Tuesday, April 11, 2017

Current GK May 2017 Part-1


1 April

1-  1 April 1935 को स्थापित किये गये RBI (Indian reserve bank) का लोगो ‘ the east india company’ के दो मोहर के सोने के सिक्के से प्रेरित है।

2-  1 अप्रैल 1935 को kolkata में RBI की स्थापना हुई थी और सर ऑसबोर्न स्मिथ इसके प्ले governor थे।

3-  केन्या की जायालिन जेपकोसगी ने प्राग हाफ मैराथन में जीत करते हुए 4 विश्व record तोड़े।

2 April

1-  आज ही के दिन 2011 के वनडे विश्व कप final में श्रीलंका को हराकर 28 साल बाद भारत ने ख़िताब अपने नाम किया था।

2-  भारतीय शीर्ष शटलर पी.वी.सिन्धु ने ‘india open’ के खिलाफी मुकाबले में मौजूदा विश्व नंबर-3 स्पैनिश खिलाड़ी कैरोलिना मारिन को हरा दिया।

3-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उधमपुर (जम्मू-कश्मीर) में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर देश की सबसे लम्बी चेनानी-नाशरी राजमार्ग सुरंग (9.28km) का उद्धाटन किया।

4-  2 April, 1970 को मेघालय असम पुनगर्ठन (मेघालय) अधिनियम, 1969के तहत स्वायतशासी राज्य बना था।

3 April

1-  3 April, 1984 को वायु सेना के स्कवाड्रन leader राकेश शर्मा अन्तरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने थे।

2-  Indian ideal 9 का ख़िताब आंध्र प्रदेश के लोला वेंकट रेवंत कुमार शर्मा (27) ने जीत लिया है। पूर्व cricketer सचिन तेंदुलकर ने उन्हें ट्राफी देकर सम्मानित किया।

3-  स्विटजरलैंड के रॉजर नडाल को 6-3, 6-4 से हराकर तीसरी बार मियामी ओपन का ख़िताब जीत लिया।

4-  मशहूर शास्त्रीय गायिका किशोरी अमोनकर (84) का मुंबई में निधन हो गया।

5-  भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को एक दिन के लिए तेल company ‘गल्फ आयल इंडियाका CEO बनाया गया।

4 April

1-  पी.पी.पांडे का इस्तीफा राज्य सरकार द्वारा स्वीकार करने के बाद 1982 बैच की IPS गीता जौहरी को राज्य के पुलिस प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

2-  4 April 1889 में मध्य प्रदेश का बाबई कस्बे में पत्रकार और कवि माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म हुआ था।

5 April

1-  IPL की मुंबई ‘Mumbai Indians’ टीम के पेसर लसिथ मलिंगा इस tournament में कुल 98 पारियों में 143 विकेट के साथ सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी है।

2-  cricket की बाइबल मानी जाने वाली magazine ‘विज़डनने भारतीय cricket team के कप्तान विराट कोहली को वर्ष 2016 के तौर पर सम्मानित किया है।

3-  world wide web के अविष्कारक टिम बर्नर्स-ली को 2016 का टयुरिंग अवार्ड दिया गया है, जिसे computering क्षेत्र का सबसे बड़ा अवार्ड माना जाता है।

6 April

1-  ओलम्पिक रजत विजेता पी.वी.सिंधु बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशनकी ताजा रैंकिंग में तीन स्थान के उछाल के साथ नंबर 2 पर पहुंच गई है।

2-  मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI  ने रेपो रेट को 6.25% पर बरकरार रखा जबकि reverse रेपो रेट को 5.75 से बढ़ाकर 6% कर दिया।

3-  6 April, 1896 को एथेंस (ग्रीस) में पहले आधुनिक ओलम्पिक खेलों का आयोजन हुआ था। इन खेलों में 14 देशों के 241 खिलाडियों ने 43 विविध प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था।

4-  6 April, 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने थे।

5-  IT उधोग के संगठन नैस्काम में क्वात्रो के CMD रमन राय को वित्त वर्ष 2017-18 के लिए चेयरमैन नियुक्त किया है।

6-  श्रीलंकाई तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा ने अंतर्राष्ट्रीय cricket में सबसे ज्यादा 4 हैट्रिक लेने के विश्व record की बराबरी कर ली।

7 April

1-  64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सोनम कपूर अभिनीत फिल्म नीरजाको सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म और अक्षय कुमार को रुस्तमके लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवार्ड मिला।

2-  स्वास्थ्य समस्याओं पर दुनिया भर के देशों के आपसी सहयोग के लिए 7 April, 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ की स्थापना हुई थी।

3-  अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की बतौर निर्माता पहली मराठी फिल्म वेंटिलेटरको तीन national film award दिए गये है। एस फिल्म के निदेशक राजेश मपुस्कर को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, रामेश्वर भगत को सर्वश्रेष्ठ एडिटिंग और आलोक डे को बेस्ट साउंड मिक्सिंग का award मिला है।

4-  गुजरात लायंस के कप्तान सुरेश रैना IPL में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गये।

5-  मुज्जफरनगर (उत्तर प्रदेश) की एक पारिवारिक अदालत ने एक मुख्य जज तेज बहादुर सिंह ने 327 कार्यदिवसों में 6,065 मामले निपटाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा लिया है।

8 April

1-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने संयुक्त रूप से video confessing के जरिये खुलना (बांग्लादेश)- kolkata मैत्री एक्सप्रेस-2 ट्रेन को kolkata से हरी झंडी दिखाकर खाना किया।

2-  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई को UN शांतिदूत चुना है।

3-  8 April, 1950 को भारत-पाकिस्तान के बीच नेहरु-लियाकत (दिल्ली-समझौता) हुआ था जिसका उद्देश्य दोनों देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित करना और भविष्य में युद्ध की संभावनाओं को खत्म करना था।

4-  8 April, 1929 को क्रांतिकारी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश विधेयकों का विरोध करने के लिए तत्कालीन असेम्बली (वर्तमान संसद भवन) में बम फेंका था।

5-  8 April, 1857 को अंग्रेजों ने क्रांतिकारी मंगल पांडे को फांसी पर चढ़ा दिया था।

6-  मुक्केबाज श्याम कुमार ने बैंकाक में Thailand international tournament में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत लिया।

7-  IAS अधिकारी अवनीश अवस्थी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है।

8-  engineering and construction समूह L&T (लार्सन and टुब्रो) ने एस. सुब्रमणयन को नया CEO नियुक्त किया है।

9 April

1-  9 April, 1965 को भारत-पाकिस्तान के बीच गुजरात के कच्छ के रण में युद्ध शुरू हुआ था।

2-  9 April, 1893 को आजमगढ़ जिले (उत्तर प्रदेश) में हिंदी के प्रसिद्द साहित्यकार और घुमक्कड़ीसाहित्य लिखने वाले राहुल सांकृत्यायन का जन्म हुआ था।

3-  गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अभिनेता अक्षय कुमार के साथ भारत के वीर’ website और mobile apps का उद्धाटन किया। इसके जरिये कोई भी शहीदों के परिजनों को आर्थिक मदद पहुंचा सकता है।

4-  भारत ने महिला हॉकी विश्व लीगमें round-2 के final मुकाबले में चिली को पेनल्टी shootout में हरा दिया।

10 April

1-  रियो ओलम्पिक में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली पहलवान साक्षी मलिक महिलाओं की 58 किलो free-style वर्ग की विश्व ranking में 5वें स्थान पर पहुंच गई है।

2-  Scotland के भौतिकशास्त्री और गणितज्ञ सर जॉन लेस्ली ने पहली बार 1810 में कृत्रिम बर्फ बनाई थी।

3-  सत्यार्थ प्रकाश, संस्कारविधि और यजुर्वेद भाष्यम समेत कई ग्रंथो की रचना करने वाले स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 10 April, 1875 को आर्य समाज की स्थापना की थी। 






Monday, April 10, 2017

General Science सामान्य विज्ञान-2


1-  Protein

1-  प्रोटीन एक जटिल nitrogen युक्त organic पदार्थ है जिसका गठन carbon, hydrogen, oxygen एवं nitrogen तत्वों के अणुओं से मिलकर होता है। कुछ protein में इन elements के अतिरिक्त आंशिक रूप से गंधक, जस्ता, तॉबा तथा phosphors भी उपस्थित होता है।

2-  रासायनिक गठन के अनुसार प्रोटीन को सरल protein, संयुक्त protein तथा व्युत्पन्न protein नामक तीन श्रेणियों में बांटा गया है। सरल protein का गठन केवल amino acid द्वारा होता है एवं संयुक्त protein के गठन में amino acid के साथ कुछ अन्य पदार्थो के अणु भी संयुक्त रहते है। व्युत्पन्न protein वे protein है जो जो सरल या संयुक्त protein के विघटन से प्राप्त होते है। amino acid के polymerisation से बनने वाले इस पदार्थ की अणु मात्रा 10000 से अधिक होती है।

3-  protein skin, blood, मांसपेशियों तथा bones की cells के विकास के लिए आवश्यक होते है। जंतुओं के body के लिए कुछ आवश्यक होते है। जंतुओं के body के लिए आवश्यक protein enzymes, hormones, ढोने वाला protein, सिकुड़ने वाला protein, संरचनात्मक protein एवं सुरक्षात्मक protein है।

4-  protein का मुख्य कार्य body की आधारभूत संरचना की स्थापना एवं enzymes के रूप में body की जैवरासायनिक क्रियाओं का संचालन करना है। आवश्यकतानुसार इससे energy भी मिलती है। एक ग्राम protein के प्रजारण से body को 4.1 calorie ऊष्मा प्राप्त होती है। protein द्वारा ही प्रतिजैविक (antibody) का निर्माण होता है जिससे body प्रतिरक्षा होती है।

Vitamin

1-  vitamin या जीवन सत्व भोजन के अवयव हैं जिनकी सभी जीवों को अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है। रासायनिक रूप से ये कार्बनिक यौगिक होते है। उस यौगिक को vitamin कहा जाता है जो body द्वारा पर्याप्त मात्रा में स्वयं उत्पन्न नही किया जा सकता बल्कि भोजन के रूप में लेना आवश्यक हो। आहार में vitamin का रहना पोषण के लिए आवश्यक है।

2-  विभिन्न vitamins की कमी से उत्पन्न विकृतियाँ

vitamin A- कैरोटिन (carotin)- रतौधी, आँख की सफेदी पर झुर्री (xerophthelmia)

3-  B1- थियामिन या आन्युरिन – बेरीबेरी(Beri-beri)

4-  B2- रिबोफ्लेविन (Riboflavin)- आँखे लाल रहना, होंठ पर झुर्री, मुंह आना, जीभ फूल जाना, चमड़े की विकृति

5-  B- पेलाग्रा- रक्षक (Pellagra preventing)- पेलाग्रा होना (विशेष चर्म-रोग)

6-  B6- पाइरिडोक्सिन (pyridoxin)- वमन- मस्तिष्क रोग तथा दस्त आना।

7-  B12- स्यानोकोबैले ऐमाइन (Cyanocobalamin)- विशेष रक्त हीनता और संग्रहणी

8-  C- एसकौर्बिक अम्ल- स्कर्वी (scurvy)

9-  D- कैल्सिफेरोल (Calciferol)- सुखंडी, रिकेट (rickets)

10-E- टोकोफेरोल (Tocopherol)- पुरुषत्व और स्त्रीत्व में कमी

11-P- रूटीन (rutin)- कोशिकाओं से रक्तपात

12-K- ऐन्फेंटामिन (Amphentamin)- रक्त में जमने की शक्ति की ह्रास

13-फोलिक एसिड (Folic acid)- विशेष रक्तहीनता

खनिज तत्व (Mineral)

1-  नमक: sodium chloride भोजन में रूचि बढ़ाता है और body के जल और लवण के संतुलन देता है। इसके अभाव में दुर्बलता और थकावट मालूम होती है। अधिक नमक से शोथ होता है। औसत प्रतिदिन 8-10 ग्राम खाया जाता है। यह नमक खाने, दूध और vegetables से प्राप्त होता है।

2-  Calcium: पोषण के लिए 0.9 से 1 ग्राम तक calcium की आवश्यकता प्रतिदिन पड़ती है। यह मात्रा ढ़ाई पाव दूध से प्राप्त हो सकती है। सब्जी, अनाज और आमिषाहार में भी यह भिन्न भिन्न मात्राओं में पाया जाता है। बढ़नेवाले बच्चे, गर्भवती और दूध पिलानेवाली स्त्रियों के लिए इसकी मात्रा प्रतिदिन लगभग 1.5 ग्राम होना जरूरी है। इसके अभाव में bones ठीक से नही बनतीं और सुखंडी रोग हो जाता है। गर्भवती और दूध पिलानेवाली स्त्री के आहार में calcium की कमी से उसकी bone से calcium निकलकर bones कोमल होकर ओस्टेमेलेशिया (ostomalecia) का रोग हो सकता है।

3-  phosphors: पोषण के हेतु इसकी मात्रा कम लगती है। किलोग्राम भारवाले व्यक्ति के लिए 0.88 ग्राम phosphors पर्याप्त 3,000 calorie के आहार से इसकी कमी का कोई भय नही।

4-  Iron: पोषण के लिए प्रति दिन 12 ml लोहे की आवश्यकता है। इसकी मात्रा गर्भावस्था तथा milk देने की अवस्था में बढ़ जाती है। इसकी कमी से एक प्रकार की रक्तहीनता (anaemia) होती है।

5-  आयोडीन: नाम मात्र से पोषण के लिए उपयुक्त है। यह थाईरायड के hormone है। यह thyroid के बहुत जरूरी है। इस hormones की कमी से बौनापन (cretinism) और myxidoema है। यदि पीने के पानी में इसकी मात्रा कम हुई तब विकृत घेघे के रूप में प्रकट होता है।

जल (Water)

1-  जल या पानी एक रासायनिक पदार्थ है जिसका अणु (H2O), दो hydrogen और एक oxygen परमाणु से बना है।

2-  जीवित कोशिका का 70 से 90 पानी है।

3-  जल मानव body का एक जरूरी वाहक है, जो आवश्यक पोषक तत्वों को विभिन्न कोशिकाओं तक पहुंचाता है।

4-  जल मानव body के तापमान को control करता है।

5-  पानी मानव body में जैव रासायनिक प्रक्रिया में भाग लेता है।

6-  जल body के अपशिष्ट पदार्थो को मूत्र एवं पसीने के रूप में बाहर निकलता है।

7-  जल आमतौर पर द्रव अवस्था में पाया जाता है पर यह ठोस अवस्था (बर्फ) और गैसीय अवस्था (भाप या जल वाष्प) में भी पाया जाता है।

8-  पृथ्वी का लगभग 71% सतह को जल से आच्छित है जो अधिकतर महासागरों और अन्य बड़े जल निकायों का हिस्सा होता है इसके अतिरिक्त, 1.6% भूमिगत जल ऐक्वीफर और 0.001% जल वाष्प और बादल (इनका गठन हवा में जल के निलंबित ठोस और द्रव कणों से होता है) के रूप में पाया जाता है। खारे जल के महासागरों में पृथ्वी का कुल 97%, हिमनदों और ध्रुवीय बर्फ चोटियों में 2.4% और अन्य स्रोतों जैसे नदियों, झीलों और तालाबों में 0.6% जल पाया जाता है।

9-  जल लगातार एक चक्र में घूमता रहता है जिसे जलचक्र कहते है, इसमे वाष्पीकरण या ट्रांस्पिरेशन, वर्षा और बह कर सागर में पहुंचना शामिल है।

सूक्ष्मजीव (Microorganism)

1-  सूक्ष्मजीव जीव है जिन्हें मनुष्य नंगी आँखों से नही देख सकता तथा जिन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र की आवश्यकता पड़ता है, उन्हें सूक्ष्मजीव कहते है। सुक्ष्मजैविकी (microbiology) में सूक्ष्मजीवों का study किया जाता है।

2-  सूक्ष्मजीव सर्वव्यापी होते है। यह मृदा, जल, वायु, हमारे body के अंदर तथा अन्य प्रकार के प्राणियों तथा पादपों में पाए जाते है। जहां किसी प्रकार जीवन संभव नही है जैसे तापीय चिमनी, मृदा में गहराई तक, बर्फ की पर्तो के कई मीटर नीचे तथा उच्च अम्लीय पर्यावरण जैसे स्थानों पर भी पाए जाते है।

3-  जीवाणु एक कोशिकीय जीव है। इसका आकार कुछ मिलीमीटर तक ही होता है। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़, आदि आकार की हो सकती है। ये प्रोकैरियोटिक, कोशिका भितियुक्त, एककोशिकीय सरल जीव हैं, जो प्राय: सर्वत्र पाए जाते है।

4-  विषाणु अकोशकीय अतिसूक्ष्म जीव है जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते है। ये नाभिकीय अम्ल और protein से मिलकर गठित होते है, body के बाहर तो ये मृत-समान होते है परन्तु body के अंदर जीवित हो जाते है। एक विषाणु बिना किसी सजीव माध्यम के पुनरुत्पादन नही कर सकता है।

5-  फंफूद या कवक एक प्रकार के पौधे है जो अपना भोजन सड़े गले मृत कार्बनिक पदार्थो से प्राप्त करते है। ये संसार के प्रारम्भ से ही जगत में उपस्थित है। इनका सबसे बड़ा लाभ इनका संसार में अपमार्जक के रूप में कार्य करना है।

6-  शैवाल (algae) सरल जीव है। अधिकांश शैवाल पौधों के समान सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते है अर्थात स्वपोषी होते है। ये एक कोशिकीय से लेकर बहु-कोशिकीय अनेक रूपों में हो सकते है। ये नम भूमि, अलवणीय जल, वृक्षों की छाल, नम दीवारों पर हरी, भूरी या कुछ काली परतों के रूप में मिलते है।

7-  लाइकेन (Lichen) निम्न श्रेणी की छोटी वनस्पतियों का एक समूह है, जो विभिन्न प्रकार के आधारों पर उगे हुए पाए जाते है। इन आधारों में वृक्षों की पत्तियों एवं छाल, प्राचीन दीवारें, भूतल, चट्टान और शिलाएं मुख्य है। इनकी वृद्धि की गति मंद होती है एवं इनके आकार और बनावट में भी पर्याप्त भिन्नता रहती है।









Saturday, April 8, 2017

अहं की पहचान और शांति

ego and peace


हम जिसे अहं का नाम देते है, वह दरअसल जब पहचान में आ जाता है, तो फिर वह उसी रूप में नही रह जाता। दरअसल, अगर आपके अंदर अहं active है तो आपको इसका पता तक नही चलेगा। बस तभी तक इसे अहं कहा जायेगा। जिनमें अहं बहुत ज्यादा होता है, वे उसके बारे में रूचि भी नही रखते है। उन्हें अहं का गुमान तक नही होता।

अहं या पुरानी प्रवृति

मजा तब आता है, जब आप इसे पहचान लेते है। काबू में भी यह तब ही आता है। उस वक्त के बाद से यह अहं नही रहता, बल्कि कोई पुरानी और अब तक सक्रिय आदत या विचारधारा जैसा कुछ रह जाता है। इसे आसानी से यूँ समझिये। मान लीजिये कि आपकी बड़े-बड़े नाम लेने की आदत है। ऐसे में आप अपने बगल वाले पर प्रभाव जमाने के लिए यह कह सकते है कि मुझे दलाई लामा को phone करना है, वे मेरे phone का इंतजार कर रहे होंगे। लेकिन, जब आप यह कह रहे होगें तो एक तरफ आप यह अनुभव कर रहे होंगे कि यह झूठ ही है। उस पल में आप अपने अहं को पहचान रहे होते है, जो चाहता है आप की भी प्रतिष्ठा बने और आप एक शख्सीयत की तरह पहचान जाएँ। चुकिं उस पल में आपने अपने अहं को उसके घटित होते समय ही पहचान लिया था, इसलिए यह अहं नही रह गया था।

अब करिश्मा ये होता है कि अगली बार के लिए आप इस पर निगाह रख सकते है। और फिर जब दोबारा कोई बड़ा नाम बताने की इच्छा होगी तो आप उसे पहले ही पहचान लेंगे। चूँकि आप इस उत्कंठा को समझ चुके है तो एक लम्बी सांस लेकर इसके शांत हो जाने का इंतजार करेंगे।

आप मुक्त हो सकते है

जिस वक्त में आप इस उत्कंठा को पहचान लेते है, मुक्ति का एक तत्व आपमें पहुंच जाता है। फायदा यह होता है कि विचारों का यह pattern तो अभी भी active रहता है, लेकिन आप उसके दास नही रहते।

ना दुश्मनी, ना दोस्ती

अहं को दुश्मन भी ना मानिए। जब आप इसे अपना दुश्मन मान बैठेंगे तो इसकी negativity दोगनी हो जाती है। दूसरी गलती यह सोच है कि आप इससे जीत सकते है। पर जैसे ही आप इससे लड़ाई लड़ने लगते है, आप इसी का हिस्सा हो जाते है।

काबू करें करुणा से

करुणा आपके अंदर एक लचीलापन जगाती है। खुद को, सच्चाई को accept करने की एक स्वाभाविक प्रवृति। इसलिए, जब अहं दर्शन आप वर्तमान में कर रहे हो तो आप खुद से मन ही मन कह सकते है, ‘देखो तो, मैं फिर से वही कर रहा हूँ। कितनी मजेदार बात है।‘ हंसकर मुक्त हो जाना भी एक तरीका है। जब आप अपनी प्रवृतियों पर हंसने लगते है तो फिर दोबारा उनके उभरने से पहले ही उन्हें पकड़ लेने में सक्षम हो जाते है। जैसे किसी विषय पर मत देने की तीव्र उत्कंठा आये तो अहं से खुद को अलग कर चुका व्यक्ति सोचेगा, ‘क्या मुझे बात कहनी चाहिए या मैं इसे टाल सकता हूँ? देखते है कि अगर नही बोलता हूँ तो क्या होता हैं?’

दबाएँ नही, अपनी इच्छा से छोड़ने का व्यवहार अपनाएं। खुद को कहें, ‘जाने दो यार, मुझे यहाँ अपना जताने की जरूरत नही है।‘ इस इच्छा को स्वेच्छा से त्याग दें, फिर देखें कि अंतर्मन में क्या उठता है? सबसे पहले लगेगा कि आप छोटे साबित हो गये। लेकिन जैसे-जैसे आप इस सोच को बनाये रखते है, अपने मन में गहरे कुछ विश्वास पनपने लगते है। अहं आपकी धरती के उपर चट्टानी पहाड़ जैसा खड़ा देखना चाहता है। वह महसूस करवाना चाहता है कि आप भी कुछ है। वह महसूस करवाना चाहता है कि आप भी कुछ है। वह कभी भी पहाड़ के नीचे घाटी की हरियाली, खुशहाली को वरीयता नही देता।

मानवता के पुराने ग्रंथो में भी सच्ची शक्ति को ग्रहण करने की बात की जाती है। सच्ची शक्ति आकारों में नही, बल्कि आकारहीन तथ्यों और तत्वों में होती है, वह हमारे प्रायोजन में होती है, उद्देश्य में होती है, जिसे मैं कभी-कभी हमारे अस्तित्व का सार भी कहता हूँ।

तो, जब आप अपने अहं से मुक्त होने का तरीका जान जाते है, तब आपमें खुद को जताने के लिए कुछ कहने की उत्कंठा पैदा नही होती। जरूरत होती है तो कहते हैं, अन्यथा चुप रहते है। यही सच्ची शांति है, हाँ, जब तक इस अवस्था को पा नही लेते, अपने अंदर active अहं के व्यवहारों के प्रति करुणा बरतें। खुद को इसके लिए बुरा ना कहें। बस उसे पहचानकर उसका दास होना बंद कर दें। आप शांति महसूस करेंगे।




                                      www.eckharttole.com



            
# इस article के writer ‘एकहार्ट टोल’ जो जर्मनी मूल के कनाडाई निवासी और लेखक है। उनकी गिनती आध्यात्मिक प्रभाव रखने वाले प्रभावी वक्ताओं में होती है। ‘The Power of now’ उनकी प्रसिद्द किताब है।








  

Monday, April 3, 2017

आगे बढ़ना ही जीवन धर्म

Life religion

जो जगत हमें सामने दिख रहा है, वह गतिशील है। उसमें परिवर्तन होता रहता है। जीवन धर्म का निर्वाह करने के लिए मनुष्य को चलना ही पड़ेगा। जो लोग पुराने समय में ही खोये रहना चाहते है, वे जीवन धर्म के विरोधी है। धर्म कहता है कि प्रगतिशील बन कर ही मनुष्यता का कल्याण किया जा सकता है।

व्याप्त जगत में परमात्मा गतिशील है। सब चलायमान है। तुम्हारा जो मन है, वह भी चलायमान है। लोग कहते है कि मन को स्थिर बनाओ। यह कहना त्रुटिपूर्ण है। कहना होगा कि मन को एक विशेष दिशा में चलाओ। मन अगर स्थिर हो गया तो मन की मृत्यु हो गई। जहाँ गतिहीनता है, वहीं मृत्यु है, इसलिए गति जीवन का धर्म है। अस्तित्व रहने से देश-काल पात्र है। इनका स्वभाव है परिवर्तित होना। देश-काल पात्र के भीतर जो रहेंगे, उनको चलना पड़ेगा। जीवनधर्म के लिए चलना कर्तव्य है।

कई हजार साल से मानव समाज चलते-चलते जहां तक पहुंचा था, आज उससे बहुत आगे बढ़ा है, क्योंकि चलना उसका धर्म है। अगर किसी में प्राचीनता का मोह हो और उस मोह के कारण वह बोले कि कई हजार साल पहले जो समाज था, जो पुरानी समाज व्यस्था थी, वह अच्छी थी तो उसका मतलब यही हुआ कि वह अधोगति का समर्थक है। उसकी गति पीछे की ओर है। यह गतिशीलता नही है। यह मानव धर्म नही कहा जा सकता।

जो लोग गंगासागर को, गंगा को गंगोत्री की तरफ ले जाने की कोशिश करें, वे अधोगति के समर्थक है। वे मानव समाज का कल्याण नही चाहते है। वे समाज की प्रगति नही चाहते है। तो गति है जीवन का धर्म और गति के जो विरोधी है, वे है मृत्यु के समर्थक। रुको मत, आगे बढ़ो- यही है जीवनधर्म, यही है जीवन का नारा।

अब, देखा जाए कि प्रगति क्या है? क्या एक ही विशेष गति अनादि काल से अनंत काल तक रहेगी या इसमें प्रगति होना संभव है? यह भी देखना है कि कैसे प्रगति हो सकती है? यह प्रगति कहाँ होगी? सृष्टिधारा में प्रथम सृष्टि की उत्पत्ति मन में होती है,- ‘मैं’ कुछ बनाऊंगा।

एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में बैठ कर यह ध्यान कर रहा है कि मैं एस रोग की दवा बनाऊंगा। तो दवा बनाने के पहले दवा मन में बन गई। सृष्टि की प्रथम उत्पत्ति मन में हुई। और मन का यह जो बीज है, बनाने की यह जो चाह है, यह जब अधिक शक्तिशाली हो जाती है, तब इसके चरित्र का ढांचा पदार्थ के रूप में, जड़ में रूपांतरित हो जाता है। मन की धातु जड़ पंचभूत में रूपांतरित हो जाता है। मन की धातु जड़ पंचभूत में रूपांतरित हो गई। यह जो चाह है, एषणा है, वह एषणा ही सृष्टि का बीज है। पहले सृष्टि की चाह, उसके बाद सृष्टि। अर्थात जीवन यात्रा में कुछ आगे बढ़ना है तो पहले मन की धरती पर कुछ नया तैयार करना होगा।

लेकिन मन में तो एक दीवार है। तुम आसानी से मन वाली दीवार को तोड़ सकते हो। भौतिक दीवार को तोड़ने के लिए अधिक मेहनत की जरूरत होती है। अब देखो, भक्ति क्या है? ‘भज्’ धातु में क्तिन् प्रत्यय के योग से ‘भक्ति’ शब्द बनता है अर्थात भक्ति में भजनात्मक भाव है। ‘भजन’ शब्द क्या है?

‘परमात्मा’ मेरी परागति है और उसकी ओर मुझे चलना है’ यह भावना जब मन में बैठ जाती है और उस भावना से प्रेरित होकर मनुष्य जब उसकी ओर चलता है तो यही होता है ‘भजन’। जहां बाह्य अभिव्यक्ति है उसको ‘भजन’ कहते है और जहां आंतरिक अभिव्यक्ति है उसको ‘भक्ति’ कहते है।


एक ही चीज या भावना, जब बाहर व्यक्त होती है और लोग भी उसे समझ रहे है, तब उसका नाम है भजन। और जब वह आंतरिक है, भीतर की ओर, अंदर की ओर चल रही है, तब वह है भक्ति। अर्थात दोनों एक ही चीज है। एक ही चीज के दो रूप है। तुम साधक हो। तुम भक्ति को जगा लो। तुम शक्तिशाली बनों। अपने आगे बढ़ो। दुनिया को सुख दो, शांति दो, समृद्धि दो। दुनिया तुम्हारी कीमत समझे। तुम लोगो की जय हो।