Monday, January 9, 2017

Kitchen में इन्हें अपनाएँ, Health बनाएं

health in kitchen

Kitchen की जगह, समय, भाव और सामग्री से जुड़ी कुछ खास बातों पर ध्यान देकर हम अपनी health में बड़े बदलाव ला सकते है

समय के साथ हमारा चौका धीरे-धीरे kitchen बनता गया। कुछ समय तक ठीक रहा, पर धीरे-धीरे स्वास्थ्य गिरना शुरू हो गया। चौका चेतना नामक अभियान के तहत नेचुरोपैथी के कुछ specialist ने health को ठीक रखने के लिए चार तरह की चीजों पर जोर दिया है।

एक हालिया research के मुताबिक कई लोगों की kitchen toilet से भी गंदी होती है। बर्तन साफ करने वाले स्पाँन्ज और kitchen टॉवेल को बहुत कम लोग नियमित रूप से साफ करते है। इनमे toilet सीट से भी ज्यादा Bactria पाए जाते है।

क्या करें

1-  कटिंग बोर्ड, खाना बनाने के उपकरण, फ्रिज,dustbin, बर्तन साफ़ करने वाले कपड़े की नियमित सफाई करें

2-  kitchen के लिए अलग चप्पल बना लें।

3-  बर्तनों में detergent का अंश न छोड़े।

4-  fruits-vegetables क अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें।

सामग्री

हम क्या खाएं, जो खा रहे है उसे खाने से पहले कैसे साफ करें, उसे किस तरह पकाएं, ये सभी बातें ध्यान में रखनी जरूरी है। विदेशों से आये fruits-vegetables दुकानों पर कई दिन तक रखे हुए होते है। इसके बाद हम उन्हें अपने फ्रिज में कई दिनों तक रखते है। ‘रेडी टू ईट’ food products में खाद्य पदार्थो को सुखा कर उनमें रासायनिक प्रिजवेटिक्स मिलाकर स्टोर में कई महीनों तक रखा जाता है। इस तरह की चीजों से बचें।

1-  घर में ही kitchen garden बना सकते है

2-  खाने की सभी चीजों को प्राकृतिक रूप में या फिर कम से कम बदलाव के साथ खाएं। जैसे, भूसी निकाला हुआ सामान्य चावल पॉलिश किये चावल की तुलना में ज्यादा फायदेमंद है।

3-  सलाद बनाते समय एक स्वाद के फलों को एक साथ खाएं, खट्टे-मीठे फल एक साथ खाएं। खट्टे-मीठे fruits एक साथ खाने पर पाचन क्रिया गड़बड़ा जाती है।

4-  नरम छिलके वाले आलू, लौकी, तोरी और सीताफल जैसी vegetables के छिलके की उपरी परत को हल्का सा उतारें।

5-  चोकारवाला आटा और हरी पत्तेदार vegetables भरपूर मात्रा में खाए। अलग से fiber की जरूरत नही पड़ेगी

6-  ठंडा, गरम, नमकीन आदि विपरीत प्रकृति वाली चीजों को एक साथ न खाए।

7-  ताजे व् मौसमी fruit व् vegetables खाएं। चीजो को सामान्य तापमान पर ही खाएं।

समय की शुद्धि

हमारे body का हर अंग, फिर चाहे वह liver हो या आंतें, एक विशेष clock के अनुरूप काम करते है। हमारे body के रूटीन के हिसाब से ही वे ढल जाते है और दिन के किसी खास वक्त पर सबसे ज्यादा गतिशील होते है। आप अपने body की मांग के हिसाब से दिन में तीन या चार बार खाना खा सकते है। night shift वालों को खास तौर पर समय को लेकर सचेत रहने की जरूरत है।

क्या करें

1-  सुबह आठ बजे तक नाश्ता करें। fruits, milk, अंकुरित अनाज, दलिया आदि लें।

2-  इसके 4-5 घंटे बाद दोपहर का भोजन करें। इस पहर में वायुमंडल गर्म होता है और body की पाचन क्षमता अच्छी होती है, इसलिए इस वक्त सम्पूर्ण आहार ले सकते है। उसमे दाल, रोटी, मट्ठा/दही, सलाद, घी आदि शामिल करें।

3-  शाम के वक्त रस्क, vegetables का सूप, या तुलसी, अदरक, काली मिर्च आदि से बनी हर्बल चाय ले सकते है

4-  रात को खाना गरिष्ठ नही होना चाहिए।

5-  रात की shift में काम करने वालों को नीद का ध्यान रखना चाहिए। 9-10 बजे तक खाना खा लें या शाम को 5-6 बजे खाना खाकर office जाना चाहिए।

भाव की शुद्धि

खाना पकाते, परोसते और खाते समय आपके मन में क्या भाव है, यह बात सीधे-सीधे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है

1-  अगर किसी वजह से आपका मूड ख़राब हो तो पहले अपना मूड सही करना चाहिए, उसके बाद खाना खाना चाहिए

2-  खाना खाते समय कोई और काम नही करना चाहिए। न टीवी, न computer, न किसी से बातें।

3-  खाने का कौर मुंह में डालने के बाद उसके स्वाद का अनुभव करें। उसे अच्छी तरह चबाने के बाद ही निगले।

4-  अगर कुछ पी रहे है तो घूंट लेकर उसे कुछ देर मुंह में रखें, उसके स्वाद का अनुभव करें, फिर उसे निगलें।

5-  खाना तभी खाएं, जब भूख लगी हो। बिना भूख खाने की इच्छा तनाव की वजह से होती है। ऐसे में अतिरिक्त न खाएं।



Tags:         Sugar की लत यूँ करे कम                      Important Food for the Winter  

                           Sitting for Long Harm on Health





Friday, January 6, 2017

Sitting for Long Harm on Health

Sitting for long harm on health
ज्यादा देर तक बैठने से Health पर नुकसान

कई लोग है, जिनका 90 से 95% समय बैठे हुए बीतता है। लगातार घंटो बैठकर काम करने की मजबूरी हमें कई तरह के रोग दे रही है। हालाँकि इस नुकसान को कम किया जा सकता है।

कामकाजी आबादी के एक बड़े वर्ग का पूरा दिन meeting में, phone करने या सुनने में, computer पर e-mail लिखने में और office में बैठकर काम करने में निकल जाता है। घर पहुंचकर भी सोने से पहले तक हम phone या tv के सामने बैठे रह जाते है। कुल मिलाकर दृश्य ऐसा बनता है- रात के 8 घंटे हम सोने में, 2 घंटे खड़े रहने या एक जगह से दूसरी जगह जाने में, करीब आधा घंटा कसरत में और बाकी बचे 13 घंटे केवल बैठे रहने में बिताते है।

इस तरह दिनभर में हम अपना ज्यादातर समय बैठे रहने में बिता देते है। सर्कुलेशन: journal of the american heart association में छपे 8,800 लोगों पर किये गये एक research के अनुसार हर 60 minute देखा गया tv आपको cancer तथा heart सम्बन्धी रोगों की ओर धकेलता है और असमय मृत्यु की आशंका को बढ़ा देता है।

कई research बतातें है कि केवल बैठे रहने से आप न जाने कितने रोगों को न्योता दे रहे है। यही नही, उन लोगो को भी अपने बैठने के समय पर अवश्य ध्यान देना चाहिए, जो नियमित व्यायाम करते है और 8 घंटे की नींद लेते है।

ज्यादा बैठे रहने से सबसे पहले मोटापे की आशंका बढ़ती है, जो cholesterol बढ़ाता है। नतीजन heart रोगों की आशंका बढ़ जाती है। body में हानिकारक LDL cholesterol का बढ़ना stroke का खतरा बढ़ाता है। सुस्त lifestyle के कारण lifestyle से जुड़े कई रोग कम उम्र में ही लोगो को अपना शिकार बना रहे है। टाइप-2 diabetes के मामलों का बढ़ना इसका उदाहरण है। बंद कमरों में बैठे रहने से बच्चों और युवाओं में हो रही vitamin-d की कमी उनमें थकान व् bones की कमजोरी उत्पन्न कर रही है। लगातार बैठे रहने से कमर के निचले हिस्से की मांशपेशियों में थकान बढ़ती है, टेल बोन में दर्द हो जाता है और हल्की swelling आ जाती है। स्लिप डेस्क की आशंका भी बढ़ती है।

Body के अंगो पर पड़ने वाला असर

Heart: heart का काम है body में साफ़ blood पहुंचाना, पर लगातार बैठे रहने से blood का प्रवाह धीमा हो जाता है। इसके कारण जमा हुआ fat इस्तेमाल नही हो पाता और धमनियों में जमने लगता है। यही body में heart रोगों की आशंका बढ़ा देता है। research में पता चला है कि जो महिलायें 10 या उससे अधिक घंटे बैठी रहती है, उन्हें heart रोगों का खतरा अधिक होता है।

Cancer: आवश्यकता से अधिक बैठे रहेगे तो कोलोन, ब्रेस्ट और एंड्रोमेट्रीयल cancer का खतरा बढ़ जाता है। इसका कारण स्पष्ट नही है, पर शायद insulin के बढ़ने से कोशिकाएं बढ़ती है। अनियंत्रित गति से कोशिकाओं का बढ़ना cancer की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। यह भी माना जाता है कि body को लगातार हरकत में रखने से anti-oxidant में बढ़ोत्तरी होती है, जो cancer पैदा करने वाली जड़ो को बढ़ने नही देते। बैठे रहने पर ये anti-oxidant बन ही नही पाते। research के अनुसार बैठे रहने से लंग cancer का खतरा 54%, गर्भाशय cancer का खतरा 66% और कोलोन cancer का खतरा 30% तक बढ़ जाता है। WHO  की report के अनुसार ब्रेस्ट और कोलोन cancer के एक तिहाई मामलों में लगातार घंटो बैठे रहना प्रमुख वजह है।

पैनक्रियाज: यानी (अग्नाशय) कहते है कि यदि आप एक दिन भी जरूरत से ज्यादा बैठ ले तो इसका असर सीधा आपकी पाचक ग्रंथि पर दिखने लगता है और यह ज्यादा insulin बनाने लगती है। इसी बढ़ी हुई insulin से diabetes होने का खतरा भी बढ़ जाता है। research में पता चलता है कि कम बैठने वाले लोगों के मुकाबले ज्यादा बैठने वाले लोगों को diabetes होने का खतरा अधिक होता है। अगर आप रोजाना 8 घंटे से ज्यादा बैठ रहे है तो टाइप-2 diabetes होने का खतरा 90% तक बढ़ जाता है।

दिमाग पर असर

ज्यादा बैठे रहने से आपका दिमाग धीमी गति से काम करता है। बैठे रहने से blood का प्रवाह भी कम होता है, जिससे दिमाग तक ताजा खून और oxygen कम पहुंच पाती है। इसका असर एकाग्रता और मूड पर पड़ता है।

पाचन शक्ति

खाना खाने के बाद बैठने से पेट में पहुंचे खाने की तह लग जाती है, जिससे पाचन शक्ति धीमी हो जाती है। इस धीमी प्रक्रिया से पेट फूलने, जलन और कब्ज होने की आशंका बढ़ जाती है।

बैठने के तरीके से होने वाली तकलीफ

1-  गर्दन और कंधो में तनाव

computer पर काम के समय अपने सिर और गर्दन को आगे की ओर करके बैठना या phone को कान से लगाकर गर्दन झुकाकर रखना body पर पड़ता है। ऐसे लोगों में गर्दन और कंधो में तनाव तथा कमर दर्द की problem बढ़ जाती है। स्पान्डिलाइटिस की तकलीफ भी हो सकती है।

2-  रीढ़ की हड्डी में Problem

खड़े रहने से अधिक बैठना रीढ़ के लिए ज्यादा नुकसानदायक है। आपकी रीढ़ को सबसे ज्यादा नुकसान तब होता है, जब आप computer के सामने बैठे रहते है। हमारी रीढ़ में मौजूद डिस्क चलने से खुलती व् बंद होती है। चलने पर इनमें blood और nutrition का संचार होता है। बैठने की अवस्था में ये disc लगातार बंद रहती है। कुछ समय बाद इनका लचीलापन खत्म हो जाता है, जिससे pain होता है।

3-  मांशपेशियों का विकार

खड़े रहने पर उदर की मांशपेशियां तनी रहती है और body के लिए ये बेहद जरूरी भी है, पर बैठे रहने पर ऐसा नही हो पाता। इससे उदर कमजोर हो जाता है। यही नही, ज्यादा देर बैठे रहने से कूल्हों की मांशपेशियों को भी फैलने का मौका कम मिलता है, जिससे वो सख्त हो जाती है और तकलीफ देने लगती है।

4-  टांगो की तकलीफ

अधिक बैठने से टांगो में blood का संचार कम हो जाता है, जिससे पैरो के निचले हिस्से में swelling, वैरिकोस वेन व् DVT (blood के थक्के बनने की बीमारी) की problem हो सकती है। मजबूत bones के लिए भी चलना, दौड़ना व् वजन उठाना जरूरी है।

खड़े होने के लिए तैयार

विशेषज्ञ कहते है कि दिन में जितने ज्यादा घंटे आप बैठेंगे, उतने घंटे आपके life में से कम हो जायेगे। ऐसे में विभिन्न research के अनुसार इस नुकसान को कम करने के लिए बेहद जरूरी है कि नियमित व्यायाम करना। हर रोज 60 minute तक व्यायाम करना body की activity को बढ़ाता है। अगर आपको लगता है कि आपका अधिकतर समय बैठे हुए बीतता है तो अभी से active हो जाने की जरूरत है।







Wednesday, January 4, 2017

ब्याज घटने पर भी EPF-PPF में Profit

EPF Vs PPF

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर ब्याज दरें इस साल के लिए घटकर 8.65 पर आ गई है। वही, सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) पर ब्याज 8% मिल रहा है। इसके बाद भी इनपर मिलने वाला ब्याज बैंको की सावधि जमा (FD) और अन्य तय अवधि की जमाओं पर मिलने वाले ब्याज या return से अधिक है। साथ ही इनपर मिलने वाली tax छूट return को और भी आकर्षक बना देती है।

EPF पर कैसे तय होता है ब्याज

सरकार पूरे वित्त वर्ष के लिए ब्याज दरें तय करती है। इस महीने वित्त वर्ष 2016-17 के लिए ब्याज दरों की घोषणा करते समय EPFO ने इसे 0.15% घटाकर 8.65% कर दिया है। वित्त वर्ष 2015-16 में EPF पर 8.8% ब्याज मिला था।

कैसे करते है निवेश

नियमों के मुताबिक आपके मूल वेतन में से 12% राशि EPF खाते में चली जाती है। साथ ही इतनी ही राशि नियोक्ता भी अपनी ओर से कर्मचारियों के EPF खाते में डालते है।

कैसे बनें Member

इसके दायरे में job करने वाले member ही आते है। यह भी जरूरी है कि आप जिस company में काम करते हो, वह EPFO के मानक पर काम करती हो। EPFO ने 15,000 रुपये तक मूल वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए EPF में निवेश अनिवार्य किया हुआ है। पहले यह सीमा 6,500 रूपये थी। ऐसा कर्मचारियों की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए किया है। इससे अधिक मूल वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए EPFO की membership स्वैच्छिक है।

निवेश पर कर छूट

EPF में निवेश पर आयकर की धारा 80c के तहत tax छूट भी मिलती है। लेकिन इसके लिए कुछ शर्ते भी है। आप लगातार पांच साल से कम समय तक काम करते है और EPF  में से राशि निकालते है तो tax छूट वापस करनी पड़ती है। यह राशि EPFO TDS  के रूप में काट लेता है।
आप EPF में 12% से भी अधिक और यहाँ तक की कुल मूल वेतन भी EPF खाते में जमा कर सकते है। इस पर 1.50 लाख तक tax छूट मिलेगी। लेकिन नियोक्ता के लिए 12% से अधिक जमा अनिवार्य नही है।

जरूरत पर निकाल सकते है राशि

अपनी शादी, बच्चों की शिक्षा या शादी-विवाह, मकान बनवाने या जमीन खरीदने के लिए आप EPF  खाते से राशि निकाल सकते है। लगातार सात साल तक काम करने के बाद EPF से 50% तक राशि इसके लिए निकाल सकते है। EPF खाता 58 साल की उम्र तक जारी रहता है। नियमों के मुताबिक पूरी अवधि में केवल तीन बार EPF से राशि निकाल सकते है लेकिन उस स्थिति में भी निकासी राशि कुल जमा की 50% से अधिक नही होगी। मकान बनवाने के लिए मूल वेतन का 36 गुना और मकान खरीदने के लिए 24 गुना राशि EPF खाता से निकाल सकते है। job छूट जाने की स्थिति में लगातार दो माह तक बेरोजगार बैठने, विदेश में job के लिए जाने या बसने और लडकियों में मामले में शादी या मां बनने की वजह से job छोड़ने या EPFO member की मृत्यु होने की स्थिति में EPF राशि तुरंत निकालने की सुविधा है।

EPF पर बीमा की भी सुविधा

आपको शायद यह नई बात लगे लेकिन EPFO पहले से ही अपने members को term बीमा कवर देता है। इसे employee deposit linked scream (EDLS) कहते है। इसके लिए नियोक्ता मूल वेतन का 0.50% EPFO को देते है। इसके तहत आपको मूल वेतन का 30 गुना बीमित राशि का समूह बीमा कवर मिलता है। नियोक्ता के लिए यह स्वैच्छिक है कि वह अपने कर्मचारियों को समूह बीमा कवर दें।

Missed Call से EPF Balance

EPFO ने पिछले कुछ वर्षो में काफी बदलाव किया है। आप अब 011-22901406 पर महज missed call से EPF का balance जान सकते है। EPFO ने online राशि निकालने की सुविधा भी दे रखी है। 



 # 8.65% ब्याज मिल रहा है EPF पर वर्तमान में

# 8% ब्याज PPF पर वर्तमान में मिल रहा है

# 50% राशि EPF से निकालने की छूट 58 की उम्र तक

# 1.50 लाख रूपये तक tax छूट EPF-PPF में निवेश पर


                     Investments in Small Savings



Thursday, December 29, 2016

जिन्दगी की यात्रा


एक युवा लड़की अपने प्रेमी को बहुत प्यार करती थी। वह job के काम से किसी दूसरे city में रह रहा था। काफी समय हो गया था, इसलिए उसे बहुत याद करती थी। एक बुजुर्ग थे, जिन्हें वह बहुत मानती थी। उनके पास अक्सर जाया करती थी। उनकी हर बात मानती थी। अबकी बार उसे उनसे मिले काफी समय हो गया था। आख़िरकार एक दिन वह उनसे मिलने पहुंची।

बुजुर्ग ने महिला का स्वागत किया और उसके हाथ में ताजे अंगूरों से भरी टोकरी पकडाई और कहा,’ क्या तुम उस पहाड़ को देख रही हो?’ महिला ने कहा, ‘हां’

बुजुर्ग ने कहा, ‘इस टोकरी को उठाओ और उस पर्वत के उपर लेकर जाओ।‘ महिला ने कुछ नही पूछा। हालाँकि वो यह करने की इच्छुक नही थी। नाखुश मन से उसने वह टोकरी उठाई और पहाड़ की दिशा में कदम बढ़ाने लगी। जैसे-जैसे चढ़ाई आ रही थी, चढ़ना मुश्किल हो रहा था। वह मन ही मन बोल रही थी कि बुजुर्ग ने उसे किस काम पर लगा दिया है, उसे यह क्यों करना पड़ रहा है? इस काम का मतलब ही क्या है? व्यर्थ ही यहाँ आयी। इस तरह वह मन ही मन बुदबुदाए जा रही थी। सूरज की तेज धूप उसे झुलसा रही थी। अंगूर के गुच्छों का वजन अब असहनीय हो रहा था। कुछ भी उसे उपर चढ़ने के लिए प्रेरित नही कर रहा था।

आख़िरकार वह पर्वत के उपरी हिस्से तक पहुंच गयी। उसने खुद को सुंदर और शांत फूलों की घाटी में खड़ा हुआ पाया। अंगूर अभी भी ताजा दिख रहे थे। वह घाटी के चारो ओर देखने लगी, तभी उसने देखा कि उसका प्रेमी उसकी ओर आ रहा है। वह उसे देर तक देखती रही। वह मुस्कराते हुए उसका स्वागत कर रही थी। अंत में महिला ने इतना ही कहा,’ अगर मैं जानती कि ये अंगूर मेरे प्रेमी के लिए है तो पूरे रास्ते में इतना उखड़ी हुई नही रहती। इन अंगूरों को धूप से बचाकर लाती। अपनी शिकायतों में मैंने पर्वतों की उस सुन्दरता को भी नही देखा, जिस पर मैं चढ़े जा रही थी।‘



ऐसी ही दशा हमारी life में होती है कि अपने जीवन-यात्रा में अपने शिकायतों का इतना पिटारा लेकर चलते है कि उस जीवन-यात्रा में पड़ने वाली उन खूबसूरत चीजों को नजरंदाज कर देते है, जो हमारे जीवन को ख़ुशी देते है। 




Wednesday, December 28, 2016

The Definition of Beauty सुन्दरता की परिभाषा

The definition of beauty

अगर हमारी आँखे चेहरे की जगह आत्मा की सुन्दरता देख पाती तो यह दुनिया कुछ अलग होती। हम झुरियों के पीछे की संवेदनाएं देख पाते, तो रंग के पीछे छिपे विचारों का संसार भी दिखता। हमारे रिश्ते और व्यवहार अलग होते। सुन्दरता की परिभाषा अलग होती।

वह रो रही थी। दुखी थी कि उसकी सहेली ने उसकी सुन्दरता पर ताना मारा था। दोनों ने शायद एक job के लिए आवेदन किया था, जिसमें वह चुन ली गयी थी। जिस पर उसकी सहेली कह रही थी,’ काबिलियत की किसे फ्रिक, तुझे तो चेहरा देखकर ही रख लिया होगा। मन में सवाल उठा कि क्या सुंदर होना अपराध है? अगर नही, तो क्या जो बाहरी सुन्दरता के पैमाने पर खरे नही उतरते, उनकी कोई गलती होती है?

हर दिन लड़के और लड़कियां सुन्दरता के प्रति किये जाने वाले इस भेदभाव के शिकार होते है। समाज की दी हुई कई तरह की हीनभावनाएं मन में बैठ जाती है, जो बड़े होने पर भी पीछा नही छोड़ती। न चाहते हुए भी हम सुन्दरता को मात देने के लिए कई तरह के दबाव झेलते रहते है। हमारे आत्मसम्मान के हर पहलु पर हावी हो जाता है, हम कैसे दिखते है! अमेरिकी actress और मिंडी कैलिंग कहती है कि शुरू में यह बड़ा अपमानजनक लगता था, जब लोग पूछते थे कि तुम इतना self-confidence कहां से लाती हो? एक तरह से वह ये कह रहे होते थे कि तुम सुंदर नही हो, गोरी नही हो, पतली नही हो तो फिर क्या चीज है, जो तुम्हें अपने बारे में खास महसूस कराती है?

हम समाज की परिभाषा नही बदल सकते, पर अपनी तो बदल सकते है। खुद को परम्परागत सुन्दरता के मानकों से प्रभावित होने से रोक सकते है।‘ चर्चित anchor ओपेरा विन्फ्रे कहती है कि हम बहुत पतले, बहुत मोटे, दूसरों से बहुत लम्बे या छोटे, काले या गोरे होते है। और ऐसा कहते हुए हम हर दिन दूसरों को नीचा दिखाते है और खुद को नीचा दिखा रहे होते है।

tennis खिलाड़ी सेरेना विलियम्स एक interview में यहा तक कहती है, ‘मेरा एक ही शरीर है और इस शरीर ने ही मुझे इस प्रसिद्धि तक पहुंचाया है। यही सब कुछ है।‘

आत्मा की सुन्दरता की बात करते हुए रूमी कहती है, ‘ओह! मेरी आत्मा, तुम बहुत चिंता करती हो! तुम अपनी ताकत को जानती हो। तुमने अपनी खूबसूरती को देखा है। तुमने अपने सुनहरे पंखों को महसूस किया है, तुममें क्या कमी है? तुम क्यों चिंता करती हो? तुम सच में आत्मा हो। आत्मा की आत्मा!’

जिसके पास जो नही है, वह उसे पाना चाहता है, फिर चाहे यह पैसा हो, सफलता हो, सम्बन्ध हो या फिर सुन्दरता। हम सुंदर होने के लिए इसलिए बेचैन रहते है, क्योंकि हम मानते है कि हम सुंदर नही है।

सुन्दरता के मायने

1-  सुन्दरता, समाज ने तय की है। एक जगह आपको सुंदर माना जाता है, तो दूसरी जगह आपको हीनता का एहसास कराया जाता है। आप अपनी सोच सम्भालें।

2-  इस जीवन के लिए यही शरीर एक सच है। यही साधना का सर्वश्रेष्ठ मन्दिर या तीर्थ है। इसका आभार व्यक्त करें। इसे प्यार करें। इसे स्वीकारें।

3-  विचारों की सुन्दरता अहम है। लोग चेहरे से आकर्षित होते है, पर गुणों से करते है। अपनी health का ध्यान रखें। लोगों से मुस्कराते हुए मिलें।

4-  अपने चेहरे या शरीर के लिए खुद को कोसना बंद करें। आप कैसे दिखते है, उसकी जगह आप क्या है, कहां मजबूत हैं, इस रूप में खुद को परिभाषित करें।


5-  nature से खुद को जोड़े। अपनों के हंसते- मुस्कराते चेहरों में खुद को देखने की कोशिश करें, शीशे में देखने वाली छवि से नही।