्बन्धी विकार हो सकते है।

मानसून और Immunity

बदलते मौसम के समय body की मजबूती कई तरह के रोगों से दूर रखती है, पर मानसून का मौसम immunity पर खासा असर डालता है। इस मौसम में उमस व् वातावरण की नमी मच्छर, किटाणु व् जीवाणुओं के पनपने के लिए अनुकूल होती है। जिनकी immunity कमजोर होती है, उनके बीमार पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है। इस मौसम में जिन लोगो को मधुमेह, सांस की दिक्कत या लंबी बीमारी है, उन्हें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। आसपास साफ-सफाई, पोषक तत्वों से युक्त घर पर बने खाने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से मौसमी संक्रमण से दुरी बनाई जा सकती है। फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थो के सेवन से पेट सम्बन्धी problem को control करने में मदद मिलती है। इसके अलावा तैलीय खाना, ज्यादा मसालेदार खाना, junk food और सोडे से युक्त पेय पदार्थो से परहेज करना चाहिए।

यूं बढाये body की ताकत

·         immune system को मजबूत करने के लिए संतुलित व् सम्पूर्ण भोजन करे। खाने में vitamin और खनिज लवणों को प्रचुरता में शामिल करे। हरी सब्जियां, दालें, सलाद और साबुत अनाज के साथ-साथ fruits का सेवन करे। भोजन प्रचुर मात्रा में नियमित समय पर करे। अधिक बसा वाले भोजन से परहेज करे।

·         धुल-मिट्टी व् प्रदूषित वातावरण से बचे। आसपास की साफ-सफाई के साथ-साथ व्यक्तिगत सफाई का भी ध्यान रखे। रोज नहाए व् साफ-सुथरे कपड़े पहने। खाना खाने से पहले अच्छी तरह से हाथ धोये।
·         immunity बढाने में व्यायाम की भी positive भूमिका होती है। नियमित व्यायाम न सिर्फ शारीरिक तौर पर, बल्कि मानसिक रूप से भी body को मजबूत बनाता है। योगासन से मानसिक तनाव कम होती है और एकाग्रता बढती है।

·         अपनी नीद से कोई समझौता न करे। जल्दी सोने व् जल्दी उठने की आदत डाले। हर रोज कम से कम 6-7 घंटे की नीद ले। इस प्रक्रिया में रात में देर से सोकर सुबह देर से उठना भी गलत है। नीद immunity को दुरुस्त रखने में मदद करती है।

·         junk food, तले हुए खाद्य पदार्थो, प्रोसेस्ड या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, चीनी युक्त आहार, सोडा, कैफीन, शराब, धुम्रपान और नशीले पदार्थो से दुरी बनाये।

·         मोटापा immunity की क्षमता कमजोर करता है। वजन को control रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाए।

Vitamin-D का महत्व

vitamin-d immunity बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। study के मुताबिक vitamin-d की कमी ऑटोइम्यून बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ा देती है और अति सवेंदनशील immune system अपने ही body की कोशिकाओ व् अंगो को नुक्सान पहुंचाने लगता है।

immune system को सही रखने में vitamin-d बहुत आवश्यक है, लेकिन चिंता का विषय ये है कि भारतीयों में vitamin-d की कमी बहुत ज्यादा पायी जाती है। diabetes foundation of india ने अनुमान लगाया है कि 80% भारतीय vitamin-d की कमी से जूझ रहे है। ये कमी भारत के सभी आयु वर्गों में 50 से 90% पाई गई है।

सभी medical specialist मानते है कि अगर खाद्य पदार्थ उपयुक्त मात्रा में vitamin-d को पूरा नही कर पाते तो स्वस्थ रहने के लिए doctor की सलाह लेकर vitamin-d supplement लेने चाहिए। ये सबसे किफायती और सभी के लिए आसान तरीका है। इसके अलावा नियमित सूरज की रोशनी से भी पर्याप्त vitamin-d मिलने में मदद मिलती है।

खाने में शामिल करे

1-  हर्बल या green tea, अंकुरित दाल व् काले चने, ताजे fruit व् उनका juice, मशरूम, शकरकंदी, कददू, पीली व् लाल शिमला मिर्च.मेवे, vitamin-c युक्त चीजे जैसे संतरा, नीबू, आंवला और अदरक आदि।

2-  vitamin-A युक्त चीजे जैसे गाजर, मुली, मेवे, मछली, गाढ़ी हरे पत्तेदार सब्जियां

3-  vitamin-d युक्त समुद्री खाना जैसे टूना और सैमन इत्यदि या विशेषज्ञों की राय से vitamin-d supplement, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ, हल्दी, सरसों, हींग, अजवाइन, कड़ी पत्ता, मुलैठी, दालचीनी, कालीमिर्च, धनिया व् पुदीने का इस्तेमाल।









Wednesday, February 24, 2016

Believe to Your Path


किसी और के जैसा होने की कामना करना, जो हम है उसे व्यर्थ करना है।“

                                                       एस.जी.एरिकसन

मै इस बात की परवाह नही करता कि दुसरे मेरे काम के बारे में क्या सोचते है, लेकिन मै इस बात का बहुत ध्यान रखता हूँ कि मै अपने काम के बारे में क्या सोचता हूँ। यही चरित्र है।“

                                                  थियोडोर रूजवेल्ट  
   
प्रवाह के साथ बहना आसान होता है। मुश्किल प्रवाह से विपरीत बहने में होती है। यही वजह है कि रोज के छोटे-बड़े काम हो या फिर life से जुड़े बड़े फैसले, भेड़चाल में चलते रहना हमे सुरक्षित और सही लगने लगता है। लेकिन फिर कुछ बड़ा न कर पाने की complain और बेचैनी क्यों?

आपका life आपके अपने experience की यात्रा है, किसी दुसरे की नही। इसलिए दूसरो के पथ का सम्मान करना, उनसे प्रभावित होना एक बात है, पर दूसरो की देखा-देखी उनके हर कदम पर अपना कदम रखना भेड़चाल से अधिक कुछ नही। यह सही है कि ऐसा करके भी हम किसी मंजिल तक पहुंचते ही है, पर वह मंजिल हमारी अपनी नही होती। भेड़चाल हमे अच्छी लगती है, क्योकि ये हमे सुरक्षा का एहसास कराती है।

खुद के प्रति अनिश्चितता और अनभिज्ञता हमारी इस भेड़चाल की प्रवृति को बढ़ा देते है। और फिर पढाई, career, पहनावे और यहाँ तक कि रिश्तो से जुड़े फैसले हम दूसरो की देखादेखी करने लगते है। हर कदम पर दूसरो से तुलना करते है।

science teacher की अपनी job बीच में छोडकर निन्जा expert बनने वाले इजमाइल आर्किन अपने blog 30 year old निन्जा पर लिखते है,’ अपने इच्छित लक्ष्यों तक पहुचने के लिए खुद को accept करना होता है। यह समझना होता है कि जो दूसरो के लिए सही है, वह जरूरी नही आपके लिए भी सही रहे। खुद पर यकीन रखकर ही जाना जा सकता है कि आपका अपना पथ भी बेहद खुबसुरत है।‘

कैसे चुने अपनी राह

1-  आज जो भी बनना चाहते है, उस राह में चुनौतियों होगी ही। किसी भी person या बात को इतना हावी न करे कि आप अपनी राह न देख सके।

2-  life के फैसले अपनी पसंद-नापसंद के आधार पर ले, दूसरो को खुश करने के लिए नही। यह समझना जरूरी है कि हमे हर person को पसंद करने और उसे खुश करने की जरूरत नही है। इस तरह यह भी कतई जरूरत नही है दुसरे सभी हमे पसंद करे। खुद में सहज रहे।

3-  अंतिम फैसले तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय ले। life कोई प्रतियोगिता नही है। यदि आपके हमउम्र या सहकर्मी आज आपसे आगे प्रतीत हो रहे है तो कल आप उनसे आगे हो सकते है। दूसरो से compare करके खुद को छोटा न करे।

4-  खुद को positive लोगो के साथ रखे। ऐसे लोग, जो आपको प्रेरणा देते है, आपको समझते है।

5-  जब आप खुद को स्वीकारते है, तो इच्छित मार्ग की ओर कदम बढ़ाना आसान हो जाता है। खुद में मौजूद अच्छे गुणों को देखे। धीरे-धीरे आप खुद को सहज और संतुष्ट महसूस करने लगेगे।