Tuesday, January 5, 2016

Veg Person रखे Nutriment का खास ध्यान

   
veg food में protein की मात्रा ही कम नही होती, दुसरे जरूरी पोषक तत्व भी है, जो पर्याप्त मात्रा में body को नही मिल पाते। अगर शाकाहारी है तो आपके लिए diet में थोडा सा बदलाव करके पोषक तत्वों का संतुलन बनाना जरूरी हो जाता है।

Iron

body में iron की जरूरत हीमोग्लोबिन के लिए होती है। इसकी कमी से एनीमिया होता है। iron अच्छी रोग प्रतिरोधी क्षमता के लिए भी जरूरी है।

कैसे ले: गुडगाँव स्थित कोलंबिया एशिया hospital में डाइटीशियन हनी टंडन के अनुसार,’ chicken, egg और सार्डीन मछली में iron प्रचुर मात्रा में होता है। मांसाहारी उत्पादों की तुलना में body वनस्पति उत्पादों से मिलने वाले iron को पूरी तरह ग्रहण भी नही कर पाता, इसलिए शाकाहारियो को आयरनयुक्त उत्पाद अधिक मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है। स्प्राउट्स, तिल, सूरजमुखी व् सीता-फल के बीज,बींस,मशरूम,अनाज,काजू,बादाम और अखरोट में iron अधिक होता है। शरीर iron को ढंग से ग्रहण कर सके, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में vitamin-c लेना भी जरूरी है। अनार और मौसमी का जूस मिला कर ले। सलाद में मेवे व् संतरे को शामिल करे। ब्रोकली  और आलू खाए।

Vitamin B12

यह vitamin लाल रक्त कोशिकाओ के निर्माण और दिमाग के विकास के लिए जरूरी है। शुरुआत में इसकी कमी से  body में pain, कमजोरी, थकावट व् मानसिक उलझन के रूप में दिखती है। बाद में दिमाग पर असर पड़ने लगता है।

कैसे ले: मुंबई में नानावटी super स्पेशलिटी hospital में डाइटीशियन उषा सिसोदिया कहती है,’vitamin b-12 शाकाहारी उत्पादों में कम पाया जाता है। कुछ प्रोसेस्ड सोया products व् ब्रेड में ये होता है। कुछ खास दुकानों पर मिलने वाले नोरी सीवीड में भी यह प्रचुरता में होता है, जिसे सलाद,सूप और सब्जियों में मिलाकर ले सकते है। कमी अधिक होने पर supplements लेना ही बेहतर होता है।

जिंक

घावो को जल्द भरने, इम्यून system को मजबूत बनाने और क्षतिगस्त DNA की मरम्मत करने के लिए जिंक की जरूरत होती है। यह test व् सुगंध की क्षमता बनाये रखता है। इसकी कमी से  कम भूख, बाल गिरने व् डायरिया के रूप में दिखती है। लम्बे समय तक ऐसा रहने पर depression की आशंका बढ़ जाती है।

कैसे खाए: Dr. टंडन के अनुसार,’ साबुत अनाज,बींस,दाले,मूंगफली,सोया व् डेयरी उत्पादों में जिंक पर्याप्त मात्रा में होता है। काजू में iron व् जिंक दुसरे मेवो की तुलना में ज्यादा होते है। सूप व् सलाद में सीताफल के बीज और वीट जर्म ले।

Vitamin A

आँखे, thyroid harmons प्रकिया,cell की वृद्दि और अच्छी skin के लिए vitamin-A जरूरी होता है। इसकी कमी से इम्यून सिस्टम धीमा होने, अनिद्रा, थकावट और वजन कम होने जैसे लक्षण दिखने लगते है।

कैसे खाए: vitamin-A के लिए संतरी रंग की सब्जियां व् फल के अलावा गाजर,अखरोट, शकरकंद के साथ हरी पत्तेदार vegetable खाए।

Omega-3 फैटी एसिड्स

दिमाग के विकास के लिए omega-3 फैटी एसिड्स जरूरी है। इसमे एंटी एजिंग गुण होते है, जो free radicals को कम करके skin को बुढा होने से रोकते है। free radicals heart व् cancer रोगों की आशंका भी बढ़ा देते है।

कैसे ले: हर रोज सात अखरोट और एक चम्मच अलसी के बीज diet में शामिल करे।









Friday, January 1, 2016

Knowledge भरा पहला मरहम


किसी बीमारी या accident के बाद मरीज के लिए पहला घंटा बहुत important होता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे ‘golden hour’ कहते है। इस समय पीड़ित को दिया गया सही उपचार स्थिति को काबू कर लेता है। आकड़ो की माने तो देश में 10.1% मौते सही प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण होती है। daily होने वाली कई छोटी-बड़ी बाते है, जिनमे शुरूआती उपचार में हुई गलती परेशानी बढ़ा देती है।

Internally चोट लगने पर

क्या न करे: कई बार अचानक ठोकर लगने, कोई भारी सामान गिरने या सीढियों से फिसल जाने के कारण घुटने या टखने की मांसपेशियों में भीतरी चोट लग जाती है, सुजन आ जाती है और दर्द रहता है। कई बार लोग उस हिस्से की गर्म चीज से सिकाई करना शुरू कर देते है। ऐसा न करे। इससे रक्त संचार तेज हो जाता है और सुजन बढ़ जाती है।

क्या करे: ऐसी स्थिति में उस हिस्से की बर्फ से सिकाई करे। बर्फ की सिकाई से सूजन भी कम होगी और दर्द में भी राहत मिलेगी।

शरीर दर्द

क्या न करे: अक्सर हम दर्द होने पर एस्प्रिन व् आईब्रुफेन ले लेते है। ये medicine वास्तविक मर्ज पर असर नही करती, बस दर्द के अहसास को कम कर देती है। हर स्थिति के लिए दर्द की दवा भी अलग होती है। खुद से दवा लेते रहना हालत को गंभीर बना सकता है। लम्बे समय तक बिना किसी doctor के सलाह के medicine लेना अन्य अंगो पर भी बुरा असर डालता है।

क्या करे: दर्द होने पर बाम से मालिश करे। ऐसा करते समय body से दर्द निवारक ऐंडोफ्रिन का स्राव होता है और दर्द में राहत मिलती है। आराम न मिलने पर doctor से संपर्क करे।

Heart Attack व् Stroke

क्या न करे: heart attack या स्ट्रोक आने की स्थिति में अक्सर लोग विशेष hospital में जाने की हडबडाहट में शुरूआती एक घंटा गवा देते है, खासकर heart attack व् स्ट्रोक में शुरुआती  उपचार न मिल पाना स्थिति को गंभीर बना देता है।

क्या करे: यदि आप किसी आपातकालीन स्थिति में फंस जाए तो स्वयं या किसी की मदद द्वारा सबसे पहले एमरजेंसी नंबर पर फोन करके एम्बुलेंस बुलवाए या हो सके तो स्वयं ही नजदीकी hospital पहुंच जाए। heart attack में मरीज के मुह में 300mg water सोल्युबल एस्प्रिन रख दे, यह blood को पतला करने का काम करती है। यदि एस्प्रिन नही है तो disprin भी रख सकते है। वैसे heart रोगियों को नाइटोग्लिसरीन की गोली हमेशा साथ रखनी चाहिए।
स्ट्रोक की स्थिति इससे अलग है। इसमे व्यक्ति का हाथ, पैर या मुंह थोडा मुड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में एस्प्रिन या डिस्प्रिन नही देनी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके, व्यक्ति को तुरंत doctor के पास ले जाए।

गलती से जहरीला पदार्थ खा लेना

क्या न करे:  यदि आपके परिवार के किसी सदस्य ने गलती से कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है तो खुद doctor बनकर व्यक्ति को किसी तरह का syrup पीने के लिए न दे।

क्या करे: मरीज को बहुत सारा नमक वाला पानी पिलाकर उल्टी करवाने की कोशिश करे। फिर तुरंत doctor को बुला ले या उपचार सेण्टर पर संपर्क करे। जहर ज्यादा है तो स्थिति को नजरंदाज न करे, तुरंत hospital ले जाए।

पैनिक अटैक

क्या न करे: दुसरे को पैनिक में देखकर आप पैनिक में न आये। अपना अंदाजा लगाने से बेहतर है मरीज से ही पूछ ले कि वह क्या चाह रहा है।

क्या करे: सबसे पहले व्यक्ति को शांत जगह ले जाकर शांत करने की कोशिश करे। उसका ध्यान श्वास गति की तरफ क्रेंदित करवाए। फिर मरीज को कोई थका देने वाली activity जैसे हाथो को उपर उठाकर रखने या किसी काम में व्यस्त करने की कोशिश करे। श्वास गति control होने दे।

कटने या घाव होने पर

क्या न करे: अक्सर चोट लगने पर blood को रोकने के लिए उस हिस्से को दबा देते है या फिर कपड़े व् पट्टी से कसकर बांध देते है। ऐसा करने से चोट वाली जगह पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या करे: अगर चोट लगी है और बहुत खून बह रहा है तो सबसे पहले कटे हुए भाग को पानी के नल के नीचे ले जाए। ऐसा करने से blood तो रुकता ही है, साथ ही कीटाणु भी निकल जाते है। blood नही रूक रहा है तो पानी का बहाव को तेज कर दे, इससे blood का बहाव रूक जायेगा। अधिक बड़ा घाव होने पर उसे पानी से साफ करके ice pack लगाये, blood रूक जायेगा। इसके बाद ही antibiotic cream लगाकर पट्टी बांधे। ध्यान रहे, पट्टी बहुत कसी हुई नही, बल्कि हल्की बंधी होनी चाहिए। हवा लगने से जख्म जल्दी ठीक होता है।

जलने पर

क्या न करे: कई बार लोग आग की चपेट में आये व्यक्ति को कम्बल से ढककर आग बुझाने के बाद भी उसे उसे कपड़े से लपेटे रहते है। ऐसा करने से कपड़ा जले भाग से चिपक सकता है। जलने पर मक्खन या बर्फ न लगाए।

क्या करे: जले भाग पर पानी डाले। जले हुए हिस्से को 20-25 minute तक पानी के नीचे रखे। ऐसा करने से आग के कारण body में गई ऊष्मा के अन्दुरुनी कोशिकाओ को नुकसान पहुँचाने की आशंका कम हो जाती है और skin पर गहरा दाग भी नही पड़ता।

नकसीर फूटने पर

क्या न करे: गर्मियों में नाक से खून बहने लगता है। ऐसा तेज धूप लगने, उच्च रक्तचाप या नाक में किसी तरह का संक्रमण होने से होता है। इस स्थिति में लोग सिर पीछे की तरफ झुका कर बैठ जाते है। इससे blood आना बंद नही होता, साथ ही उसके गले के रास्ते सांस की नली में जाने की आशंका बढ़ जाती है, जो खतरनाक हो सकता है।

क्या करे: अपने सिर को सीधा रखे और अंगूठे व् ऊँगली से नाक के दोनों नथुनों को बंद कर ले।  ऐसा कम से कम 15 minute तक करे और मुंह से साँस ले। सिर पर ठंडा पानी डाले। यदि blood बंद नही हो रहा है तो तुरंत doctor से संपर्क करे।

सडक दुर्घटना

क्या न करे: accident की स्थिति में अक्सर लोग घबरा जाते है। खुद शांत रहे और पीड़ित को भी शांत रहने दे। स्थिति देखकर फैसला ले। समय ख़राब न करे।

क्या करे: accident में ज्यादातर मौते साँस में अवरोध आने की वजह से होती है, इसलिए सबसे पहले नाक और मुंह के आगे हाथ करके मरीज की साँस की गति को देखे। अगर साँस धीमे चल रहा है तो देख ले कि कही कुछ फंसा न हो। artificial breeding के जरिये oxygen भी दे सकते है। फिर उसके हाथ, पैर, सिर को हिलाकर के देखे। तुरंत ambulance बुलाये।

आँख में कचरा जाना या खुजली होना

क्या न करे: आँख में कचरा चले जाने पर खुजली करने की इच्छा होती है। ऐसी स्थिति में आँखों को रगड़ना नही चाहिए। इससे कचरा और अंदर जा सकता है। साथ ही इन्फेक्शन अधिक फ़ैल सकता है।

क्या करे: आँखों को तुरंत ठन्डे पानी से धोये। ऐसा करने से कचरा निकल जायेगा और इन्फेक्शन फैलेगा नही। उसके बाद भी अगर आँख में लाली व् दर्द देर तक बने हुए है तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करे।

दौरा पड़ना

क्या न करे: एक सामान्य अवधारणा है कि दौरा पड़ने पर मरीज के मुंह में चम्मच, कपड़ा पेन्सिल फंसा दे, ताकि वह अपनी जीभ न काट ले। कुछ लोग जूता भी सुंघाते है। ऐसा कुछ भी नही नही करना चाहिए। मरीज के मुंह में कपड़ा फंसाने से उसे साँस लेने में तकलीफ होगी, साथ ही जो वस्तु मुंह में रखी है, उसके गले में फंसने की आंशका भी बढ़ जाती है।

क्या करे: दौरा सीमित समय के लिए होता है। ऐसी हालत में सबसे पहले साथ वाले व्यक्ति को अपना धेर्य बनाये रखे। मरीज को पानी, आग, धारदार वस्तु, सीढी या अन्य कोई वस्तु जो नुकसान पंहुचा सकती है, उससे दूर रखकर खुली जगह पर लिटा देना चाहिए। मरीज के मुंह में कपड़ा नही फंसाना चाहिए। oxygen का प्रवाह ठीक होने से स्थिति जल्दी सामान्य हो जाती है। मरीज को करवट लेकर लिटाये। दौरा 3 minute से अधिक होने पर तुरंत doctor के पास ले जाए। अगर व्यक्ति की साँस चलती हुई महसूस नही हो रही है तो उस स्थिति में अपनी हथेली से व्यक्ति की छाती पर दवाब दे। हथेली के अंतिम भाग को छाती के बीच में रखे। फिर दुसरे हाथ को पहले हाथ पर रखकर एक minute में 100 से अधिक दवाब दे।

घर में जरुर रखे

1-  सिरदर्द, सर्दी-जुकाम, हाथ-पैर व् कमर दर्द के लिए बाम। चोट पर लगाने के लिए एंटीसेप्टिक tube.

2-  पट्टी, ऐदहेसिव बैंडेज, छोटी कैची और स्टिकिग प्लास्टर।

3-  खून बहने से रोकने के लिए solution.

4-  skin के लिए एंटी फंगल cream, ऐलोबिरा जेल, जले पर लगाए जाने वाली दवा।

5-  दर्द निवारक दवाये। ये दवाये doctor की सलाह से ही किट में रखे और एमरजेंसी में ही ले।

6-  disposable ग्लब्स, pocket mask, antiseptic वाइप्स, thermometer व् हाथ धोने का साबुन।

7-  बाहर का खाना व् अधिक चिकनाईयुक्त खाने से अक्सर पेट दर्द, मरोह, कब्ज, गैस, बदहजमी जैसी तकलीफे होती है। इनके लिए हाजमा करने वाली medicine व् चूर्ण रखे।

8-  डायरिया व् डिहाइड्रेशन से राहत पाने के लिए electoral का packet








Friday, December 25, 2015

Mahamana Madan Mohan Malviya मदन मोहन मालवीय


मदन मोहन मालवीयका जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ था। उनके दादा पं. प्रेमधर और पिता पं. बैजनाथ संस्कृत के अच्छे विद्वान थे। उनके पिता पं. बैजनाथ, एक उत्कृष्ट कथावाचक (भागवत कथा) भी थे। मदन मोहन की शादी 1878 में मिर्जापुर की कुमारी देवी के साथ हुई थी।
मदन मोहन की शिक्षा पांच साल की उम्र में शुरू हो गई थी। वह एक बहुत मेहनती बालक थे। उन्होंने 1879 में मुइर सेंट्रल कॉलेज से मैट्रिकुलेशन की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने 1884 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक किया। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और 1891 में एल.एल.बी. की परीक्षा उत्तीर्ण की, किन्तु उन्होंने कानूनी पेशे में कोई दिलचस्पी नहीं ली।
मदन मोहन मालवीय एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्हें महामनाका खिताब दिया गया था। उन्हें वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्थापक के रूप में याद किया जाता है। मदन मोहन मालवीय एक महान विद्वान, शिक्षाविद् एवं राष्ट्रीय आंदोलन के नेता थे। उन्होंने वर्ष 1906 में हिंदू महासभा की स्थापना की। उन्होंने कई दैनिक, साप्ताहिक और मासिक समाचार पत्र और पत्रिकाओं का प्रकाशन भी किया।
12 नवंबर 1946 को 85 वर्ष की आयु में मदन मोहन मालवीय का देहांत हो गया। वह सामाजिक मामलों में एक रूढ़िवादी व्यक्ति थे। उनकी 153 जयंती के एक दिन पहले, 24 दिसंबर, 2014 को उन्हें (मरणोपरांत) भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित किया गया। मदन मोहन मालवीय का भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक बहुत ही उच्च स्थान है। उन्हें उनकी सौम्यता और विनम्रता के लिए सदैव जाना जाता रहेगा।
-मदन मोहन मालवीय के पौत्र गिरिधर मालवीय ने बताए महामना की सफलता के पांच सूत्र

 पंडित मदन मोहन मालवीय सही मायनों में भारत निर्माता थे। उन्होंने समाज सेवा, वकालत, पत्रकारिता, शिक्षा, साहित्य आदि के जरिए देश को बहुत कुछ दिया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना और उसमें इंजीनियरिंग व टेक्नोलॉजी के कोर्स चलाकर उन्होंने अंग्रेजों को चुनौती दी। वह नहीं चाहते थे कि आजादी के बाद अंग्रेजों के चले जाने से देश का यांत्रिक ढांचा बर्बाद हो जाए। महामना मालवीय को भारत रत्‍‌न दिए जाने की घोषणा के बाद उनके पौत्र पूर्व जस्टिस गिरिधर मालवीय ने ये शब्द कहे। उन्होंने महामना के जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर पत्रकारों से खुलकर बात की।

सफलता के पांच सूत्र

महामना का जीवन स्वच्छता और पवित्रता से भरा था। वह अजातशत्रु थे। किसी से उनका मनमुटाव नहीं था। मृदुभाषी होने के चलते वह सबके प्रिय थे। कोमल हृदय होने के बावजूद वह विचारों के दृढ़ थे। साधारण भोजन करते थे और सफेद वस्त्र पहनते थे। उनके जीवन में सफलता के पांच सूत्र थे। जिनमें देशप्रेम, सतचरित्र, विद्या अध्ययन, आत्म त्याग और स्वस्थ जीवन शामिल हैं। उन्होंने आजीवन इन्हीं का पालन किया।

नौकरी देने के लिए नहीं थी शिक्षा

अंग्रेजी शासन के दौरान कुछ युवाओं ने महामना से शिकायत की कि बीएचयू से पढ़ने के बाद अंग्रेज उन्हें सरकारी नौकरी नहीं दे रहे हैं। इस पर उन्होंने युवाओं को बुलाया और समझाया कि बीएचयू में शिक्षा का उददेश्य कभी सरकारी नौकरी दिलाना नहीं रहा। इसका उददेश्य युवाओं को देश निर्माता बनाना है। आप के भीतर देश- प्रेम की भावना जागृत करना है।

पत्रकारिता में नहीं किया उसूलों से समझौता

 राष्ट्रीय महासभा के मंच पर पहला भाषण देने के बाद वह इतने चर्चित हुए कि काला कांकर के राजा रामपाल सिंह ने उनसे समाचार पत्र हिंदोस्थान का संपादक बनने का आग्रह किया। एक बार राजा द्वारा मद्यपान करके उनका संबोधन करने से वह इतने रुष्ट हुए कि अखबार से अलग हो गए। बाद में वह इंडियन ओपिनियन, हिंदुस्तान रिव्यू, इंडियन पीपुल, लीडर और भारत आदि समाचार पत्रों से जुड़े। इस बीच उन्होंने कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया।
लंबे समय से थी प्रतीक्षा
पूर्व जस्टिस गिरिधर मालवीय ने कहा कि उन्हें ही नहीं बल्कि प्रयाग नगरी को लंबे समय से महामना मालवीय जी को भारत रत्‍‌न प्रदान किए जाने की प्रतीक्षा थी। राष्ट्रपति द्वारा ट्वीट किए जाने के बाद फोन के जरिए उन्हें इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद तो बधाई देने वालों का तांता लग गया। सभी ने गिरिधर मालवीय को फोन और व्यक्तिगत तौर पर शुभकामनाएं दीं।


भारत की एकता का मुख्य आधार है एक संस्कृति, जिसका उत्साह कभी नहीं टूटा। यही इसकी 

विशेषता है। भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण है, क्योंकि भारतीय संस्कृति की धारा निरंतर बहती रही है

और बहेगी।

 मदनमोहन मालवीय







Thursday, December 24, 2015

work Place में इन गलतियों से बचे


work place में आपकी छवि आपके काम पर काफी हद तक असर डालती है। अक्सर लोग पूरी मेहनत व् लगन के साथ office में अपनी बेहतरीन image बनाने की कोशिश करते है, मगर पूरी कोशिश के बावजूद छोटी-छोटी गलतिया हो ही जाती है। इसी वजह से आपको वह जगह नही नही मिल पाती, जिसके आप हकदार है। आये जानते है उन गलतियों के बारे में-

बहाना न बनाये

office में काम से बचने के कई बहाने होते है। ऐसा न समझे कि बार-बार बनाये जा रहे इन बहानो को कोई समझ नही रहा। office न आने का कोई बहाना बना आप boss से छुट्टी तो ले लेते है, मगर ऐसा कर आप धीरे-धीरे दूसरो के विश्वास को भी कम करने लगते है, इसलिए ऐसा करने से हमेशा बचे।

Dressing Sense

work place में professional behaviour में सही dressing भी आती है। office का माहौल चाहे कितना भी cool हो या फिर मौसम कितना भी सर्द- गर्म हो, पहनावा workplace के मुताबिक ही होना चाहिए।

निजी कार्य

facebook पर लगातार chat करना, personal document के print लेना- यह सब अगर आप करते है तो यह ज्यादा दिनों तक नोटिस में आये बिना रह नही पाता। इसलिए सावधान रहे और ऐसी आदत न डाले।

गलतिया स्वीकारे

खुद गलतिया कर दूसरो के सिर डालने वाले लोग हर जगह मिल जाते है, लेकिन office में ऐसे लोग बहुतों की परेशानी की वजह बन जाते है। अपनी गलती दूसरो के सिर न मढ़े। हो सकता है कि अपनी गलती को स्वीकार करते हुए आपको शमिंदगी महसूस हो रही हो, लेकिन यकीन जानिये कि इसे छिपाने की कोशिश में आपको कही ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

हर बात पर गुस्सा

गुस्सैल स्वभाव आपको मुसीबत में डाल सकता है। office में जब आपका गुस्से पर काबू नही रहता, तब आप खुलकर या तो लाल-पीले होने लगते है या फिर अपने खोल में सिकुड़ जाते है। दरअसल ये दोनों तरह का व्यहवार ही सही नही है। याद रहे, तुरंत प्रतिक्रिया से बचे। इससे आप सबकी नजरो में अधिक सवेंदनशील साबित हो जाते है। वही चुपचाप किसी का गुस्सा झेल लेने से आप हर किसी को आसान दीखते है।









Sunday, December 20, 2015

Feedback सही दशा से मिलेगी दिशा


हम अपनी कामकाजी life का एक-तिहाई हिस्सा office में गुजारते है। अपने काम के प्रति सदैव positive रहते है, काफी मेहनत करते है, सारा काम समय से पूरा करते है। इसके बावजूद हमे यह पता नही चल पाता है कि हमारी performance कैसी है और boss हमारे काम से किस हद तक संतुष्ट है। कई बार तो यह भी आभास नही हो पाता है कि office में हमारी भूमिका किस स्तर की है। इन सब का असर हमारे प्रदर्शन पर पड़ता है तथा उत्पादन प्रभावित होता है। देखा जाये तो यह सारा खेल ‘feedback’ की कमी का है। बिना feedback के काम शुरू करने का मतलब है बिना किसी map या संकेत चिह्न के यात्रा शुरू करना। आपके पास भले ही काम की अच्छी समझ हो, लेकिन काम को track पर रखने के लिए यह पर्याप्त नही है। यदि कर्मचारियों के पास थोडा सा भी feedback हो तो वे काम को track पर ला सकते है।

FeedBack फैमिन

अक्सर देखा गया है कि पुरे जोश के साथ अपना काम करते है, लेकिन feedback के आभाव में निरंतर एक तरह की गलतिया दोहराते रहते है। boss व् कर्मचारियों के बीच सुझाव और फैसले में समानता न होकर विरोधाभास नजर आता है। इस स्थिति में feedback फैमिन कहा जाता है। यह feedback फैमिन किसी भी company के लिए खतरनाक होता है। कर्मचारियों की कार्यशैली में भी कोई सुधार नही हो पाता, चाहे company किसी भी स्तर की हो।

मिलती है भरपूर ताकत

आपको ऐसे कई लोग मिलेगे, जो success के शिखर पर है। निश्चित तौर पर उन्होंने भी कठिन परिस्थितियों एवं चुनौतियों का सामना किया होगा, दूसरो से अपने कार्यो के बारे में feedback लिया होगा। सही मायने में feedback हमे दिशा दिखाता है कि यदि हम सही रास्ते पर न हो तो खुद को पटरी पर लाये।

सफलता और असफलता का अंतर

feedback एक आसान व् पॉवरफुल management tool है। यह कर्मचारियों की संतुष्टि व् उत्पादन बढ़ाने का काम करता है। इसके जरिये सफलता व् असफलता का अंतर जाना जा सकता है। यदि किसी को समय रहते उसके प्रदर्शन में कमी का पता चल जाए तो सुधार के अवसर व् सम्भावनाये बढ़ जाती है। इसलिए काबिल कर्मचारी अपने वरिष्ठो की बात गहराई से सुनता है।

सुनने को भी तैयार रहे

दूसरो के मुख से अपने प्रदर्शन की निंदा सुनना आसान नही होता, जबकि सच्चाई यह है कि feedback मिले बिना आप अपने बारे में दूसरो की राय नही जान पाते। हमे अपनी सेवा या उत्पाद की गुणवता का अनुमान नही हो पाता। feedback लेने के साथ complain सुनने का धैर्य भी रखे। इसे positive पहल के रूप में ले। हम चाहकर भी feedback की उपेक्षा नही कर सकते। student भी तो entrance exam के रूप में feedback हो पाते है।

कई हो सकते है स्रोत

feedback कई स्रोतों मसलन manager, supervisor, management system, quality control team, मित्र समूह, customer से मिल सकता है। इसमे जरूरी यह नही है कि यह feedback कितना विश्वसनीय है और इस पर काम कर company को किस हद तक तरक्की की राह पर ले जाया जा सकता है।

संदेश positive हो

feedback के बारे में यह आम धारणा है कि यह negative ही होगा, इसलिए इसे positive तरीके से दिया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को यह लगे कि यह उनके और company के हित की बात है। कई बार कर्मचारियों की ओर से बेहतर प्रदर्शन नही हो पा रहा है और boss को negative feedback देना है तो फिर उन्हें कहानी बदलनी पड़ेगी। उन्हें कर्मचारियों को हतोत्साहित न करते हुए अपना सन्देश और जरूरत उन तक पहुंचानी होते है। यह काम बहुत ही सावधानीपूर्वक करना का है।

जरुरतो को भी समझे

यदि आप team leader या manager है और आपको कर्मचारियों को feedback देना है तो इसके लिए आपको कई तरह की तैयारी भी करनी पड़ेगी। आपको कर्मचारियों की जरुरतो को भी सुनना पड़ेगा और उन्हें यह भरोसा दिलाना होगा कि आप उनके आइडियाज और जरूरते सुनने के लिए तैयार और इच्छुक है। अपने स्तर की कमिया होने पर कर्मचारियों होने पर कर्मचारियों से तर्क-वितर्क न कर उसे स्वीकार कर लेना सही approach साबित होगा।

Feedback के फायदे

किसी भी workplace पर feedback के ढेरो फायदे है

आपसी समझ: workplace पर feedback मिलने से कर्मचारियों के बीच एक आपसी समझ विकसित होती है कि अच्छी performance के लिए क्या जरूरी है। कर्मचारियों उस हिसाब से अपना काम आगे बढ़ाते है।

विशिष्टता: feedback तब सटीक काम करता है, जब वह किसी खास लक्ष्य से सम्बद्द हो। कर्मचारी फिर उसी के हिसाब से अपने काम में गति अथवा बदलाव लाते है। इससे काम की गति 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

समयबद्दता: कर्मचारियों को यदि उनके काम का feedback मिले तो वे पूरी कोशिश करते है कि किस तरह से उनका काम नियत समय तक पूरा हो। यदि काम में कुछ बदलाव भी हो तो उससे काम प्रभावित नही होता।

आत्म सुधार: feedback से सिर्फ कर्मचारी एवं company की performance में ही सुधार नही होता, बल्कि इससे खुद में भी सुधार होता है। आप उसी दिशा में कदम बढ़ाते है, जो company को feedback फैमिन से बाहर निकालती है।

बेहतर तरीका: feedback की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे काम करने का बेहतर तरीका मिलता है। कर्मचारी focus होकर काम करते है। बस positive दृष्टिकोण आपको भी अपनाना चाहिए।

समस्या-सुधार: company की मुलभुत समस्याए क्या है तथा इनसे कैसे जल्दी निजात मिल सकती है, यह feedback से पता चल जाता है। इसके बाद सभी लोग मिल-जुल कर नये आइडियाज सामने लाते है और हल निकालने की कोशिश करते है।

Office में कार्य में फर्क डालने वाली 7 प्रमुख बाते

1-  64% कर्मियों को नही लगता कि मौजूदा company में कार्य करने का माहौल बढ़िया है।


2-  66% कर्मचारियों को लगता है कि उनकी company में विकास के अवसर सीमित है।

3-  49% कर्मचारी अपने supervisor से खुश नजर नही आये

4-  4 में से 1 से अधिक कर्मचारी के पास कार्य करने के लिए जरूरी tools नही है।

5-  21% कर्मचारियों को ही सिर्फ लगता है कि company में वे भी important है।

6-  44% कर्मचारियों ने पाया कि उनके समकक्ष साथियों से उन्हें सम्मान मिलता है।

7-  मित्र समूह जैसे बहुत से कारण ऐसे रहे, जिनसे कर्मचारियों ने कुछ अलग कर दिखाया।