Tuesday, November 15, 2016

Sugar (चीनी) से अधिक खाने से होने वाले Problem

eat-less-sugar


हम जितना कम sugar खाने की सोचते है, उतना ही खुद को sugar से घिरा पाते है। Specialist कहते है कि खाने की चीजों में कुदरती मिठास होती है और उतना ही मीठा काफी भी होता है। कैसे करे sugar की लत को कम

sugar body के विकास के लिए जरूरी है, पर एक control मात्रा में। WHO का स्पष्ट निदेश है कि लोगो को अपने खाने में मीठे की मात्रा कुल calorie के 10% से अधिक नही रखनी चाहिए और future में इसे 5% तक कर देना चाहिए। वर्तमान में स्थिति यह है कि मिठास के तौर पर हम पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा sugar खा रहे है। मीठे के नाम पर sugar health बिगाड़ती है, क्योकि यह naturally न होकर artificial होती है और उपर से मिलायी जाती है।

fruits, vegetables, beans, मेवे आदि में naturally रूप से मिठास मौजूद होती है। साबुत अनाजों में भी मौजूद sugar सेहत के लिए फायदेमंद होती है। इन पदार्थो में vitamin, mineral व् fiber आदि कई पोषक तत्व भी होते है। खाद्य पदार्थो में मौजूद fiber body में sugar की मात्रा को सीमित रखता है, जिससे blood sugar सही रहती है। असल problem उस sugar से है, जो factory में processing के बाद का product होती है या मीठे का test बढ़ाने के लिए अलग से मिलायी जाती है।

Health की दुश्मन

American journal of cardiology में कुछ समय पहले एक report प्रकाशित हुई है। report के अनुसार न्यूयार्क और कैन्सस में 8670 व्यस्क लोगो पर study के बाद यह निष्कर्ष निकला कि नमक से कही ज्यादा नुकसान ज्यादा मात्रा में sugar या सफेद शक्कर के सेवन से होता है। research के मुताबिक अधिक मात्रा में चीनी खाने से body में insulin सीमा से अधिक बढ़ने लगता है। नतीजतन, brain का हाइपोथैलेमस वाला हिस्सा जल्दी active हो जाता है और heart रोग का कारण बन जाती है।

ज्यादा sugar दांतों को भी नुकसान पहुंचाती है। दैनिक calorie में sugar का हिस्सा 10% से ज्यादा रहने पर दांतों में सडन की problem बढ़ जाती है। न्यूकैसल विश्वविद्यालय में nutrition and oral health के professor पाउला मोनीहीन कहते है, ‘हम जितनी कम चीनी खाते है, दांतों में सड़न का खतरा उतना ही कम होता है।‘

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक report का निष्कर्ष है कि sugar का सेवन सीधे तौर पर मोटापे के लिए भले ही जिम्मेदार न हो, पर जो लोग इसका ज्यादा सेवन करते है, उनके मोटे होने की आशंका निश्चित रूप से ज्यादा  होती है। एम्सटर्डम में स्वास्थ्य सेवा के प्रमुख पॉल वैन ज्यादा मात्रा में sugar के सेवन को शराब और तम्बाकू की तरह का ही नशा करार देते है। research बताते है कि जिन्हें मधुमेह नही है, उनमे sugar के जरिये आया मोटापा body के कई तरह के मेटाबोलिक व् hormonal बदलाव का कारण बढ़ जाता है और पैन्क्रियाज की कोशिकाएं निष्क्रिय होने लगती है। जाहिर है, यह मधुमेह को दावत देने जैसा है।

जब हम sugar खाते है तो हमारा liver इसके fructose को fat में बदल देता है। कुछ fat तो बाहर निकल जाती है, पर कुछ हिस्सा liver में ही रह जाता है। समय के साथ यह fat ज्यादा बढ़ जाए तो नॉन अल्कोहोलिक लीवर सिरोसिस और liver cancer का कारण बन सकता है। research यह भी कहते है कि जो sugar अधिक खाते है, उनमें दूसरे प्रकार के cancer विकसित होने की आशंका भी अधिक होती है। sugar skin रोगों का कारण भी बन सकती है और memory पर भी असर डाल सकती है।

Problem मीठा नही, चीनी है

दिलचस्प है कि मुंह मीठा करने वाली चीजों में sugar जितनी नुकसानदेह है, उतनी कोई और चीज नही है। आखिर ऐसा क्यों है? असल में इसका रहस्य sugar बनाने के प्रक्रिया में छिपा है। गन्ने के रस को संरक्षित करने से लेकर उसे सफेद sugar तक ले आने की प्रक्रिया में जिन chemical का इस्तेमाल होता है, वे वास्तव में body के लिए नुकसानदेह है और इसमें मौजूद पोषक तत्वों को लगभग समाप्त कर देते है। इनसेक्टीसाइड के रूप में प्रयोग किया जाने वाला फार्मेल्डीहाईड उच्च रक्त चाप, धमनियों में सिकुड़न, skin रोगों व् cancer से लेकर अस्थमा तक की वजह बन सकता है। सल्फर डाई ऑक्साइड से allergy और skin रोग होते है। कास्टिक सोडा और फास्फोरिक एसिड जैसे chemical कोलाइटिस, गैस्ट्राइटिस और टांसिलाइटिस जैसे रोगों की सौगात दे सकते है। सफेद sugar या चीनी में महज कार्बोहाइड्रेट भर बचा रह जाता है। चीनी का fructose मुंह में पहुंचते ही calorie की मात्रा तो काफी दे देता है, लेकिन इसके संतुलन के लिए fiber और कई दूसरे जिन पोषक तत्वों की जरूरत होती है, वे body को बिलकुल नही मिल पाते। नतीया यह अतिरिक्त calorie heart पर भारी पड़ती है। एक चम्मच चीनी में लगभग 50 calorie होती है।

WHO के मानकों के हिसाब से इसका अर्थ हुआ कि यदि एक महिला को रोजाना औसतन 1800 calorie की जरूरत होती हो तो उसे sugar से मिलने वाली calorie 10% यानी 180 से अधिक नही होनी चाहिए। स्पष्ट है कि एक दिन में साढ़े तीन चम्मच से ज्यादा चीनी खाने की आदत रोगों को न्योता देने जैसा है। इसके विपरीत गन्ने के ताजे रस या इससे बने गुड़ में calcium, phosphorus, potassium, iron और विभिन्न तरह के दूसरे खनिज भरपूर मात्रा में होते है, जो body के लिए फायदेमंद है।

कितनी हो मात्रा

एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए अपने आहार में  चीनी की कितनी मात्रा रखे, इस पर researcher की अलग-अलग राय है। sugar की कुछ मात्रा fruits और डेयरी product के naturally स्रोतों से भी body को मिलती है। इन सबको ध्यान में रखते हुए american heart association का सुझाव है कि एक सामान्य पुरुष को रोजाना 36 gram और महिला को 25 gram से अधिक sugar नही लेनी चाहिए। एक साल से कम उम्र के बच्चों को, जब वे ठोस आहार ग्रहण करना शुरू कर दे तो ही देना शुरू करना चाहिए।



                                       Spices में छिपी Health







Friday, November 11, 2016

Investments in Small Savings

Investments in small savings
छोटी बचत में निवेश

केवल आसान या आकर्षक return देखकर निवेश का फैसला करना आपके लिए घाटे का सौदा हो सकता है। निवेश करते समय return, उसपर लगने वाले tax और महंगाई दर की compare में वास्तविक या अंतिम return कितना मिलता है यह देखना बेहद जरूरी है। छोटी बचत में इसका important और भी बढ़ जाता है। ऐसा करके आप अपने निवेश पर ज्यादा फायदा उठा सकते है।

महंगाई के कारण Return

August में खुदरा दर महंगाई 5% के करीब रही। आपको यदि किसी निवेश पर 10% return मिल रहा है और आप 10% आयकर वाले स्लैंब की श्रेणी में आते है तो ऐसे में निवेश से return पर सेस सहित 10.33% आयकर काटकर आपको 9% के करीब return मिला। जब 5%  महंगाई दर को घटाते है तो वास्तविक return महज 4% मिलता है। ऐसे में निवेश से पहले महंगाई दर को नजरंदाज नही करना चाहिए।

RD पर Return

वर्तमान में 5 साल की recurring deposit(RD) के निवेश पर 7.40% ब्याज मिल रहा है। ऐसे में अगर आप पांच साल के लिए RD में अपनी धनराशि का निवेश करते है तो आपका वास्तविक return कुछ और ही होगा। मान लीजिये आप 10.33% tax स्लैब में आते है तो ऐसे में आकलन के बाद return घटकर 6.64% हो जायेगा। इसके बाद जब आप इसमें से 5% महंगाई दर को घटाकर देखेंगे तो आपका अंतिम return महज 1.64% ही रह जायेगा।

PPF ज्यादा फायदेमंद

public provident fund(PPF) में निवेश अन्य छोटी बचत योजनाओं के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। इस पर तीन स्तरों पर tax छूट है। वर्तमान में PPF में 8.10% ब्याज मिल रहा है। ऐसे में अगर आप मिले हुए return की राशि में 5% महंगाई दर को घटाएंगे तो आपका PPF पर 3.10% अंतिम return मिलेगा। PPF में न्यूनतम 500 रूपये प्रतिमाह और अधिकतम सालाना 1.50 लाख का निवेश किया जा सकता है। PPF खाते की अवधि 15 साल होती है।

किसान विकास पत्र

किसान विकास पत्र में निवेश पर अभी 7.80% ब्याज मिल रहा है। ऐसे में अगर आप 10% वाले tax स्लैब के दायरे में आते है तो किसान विकास पत्र के तहत मिलने वाला return tax काट लेने के बाद 7.01% रह जाता है और जब इसमें 5% महंगाई दर को घटाते है तो आपका वास्तविक return 2.01% ही रह जाता है।

बेटियों को ऊँचा ब्याज

सुकन्या समृद्धि योजना के तहत निवेश की गई राशि पर वर्तमान समय में 8.60% ब्याज मिलता है। इसपर भी तीन स्तरों पर tax छूट है। छोटी बचत की इस योजना से मिले return पर भी 5% महंगाई दर को घटाने पर इसपर अंतिम return 3.60% मिलेगा।

सावधि जमा कितना फायदेमंद

post office में फ़िलहाल 5 साल के लिए fixed deposit (FD) कराने के एवज में 7.90% ब्याज का प्रावधान है। ऐसे में 10% tax स्लैब के दायरे में आने के तहत अगर आप 5 साल के लिए अपनी धनराशि को सावधि जमा में निवेश करते है तो सेस सहित 10.33% tax कटने के बाद आपका return घटकर 7.09% हो जाता है। इसके अलावा जब आप इस return में 5% महंगाई दर को घटा देते है तो आपका FD पर वास्तविक return 2.09% रह जाता है।

राष्ट्रीय बचत पत्र

राष्ट्रीय बचत योजना में निवेश पर फ़िलहाल 8.10% का ब्याज मिल रहा है। अगर आप 10% tax स्लैब के दायरे में है और राष्ट्रीय बचत योजना में अपने धन का निवेश करते है तो आपका return tax कटने के बाद 7.27% रह जाता है। अब जब इसमें 5% महंगाई को घटाते है, राष्ट्रीय बचत पत्र पर आपका असल return 2.27% मिल पाता है।

Senior Citizen बचत योजना

बुजुर्गो के लिए मौजूद senior citizen बचत योजना में वर्तमान में 8.60% ब्याज मिलने का प्रावधान है। ऐसे में अगर कोई senior citizen की सालाना आय 10% tax स्लैब के दायरे में आती है तो इसपर योजना में मिलने वाले return में भी फर्क देखा जा सकता है। अगर कोई senior citizen इस योजना में धनराशि लगाते है तो सेस सहित 10.33% tax के बाद निवेश पर return घटकर 7.22% रह जाता है। जब इस return में 5% महंगाई दर को भी घटाया जाता है तो senior citizen को अंतिम return महज 2.72% मिलता है।



                                 Mutual Fund: कम जोखिम में ज्यादा Return









Tuesday, November 8, 2016

Motivational Story


वर्तमान क्षण का महत्व

तलवारबाजी में कुशल एक योद्दा था। एक बार उसने नौकर को अपनी पत्नी के साथ देख लिया। वहां के परम्परा के अनुसार, उसने नौकर को तलवार दी और युद्द की चुनौती दी, ‘आज या तो तुम या मैं।‘

नौकर को तो तलवार पकडनी भी नही आती थी। वह बोला, ‘स्वामी मैं आपका सम्मान करता हूँ कि आप मुझे जैसे नौकर को ये अवसर दे रहे है। पर मैं तलवार चलाना नही जानता। मुझे कुछ समय दीजिये, ताकि मैं किसी के पास जाकर कुछ सीख संकू।

योद्दा ने कहा, ‘ठीक है। जितना भी समय लो। मैं प्रतीक्षा करूंगा।‘

वह एक अन्य योद्दा के पास गया। उसने कहा, ‘तुम वर्षो तक अभ्यास करोगो तो भी कुछ नही होगा। तुम्हारा स्वामी सर्वश्रेष्ठ तलवारबाज है। मेरी सलाह है कि यही लड़ाई का सही समय है।

नौकर बोला, ‘मैं आपके पास सलाह के लिए आया हूँ और आप कह रहे है, जा मर जा।

योद्दा ने कहा, ‘हां, क्योंकि एक ही चीज निश्चित है-तुम्हारी मृत्यु। इसके अलावा तुम्हारे पास खोने के लिए कुछ नही है। पर तुम्हारे स्वामी को कई चीजें दांव पर है- पत्नी, पद प्रतिष्ठा और वह एक बड़ा जमींदार भी है। वह अपनी पूर्णता में नही होगा, पर तुम हो सकते हो। तुम्हें होना ही पड़ेगा- जिस एक क्षण के लिए भी तुम्हारा ध्यान भटकेगा, वही आखिरी क्षण होगा। किसी और नियम-अनुशासन के बारे में फ़िलहाल मत सोचो। तलवार लो और युद्द करो। नौकर लौट गया।

मालिक ने कहा, ‘इतनी जल्दी सब सीख लिया?’ नौकर जोर से बोला, ‘कुछ सीखना नही है। मैं युद्द के लिए तैयार हूँ।‘

योद्दा को विश्वास नही हो रहा था कि ऐसा क्या जादू हो गया है। वह घर से बाहर आया तो नौकर ने नियमों के अनुसार सिर झुकाया। उसके बाद नौकर ने तलवार चलानी शुरू कर दी।

मालिक हक्का-बक्का था। एक expert की नजर में कोई व्यक्ति जहां तलवार चलाता है, नौकर वहां नही चला रहा था। और वह जहां तलवार चलाता था, वहां कोई expert सोच नही सकता था। जल्द ही योद्दा के कदम पीछे होने लगे। नौकर में थोड़ा और साहस आ गया। नौकर बस तलवार चला रहा था, बिना यह जाने कि क्यों, क्या उद्देश्य है और वह कैसी तलवार चला रहा है। वह अपनी मौत के भय से भी बाहर आ चुका था। जल्द ही उसने मालिक को किनारे कर दिया।

अब मालिक को मृत्यु का डर सताने लगा। वह बोला, ‘रुको, मैं तुम्हें अपना सबकुछ देता हूँ। मैं अब सन्यास के रास्ते जा रहा हूँ। वह डर के मारे काँप रहा था। वह समझ नही पा रहा था कि आखिर नौकर में यह साहस कहां से आया? उसमें यह चित्त की एकाग्रता कैसे आयी?

लेकिन सच यही है कि ऐसी किसी भी खास स्थिति में किसी भी नियम-कायदे से अधिक उस स्थिति में होना, पूरी तरह वर्तमान को जीना, बहुत कुछ जाग्रत कर देने वाला होता है।






Sunday, November 6, 2016

समय ही नही मिलता

time

Do Not Have Time

समय नही है, बहुतों के लिए यह बहाना है। लेकिन यह सच भी है। हम सब यहाँ सीमित समय के लिए है और जानते भी नही कि कितना समय हमारे पास है। सही इस्तेमाल न करके हम इस समय को और भी कम कर देते है। कमी समय की नही, समय को समझने की है।

बचपन में इसे कई बात सुना-अकसर दुनिया के लोग time के चक्कर खाया करते है, पर कुछ ऐसे होते है, जो इतिहास बनाया करते है। बड़े होने पर बात समझ आने लगी। ज्यादातर लोग समय की कमी को कोसते हुए उसे पकड़ने की कोशिश में भागते हुए दिखे। जिन्होंने success की बुलंदियों को छुआ, उन्हें यही कहते सुना, ‘busiest men have the most leisure’ यानी व्यस्त रखने वालों के पास फुर्सत ही फुर्सत होती है। जाहिर है ऐसे लोगो की संख्या कम थी।

क्या आपको भी लगता है कि अपने कामों को पूरा का समय ही नही मिलता? अक्सर हडबडाहट में रहते है और पूरे दिन दौड़-भाग करने के बावजूद काम अधूरे ही रह जाते है? exercise करने के लिए समय नही होता? breakfast ढंग से नही कर पाते? बच्चों से मुलाकात नही हो पाती? और कुछ नया पढ़ने या सीखने की इच्छा तो इच्छा ही रह जाती है? Australia के पूर्व prime minister ‘जॉन हॉवर्डहर दिन एक घंटे पैदल ही चलते है। दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हों, वह ‘walk’ जरुर करते है। वह कहते है,’ मुझे जो करना है तो करना है। समय ही निकल ही जाता है। दिक्कत समय की नही, सोचने की होती है।

Management में पेरेटो रुल पर जोर दिया जाता है। इसे 80:20 नियम भी कहते है। इसके अनुसार हमारे 20% काम 80% नतीजे देते है। वही 80% काम कामो से केवल 20% ही नतीजे मिलते है। ऐसे में कामों को ढंग से पूरा करने का एकमात्र तरीका यही है कि आप 20% कामों को ढंग से पूरा करें और उन्हें ठीक से समय दें। ये 20% काम कौन से होगे? यह आपको तय करना है।

जो करना है  तो करना है

morning की शुरुआत जल्दी हो। एकसाथ बहुत सारे काम न करें। कुछ समय के लिए phone व् internet से दूर रहें। ढंग से योजना बनाएं। इन बातों को आपने कई बार पढ़ा होगा। ये भी जरूरी है, पर सबसे जरूरी है एक रूटीन का होना। example के लिए Microsoft के प्रमुख बिल गेट्स सोने से पहले book पढ़ते है। उनका कहना है,’भले ही देर हो जाए, मैं पढ़ता ही हूँ। इस कारण मैं काफी कुछ नया पढ़ पाता हूँ।

तेज नही प्रभावी

ऑलिवर बर्कमेन अपनी famous book ‘द एंटीडोटमें तेज काम करने से अधिक प्रभावी ढंग से काम करने पर जोर देते है। उनका मानना है,’ जब ध्यान केवल गति पर होता है तो खराब driving की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन जब अच्छी driving करते है तो अपने लक्ष्यों को पूरा करने के साथ दूसरों की भी मदद कर पाते है।खासकर team work जहां होता है, वहां हर स्तर पर काम को सही ढंग से करना मायने रखता है।

अपना-अपना समय

समय की अपनी गति होती है और हमारी अपनी। दोनों में तुलना की जरूरत ही नही है। हम समय से आगे या पीछे नही होते, बस अपनी-अपनी गति से अपने-अपने समय को जी रहे होते है। और अगर समय को भरपूर जी रहे है, तो न ही समय की कमी की complain रहती है और न समय की कमी आड़े आती है। भौतिकी के नियम के अनुसार, अपनी गति और समय से चलते हुए मंजिल पा लेते है। यानी सभी जरूरी काम हो जाते है। और अगर लगता है कि आधे-अधूरे कामों की लम्बी list है तो फिर जरूरत है खुद को थोड़ा ठीक तय करने की। अपनी हां और न को समझने की। इसके लिए अपनी प्रथमिकताये तय करें। खुद को मन से मजबूत बनाएं, ताकि ध्यान भटकाने वाले बहाव में न बहकर आप अपने समय को सार्थक कर सकें। 







Thursday, November 3, 2016

A Letter Incomplete Persistence

goal acheivement


अधूरी प्रतिबद्दता के नाम एक खत

मकसद है, दूरदर्शिता है और मंजिल तक कैसे पहुंचेगे, इसकी योजना भी। कमी होती है तो बस मन की, जो पूरी तरह लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्द नही होता। आधे अधूरे मन से काम करने की प्रवृति हमें सपनों से दूर कर देती है। कई नये मौकों का दम घोंट देती है।

आपका एक अच्छा friend होने के नाते मैं कुछ कड़वी बातें कहना चाहता हूँ। हाल में ये बातें मैंने अपने एक friend को लिखी हैं। यह खत है, जो हमारी प्रतिबद्दता के नाम है। वही प्रतिबद्दता, जो एकमात्र success की guarantee नही है, पर इसके बिना असफलता जरुर तय है। मैंने यही दोस्त को लिखा है... आपके लिए भी सही साबित होगा।

dear, मुझे कहना पड़ रहा है कि तुम पूरी तरह प्रतिबद्द नही हो। मैं चाहता हूँ कि तुम success हो। तुम्हारी योजनायें, व्यहवार में आयें। तुम वो काम छोड़ दो, जो बोझिल लगते हैं। वैसी जिन्दगी जियो, जैसी जीना चाहते हो। मैं तुम्हारी मदद भी करना चाहता हूँ, पर ऐसा करने से तुम मुझे रोक रहे हो.. क्योकिं तुम्हें देखकर मुझे कभी ये नही लगा कि तुम खुद के लिए ही समर्पित हो।
हर कदम पर एक सवाल खुद से पूछना जरूरी हो जाता है। क्या अपनी चीजों के लिए हमारी प्रतिबद्दता 100% है? कुछ नया शुरू करने के लिए तुम्हारे पास मकसद है, दूरदर्शिता है। तुम योजनायें बनाकर एक कदम आगे भी बढ़ते हो। लेकिन आगे क्या? क्या तुमने आगे के लिए जरूरी कदम उठायें? यही समर्पण की कमी तुम्हारे सपनों को बर्बाद कर रही है, dear.

नये मौकों को स्वागत करो

सुनो, हम सभी को संदेह होता है। struggle और रुकावटों से भरा होता है ये सफर। हम संदेहों से भी घिर जाते है। लगता है कि हमें अपने मकसद के बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है। यह भावना कभी खत्म भी नही होगी। जब कुछ नया शुरू करते है तो फैसला लेते समय कुछ दुविधाएं होती है। चूँकि दुविधाएं हमेशा रहेगी। तुम्हें किसी project, book लिखने का idea, business plan या किसी एक लक्ष्य या योजना से आगे बढ़कर अपने लिए समर्पित होने की जरूरत है। पूरी तरह से।
तुम्हें खुद पर उस स्तर पर विश्वास करने की जरूरत है, जो किसी हाल में कम नही हो सकता। तुम्हें लगता होगा कि तुम तो पहले से ऐसे हो। पर क्या ये सच है? या तुम ग्लानि से भर गये हो कि तुमने नये अवसर का रास्ता खुद के लिए बंद कर दिया है? जब तुम्हे कोई आमंत्रण मिलता है तो तुम मन ही मन उसकी उपेक्षा करने लगते हो? या तुम किसी अजनबी से मिलते हो तो उससे आगे contact रखने के मौकों को खत्म कर देते हो, क्योंकि तुम्हे comfort zone रास आ गया है
जब आप अपने प्रति समर्पित नही होते है तो आपके पाठक, संभावित ग्राहक, पुराने क्लाइंट्स आपकी इस कमी को भांप लेते है। और यह कहना गलत नही होगा कि किसी ऐसे person पर भरोसा करना किसी के लिए मुश्किल होगा, जो खुद के लिए  ही समर्पित नही है।

क्या है तुम्हारी प्राथमिकता

पता है, दूसरे क्या चाहते है? उन्हें कोई ऐसा चाहिए, जिसकी प्राथमिकता वे हों। जो लगातार उनकी उम्मीदों वे हों। जो लगातार उनकी उम्मीदों पर खरा उतरें। जो business को जिम्मेदारी के साथ निभाए। जब आप खुद के प्रति समर्पित नही होते तो अपनी जिम्मेदारियां ठीक से नही निभा पाते  और दूसरों के प्रति भी समर्पित नही हो पाते। यही तुम्हें समझना है।

जब हम प्रतिबद्द नही होते तो बहाने बनाते हैं। अपने निर्धारित कामों से बचने की कोशिश करते है। काम की समय सीमा न नजदीक होती है तो काम को नजरंदाज करते है, खुद को छुपा लेना चाहते है और फिर कहते है- अब जो होगा, कल देखा जायेगा। किसी दोस्त के साथ coffee date पर जाना था, पर हमेशा की तरह लेट होते है। उस दोस्त को जवाब नही देते, जिसने ‘hello’ बोलने के लिए phone किया था। हो सकता है कि आप थके हों, मूड ठीक न हो या किसी परेशानी में हों। पर ऐसा हमेशा नही होता। हो सकता है कि friend को कोई जरूरत हो। यूँ भी हमें अपनी प्राथमिकताएं बदलने के लिए तैयार रहना पड़ता है।

खुद के लिए खड़ा होना सीखें

खुद के लिए फैसले लेना और फिर उनका सम्मान करना तुम्हें सीखना होगा। जो खुद के लिए लड़ नही सकता, उसके लिए कोई नही लड़ेगा। जब आप अपनी राय सबके सामने रखते है तो लोग आप पर भरोसा करते है। आपका समर्थन करते है। वे आपको आगे बढ़ाने में मदद भी करते है। लेकिन आपमें ही आत्मविश्वास में कमी है तो वे ऐसा नही कर पायेंगे। आपकी चाल, आपके शब्द, आपके काम करने का ढंग यह दिखा देता है कि आप खुद के प्रति प्रतिबद्द नही है। किसी क्लाइंट के साथ meeting रद्द करना आसानी से बता देता है कि उससे मिलना आपकी प्राथमिकताओं में नही है।

तुम अपनी प्राथमिकता हो

तुम कब पूरी तरह से अपने लिए प्रतिबद्द होने जा रहे हो, जिससे उस दोस्त, उस साथी, उस क्लाइंट के साथ प्रतिबद्द हो सको, जो तुम्हारे साथ समय बिताने को आतुर है? सच है कि खुद के प्रति समर्पण के बिना जितना भी आगे जाएँ, लड़ने की इच्छा कम होती जाएगी।

अंत में, मै आपको success होते देखना चाहता हूँ। समृद्द होते हुए देखना चाहता हूँ। मैं हमेशा आपके लिए यही चाहूँगा।



 इस article के writer ‘डेव उर्सिलोहै, जो रोड आइलैंड में yoga teacher, writer, creative entrepreneur और blogger. मानते है कि दूसरों के प्रति प्रेम स्व की अभिव्यक्ति है।



                                                 विश्वास की दुनिया