Sunday, May 17, 2015

गर्मियों की जान देशी Food




जैसे जैसे गर्मी का पारा चढ़ रहा है, वैसे वैसे सूरज की तपन से body झुलसा और गला रह-रह कर सुखा जा रहा है। हालाकि इसके लिए खान-पान के विदेशी विकल्पों की भरमार है, पर क्यों न इस गर्मी कुछ सस्ते और सेहतमंद देशी विकल्पों से नजदीकी बढ़ायी जाये, जो ठंडक देने के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है।
  
Summer में पाचन से जुडी problem का अधिक सामना करना पड़ता है। इस समय body को ठंडक, पोषण, और स्वाद देने वाले खाध पदार्थो की जरूरत होती ही है, साथ ही उनकी साफ सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। हमारे परंपरागत खान- पान में ऐसी कई चीजे है, जिनका गर्मियों से लड़ने में कोई जवाब नही।

पुदीना और green धनिया

पुदीना पाचन में सहायता करता है और body को ठंडक देता है। इससे डायरिया acidity में राहत मिलती है। body की सफाई होती है, जिससे skin के संक्रमण की आशंका कम हो जाती है। vitamin C की प्रचुरता इम्यून system को दुरुस्त रखती है।

हरे धनिये- पुदीने की चटनी 

धनिये-पुदीने का रस और जलजीरे के अलावा इसकी बनी चटनी पाचन के लिए अच्छी होती है। चटनी बनाने के लिए धनिये- पुदीने के साथ अदरक, हरी मिर्च, lemon का रस, जीरा, कच्चा mango व salt मिलाये। इसे एक week तक रख सकते है।

Aloe Vera 

aloe vera body के ताप को कम करने के साथ पेट के लिए लाभकारी है। इसके नियमित सेवन से कब्ज, अपच और इरिटेबल बाउल sindrom की problem में भी यह लाभकारी है। इसमे मौजूद एमिनो acid, vitamin व minral इसे natural क्लींजर बनाते है।

Aloe Vera Juice

aloe vera की उपरी skin को उतार कर उसकी jelly को टुकडो में काट ले। फिर इसे मिक्सी में पीस ले। कुछ दिन store करना है तो इसमे lemon का रस मिलाकर पीस ले। पर एक दिन में 3-6 चम्मच से अधिक juice न पिए। teste के लिए इसमे सेब, अनन्नास, संतरे या गाजर का juice मिलाकर पी सकते है। aloe vera की सब्जी व हलवा भी बनाया जा सकता है।

सत्तू

सत्तू carbohydrate और fiber से भरपूर होता है। यह एक सम्पूर्ण और सुपाच्य आहार है, जो brain को तरोताजा रखता है। पेट की गर्मी को कम करके stamina बढ़ाता है। जौ व चने का सत्तू teste के अनुसार ले सकते है।

नमकीन और मीठा सत्तू

चने व जौ के सत्तू में पानी, भुना हुआ जीरा, कला नमक और lemon का रस मिला कर पिए। गाढ़ा नमकीन सत्तू बनाने के लिए इसमे प्याज और हरी मिर्च भी मिला सकते है। इन सब को मिक्सी में पीस कर ठंडा करने के बाद खाए। मीठा पसंद करने वाले सत्तू पानी में sugar मिला कर पी सकते है।

कच्चा Mango

कच्चे mango में पके mango की तुलना में vitamin c अधिक होता है। यह vitamin b और minral का अच्छा श्रोत है। कच्चे आम में लाल मिर्च, अदरक और हरी मिर्च डालकर उसे पीस ले। पैन में oil या ghee डाल कर राई कडकडाने के बाद इसे डाल कर अच्छी तरह पका ले। 15 minute बाद इसमे पके हुए चावल मिला ले। दही के साथ खाए। इसमे बना आमपना गर्मियों के लिए बेहतरीन शीतल पेय है। 

इमली

इमली को पेट के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमे vitamin c, minral और fiber की प्रचुरता होती है। इसमे मौजूद टारटरिक acid free radicals से बचाता है।

इमली का शरबत

इमली को water में उबाल कर उसे छान ले। इस water में sugar, भुना जीरा, salt डालकर मिक्सी में पीस ले। अब इस water में उपर से ठंडा water और ice के टुकड़े मिलाये।
इमली के गूदे का juice सब्जियों में भी मिलाया जा सकता है।

बेल

fiber और पोषण से भरपूर है यह फल। इसका गुदा पीला और बीज चिपचिपे होते है। पके बेल का गुदा मीठा होता है। यह पेट के लिए फायदेमंद होता है। इसमे vitamin c और कार्बोज होते है। बलवर्धक होने के साथ यह ठंडक देता है।

बेल शर्बत

बेल को धोकर उसका गुदा निकाले। एक बर्तन में गुदे से दो गुना water लेकर उसे मसल ले। इसे छलनी से छाने। इसमे sugar के अलावा भुना जीरा भी डाल सकते है। ice डालकर पिए। चाहे तो बेल के गूदे में milk और sugar मिलाकर मिक्सी में शेक भी बना सकते है।

गन्ने का Juice 

गन्ने का juice calcium, मैग्नीशियम, पोटेशियम और iron से भरपूर होता है। यह body में water और इलेक्टोलाइट्स की कमी को पूरा करता है और पेट को संक्रमण से बचाता है। गन्ने का juice skin में नमी और लचीलापन बनाये रखता है। इसके अलावा मुहासे की problem को भी कम करता है। गन्ने का juice पीते समय सफाई पर ध्यान अवश्य दे। 

कब क्या खाए

पसीना अधिक आने पर

Dihydration से बचने के लिए रसीले fruit, हरी सब्जियों, दही, छाछ, coconut और नीबू पानी को भोजन में शामिल करे।

Water की कमी होने पर

नीबू पानी और बेल का शरबत पिए। body को ठंडक, पोषण और energy तीनो मिलेगे। 

अपच और भूख न लगने पर

अधिक चिकनाई, मासालेदार भोजन और कैफीनयुक्त चीजे कम खाए। खाघ पदार्थो की साफ- सफाई और सही storege पर ध्यान दे।

सिरदर्द

लगातार तेज धुप और गर्मी में रहने से brain में oxygen का level प्रभावित होता है। ढेर सारा water पिए। बेल का शर्बत, नीबू पानी, छाछ व् सत्तू खाए। body को ढककर बाहर निकले।

Food Poision

उबला हुआ या filter किया water ही पिए। Fresh और स्वच्छ भोजन खाए। कच्चे fruit व् सब्जियों को धोकर इस्तेमाल करे।

Skin एलर्जी

Sun के light, पसीने और अधिक गर्मी से skin सम्बन्धी कई परेशानियों हो जाती है। इनसे बचने के लिए light के सीधे संपर्क में आने से बचे। ढेर सारा water पिए। संतुलित भोजन ले।

  
  


Monday, May 4, 2015

बवासीर के लिए Ayurvedic Treatment







मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण बवासीर की समस्‍या होती है। इसके कारण गुदे में सूजन हो जाती है। लेकिन आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है।

1 बवासीर का Ayurvedic Treatment

बवासीर बहुत ही पीड़ादायक रोग है। इसका pain असहनीय होता है। बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है। बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी बवासीर में नसों की सूजन दिखती नहीं पर महसूस होती है, जबकि बाहरी बवासीर में यह सूजन गुदा के बिलकुल बाहर दिखती है। बवासीर को पहचानना बहुत ही आसान है। मलत्याग के समय मलाशय में अत्यधिक पीड़ा और इसके बाद रक्तस्राव, खुजली इसका लक्षण है। इसके कारण गुदे में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है।

2 Fiber युक्त Food
  
अच्‍छे पाचन क्रिया के लिए fiber से भरा आहार बहुत जरूरी होता है। इसलिए अपने आहार में रेशयुक्त आहार जैसे साबुत अनाज, ताजे fruit और हरी vegetable को शामिल करें। साथ ही फलों के रस की जगह फल खाये।

3 छाछ

बवासीर के मस्‍सों को दूर करने के लिए मट्ठा बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए करीब दो लीटर छाछ लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और स्‍वादानुसार salt मिला दें। प्यास लगने पर water के स्‍थान पर इसे पीये। चार दिन तक ऐसा करने से  मस्‍से ठीक हो जायेगें। इसके अलावा हर रोज दही खाने से बवासीर होने की संभावना कम होती है। और बवासीर में फायदा भी होता है।

4 त्रिफला

आयुर्वेंद की महान देन त्रिफला से हम सभी परिचित है। इसके चूर्ण का नियमित रूप से रात को सोने से पहले 1-2 चम्‍मच सेवन कब्‍ज की समस्‍या दूर करने मेंं मदद करता है। जिससे बवासीर में राहत मिलती है।

5 जीरा

छोटा सा जीरा पेट की समस्‍याओं बहुत काम का होता है। जीरे को भूनकर मिश्री के साथ मिलाकर चूसने से फायदा मिलता है। या आधा चम्‍मच जीरा powder को एक गिलास water में डाल कर पियें। इसके साथ जीरे को पीसकर मस्‍सों पर लगाने से भी फायदा मिलता है।

6 अंजीर

सूखा अंजीर बवासीर के इलाज के लिए एक और अद्भुत आयुर्वेदिक उपचार हैं। एक या दो सूखे अंजीर को लेकर रात भर के लिए गर्म water में भिगों दें। सुबह खाली पेट इसको खाने से फायदा होता है।

7 तिल

खूनी बवासीर में blood को रोकने के लिए 10 से 12 gram धुले हुए काले तिल को लगभग एक gram ताजा butter के साथ लेना च‍ाहिए। इसे लेने से भी बवासीर में blood आना बंद हो जाता है।

8 हरीतकी

हरड़ के रूप में लोकप्रिय हरीतकी कब्‍ज को दूर करने का एक बहुत अच्‍छा आयुर्वेदिक उपाय है। हरीतकी चूर्ण आधा से एक चम्मच, रात को गुनगुने water से लेने से या गुड़ के साथ हरड खाने से बवासीर की समस्‍या से निजात मिलता है।

9 बड़ी इलायची

लगभग 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रखकर भूनते हुए जला लीजिए। ठंडी होने के बाद इस इलायची को पीस चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से सुबह water के साथ खाली पेट लेने से बवासीर की समस्‍या ठीक हो जाती है।

10 आंवला

आयुर्वेद में आंवले को बहुत महत्ता प्रदान की गई है, जिससे इसे रसायन माना जाता है। यह body में आरोग्य शक्ति को बढ़ाता है।आंवला पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। बवासीर की समस्‍या होने पर आंवले के चूर्ण को सुबह-शाम honey के साथ पीने से फायदा होता है।

11 नीम

नीम के छिलके सहित निंबौरी के powder को प्रतिदिन 10 gram रोज सुबह रात में रखे water के साथ सेवन कीजिए, इससे बवासीर में फायदा होगा। इसके अलावा नीम का तेल मस्सों पर लगाने और इस तेल की 4-5 बूंद रोज पीने से बवासीर में लाभ होता है।

12 गुलाब की पंखुडियां 

बवासीर में blood की problem को दूर करने के लिए बहुत ही अच्‍छा आयुर्वेदिक उपचार है। इसके लिए थोड़ी सी गुलाब की पंखुडी को 50 मिलीलीटर water में कुचल कर तीन 3 दिन खाली पेट लेना चाहिए। लेकिन ध्‍यान रहें इस उपचार के साथ केले का सेवन न करें।

13 इसबगोल

इसबगोल की भूसी, गलत खान-पान से उपजी व्याधियों को दूर करने की एक ऐसी ही अचूक, प्राकृतिक और चमत्कारिक औषधि है। इसबगोल भूसी का प्रयोग करने से से अनियमित और कड़े मल से राहत मिलती है। इससे कुछ हद तक पेट भी साफ रहता है और मस्‍सा ज्‍यादा दर्द भी नही करता। रात को सोने से पहले एक या दो चम्‍मच इसकी भूसी को दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है।

Friday, May 1, 2015

कामकाजी Person और Emotional का संघर्ष



Tension का सीधा संबंध हमारी emotional से जुड़ा होता है और इसके कारण अधिकतर बाहरी होते है, इसलिए निजी जीवन की तरह कार्यस्थल पर भी tension के कई रूप और कारण हो सकते है। कार्यस्थल पर emotional गिरावट या ‘emotional मेल्टडाउन’ कई कारणों से सामने आता है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे ‘साइकोसिस’ के दायरे में भी रखते है। साइकोसिस’ यानी एक ऐसी स्थिति, जिसकी चपेट में आकर व्यक्ति अपने आसपास की सच्चाई को समझने में असमझ रहता है और उसके अनुसार काम नही कर पाता।

अक्सर हमने सिलेब्रिटीज से जुड़े ऐसे किस्से सुने है कि वह किसी सार्वजनिक स्थान पर दुसरो के साथ मारपीट या गालीगलौज करते नजर आये। ऐसे मामले अक्सर साइकोसिस की जद में आते है। वह यथार्थ से दूर, अपनी ही दुनिया में खोए रहते है और उनके दिमागी फितूर के हिसाब ही उनके हावभाव संचालित होते है।

सिलेब्रिटीज के मामले में अक्सर उनका असंतुलन सार्वजनिक तौर पर इसलिए भी देखने को मिलता है, क्योकि वह अक्सर बहिमुर्खी जीवन जीते है। जनता के सामने प्रदर्शन में उन्हें झिझक नही होती, परन्तु अन्य लोग अंदर ही संघर्ष करते है और उनकी समस्याओ का पता लम्बे समय के बाद पता चलता है।

दरअसल हरेक व्यक्ति तनाव का अल्ग-अल्ग तरह से सामना करता है, इसलिए किसी भी व्यक्ति के व्यवहार में tension के कारणों की पहचान कर पाना भी मुश्किल होता है। हालाकि लोग खुद अपने भीतर आ रहे परिवर्तनों को पहचानते है। मसलन, नीद न आना। परन्तु उन्हें इसका मतलब पता नही चलता, इसलिए वे अक्सर अपनी समस्याओ के उपचार के लिए खुद आगे नही आते। लिहाजा tension पर tension कि परते चढती जाती है और वे अपने ही अंदर धंसते जाते है। नतीजा अपने सहकर्मियों और परिवारजनों के प्रति उनके व्यवहार में स्नेह और सहयोग का भाव नही रहता। वे सामाजिकता से दूर अकेलेपन का शिकार हो जाते है।

किसी भी कामकाजी व्यक्ति के साथ ऐसे हालात अधिकांशत तब बनते है, जब वह अपने काम से जुडी बुरी खबर के लिए मानसिक तौर पर तैयार नही होता। इस श्रेणी में अधीनस्थ ही नही, manager भी आ सकते है। आमतौर पर एक manager से उम्मीद की जाती है कि वह अपने अधिनस्थो के प्रति जिम्मेदार व्यवहार आपनाये, लेकिन ऐसा कोई manager जो कम प्रतिभाशाली है, अपने किसी सहकर्मी की किसी बात से आहत भी हो सकता है। यह भी आवेगपूर्ण व्यवहार का एक बड़ा कारण हो सकता है। इसलिए professional coporate माहौल में विशेषज्ञों द्वारा अपनी भावनाओ पर काबू रख कर दूसरो की बात समझने पर जोर दिया जाता है। इसकी company और कर्मचारियों दोनों से उम्मीद की जाती है। तो कैसे पहचाने इन कारणों को और इनसे कैसे उबरे?


कुछ कारण, जिनसे पहचाने problem को

एकाग्रता की कमी 

प्रत्येक व्यक्ति के साथ ऐसा समय कभी न कभी जरुर आता है, जब उसे अपनी एकाग्रता में कमी दिखती है। यदि लगातार कुछ दिनों / सप्ताह तक ऐसा महसूस हो तो समझिये कि आपकी मानसिक क्षमता और हालत कुछ गडबडा रही है।

अव्यवस्थता

एक समय आपका व्यवस्थित लगने वाला desk यदि अब लगातार बेतरतीब नजर आता है तो यह भी एक संकेत हो सकता है Emotional गिरावट का। मनोवैज्ञानिक सत्य है कि किसी भी व्यक्ति की जीवनशैली उसके आचार- व्यवहार और रख-रखाव से स्पष्ट होती है।

दबाव

यु तो कामकाज में busy कोई healthy person भी tension का शिकार हो सकता है,परन्तु यदि आपका body अति का सन्देश दे रहा है तो चेत जाये। यह position तब होती है, जब उस व्यक्ति को महसूस हो कि उसके भीतर tension पूरा भर चुका है और वह फट पड़ने को है।

Negativity

यदि कोई person औपचारिक meetings में negetive विचार रखता दिखे तो समझ लेना चाहिए कि उसे help की जरूरत है। दरअसल औपचारिक बैठको में अपने विचारो को व्यक्त करने के प्रति हमेशा अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है। ऐसी मानसिक हालत वाले व्यक्ति अपने विचारो को छुपा नही पाते। 

हिंसा

कार्यस्थल पर भावनात्मक तौर पर अलग-थलग पड़ा व्यक्ति अपने मन में विपरीत परिस्थितियों के लिए हिंसात्मक फंतासिया भी बनाता है। इससे पहले कि उसकी कोई फंतासी सचमुच कार्यरूप ले, उसे मदद मिलनी चाहिए।

अकेलापन

यह सबसे जरूरी संकेतो में से है। तनावग्रस्त व्यक्ति धीरे धीरे पूरी तरह अकेलेपन की अवस्था में जा पहुचता है। यह विशेष तौर पर खतरनाक स्थिति होती है।

भोजन और नशा 

बिगडती मानसिक दशा में खान-पान के तरीके और वजन पर भी पड़ता है। खुराक में कमी या वृद्दि बताती है कि व्यक्ति अपने मनोभावों से जूझ रहा है। इसी तरह अपने अवसाद से लड़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग नशे का भी सहारा लेते है। नशा अवसाद को और बिगाड़ता है।

जान का खतरा

आत्महत्या का प्रयास बिगड़ी मानसिक दशा की पहचान होता है। अवसादग्रस्त व्यक्ति कई बार अपनी सुरक्षा को लेकर भी शंकित रहते है। ऐसे में भी वह खतरनाक कदम उठा लेते है।
 

कैसे उबरे आत्मसंघर्ष की स्थिति से

यदि किसी में emotional meltdown के शुरूआती या गहरे लक्षण दिख रहे है तो कुछ रचनात्मक तरीके व्यक्ति की मदद कर सकते है ये है...

लेखन

अपने bad और negative अनुभव के बारे में लिखने को self- help therapy के तौर पर देखा जाता है। शोध बताते है कि लेखन आपके इम्यून system और मूड में सुधार करता है। इससे रक्तचाप, दर्द और अन्य तकलीफों में आराम मिलता है। इसके लिए जरूरी है कि प्रतिदिन पंद्रह मिनट के लिए आपनी diary लिखने का अभ्यास करे। आपनी सभी दिक्कतों का खुलासा अपनी diary के पन्नो में करे। 

Break ले

कार्यस्थल पर emotional meltdown से उबरने के लिए पैदल चलना या ध्यान बहुत कारगर तरीके है। इनमे भी पैदल चलना विशेषतौर पर लाभदायक होता है, जिस दौरान विचारो को सहेजने में मदद मिलती है। ध्यान दे कि यह time positivity से भरपूर हो।

व्यायाम

अपने मूड को ठीक करने का एक बेहद कारगर तरीका है लगातार व्यायाम करना। तेज चलना या अपनी सुविधानुसार अन्य किसी किस्म का व्यायाम कारगर रहता है।केवल दस minute के व्यायाम से ही आपको बेहतर महसूस होने लगेगा।

Friend से बात

अपने किसी भरोसेमंद friend से बात कर सकते है। इससे आपको problem का नये सिरे से समझने का नजरिया मिलेगा या उसका कोई सिरा हाथ आएगा, जिसके आधार पर आप उसे सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ सकते है। याद रखे मित्र से बात केवल बातचीत तक ही सीमित रहनी चाहिए, उससे मदद की गुहार न लगाए। 

आत्म-विश्लेषण 

प्रतिदिन आधा घंटा एकांत में बिताये। problem क्यों है, इस बारे में खुद से सवाल करे। सवाल दोहराते रहे और एक समय बाद आप उसकी जड़ में जा पहुचेगे। किसी भरोसेमंद friend से भी इस बारे में बात कर सकते है। 

यह पांच उपाय आपको व्यवहार में कुछ लचीलापन अपनाने को प्रेरित करेगे, जो हमे सीमित दायरे से दूर एक व्यापक दृष्टिकोण देता है।