Thursday, October 15, 2015

अवचेतन मन की शक्ति




हम सभी के भीतर बहुत बड़ा अखूट खजाना समाया है। उसे प्राप्त करने के लिए हमे केवल मन की आंखे खोलकर देखना भर है। हमारे भीतर नियामतो का अथाह भंडार है। जिसमे से हम खुद सुखद,समृद्द और आनंदमयी जीवन जीने के लिए आवश्यक हर चीज प्राप्त कर सकते है। बहुत सी बार हम अपने में समायी संभावनाओ को इसलिए नही जान पाते; क्योकि हम अपने भीतर मौजूद असीमित ज्ञान और अनंत प्रेम के भंडार से अनभिज्ञ होते है, जबकि सत्य तो यह है कि इसमे से हम अपनी हर मनचाही चीज निकाल सकते है। 

लोहे की चुम्बक का टुकड़ा अपने भार से बारह गुना अधिक वजन उठा सकता है, लेकिन अगर हम उसके चुम्बकीय गुण को हटा दे तो यह एक तिनका भी नही उठा पायेगा। इसी तरह मनुष्य भी दो तरह के होते है। एक वे, जो चुम्बकीय गुणों से परिपूर्ण होते है, ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास और आस्था से भरे होते है तथा वे जानते है कि वे सफल होने तथा जीतने के लिए ही बने है। दुसरे वे लोग होते है, जिनमे चुम्बकीय गुण नही होता, ऐसे व्यक्तियों की संख्या समाज में अधिक पायी जाती है। वे डर और शंकाओ से भरे होते है। अवसर सामने आने पर ही वे कहते है,” अगर मै सफल नही हुआ तो क्या होगा? लोग मेरी हंसी उड़ायेगे। इस तरह के लोग जीवन में ज्यादा आगे नही जा पाते है। उनका डर उन्हें उसी जगह पर रोके रहता है, जहाँ वे है। अब हमे चिन्तन करना है कि हम दोनों प्रकारों में से किस श्रेणी में आते है अर्थात हममे चुम्बकीय गुण है या इसका आभाव है। यदि नही तो हम भी चुम्बकीय व्यक्ति बन सकते है, बशर्ते हम इसके रहस्य को समझ ले और उस पर अमल करने लगे। यह रहस्य है, हमारे अवचेतन मन में पाई जाने वाली अदभुत चमत्कारी शक्ति। अवचेतन मन की छिपी हुई शक्ति का प्रयोग करना सीखकर हम अपने जीवन में अधिक शक्ति, धन-सम्पदा, स्वास्थ्य और आनन्द पा सकते है। वास्तव में हमे इस शक्ति को हासिल करने की जरूरत नही है, यह तो हममे पहले से ही समाहित है, बस हमे यह सीखना होगा कि इसका प्रयोग कैसे किया जाये। हमारा अवचेतन मन इस बात का इंतजार करता रहता है कि हम इसे कब विकसित करे और अभिव्यक्ति दे। यदि हम अपने अवचेतन मन की क्षमता को पहचान ले तो हमारी बाहरी जगत की सभी इच्छाए साकार हो सकती है और हम अपने जीवन में अदिश अभिव्यक्ति उपयुक्तता को जानने को मार्ग खोल सकते है। अवचेतन मन में समाहित शक्तिया प्रकट करने के लिए निम्नलिखित विचार स्मरण रखने योग्य है-

1-  सभी महान व्यक्तियों का महान रहस्य यह था कि उनमे अपने अवचेतन मन की शक्तियों से संपर्क करने और उन्हें मुक्त करने की प्रतिभा थी। आप भी ऐसा ही कर सकते है।

2-  हमारे अवचेतन मन के पास सारी समस्याओ के जवाब है। यदि हम सोने से पहले अवचेतन मन से कहे,” मै सुबह छह बजे उठना चाहता हूँ” तो यह आपको ठीक उसी समय जगा देगा।

3-  हमारा अवचेतन मन हमारे शरीर का निर्माता है और हमारा उपचार कर सकता है। यदि हम हर रात आदर्श सेहत के विचार के साथ सोने जायेगे तो और हमारा वफादार सेवक यानि हमारा अवचेतन मन हमारे आदेश का पालन करेगा। हर विचार एक कारण है और हर परिस्थिति एक परिणाम है।

4-  अगर हम पुस्तक लिखना चाहते है, बढ़िया नाटक लिखना चाहते है, श्रोताओ के सामने बेहतर भाषण देना चाहते है तो यह विचार भावना और प्रेम के साथ अपने अवचेतन मन तक पहुचा दे। वह इस पर इसी के अनुरूप प्रतिक्रिया करेगा।

5-  वास्तव में, हम एक जहाज के कप्तान के तरह है। हमे केवल सही निदेश देने होगे, वरना जहाज दुघटनागस्त हो जायेगा। इसी तरह से हमे अपने अवचेतन मन को सही आदेश (विचारे और तस्वीरे) देने होगे, जो हमारे सभी अनुभवो को नियंत्रित करता है। 

6-  इस तरह का वाक्यों का प्रयोग कभी नही करना चाहिए,”मेरे पास इसके लिए पैसे नही है” या “मै ये काम नही कर सकता” हम जो सोचते है, हमारा अवचेतन मन उसी बात को सच मान लेता है  इसलिए वह यह सुनिश्चित कर लेता है कि हमारे पास कभी पैसे न रहे या वह काम करने की क्षमता न रहे, जो हम करना चाहते है। इसके बजाय दृढ़ता से कहे,”मै अपने अवचेतन मन की शक्ति से सारे काम कर सकता हूँ।”

7-  जीवन का नियम विश्वास का नियम है। विश्वास हमारे मस्तिष्क का एक विचार है। उन चीजो में विश्वास न करे, जो हमे नुकसान या चोट पहुचाये। अपने अवचेतन मन की शक्तियों में विश्वास करे। यह विश्वास रखे कि वे हमारा उपचार करेगी, प्रेरित करेगी, शक्तिशाली और समृद्द बनाएगी। अपने विचारो को बदल ले, तकदीर बदल जाएगी।



उपयुक्त विचार डॉ. जोसेफ मर्फी के विचारो से प्रेरित है। 






Monday, October 12, 2015

Meetings को न ले हल्के में




हम सबने यह महसूस किया होगा कि office की meetings में प्रत्येक दिन काफी वक्त लगता है। कभी-कभी तो काम से ज्यादा समय meetings में ही गुजर जाता है। ऐसी meetings का purpose ऐसी meetings का purpose company या organization के कामकाज से सम्बंधित नीतियों को तैयार करने से लेकर उनके implementation में आने वाली problem का समाधान तलाशना होता है। इसके अलावा output और productivity बढाने जैसे मामलो के लिए भी meetings होती है। हालाकि यह भी सच है कि कई बार ऐसी meetings दिशाविहीन होती है और बिना किसी हल के समाप्त हो जाती है। 

meetings में जाने से पहले करे तैयारी

प्रत्येक meetings का एजेंडा पहले से तय होता है और meetings से कई दिन पहले उसमे भाग लेने वाले कर्मियों को यह सर्कुलेट किया जाता है, इसलिए समय रहते एजेंडे में निहित item के बारे में अधिक से अधिक जानकारिया प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। संभव है कि आपके द्वारा निर्वहन किये जा रहे कार्यकलापो पर ही meetings आधारित हो। ऐसे में आपको समस्त update तैयार रखना चाहिए। पिछले कार्यो की detail के अतिरिक्त वर्तमान में जारी कार्यो और भावी कार्यकलापो की रूप-रेखा भी अपने साथ अवश्य रखनी चाहिए।

अगर किसी project या problem की वजह से meetings आयोजित की जा रही हो तो आपको भरसक प्रयास करना चाहिए कि अपनी तरफ से भी आप कोई हल प्रस्तुत कर सके या कम से कम सुझाव देने की स्थिति में हो।

बना सकते है Impression

meetings को कुछ लोग चाय-पानी या गपशप की जगह मान बैठते है। वे ये नही समझ पाते कि कोई ऐसी management नही होगी, जो मोटा वेतन देकर समय व्यर्थ करने के लिए अपने staff को meetings में बुलाएगी। ये भी ध्यान रखे कि कई बार meetings की recording भी होती है और उसे management देखता भी है। ऐसे गैर जिम्मेदाराना behavior का आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है, इसलिए meetings को अवसर की तरह ले और अपनी काबिलियत तथा योग्यता का परिचय देने का प्रयत्न करे।

दुसरो की important बातो को सराहे

अगर आपको किसी वक्ता की कोई बात या सुझाव पसंद आये तो उसकी बेहिचक तारीफ करे। किसी junior की कोई advice मूल्यवान हो तो बाकायदा उसका नाम लेकर उसे श्रेय दे।

Personal झगड़ो का अखाड़ा न बनाये

अगर किसी वक्ता की कोई बात आपको चुभ जाए या जाने-अनजाने में कोई personal comment कर बैठे तो बेहतर यही रहेगा कि उसके साथ किसी बहस में न उलझे। यकीन मानिए गर्मागर्मी का माहौल बनाने से किसी तरह का positive परिणाम नही निकलता, बल्कि नुकसान ही होता है।

सम्मानजनक तरीके से रखे अपनी बात

अपनी बात कहते समय meetings के chairmen और अन्य वक्ताओ के प्रति सम्मान प्रकट करे। यदि आपसे सम्बंधित कोई बात है तो वक्ता की बात खत्म होने पर chairmen से अनुमति मांगकर अपनी बात रखे। बातचीत में चालू शब्दों और भाषा का प्रयोग न करे। भरसक कोशिश करे कि बिना सबूत या साक्ष्यो के किसी भी वक्ता की बात को न काटे। प्रत्येक मुद्दे पर राय देने से भी बचना चाहिए। जोर-जोर से से बोलना या मेज पर हाथ मारते हुए अपनी बात मनवाने जैसी हरकते तो कतई न करे, पर यह भी आवश्यक है कि आवाज इतनी बुलंद हो कि सभी तक पहुचे। बातो में confidence भी झलकना चाहिए और कम शब्दों में पूरी बात रख देनी चाहिए। दोहराव से बचे और सरल भाषा तथा profession से सम्बंधित terminology का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करे। अगर कोई जिज्ञासा है तो उसे meetings के अंतिम समय के लिए बचा कर न रखे। बीच में chairmen की अनुमति से इसे सबके सामने रखने में कोई बुराई नही है। यदि जरूरी है तो अपनी बात power point presentation के जरिये रखे, पर इसे नीरस तरीके से न बनाये। इस क्रम में आकड़ो की बाजीगिरी दिखाने से भी बचे। इसका अच्छा impression नही पड़ता। अपनी उपलब्धियों या सफलता का बखान करने के क्रम में team work को नजरअंदाज न करे। उनकी भूमिका का उचित उल्लेख जरुर करे, लेकिन अपने senior या junior की complain meetings में न करे। यह ऐसी बातो के लिए उपयुक्त मंच नही है।

कैसी हो Body Language

1-       चुस्त-दुरुस्त और अलर्ट दिखे। आपके personality में किसी तरह का आलस्य या बोझिलपन नही झलकना चाहिए।

2-       chair पर बिलकुल सीधे होकर अन्य member के बराबर की उचाई पर बैठे

3-       chair पर पसर कर बैठना, बार-बार पहलू बदलना, पैर पसार कर बैठना इत्यादि से यह पता चलता है कि आपका ध्यान meeting में नही है।

4-       दोनों हाथ सामने टेबल पर रखे।

5-       भूलकर भी किसी की ओर ऊँगली दिखाकर इशारा या बाते न करे।

कुछ सामान्य Tips

1-meeting वाले दिन formal कपड़े पहने। ज्यादा color  या तडक-भड़क वाले वस्त्र तो बिलकुल न पहने। shirt के बटन बंद हो।

2-meeting शुरू होने से 10 minute पहले confess hall में अवश्य पहुच जाये। साथ में notepad और pen रखे। points note करते रहे।

3-meetings में अपने साथ सारे आवश्यक papers या reports ले जाना न भूले।

4-वक्ताओ की बात ध्यान से सुने।

5-बेवजह की टोका-टाकी करने से बचे।

6-meetings शुरू होने से पहले mobile off कर दे या silence मोड में डाल दे।

7-बार-बार mobile सन्देश न पढ़े, न जवाब दे।

8-phone सामने meeting table पर न रखे। इससे आपका और सहकर्मियों का ध्यान भटकता है।

9- अगर कोई बहुत जरूरी call हो तो confess room से बाहर जाकर संक्षिप्त बातचीत करे।

10- ऊँघना, अंगुलिया चटकाना, पैर हिलाना,इधर-उधर देखना या साथ बैठे person से व्यक्तिगत बाते करना आदि meeting के डेकोरम के विरूद्ध होता है। ऐसा न करे।

  

 


   

Thursday, October 8, 2015

Healthy Diet अच्छी नही अति




गौरव को fruit खाने का बहुत शौक था। खासकर वह apple और papaya जब तब खाता रहता था। जब भी भूख लगती, refrigerator से fruit निकाल कर खा लेता। ज्यादा भूख लगने पर उसका सलाद बना लेता। उसका ये ख्याल था कि fruit तो fiber और vitamin से भरपूर होते है। fruit से सेहत कोई नुकसान नही। तभी अचानक एक दिन वह बीमार पड़ गया। पेट में भयंकर pain होने लगा। उसे गैस,अपच की भी शिकायत रहने लगी। काफी इलाज हुआ। तब जाकर उसने doctor के advice पर अपना खान-पान बदला। doctor ने बताया कि एक ही तरह के खान-पान की वजह से गौरव के body में कई अन्य आवश्यक तत्वों की कमी हो गई थी।
यह सही है कि fruit vitamin और mineral से भरपूर होते है, पर एक की अधिकता body में दुसरे तत्वों की कमी कर देती है। पपीता पाचन के लिए बेहतर होता है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल कई problem भी पैदा करता है। apple में उच्च मात्रा में fiber व् iron होता है, पर body को सिर्फ fiber की जरूरत नही होती, उसे ठोस भी चाहिए। साथ ही बहुत अधिक fiber लेने पर toxin के साथ-साथ body के लिए उपयोगी पोषक तत्व भी बाहर निकल जाते है। पेट सम्बन्धी दिक्कते भी होती है।

दूसरी ओर WhatsApp पर आये एक message में पानी की खुबिया जानने के बाद मानसी ने खूब water पीना शुरू कर दिया। पर कुछ समय बाद उसने महसूस किया कि वह पहले से ज्यादा बार पेशाब जा रही है और उसे थकान भी अधिक रहने लगी है। मानसी और गौरव के उदारहण बताते है कि जरूरत से ज्यादा कुछ भी खाना-पीना body को नुकसान ही पहुचाता है, फिर भले ही वह पोषक तत्व ही क्यों न हो। पोषक तत्व भी एक आदर्श मात्रा में body में पहुचने पर ही फायदेमंद रहते है।

Protein

protein मांशपेशियो के निर्माण और मरम्मत के लिए जरूरी है। बढ़ते बच्चो के लिए इसकी अधिकता बेहद जरूरी है। पर उम्र बढने के साथ-साथ protein को अधिक मात्रा में लेने से kidni को भी अतिरिक्त मेहनत करनी पडती है। लम्बे समय तक high protein diet से heart और liver रोगों का खतरा बढ़ता है। कुछ खास तरह के protein bones की सेहत पर भी असर डालते है। गठिया और kidni की परेशानी से जूझ रहे लोगो को खास ध्यान रखने की जरूरत है। दाले,अंडा,milk,soyabean,मटर, chicken,टूना,पनीर व् मूंगफली के अच्छे स्रोत है।

क्या है सही मात्रा 

protein की मात्रा body की सक्रियता व् work out पर depend करती है। सामान्य तौर पर भोजन से मिलने वाली कुल calorie का कम से कम 10 प्रतिशत और अधिक से अधिक 30 प्रतिशत हिस्सा protein से आना चाहिए। आहार विशेषज्ञ से राय लेना बेहतर रहता है।

Tea

tension कम करने और आलस दूर भगाने में tea से मदद मिलती है, लेकिन इस पेय की लत लगने में देर नही लगती। इसलिए संभव है कि अगर आपको दिनभर में 2 कप चाय पीने की आदत है तो यह आदत खुद ब खुद 6 cup में बदल जाएगी। दरअसल चाय में कैफीन होता है, जो पाचन शक्ति को कमजोर करने के साथ खीज, चिडचिडेपन, अनिद्रा और मूड स्विंग के लिए जिम्मेदार होता है। सामान्य चाय के मुकाबले टीबैग वाली चाय ज्यादा नुकसान पहुचाती है, इसलिए टीबैग वाली चाय को कुछ क्षण पानी में रखने के बाद तुरंत निकाल देना चाहिए। यदि आप मानते है कि green tea तो कितनी भी पी जा सकती है तो भी ध्यान देने की जरूरत है। अधिक green tea का सेवन body में dehydration कर सकता है।

क्या है सही मात्रा

दिन में 2 cup से ज्यादा चाय न पीये। चाय के cup के size पर भी ध्यान दे। cup जितना बड़ा होगा, चाय उतना पी जाएगी। इसलिए cup छोटा ही ले। green tea भी दिनभर में चार cup से अधिक न ले। अगर आप चाय की दुकान आदि पर चाय पीते है तो थोडा और सतर्क हो जाये, क्योकि वहा बिकने वाली चाय के दो cup बार-बार उबलने के कारण छह cup चाय के बराबर साबित होते है।

Vitamin

बिना सलाह vitamin supplement और फोर्टीफाईड fruit का सेवन करते है तो ध्यान दे। body में अधिक vitamin थकावट,चक्कर व् आलस पैदा कर सकते है। जैसे अधिक vitamin-c या जिंक, उल्टी,डायरिया और मरोड़ का कारण बन सकते है। selenium की अधिकता acidity और बाल गिरने का कारण बन सकती है। vitamin-d की अधिकता से heart गति अनियमित होती है। लम्बे समय तक vitamin-A,D,E और K की अधिकता toxin बढ़ा देती है। पर आमतौर पर उचित मात्रा में fruit व् vegetable का सेवन body में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति कर देता है। 

Fiber

fruit-vegetable fiber यानि रेशो से भरपूर होते है। इन्हे पर्याप्त मात्रा में खाने से कब्ज और gas सम्बन्धी परेशानिया कम होती है। कब्ज, अपच और मोटापे के शिकार लोगो को खासतौर पर fiber युक्त चीजे खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन यह भी सच है कि लम्बे समय तक ऐसी अधिक चीजे खाना पेट में ऐठन, अपच और acidity कर सकता है। डायरिया का खतरा भी बढ़ सकता है।

क्या है सही मात्रा

एक healthy person को हर रोज 25 से 35 gram fiber यानी कोई भी 2 fruit, दो कटोरी सब्जी और एक कटोरी सलाद खाना चाहिए। हर रोज बदल-बदल कर fruit-vegetable खाना फायदेमंद रहता है।

Water

बहुत अधिक water पीने को हाइपोनेटिमिया कहते है। जल्दी-जल्दी व् एक साथ बहुत सारा पानी से blood में अधिक अधिक sodium घुलने लगता है, फ्लूड रक्त से cell में जाने लगता है, जिससे उलझन, भ्रम, सूजन और सिरदर्द हो सकता है। बार-बार पेशाब जाना और उल्टी अधिक पानी पीने के लक्षण है। यह भी ध्यान रखे कि अन्य खाध पदार्थ भी पानी की पूर्ति करते है।

क्या है सही मात्रा

दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी की जरूरत होती है। मौसम भी पानी पीने की क्षमता पर असर डालता है। इतना पानी अवश्य पिए कि पेशाब का रंग पीला न हो जाये।

इन बातो का रखे ध्यान

1-  soyabean में protein अधिक होता है, जबकि cholesterol बिलकुल भी नही होता। बावजूद इसके ज्यादा सोया खाने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। विभिन्न शोधो के मुताबिक इसे ज्यादा खाने से women के body में estrogen का स्तर प्रभावित हो सकता है, men में भी इनफर्टिलिटी  का खतरा बढ़ सकता है। thyroid वालो को भी soyabean की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
2-  किसी भी fruit या vegetable को हर रोज ज्यादा मात्रा में खाना कई तरह की परेशानिया लाता है। जैसे जरूरी नही कि vitamin-A के बेहतरीन स्रोत माने जाने वाले पपीते या गाजर का ज्यादा सेवन body को फायदा ही पहुचाये। दरअसल ये fruit बीटा कैरोटिन से भरपूर होते है। body का पाचनतंत्र इनमे मौजूद बीटा-कैरोटिन को vitamin-A में तब्दील कर देता है, लेकिन body अपनी जरूरत के मुताबिक ही vitamin-A लेता है। बाकि बचा अतिरिक्त vitamin-A system में ही रह जाता है, जिसकी वजह से धीरे-धीरे हथेलिया और तलुए पीले पड़ने लग जाते है। इसे कैरोटनेमिया कहते है। बीटा-कैरोटिन से भरपूर अन्य चीजे आलू, कुम्हड़ा,पालक और ब्रोकली अधिक खाने से भी कैरोटनेमिया हो सकता है।
3-  olive oil दिल की बीमारी के खतरे को कम करता है, पर इसे जरूरत से ज्यादा हाईप देना सही नही। सभी तरह के तेलों का संतुलन जरूरी है। सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली भी इस्तेमाल करते रहे। एक दिन में दो से तीन चम्मच जैतून का तेल काफी है।
4-  विभिन्न शोधो के मुताबिक सूखे मेवो का जरूरत से ज्यादा सेवन पाचन क्रिया बिगाड़ सकता है। इससे allergy भी हो सकती है, इसलिए सूखे मेवे खाते समय मात्रा पर ध्यान दे। एक स्वस्थ व्यक्ति के खानपान में सूखे मेवो की आदर्श मात्रा उसकी दिनचर्या पर depend करती है। अधिक शारीरिक श्रम न करने वालो के लिए नियमित 10-12 दानो का सेवन पर्याप्त है। बादाम व् किशमिश रात में भिगोकर सुबह खाना अच्छा रहता है। मेवे तल कर नमक लगा कर नही खाने चाहिए।

                            डाइटीशियन नेहा यादव और निधि पांडेय के अनुसार