Saturday, April 8, 2017

अहं की पहचान और शांति

ego and peace


हम जिसे अहं का नाम देते है, वह दरअसल जब पहचान में आ जाता है, तो फिर वह उसी रूप में नही रह जाता। दरअसल, अगर आपके अंदर अहं active है तो आपको इसका पता तक नही चलेगा। बस तभी तक इसे अहं कहा जायेगा। जिनमें अहं बहुत ज्यादा होता है, वे उसके बारे में रूचि भी नही रखते है। उन्हें अहं का गुमान तक नही होता।

अहं या पुरानी प्रवृति

मजा तब आता है, जब आप इसे पहचान लेते है। काबू में भी यह तब ही आता है। उस वक्त के बाद से यह अहं नही रहता, बल्कि कोई पुरानी और अब तक सक्रिय आदत या विचारधारा जैसा कुछ रह जाता है। इसे आसानी से यूँ समझिये। मान लीजिये कि आपकी बड़े-बड़े नाम लेने की आदत है। ऐसे में आप अपने बगल वाले पर प्रभाव जमाने के लिए यह कह सकते है कि मुझे दलाई लामा को phone करना है, वे मेरे phone का इंतजार कर रहे होंगे। लेकिन, जब आप यह कह रहे होगें तो एक तरफ आप यह अनुभव कर रहे होंगे कि यह झूठ ही है। उस पल में आप अपने अहं को पहचान रहे होते है, जो चाहता है आप की भी प्रतिष्ठा बने और आप एक शख्सीयत की तरह पहचान जाएँ। चुकिं उस पल में आपने अपने अहं को उसके घटित होते समय ही पहचान लिया था, इसलिए यह अहं नही रह गया था।

अब करिश्मा ये होता है कि अगली बार के लिए आप इस पर निगाह रख सकते है। और फिर जब दोबारा कोई बड़ा नाम बताने की इच्छा होगी तो आप उसे पहले ही पहचान लेंगे। चूँकि आप इस उत्कंठा को समझ चुके है तो एक लम्बी सांस लेकर इसके शांत हो जाने का इंतजार करेंगे।

आप मुक्त हो सकते है

जिस वक्त में आप इस उत्कंठा को पहचान लेते है, मुक्ति का एक तत्व आपमें पहुंच जाता है। फायदा यह होता है कि विचारों का यह pattern तो अभी भी active रहता है, लेकिन आप उसके दास नही रहते।

ना दुश्मनी, ना दोस्ती

अहं को दुश्मन भी ना मानिए। जब आप इसे अपना दुश्मन मान बैठेंगे तो इसकी negativity दोगनी हो जाती है। दूसरी गलती यह सोच है कि आप इससे जीत सकते है। पर जैसे ही आप इससे लड़ाई लड़ने लगते है, आप इसी का हिस्सा हो जाते है।

काबू करें करुणा से

करुणा आपके अंदर एक लचीलापन जगाती है। खुद को, सच्चाई को accept करने की एक स्वाभाविक प्रवृति। इसलिए, जब अहं दर्शन आप वर्तमान में कर रहे हो तो आप खुद से मन ही मन कह सकते है, ‘देखो तो, मैं फिर से वही कर रहा हूँ। कितनी मजेदार बात है।‘ हंसकर मुक्त हो जाना भी एक तरीका है। जब आप अपनी प्रवृतियों पर हंसने लगते है तो फिर दोबारा उनके उभरने से पहले ही उन्हें पकड़ लेने में सक्षम हो जाते है। जैसे किसी विषय पर मत देने की तीव्र उत्कंठा आये तो अहं से खुद को अलग कर चुका व्यक्ति सोचेगा, ‘क्या मुझे बात कहनी चाहिए या मैं इसे टाल सकता हूँ? देखते है कि अगर नही बोलता हूँ तो क्या होता हैं?’

दबाएँ नही, अपनी इच्छा से छोड़ने का व्यवहार अपनाएं। खुद को कहें, ‘जाने दो यार, मुझे यहाँ अपना जताने की जरूरत नही है।‘ इस इच्छा को स्वेच्छा से त्याग दें, फिर देखें कि अंतर्मन में क्या उठता है? सबसे पहले लगेगा कि आप छोटे साबित हो गये। लेकिन जैसे-जैसे आप इस सोच को बनाये रखते है, अपने मन में गहरे कुछ विश्वास पनपने लगते है। अहं आपकी धरती के उपर चट्टानी पहाड़ जैसा खड़ा देखना चाहता है। वह महसूस करवाना चाहता है कि आप भी कुछ है। वह महसूस करवाना चाहता है कि आप भी कुछ है। वह कभी भी पहाड़ के नीचे घाटी की हरियाली, खुशहाली को वरीयता नही देता।

मानवता के पुराने ग्रंथो में भी सच्ची शक्ति को ग्रहण करने की बात की जाती है। सच्ची शक्ति आकारों में नही, बल्कि आकारहीन तथ्यों और तत्वों में होती है, वह हमारे प्रायोजन में होती है, उद्देश्य में होती है, जिसे मैं कभी-कभी हमारे अस्तित्व का सार भी कहता हूँ।

तो, जब आप अपने अहं से मुक्त होने का तरीका जान जाते है, तब आपमें खुद को जताने के लिए कुछ कहने की उत्कंठा पैदा नही होती। जरूरत होती है तो कहते हैं, अन्यथा चुप रहते है। यही सच्ची शांति है, हाँ, जब तक इस अवस्था को पा नही लेते, अपने अंदर active अहं के व्यवहारों के प्रति करुणा बरतें। खुद को इसके लिए बुरा ना कहें। बस उसे पहचानकर उसका दास होना बंद कर दें। आप शांति महसूस करेंगे।




                                      www.eckharttole.com



            
# इस article के writer ‘एकहार्ट टोल’ जो जर्मनी मूल के कनाडाई निवासी और लेखक है। उनकी गिनती आध्यात्मिक प्रभाव रखने वाले प्रभावी वक्ताओं में होती है। ‘The Power of now’ उनकी प्रसिद्द किताब है।








  

Monday, April 3, 2017

आगे बढ़ना ही जीवन धर्म

Life religion

जो जगत हमें सामने दिख रहा है, वह गतिशील है। उसमें परिवर्तन होता रहता है। जीवन धर्म का निर्वाह करने के लिए मनुष्य को चलना ही पड़ेगा। जो लोग पुराने समय में ही खोये रहना चाहते है, वे जीवन धर्म के विरोधी है। धर्म कहता है कि प्रगतिशील बन कर ही मनुष्यता का कल्याण किया जा सकता है।

व्याप्त जगत में परमात्मा गतिशील है। सब चलायमान है। तुम्हारा जो मन है, वह भी चलायमान है। लोग कहते है कि मन को स्थिर बनाओ। यह कहना त्रुटिपूर्ण है। कहना होगा कि मन को एक विशेष दिशा में चलाओ। मन अगर स्थिर हो गया तो मन की मृत्यु हो गई। जहाँ गतिहीनता है, वहीं मृत्यु है, इसलिए गति जीवन का धर्म है। अस्तित्व रहने से देश-काल पात्र है। इनका स्वभाव है परिवर्तित होना। देश-काल पात्र के भीतर जो रहेंगे, उनको चलना पड़ेगा। जीवनधर्म के लिए चलना कर्तव्य है।

कई हजार साल से मानव समाज चलते-चलते जहां तक पहुंचा था, आज उससे बहुत आगे बढ़ा है, क्योंकि चलना उसका धर्म है। अगर किसी में प्राचीनता का मोह हो और उस मोह के कारण वह बोले कि कई हजार साल पहले जो समाज था, जो पुरानी समाज व्यस्था थी, वह अच्छी थी तो उसका मतलब यही हुआ कि वह अधोगति का समर्थक है। उसकी गति पीछे की ओर है। यह गतिशीलता नही है। यह मानव धर्म नही कहा जा सकता।

जो लोग गंगासागर को, गंगा को गंगोत्री की तरफ ले जाने की कोशिश करें, वे अधोगति के समर्थक है। वे मानव समाज का कल्याण नही चाहते है। वे समाज की प्रगति नही चाहते है। तो गति है जीवन का धर्म और गति के जो विरोधी है, वे है मृत्यु के समर्थक। रुको मत, आगे बढ़ो- यही है जीवनधर्म, यही है जीवन का नारा।

अब, देखा जाए कि प्रगति क्या है? क्या एक ही विशेष गति अनादि काल से अनंत काल तक रहेगी या इसमें प्रगति होना संभव है? यह भी देखना है कि कैसे प्रगति हो सकती है? यह प्रगति कहाँ होगी? सृष्टिधारा में प्रथम सृष्टि की उत्पत्ति मन में होती है,- ‘मैं’ कुछ बनाऊंगा।

एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में बैठ कर यह ध्यान कर रहा है कि मैं एस रोग की दवा बनाऊंगा। तो दवा बनाने के पहले दवा मन में बन गई। सृष्टि की प्रथम उत्पत्ति मन में हुई। और मन का यह जो बीज है, बनाने की यह जो चाह है, यह जब अधिक शक्तिशाली हो जाती है, तब इसके चरित्र का ढांचा पदार्थ के रूप में, जड़ में रूपांतरित हो जाता है। मन की धातु जड़ पंचभूत में रूपांतरित हो जाता है। मन की धातु जड़ पंचभूत में रूपांतरित हो गई। यह जो चाह है, एषणा है, वह एषणा ही सृष्टि का बीज है। पहले सृष्टि की चाह, उसके बाद सृष्टि। अर्थात जीवन यात्रा में कुछ आगे बढ़ना है तो पहले मन की धरती पर कुछ नया तैयार करना होगा।

लेकिन मन में तो एक दीवार है। तुम आसानी से मन वाली दीवार को तोड़ सकते हो। भौतिक दीवार को तोड़ने के लिए अधिक मेहनत की जरूरत होती है। अब देखो, भक्ति क्या है? ‘भज्’ धातु में क्तिन् प्रत्यय के योग से ‘भक्ति’ शब्द बनता है अर्थात भक्ति में भजनात्मक भाव है। ‘भजन’ शब्द क्या है?

‘परमात्मा’ मेरी परागति है और उसकी ओर मुझे चलना है’ यह भावना जब मन में बैठ जाती है और उस भावना से प्रेरित होकर मनुष्य जब उसकी ओर चलता है तो यही होता है ‘भजन’। जहां बाह्य अभिव्यक्ति है उसको ‘भजन’ कहते है और जहां आंतरिक अभिव्यक्ति है उसको ‘भक्ति’ कहते है।


एक ही चीज या भावना, जब बाहर व्यक्त होती है और लोग भी उसे समझ रहे है, तब उसका नाम है भजन। और जब वह आंतरिक है, भीतर की ओर, अंदर की ओर चल रही है, तब वह है भक्ति। अर्थात दोनों एक ही चीज है। एक ही चीज के दो रूप है। तुम साधक हो। तुम भक्ति को जगा लो। तुम शक्तिशाली बनों। अपने आगे बढ़ो। दुनिया को सुख दो, शांति दो, समृद्धि दो। दुनिया तुम्हारी कीमत समझे। तुम लोगो की जय हो। 








Friday, March 31, 2017

Job से सम्बंधित कुछ बातें

customer service

Customer Service में काम आती हैं ये खूबियां

अगर आप customer service के क्षेत्र में कदम रखने जा रहे है तो आपको अपने व्यक्तित्व की इन खूबियों को तराशना होगा।

संजीदगी से सुने Problem

उपभोक्ता की problem सही तरीके से सुनने और संभावित सवालों के बारे में विचार करने से ही उसके साथ प्रभावशाली संवाद बनाया जा सकता है।

सकारात्मक भाषा का इस्तेमाल

problem के समाधान में सकारात्मक भाषा का इस्तेमाल customer के मन में company की बेहतर छवि बनाता है।

धैर्य और आत्म नियन्त्रण

अपनी बात उपभोक्ता तक सुगमता से पहुँचाने के लिए customer service दे रहे व्यक्ति का धैर्यवान होना बेहद जरूरी है।

Time Management

उपभोक्ता की problem को तय समय-सीमा में सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए।

और अन्य बातें

1-  24% उपभोक्ता अच्छे experience के बाद 2 या ज्यादा सालों तक एक ही विक्रेता की सेवाएँ लेते है।

2-  39% उपभोक्ता ख़राब experience के बाद 2 या ज्यादा सालों तक विक्रेता की उपेक्षा करते है।

3-  70% customer phone के जरिये उपभोक्ता सेवाएँ लेना पसंद करते है।

4-  88% customer online review पढ़कर खरीदारी करने का decision करते है।

5-  अच्छी सेवाओं के बाद एक customer अपना experience 4 से 6 लोगों को बताता है।

Appraisal Meeting में न करें ये गलतियां


Employee की नजर में appraisal increment या promotion पाने का अवसर है, जबकि नियोक्ता
 की नजर में career में नई संभावनाओ तलाशने का अवसर।

इन दिनों आप appraisal में शामिल होने की तैयारी कर रहे होंगे। आपने साल भर अच्छा काम
 किया, लेकिन अब appraisal की तैयारी में कमी आपकी rating को प्रवाभित कर सकती है।

पहले समझे Appraisal

यह असल में company की अपनी और अपने employees की प्रगति को जांचने का एक पैमाना है।
 हर company में appraisal का अपना तरीका होता है। कुछ company साल में एक बार
 appraisal करती है, तो कुछ हर तीन माह या छह माह में अपनी कर्मचारियों के काम का मुल्यांकन
 करती है। कही-कही appraisal प्रक्रिया में कर्मचारी भी शामिल होते है। उनसे form भरवाए जाते है,
 तो छोटी firm में supervisor व् senior officer ही स्वयं फैसले ले लेते है। आपकी rating के साथ
 बजट को ध्यान में रखकर salary में increment किया जाता है।

Appraisal Meeting में क्या न करें

1-  कमियों को लेकर भावुक न बनें: problem के समाधान और संभावनाओं पर बात करें।

2-  बहस न करें- अपनी कमियों को लेकर complain करने से आपकी नकारात्मक छवि बनती है।

3-  सही वजह पर ध्यान दें- boss पर पक्षपात करने का आरोप न मढें। अपने कार्य पर ध्यान दें।

4-  दूसरों पर आरोप न मढें- गलती हुई है तो मानें। आरोप मढ़ने से सिर्फ कमियां दिखती है।

Appraisal को कैसे बनाएं बेहतर

1-  अपना महत्व समझाएं- appraisal form में कहानी न लिखें। अपने appraisal form पर अपने
 नये ideas के data point शामिल करें। आंकड़े और मेल से अपनी बात को पुष्ट करें।

2-  Boss से सलाह करें- अगर आप appraisal form के किसी सवाल को लेकर स्पष्ट नही है
तो boss से बात करें।







Tuesday, March 28, 2017

Job के साथ Income के Five Sources

part time job


अगर आप office के कामकाज के साथ तालमेल बैठाकर कुछ समय part-time job के लिए निकाल सकें तो अपनी आय में काफी बढ़ोत्तरी कर सकते है।

job के बाद बचे हुए समय में आप महज कुछ घंटे काम करके अपनी आमदनी बढ़ा सकते है। बस, इसके लिए part-time job के best option और उनसे जुड़ी skills की जानकारी होनी चाहिए। आज हम part-time jobs के उन पांच option के बारे में बता रहे है, जिनकी मदद से आमदनी को बेहतर बनाया जा सकता है।

1-  Affiliate Marketing

Affiliate Marketing के लिए आपके पास अपनी blog, website या फिर किसी website में आपकी हिस्सेदारी होना जरुरी है। हमारे देश में भी अब online shopping का कारोबार फल-फूल रहा है। आमतौर पर सभी shopping sites का अपना affiliates marketing program होता है। आप अपने blog या website के जरिये इन shopping websites के जरिये इन shopping websites के products को promote करते है, तब इससे भी आमदनी हो सकती है। जब भी आप किसी affiliates marketing program से जुड़ते है, तब आपको एक referral link दिया जाता है। इस link के जरिये जब आप product खरीदते है, तब आपको commission मिलता है।

जरूरी Skills: affiliates marketing के लिए आपको blog या website संचालन के ज्ञान से नया content उपलब्ध कराते रहना जरूरी है, ताकि users को traffic आपकी site पर बना रहे।

कमाई: इसके जरिये होने वाली कमाई product की कीमत के अनुसार निर्धारित commission के मुताबिक अलग-अलग हो सकती है।

2-  Web Designing

आज लगभग हर क्षेत्र में website एक अनिवार्य जरूरत बन गई है। किसी संस्था या व्यावसायिक संगठन के अलावा कई मशहूर हस्तियाँ भी अपनी व्यक्तिगत websites बनवाती है। एक web designer के तौर पर भी आप घर बैठे कमाई कर सकते है। website से जुड़े हर पहुलओं का ध्यान रखना web designer की profile में आता है। website का design यानी webpage का layout, structure और architecture तैयार करना web designer का काम होता है।

जरूरी Skills: web designer को template designing, 3D व् 2D animation, portfolio designing, flash, banner designing, ग्राफिक designing, website मेंटेनेंस, movie making, adobe Photoshop, adobe इलेस्ट्रेटर, coral-draw, HTML, java script, basic art एवं print design आदि का ज्ञान जरूरी है।

Income: एक website बनाकर दस से बीस हजार रूपये आराम से कमाए जा सकते है।

3-  Translation

आज कई ऐसी company है, जो online translation का काम देती है। कुछ company घंटे के हिसाब से भुगतान करती है, जबकि कुछ शब्दों के हिसाब से भुगतान करती है। अगर आपकी english के साथ किसी दूसरी भाषा पर पकड़ है तो आप अच्छी कमाई कर सकते है। translation का काम पाने के लिए आप किसी translation website पर अपने आप को registered करवा सकते है।

जरूरी Skills: english के अलावा किसी अन्य भाषा पर अधिकार translation के लिए आवश्यक है। 

Income: इसमें एक रूपये प्रति word से लेकर दस रूपये प्रति word के हिसाब से भुगतान किया जाता है।

4-  Online Researcher:

इस job में आपको सम्बंधित business का general knowledge, research skill और quality content तैयार करना आना चाहिए।

जरूरी Skills: इसमें online researcher का सम्बंधित business से जुड़े सवालों के शानदार जवाब और उनकी व्याख्या करना आना चाहिए।

Income: इस part-time job में आप हर घंटे के हिसाब से अच्छा कमा सकते है। इस job में project के आधार पर पैसा मिलता है।

Online Community Management

image-building और किसी खास वर्ग के लोगों के बीच अपनी brands की स्वीकार्यता कायम करने के लिए company अब online community management का उपयोग करती है। web content update करने से लेकर social media manage करने तक का काम इसमें शामिल है। अगर content जुटाने और report तैयार करने में माहिर है तो यह field आपके लिए है।

जरूरी Skills: social media platform की जानकारी और brand promotion के लिए लगन।

Income: इस field में आप एक घंटे में 500-1000 रूपये तक कमा सकते है।















Friday, March 24, 2017

Health Professional को इलाज की जरूरत

vitamin-d

अतिव्यस्तता व् घंटो चारदिवारी के भीतर रहना health professionals को बीमार कर रहा है। एक study के आनुसार करीब 80% में vitamin-d की कमी है।

Body को बेहतर तरीके से चलाने के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है vitamin-d, इसकी कमी bones की सेहत को प्रभावित करती है। जब हम धूप में जाते है तो हमारा body vitamin-d अपने आप बना लेता है। इतना ही नही vitamin-d bones के साथ मांशपेशियों, दिमाग, फेफड़ो की कार्यप्रणाली को भी ठीक करता है। Research के अनुसार 69% भारतीयों में vitamin-d की कमी है।

health professional में vitamin-d का study किया गया, जिसमें 18 शहरों के 2119 medical और पैरा-मेडिकल पेशेवरों को शामिल किया गया था। इनमें ऐंडोक्राइनोलॉजी के education program में भाग ले रहे चिकित्सक व् health professional शामिल थे। December 2010 से मार्च 2011 के बीच रक्त के नमूने लिए गये। इस जाँच में पाया गया कि 79% vitamin-d की कमी है, 15% में यह border line पर है। केवल 6% में ही उचित मात्रा देखने को मिली। इन नतीजों से साफ़ है कि इस देश में health दिखने वाले मध्य उम्र के health care professionals hospital की चारदीवारी के अंदर ही काम करते है, जहां ना के बराबर धूप आती है। ऐसे में नियमित जांच जरूरी है।

भारतीय उपमहाद्वीप में पूरे साल धूप रहती है, इसके बावजूद बड़े स्तर पर लोग vitamin-d की कमी से जूझ रहे है। स्किन पिग्मेंटेशन, पारम्परिक कपड़े पहनना, vitamin-d का फोर्टीफिकेशन ना होना और वायु प्रदुषण इसके प्रमुख कारण हो सकते है। vitamin-d की कमी blood की जांच से पता लगाई जा सकती है। बुरा कोलेस्ट्राल कम करने और अच्छा कोलेस्ट्राल बढ़ाने में भी इससे मदद मिलती है।

दूर करें Vitamin-D की कमी

1-  सुबह आधा घंटा sunscreen के धूप में बिताएं।

2-  हर रोज सूर्य नमस्कार करें।

3-  सामन, बांगरा, हिलसा और टूना आदि मोटी मछलियाँ vitamin-d का अच्छा स्रोत है। इसके अलावा मछली का तेल, अंडे की जर्दी, फोर्टिफाइड अनाज को diet में शामिल करें।

4-  कमी अधिक होने पर medicine भी ली जा सकती हैं।