Wednesday, October 5, 2016

Motivational Article


कैसे मिलेगी कामयाबी

एक बार एक युवा सुकरात के पास पहुंचा और कामयाबी का मंत्र पूछने लगा। सुकरात ने उसे अगले दिन नदी किनारे मिलने को कहा। अगले दिन दोनों तय समय पर मिले और नदी में प्रवेश करने लगे। जब पानी गले तक आ गया तो सुकरात ने आश्चर्यजनक तरीके से उस युवा का मुंह पानी के नीचे दबा दिया। युवा पानी से मुंह बाहर निकालने के लिए छटपटाने लगा, लेकिन सुकरात काफी मजबूती से उस लड़के को पकड़े रहे। जब लड़के का शरीर नीला पड़ने लगा, तब सुकरात ने उसका मुंह पानी से बाहर निकाला। तब उस लड़के की जान में जान आई और उसने लगभग हाँफते हुए एक लम्बी सांस् ली। सुकरात ने पूछा,’जब तुम पानी के अंदर थे सबसे ज्यादा तुम क्या चाहते थे?’ लड़के ने जवाब दिया,’साँसें।‘ तब सुकरात ने कहा, ‘यही कामयाबी का मंत्र है। सांसों की तरह जब तुम कामयाबी भी शिद्दत से चाहोगे तो वह कामयाबी तुम्हें जरुर मिलेगी।‘

गौर करे

workplace पर कामयाबी हासिल करने के लिए लक्ष्य तय होना सबसे जरूरी है। नेपोलियन ने कहा है,’जब इंसान का मस्तिष्क ने कहा है,’ जब इंसान का मस्तिष्क किसी अवधारणा को विकसित कर सकता है और उस पर विश्वास कर सकता है तो दिमाग भी उसको हासिल कर सकता है।‘ लक्ष्य हासिल करने की इच्छा होना सफलता का शुरूआती कदम है। लक्ष्य तय करने के बाद उसे हासिल करने के लिए नियमित रूप से कड़ी मेहनत भी जरूरी है। एक important बात भी है कि कामयाबी की कोई समय-सीमा नही होती, पूरे धैर्य के साथ अपने काम पर focus करें और positivity रवैया बनाये रखें। कई बार लक्ष्य हासिल करने में चूक भी होती है, लेकिन उसे सबक मानकर नये सिरे से संघर्ष करना चाहिए।










Saturday, October 1, 2016

Professional Life में दायरा बढ़ाने से मिलेंगे मौके

opportunities in professional life

Meet Expanding Opportunities In Professional Life

आज के दौर में अच्छे अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपनी कार्यकुशलता के बारे में बताना बेहद जरूरी है। इसके लिए professional समूहों में अपनी भागेदारी सुनिश्चित करें। social media पर नियमित update कर लोगो को अपनी मौजूदगी का एहसास कराएँ। networking से जुड़ी कुछ अहम बातें-

professional लोगो से मेल-जोल कर अपना दायरा बढ़ाने में आप कितने माहिर है? क्या आप पहली बार मिल रहे professionals से स्वाभाविक रूप से सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बातचीत कर पाने में सक्षम है?अगर आप इसमें खुद को बेहतर नही मानते तो मायूस न हों। networking की कला विकसित कर आप अपने इस कमजोर पक्ष को मजबूत कर future में मिलने वाले अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकते हैं।

अगर आप शर्मीले स्वभाव के है और networking करने में असहज महसूस करते है तो रणनीति बनाकर आप इस मुश्किल को हल कर सकते है। सबसे पहले आप एक योजना तैयार करें कि दूसरे professional से आप किस बारे में बातचीत करेगे। इससे आप तनावग्रस्त नही होगे और नये व्यक्ति से सार्थक बातचीत करने में भी आपको आसानी होगी। इन उपायों पर भी विचार करें-

अभ्यास करें: शुरुआत ऐसे अवसरों से करें, जहां जोखिम की गुंजाइश न के बराबर हो। अपने comfort zone से बाहर निकलें और नये लोगो से मेल-जोल बढ़ाएं। networking को रोजमर्रा की जिन्दगी का हिस्सा बनाएं।

योजना बनाएं: पहली बार मिल रहे लोगो से पूछे जा सकने वाले सवालों की एक सूची बना लें। किसी problem या important subject पर विमर्श के जरिये आप बातचीत के दरवाजे खोल सकते है।

तय करे अपने लक्ष्य: अपनी अगली meeting के लिए लक्ष्य तय कर लें, मसलन आपको पांच नये लोगो से बात करनी है। इसमें आपको दो लोग तो काम के मिल ही जायेगे, जिन्हें आपसे बात करके मजा आएगा या जो आपके काम आ सकते है। यहाँ मुद्दा सिर्फ important लोगो से मिलने का नही है। कोई भी नया व्यक्ति आपके लिए important साबित हो सकता है, इसलिए जुड़ने का सिलसिला जारी रखें। जब एक बार आप अपना लक्ष्य तय कर लें, तो उसे पाने के तरीकों पर काम करना शुरू कर दें।

अच्छे श्रोता बनें: अच्छे श्रोता बमुश्किल मिलते हैं। networking सिर्फ अपनी marketing करना भर नही है। अच्छे सवाल पूछना और दूसरों की बातें ध्यानपूर्वक सुनना भी जरूरी है। आमतौर पर ज्यादातर लोग वैसा ही सोचते है जैसा कि आप सोच रहे होते है। आपकी तरफ से बातचीत शुरू होने पर मुमकिन है कि दूसरा व्यक्ति यह सोचकर खुश हो कि आपने पहल की।

नकार देने के डर से बाहर आयें: ज्यादातर लोग यह सोचते है कि नया व्यक्ति उनके विचारों को ख़ारिज न कर दे, उन्हें सिरे से नकार न दे। इस डर को भीतर से निकाल दें। खुलकर अपने विचार जाहिर करें और अपनी प्रेरणाओं के बारे में बताएं।

Online जुड़ने के उपायों पर विचार करें: social media और दूसरे online communication माध्यमों के जरिये अंतरमुखी लोग भी आसानी से दूसरे लोगो के साथ contact स्थापित कर सकते है। इन अनौपचारिक platform से आप दूसरे professional की गतिविधियों पर नजर रख अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं।

क्यों जरूरी है Networking

ernst and young में हाल ही में प्रकाशित एक study में networking को core business skill का हिस्सा माना गया। इस study के अनुसार चार में से एक professional networking करता ही नही है, वही 65% professionals सिर्फ व्यक्तिगत रूप से ही networking करना पसंद करते है। यानी social media पर दिनभर मसरूफ रहने और linked-in पर हजारों लोगो से बारे में जानने के बावजूद हम में से ज्यादातर लोगो से व्यक्तिगत रूप से जुड़ना पसंद करते है।

सिर्फ मेहनत करने से आप शायद उस मुकाम तक न पहुंच पायें, जहां तक पहुंचने का आप सपना देखते है। अगर आप अपनी क्षमताओं से वाकिफ है और अपने वर्तमान से संतुष्ट नही है तो networking आपको आपके गंतव्य तक पहुँचाने में important भूमिका निभाती है। यह एक तरह से professional रिश्ते विकसित करने की कला है। अच्छी job पाने की यह सबसे बेहतर रणनीति है। networking की professional life का एक अभिन्न हिस्सा बनाएं। यह आपके लिए रोजाना चाय-कॉफ़ी पीने जितना important होना चाहिए।

बड़े काम की Networking

office के employee द्वारा refer किये गये आज भी भर्ती का सबसे बड़ा हिस्सा है। खुद को इतना सक्षम बनाएं कि office में नई vacancy के बारे में सूचना सार्वजनिक होने से पहले आपको अपने network के जरिये मिल जाएँ।

समूह विकसित करें

ऐसा माना जाता है कि आप किसी व्यक्ति से 6 degree ही दूर होते है। यानी ज्यादातर लोग ऐसे व्यक्ति के बारे में जानते है, जिसके बारे में आप जानना चाहते है। ‘how too be a power connector’ के writer जूडी रॉबीनेट के अनुसार एक व्यक्ति आमतौर पर 632 लोगो को जानता है, जो अपने आप में काफी बड़ा समूह है। अपने जैसे लोगो का एक समूह विकसित करें और समय-समय पर उनसे सूचनाओं और जानकारियों का आदान-प्रदान करें।

तीन की तरकीब

1-  दूसरे व्यक्ति की बातों में स्वाभाविक दिलचस्पी लें।

2-  अपनी योग्ताओं और talent के बारे में अन्य professionals से बात करें।

3-  नियमित रूप से जुड़े रहने के लिए creative तरीकों पर विचार करें।

कुछ Important Tips

1-  रोजाना अपने comfort zone से कम से कम एक बार बाहर जाने का प्रयास करें।

2-  किसी परिचित professional के साथ ऐसे लोगो से मिलें, जिनसे जुड़ने पर दायरा बढ़ाने की संभावना हो।

3-  दूसरे के सामने छवि खराब होने की चिंता छोड़े। यह डर सबके मन में होता है। नये लोगो से मिलते समय उन्हें उचित सम्मान दें और उनकी बातचीत में दिलचस्पी लें।

4-  किसी अन्य की मदद की बात करके भी आप नये व्यक्ति से जुड़ सकते है। नये सामाजिक परिवेश में असहज महसूस करने वाले को इससे अपनी ओर से ध्यान हटाने में मदद मिलती है। दूसरा व्यक्ति भी इस बात से खुश होता है कि वह किसी के काम आ सकता है।


5-  अंतरमुखी लोग अक्सर विस्तार से चर्चा करने की इच्छा रखते है। ऐसे लोग संक्षिप्त बातचीत के बजाय ज्यादा अर्थपूर्ण बातचीत कर सकते है। कामकाज से इतर विचारपूर्ण सवाल पूछें। बातचीत के दौरान ऐसी छोटी-छोटी चीजों पर बात करें, जिन पर विस्तार में बातचीत करना संभव हो। 


  


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Wednesday, September 28, 2016

डायबिटीज को कम करने के लिए पांच व्यायाम

control of diabetes

Five Exercises to Reduce Diabetes

नियमित व्यायाम के फायदों से हम सब वाकिफ है, फिर भी व्यायाम बहुत कम लोगो की lifestyle का हिस्सा बन पाता है। diabetes पीड़ितों के लिए medicine और खानपान के साथ कौन से व्यायाम रहते है फायदेमंद आईये जानते है-

विभिन्न research, diabetes को control में रखने में व्यायाम को भूमिका को accept करते है। नियमित व्यायाम न केवल activity बढ़ाता है, बल्कि टाइप-2 diabetes को पूरी तरह control रखने में भी मदद कर सकता है। सही व्यायाम blood में sugar की ज्यादा मात्रा होने के बावजूद कई problem को बढ़ने से रोक देता है। व्यायाम शुरू करने से पहले अपने doctor से परामर्श जरुर करें। diabetes के मरीज की आयु व् sugar की स्थिति के अलावा दिल की सेहत भी मायने रखती है। इसी आधार पर हर किसी की जरूरत के अनुरूप व्यायाम की सलाह दी जाती है। एक सप्ताह में कम से कम 200 से 250 minute aerobics व् अन्य व्यायाम करें।

क्या-क्या है व्यायाम के फायदे

1-  दिल से जुड़ी बीमारियाँ व् heart stroke का खतरा कम होता है।

2-  नियमित रूप से व्यायाम करने से नीद अच्छी आती है।

3-  tension से लड़ने में मदद मिलती है।

4-  हानिकारक cholesterol और रक्तचाप कम होता है।

5-  दैनिक कार्यो के लिए पर्याप्त energy मिलती है।

6-  diabetes के मरीजों के लिए अपना weight control में रखना जरूरी होता है। नियमित व्यायाम से यह संभव है।

7-  blood में sugar के बढ़े हुए स्तर से body का रक्तचाप प्रभावित होता है। नियमित व्यायाम से रक्तचाप बेहतर होता है और blood पुरे body में आसानी से पहुंच पाता है।

ये पांच व्यायाम करेगे मदद

Walking: टाइप-2 diabetes से निबटने में नियमित टहलने को सबसे उपयोगी माना जाता है। सप्ताह में कम से कम 250 minute जरुर टहलें। इसके लिए सप्ताह में छह दिन 40 से 45 minute तक आपको टहलना होगा। office में भी active रहने की कोशिश करें। हर दो घंटे पर पांच minute जरुर टहलें।

Weight Training: weight training मांशपेशियों को मजबूत बनाती है। टाइप-2 diabetes के मरीजों के लिए मजबूत मांशपेशियां बहुत जरूरी होती है। अपने diabetes management plan के तहत सप्ताह में पांच दिन तीन किलो तक के weight से पांच से दस minute weight training करें।

योगासन: नियमित रूप से योगासन करने से fat कम होती है, insulin control में रहता है और तंत्रिका तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। योगासन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसे किसी भी time कर सकते है।

Cycling: नियमित रूप से cycling करने से दिल मजबूत बनता है और फेफड़े बेहतर तरीके से काम कर पाते है। cycling चलाने से body के विभिन्न हिस्सों में रक्तसंचार बेहतर होता है और weight को control रखने में भी मदद मिलती है।

तैराकी: diabetes के मरीजों में खासतौर पर पैर की ओर रक्तसंचार कम हो जाता है। तैराकी में टहलने या jogging की तरह पैरों पर ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नही पड़ती और पूरे body का  व्यायाम भी हो जाता है।









Sunday, September 25, 2016

घुटने का दर्द धीमा न कर दे चाल

knee pain
 Knee pain, slow running will not make

युवाओं में घुटनों के दर्द के मामले तेजी से बढ़ रहे है। सही जाँच व् उपचार में देरी का नतीजा होता है कि हल्का मांसपेशीय दर्द बढ़कर घुटने, जांघ व् कूल्हे की movement पर असर डालने लगता है।

तीस के age के करीब की एक school teacher है। घर और काम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हुई वह बेहद व्यस्त रहती है। वह जानती है कि सेहतमंद और fit रहना उनके लिए कितना जरूरी है, बावजूद इसके व्यायाम के लिए समय निकालना उनके लिए मुश्किल होता है। व्यायाम की भरपाई के तौर पर उन्होंने कुछ समय पहले खुद को अधिक active बनाये रखने का फैसला किया, जिसके चलते वह lift की जगह सीढियों का इस्तेमाल करने लगी और रिक्शा की जगह पैदल घर और बाज़ार जाने लगी। वह तीसरी मंजिल पर रहती है। शुरुआत में सीढियां चढ़ने में थकान होती थी, पर habit हो जाने के बाद अब problem नही होती।

लेकिन एक माह बाद ही उन्हें सीढियां उतरते हुए सीधे पैर के घुटने में सामने के हिस्से में कुछ परेशानी महसूस होने लगी, पर उन्होंने ज्यादा ध्यान नही दिया। करीब एक सप्ताह गुजरने के बाद यह परेशानी हल्के pain में बदल गयी। धीरे-धीरे सीढियां चढ़ते हुए भी पैरों में pain होने लगा। doctor ने इसे घुटने के सामने वाले हिस्से का pain बताया, जिसे medical language में पेटेलोफीमोरल पेन सिंड्रोम/ एंटीरियर नी पेन या फिर कॉन्ड्रोमलेसिया पटेला कहते है। doctor ने उन्हें कुछ दर्द निवारक medicine लेने को कहा है। साथ ही सीढियां चढ़ने-उतरने से बचने की सलाह दी है। pain दोबारा न हो, इसलिए मांशपेशियों को मजबूत बनाने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के पास जाने की सलाह भी दी है।

Pain का कारण

जांघ की हड्डी को femur, जोड़ की मुख्य बड़ी हड्डी को tibia और नी कैप को पटेला कहते है। जांघ की हड्डी और नी कैप से मिलकर जो जोड़ बनता है, उसे पेटेलोफीमोरल जॉइंट कहते है। लगभग 20% मरीज पेटेलोफीमोरल पेन सिंड्रोम (PFPS) के शिकार होते है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह problem अधिक होती है। यह pain नी कैप और जांघ की हड्डी के बीच अधिक घर्षण होने के कारण होता है। इस वजह से पंजे की एड़ियो का पिछला हिस्सा, टखना,कुल्हे का उपरी हिस्सा,पेडू और पैरो के मध्य में pain बढ़ जाता है। नी कैप के जांघ की हड्डी से टकराने के कई कारण होते है।

PFPS के अधिक होने के मुख्य कारण पैर की मांशपेशियों का प्रभावित होना है। ये मांशपेशियां एक तरह से हमारे body का engine room होता है, जिनकी activity के कारण ही हमारी activity बनी रहती है। चलने से लेकर दौड़ने जैसी हर गतिविधि इन्ही मांशपेशियों पर काफी वजन पड़ता है, जिससे कई बार ये मांशपेशियां चोटिल हो जाती है व् उनमे खिंचाव आ जाता है। उनका लचीलापन भी कम होने लगता है। मांशपेशियों में अकड़न बढने से दर्द बढ़ने लगता है और मांशपेशियों की कुशलता कम होने लगती है। घुटने के जोड़ में pain भी होता है। आमतौर पर जांघ के भीतरी हिस्से की मांशपेशियों की तुलना में बाहरी मांशपेशियां अधिक कड़ी हो जाती है। इस असंतुलन के कारण नी कैप बाहर की ओर उठने लगती है और चलते समय जांघ वाली हड्डी से टकराती है। इसी वजह से नी कैप और जांघ की हड्डी के बीच swelling और pain बढ़ जाता है।

उपचार का तरीका

फिजियोथेरेपिस्ट pain में आराम देने के लिए acupressure या cross friction मसाज तकनीक का इस्तेमाल करते है, जिसमें pain वाले हिस्से पर थोड़ा जोर देकर pressure दिया जाता है। इसके अलावा मालिश से भी काफी आराम मिलता है। नियमित मालिश से मांशपेशियों की अकड़न वाले हिस्से में लचीलापन आ जाता है। कुछ आराम आ जाने पर मांशपेशियों में मजबूती लाने के लिए stretching कराई जाती है। अपने doctor और फिजियोथेरेपिस्ट से आप घर में किये जाने वाले exercise से राहत पा सकते है।

आमतौर पर आराम आने में 12 से 16 सप्ताह का समय लग जाता है। घर में exercise, doctor द्वारा की गयी जाँच और फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा अपनाई गयी विभिन्न तकनीक और मसाज कूल्हे और टखने के लचीलापन को बढ़ा देते है। स्थायी निजात पाने के लिए नियमित exercise करना ही सबसे बेहतर उपाय है। ऐसा करने पर घुटने के आसपास की सभी मांशपेशियां मजबूत हो जाती हैं।

ये Exercise देगे मांशपेशियों के दर्द से आराम

इलियोटिबियल बैंड को दे मजबूती

इलियोटिबियल बैंड की कूल्हे, जांघ के भीतरी हिस्से की मांशपेशियों का समूह समझा जा सकता है। इस हिस्से में होने वाले दर्द में राहत पाने के लिए फोम रोलिंग एक प्रभावी तरीका है। इसके लिए आपको एक tube की जरूरत होगी, जिसे फोम रोलर कहते है। यह आसानी से आपको किसी आसपास के sports store से मिल जायेगा। फोम रोलर पर इस तरह लेटें, जिससे आपके body का पूरा weight जांघ के बाहरी हिस्से पर रहे। जांघ के निचले हिस्से से शुरू कर रोलर को move करते हुए धीरे-धीरे उपरी हिस्से तक जाएँ। हर पैर से ऐसा पांच minute तक करें। लगातार pain वाली जगह पर इस तरह रोल करना मांशपेशियों को आराम पहुंचाएगा।

जांघ की सामने वाली मांशपेशियां

फोम रोलर पर इस तरह लेटे कि रोलर आपके दोनों घुटनों यानी नी कैप से थोड़ा उपर रहें। धीरे-धीरे उपर से नीचे और नीचे से उपर तक लायें। ऐसा 5 से 10 minute तक करें।

घुटने को लचीलापन बढायें

पेट के बल लेटें। पेट की मांशपेशियों को भीतर की ओर खीचे। एक घुटने को मोड़ते हुए पीछे की ओर ले जाएँ और पैर से पंजे को पकड़ते हुए एड़ी को कूल्हे पर टिकाने का प्रयास करें। 30 से 60 seconds तक इस मुद्रा में रहें। फिर इसे दूसरे पैर से दोहरायें। ऐसा तीन बार करें।

फोम रोलिंग, बाहरी कूल्हे के लिए

फोम रोलर पर इस तरह लेटे कि ये आपकी कूल्हे की हड्डी के पास हो। थोड़ा आगे और पीछे धीरे-धीरे move करें। हर तरफ से पांच minute ऐसा करें। इससे कूल्हे व् कमर दोनों की मांशपेशियों मजबूत बनेगी। दर्द कम होगा।


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Wednesday, September 21, 2016

Mutual Fund: कम जोखिम में ज्यादा Return

mutual funds

share में सीधे निवेश के मुकाबले mutual fund(MF) में जोखिम कम है। जबकि इसमें सावधि जमा(FD) एवं अन्य तय अवधि के निवेश option के तुलना में return ज्यादा मिलता है। पिछले तीन साल में equity fund की चुनिंदा scream में 28% से भी अधिक return मिला है। mutual fund में निवेश के कई option हैं जिसमें से निवेशक अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर चुनाव कर सकते है।

Equity Fund Return में सबसे आगे

इस fund की अधिकांश पूंजी share में निवेश की जाती है जिसकी वजह से इसमें return की सम्भावना बेहतर होती है। equity fund के तहत आने वाले large cap fund में पिछले तीन साल में 28.8% तक return मिला है। वही small and mid cap में 52.2% और equity linked saving scream (ELSS) में 31% जबकि index fund में 15.8% return मिला है। equity fund का दायरा बहुत बड़ा है और इसके तहत कई scream है जो निवेश और क्षेत्र के हिसाब बंटी हुई है। ELSS, focus fund, multi cap fund,large,small and mid cap fund सहित कई अन्य fund इसके तहत आते है।

Date Fund FD से ज्यादा फायदेमंद

इसकी पूंजी का अधिकांश हिस्सा सरकारी bond,corporate bond और तय अवधि वाले अन्य माध्यमों में निवेश किया जाता है। इस वजह से mutual fund की अन्य scream से date fund में जोखिम कम होता है। इससे निवेशकों की पूंजी डूबने का खतरा कम होता है। पिछले तीन साल में date fund में 12.4% तक return मिला है। वही इस अवधि में FD पर ब्याज आठ से 9% के करीब रहा है। date fund में छोटी अवधि के बजाय तीन से पांच साल की अवधि में return ज्यादा बेहतर मिला है। FD में 10 हजार रूपये से अधिक ब्याज पर tax लगता है। वही date fund को तीन साल बाद निकालने पर मंहगाई सूंचकांक के साथ फायदा लेने पर 20% capital gain tax की बचत होती है। FD पर हर साल 10% के हिसाब से स्रोत पर कर कटौती (TDS) हो जाती है। यदि आप आयकर श्रेणी में नही आते है तो TDS से बचने के लिए form-H भर के देना पड़ता है। date fund में इस तरह की परेशानी नही है।

Balanced Fund में दोहरा लाभ

पिछले तीन साल में इसमे 25% तक return मिला है। balanced fund की पूंजी का 65% हिस्सा share में और 35% हिस्सा सरकारी bond, corporate deposit सहित तय return वाले माध्यमों में निवेश किया जाता है। इसकी वजह से इसमें return और जोखिम के बीच संतुलन बना रहता है। जब share market में तेजी आती है तो balanced fund के 65% निवेश पर उसी के मुताबिक आकर्षक return मिलता है। वही गिरावट आने पर केवल उसी हिस्से पर नुकसान होता है लेकिन तय अवधि वाले हिस्से में निवेश की राशि पर मिलने वाले return से यह कुल नुकसान घट जाता है। वही equity fund की श्रेणी में नही आने के बावजूद भी इसपर tax की गणना share की तरह की जाती है। 65% राशि share में निवेश होने की वजह से इसे एक साल बाद बेचने पर लम्बी अवधि का पूंजीगत लाभ होता है। जबकि date fund में इसके लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। mutual fund company, balanced fund की share में निवेश की जाने वाली राशि से बड़ी company (large cap) और छोटी company (small cap) के share में निवेश करते है। बड़ी company  के प्रदर्शन में ज्यादा उतार-चढ़ाव नही होता है वही market में तेजी पर छोटी company का प्रदर्शन ज्यादा बेहतर रहता है। इसकी वजह से आकर्षक return मिलने की संभावना रहती है।

छोटी अवधि में Liquid Fund बेहतर

इसे money market fund भी कहा जाता है। इसके return में ब्याज दरों के अनुसार उतार-चढ़ाव आता रहता है। इस fund की अधिकांश पूंजी उन तय आय (fixed income) वाले माध्यमों में निवेश की जाती है जिनकी परिपक्वता अवधि एक साल से कम होती है।

कम अवधि के लिए पैसा लगाने की सुविधा की वजह से इसे छोटी अवधि के बेहतरीन निवेश option के तौर पर जाना जाता है। यह उन निवेशकों के लिए बेहतर माना जाता है जो किसी वजह से अपना पैसा बचत खाते में रखने के बजाय कही और रखने के साथ ही आकर्षक return भी चाहते है।

निवेश से पहले जरुर देखें Rating

mutual fund scream जब market में जारी की जाती है तो उसकी rating भी साथ आती है। AAA(triple A) rating सबसे सुरक्षित मानी जाती है। इसमे पूंजी डूबने का खतरा कम रहता है। rating से निवेश पर जोखिम का पता चलता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षो से ऐसा देखा गया है कि निवेश के समय जो rating थी वह एक साल बाद घट गयी। fund company ज्यादा return के लिए कई बार कम rating वाले निवेश माध्यमों में पूंजी लगा देती है। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि जब जारी करते समय किसी date fund की rating AAA है। लेकिन उसे पेश करने वाली company बाद में चलकर कम rating वाले निवेश माध्यमों में पूंजी लगाती है तो वैसे में निवेश निकालने में ही समझदारी है।

कितना फायदा

1-  52% तक return मिला equity fund में तीन साल में

2-  31% तक return दिया equity fund की ELSS ने

3-  25% तक return मिला balanced fund में

4-  12.4% तक का लाभ हुआ date fund में

5-  8.9% तक का फायदा हुआ liquid fund में