Sunday, September 18, 2016

Motivational Story


क्या ढूंढ रहे है आप?

रोहित और मोहित दोनों पांचवी कक्षा के student थे। दोनों अच्छे दोस्त थे। एक दिन छुट्टी के समय मोहित ने कहा –friend, ‘एक idea है। वों देखों, सामने तीन बकरियां चर रही है।‘

रोहित- इससे हमें क्या लेना-देना है?

मोहित- हम आज छुट्टी के बाद इन बकरियों को school में छोड़ देगे। कल सभी इन्हें खोजने में समय व्यर्थ करेगे और पढ़ाई नही होगी..

रोहित- पर बकरियां तो कुछ समय में मिल ही जाएँगी।

मोहित- हा हा हा, यही तो बात है, बस तुम देखते जाओ, मैं क्या करता हूँ!

जब सभी लोग चले गये तो वे दोनों उन बकरियों को पकड़ कर class के अंदर ले आये। मोहित बोला- अब मैं इन बकरियों पर number डाल देता हूँ। पहली बकरी पर number-1 दूसरी पर 2 और तीसरी पर 4.

ये क्या? तीसरी बकरी पर number 4 क्यों डाल दिया?- रोहित ने हैरानी से पूछा।

मोहित ने हंसते हुए कहा- यही तो बात है। कल सभी तीसरे number की बकरी को ढूंढेगे। और वो कभी मिलेगी नही।

अगले दिन दोनों समय से पहले school पहुंच गये। थोड़ी देर में school में बकरी होने का शोर मच गया। कोई चिल्ला रहा था- चार बकरियां है, पहली,दूसरी और चौथी तो मिल गई, बस तीसरी को ढूंढना बाकी है।

पूरा staff बकरी ढूंढने लगा। तीसरी बकरी ढूंढने का खूब प्रयास किया गया... पर बकरी तब मिलती, जब वो होती! school में सब हैरान- परेशान थे, सिवाय रोहित व् मोहित के। उन्होंने चालाकी से एक बकरी जो अदृश्य कर दी थी।


इस story को पढ़कर हल्की मुस्कान आना स्वाभाविक है। पर तीसरी बकरी दरअसल वो चीजें हैं, जिन्हें खोजने के लिए हम बेचैन है, पर वो हमें मिलती ही नही... क्योंकि वो होती ही नही। हम जो नही है, उसे पाने में लगे रहते है, पर ये भी तो हो सकता है कि वो चीज हो ही न!






Saturday, September 17, 2016

Taking things to Heart (बातों को दिल पर लेना)

  
किसी ने किसी की तारीफ़ की। आप चिढ़ जाते है कि आपकी बुराई की गयी है। दरअसल हम हर समय दुखी होने के लिए आतुर रहते है और अपने भीतरी घावों को भरने नही देते। क्या वाकई सब हमें दुःख पहुँचाने के लिए बैठे है? ऐसा तो नही कि सामने वाला अपने ही घाव सहला रहा हो!

‘तुम्हे नही कहा था। वो तो बस एक बात थी। तुम्हारी problem क्या है, सब बात अपने पर क्यों लेते हों?’ रोजमर्रा में कई बार ये बात आपने दूसरों को कही होगी, तो कुछ ने आपको भी। क्या वाकई यह हमारे अपने स्वभाव की दिक्कत होती है कि हम किसी भी बात को झट अपने उपर ले लेते है?

मान लीजिये किसी ने कहा- मूर्ख हो, ये भी नही जानते? हो सकता है कि वह व्यक्ति आपको जानता ही न हो, या वह शब्द उसकी habits में शुमार हो, या फिर वाकई वह आपको नीचा दिखाना चाहता हो। जानकर कहते है कि अगर आप बुरा मानते है तो कहीं न कही आप मानते है कि आप वैसे ही है। और सामने वाले ने आपकी कमजोरी को पहचान लिया है।

हम खुद से जैसी बातें करते है, हमारी प्रतिक्रियाएं वैसी ही हो जाती है। यही वजह है कि कुछ लोग किसी अनजान की भी छोटी सी बात पर आपा खो बैठते है। दरअसल यह हमारे अपने अभावों की बेचैनी होती है। जब कोई अपनी सफलता और सुखी जिन्दगी की बात करता है तो हम सोचते है कि वह हमें चिढ़ा रहा है। सही या गलत, जब हर बात को हम अपने उपर लेते है तो दूसरों के जहर को अपने अंदर जगह दे रहे होते हैं।

bestseller ‘the for agreement’ के writer और spiritual master ‘दॉन मिखेल रुइस कहते है,’ खुद को बहुत important समझना या हर चीज को अपने उपर लेना अतिस्वार्थी होने का लक्षण है। हमे लगता है कि अब कुछ ‘मेरे बारे में है। जबकि दूसरे जो करते है, वह आपके नही, अपने कारणों से करते है। वह उनकी राय, उनके अपने मन के समझौते होते है।‘

सवाल उठ सकता है कि सामने वाला वाकई जान कर चोट कर रहा हो, तब दुःख कैसे नही होगा? ओशो अपने लेख ‘you carry your wound’ में लिखते है,’अंहकार हमारी पूर्णता को घाव में बदल देता है। हर कोई केवल अपने घावों की रक्षा कर रहा होता है। किसी की बात सुनकर आप दुखी होते है, क्योकि आप दुखी होना चाहते है। जितना अहंकार कम होगा, उतने ही दुखी कम होगे।‘ महात्मा गांधी ने कहा है कि कोई भी मुझे अपमानित नही कर सकता।

न करें खुद को परेशान

1-  जिस व्यक्ति की बात से दुखी है, उसके साथ अपने सम्बन्ध को देखे। क्या उसे खुश रखना आपके लिए मायने रखता है?

2-  जिसने कहा, उसके भाव,स्थिति, सोच के ढंग और बोलने की सीमाओं को समझें। हो सकता है कि वे वैसे ही बात करता हो।

3-  तुरंत प्रतिक्रिया न दें। मन का एक कोना ऐसा जरुर रखें, जहां किसी दूसरे को प्रवेश की इजाजत न हो।

4-  स्थिति को समझे। हो सकता है कि उस बात का आपसे सम्बन्ध ही न हों। फिर भी कुछ शंका है तो सीधे तौर पर पूछ लें।

5-  शांत दिमाग से यह अवश्य सोचे कि स्थिति विशेष में आपके सीखने के लिए क्या है?

6-  खुद पर विश्वास करना सीखें। जितना खुद को समझेगे, उतना ही दूसरों की स्वीकृति की जरूरत कम होगी।

7-  अपने आसपास वालों की मदद करें, उनके प्रति उदारता बरतें। ऐसा करना आप में आत्मसम्मान की भावना को बढ़ाएगा।




                               When do not Mind (जब मन का नही मिलता !)



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Wednesday, September 14, 2016

When do not Mind (जब मन का नही मिलता !)

When do not mind

ऐसा क्यों होता है कि हमारा मन जिस चीज के लिए तैयार है, वह या तो हो नही पाता या फिर नतीजे ख़ुशी देने वाले नही होते? प्रयास करने के बाद भी लक्ष्य से दूर रह जाते है। ऐसा तो नही कि हम सोचते कुछ है और कर कुछ और रहे होते है?

यह सबसे ज्यादा खीझ करने वाली परिस्थितियां होती है, जब आप वास्तव में कुछ करना तथा पाना चाहते है, उसके लिए तैयार भी हो जाते है, तब पाते है कि इसके नतीजे संतुष्टि देने वाले नही है। एक उदाहरण लेते है, मान लीजिये आप स्नान कर रहे है, और नहा कर तुरंत बाहर निकलना चाहते है, लेकिन कुछ कारणों से निकल नही पाते। आप खुद से कहते है कि 10 minute में नहा कर बाहर निकल आयेंगे, लेकिन 45 minute में bathroom में ही बीत जाते है।

ऐसी परिस्थितियां कोई सामान्य नही है। इन्ही वजहों से alarm घड़ी में sleep/snooze button का आविष्कार किये गये। आईये कुछ संभावित कारणों की पड़ताल करते है कि क्यों हम मानसिक रूप से खुद को प्रेरित महसूस करते है और फिर भी लक्ष्य को प्राप्त नही कर पाते।

क्या आपके लक्ष्य आपकी Problem है?

नही। लक्ष्य problem नही है, बल्कि उनके बारे में हमारी समझ problem है। कुछ ऐसे आधुनिक मिथक है, जो motivation और लक्ष्यों से जोड़ दिए गये है। इनमें सबसे आम है कि अगर आपका कोई लक्ष्य है और आप इसे लिख लेते है, या इसकी success की परिकल्पना करते है तो यह किसी भी प्रकार से हासिल होगा। सिर्फ इसलिए कि हमने दिमाग को किसी चीज के लिए तैयार कर लिया है तो इसका अर्थ यह नही है कि ऐसा होगा ही। फिर भी कुछ लोग सोचते है कि किसी काम के लिए अपने मन को तैयार करना ही सबसे कठिन होता है।

अपने मन को किसी चीज के लिए तैयार करना, अक्सर आपको उसे स्थगित करने का बहाना दें देता है। कई लोगो के मामले में लक्ष्य को निर्धारित करना, उन्हें उसे क्रियान्वित न करने का एक बहाना दे देता है।

इसे कैसे ठीक करें?: वैसे ही लक्ष्य निर्धारित करें, जिन पर आप अभी काम शुरू करने जा रहे है। अगर चाहते है कि कोई काम पूरा हो तो उसे अभी करने का फैसला करें और अपने लक्ष्य उसी समय निर्धारित करें। अगर समय थोड़ा है तो वही लक्ष्य निर्धारित करें, जो उतने समय में हासिल कर सकते है।

क्या अनुशासन Problem है?

कई लोगो में अनुशासन और उनके motivation में गहरा और सीधा सम्बन्ध होता है। जिन लोगो स्व-अनुशासन की problem होती है, वे काम से जी चुराते है और किसी कार्य को बड़ी आसानी से छोड़ देते है। problem यह है कि ज्यादातर कामों को पूरा करने के लिए स्व-अनुशासन की जरूरत होती है। कई लोगो में काम को नजरअंदाज करने की भावना बड़ी बलवती होती है तो कई लोग आसान और ज्यादा सुविधाजनक रास्तों को चुनते है।

इसे कैसे ठीक करे?:

अगर आप अक्सर पाते है कि आपकी mind इच्छुक है, लेकिन नतीजे संतोषजनक नही है तो आपको जिस चीज की आवश्यकता है, वह है स्व-अनुशासन में सुधार। कुछ लोगो के लिए अपने comfort जोन से बाहर निकलना दूसरों के मुकाबले कठिन होता है और इसकी बड़ी वजह उनका स्व-अनुशासन। पर काम कीजिये। लक्ष्य तुरंत हासिल भले ही न हों, आप खुद को अपने लक्ष्य की दिशा में बढ़ते हुए पाएंगे।

क्या Negative Habits Problem हैं?

वास्तव में negative habits problem नही है। habits ही अपने आप में एक problem है। आप में प्रेरणा की कमी इसलिए नही है कि आपको ज्यादा खाने, धुम्रपान करने या व्यर्थ में इधर-उधर घुमने की आदत है। habits किसी काम में आपकी मदद नही करती, लेकिन यह आपकी सोच में बाधा भी नही खड़ी करती। यह आपकी निष्क्रियता, अनिर्णय और देर करने की प्रवृत्तियाँ है, जो आपके motivation प्रयासों पर विराम लगा देती है, जो हमें ख़राब परिणाम की ओर ले जाता है। अपनी habits बदलिए और स्वयं को असुविधाजनक स्थितियों की ओर धकेलिए, जहां वैसी गर्मजोशी और सुविधा महसूस नही होती, जो आपको सामान्य हालात में होती है। हो सकता है कि देर करने, अनिर्णय और निष्क्रियता की habits को छोड़ने में उतनी ही मुश्किलें आयें, जितनी drugs से छुटकारा पाने में आती है।

इसे कैसे ठीक करें?: इसका सबसे बड़ा समाधान है practice. लक्ष्य निर्धारित करने और उसे प्राप्त करने का आनन्द महसूस करने के लिए स्वयं को प्रेरित करना, ऐसी चीज नही है, जो जन्म के साथ प्राप्त होती है। यह एक ऐसी चीज है, जिसे अनेक लोग बढ़ती उम्र के साथ सीखते है। लेकिन कोई सबक कितनी अच्छी तरह सीखता है, यह व्यक्ति-व्यक्ति पर depend करता है। आप धीरे-धीरे पुरानी आदत को बदलने के लिए एक नई habits अपनाएँ, जो अक्सर किसी आदत को छोड़ देने की कोशिश करने के मुकाबले ज्यादा आसान होता है। यही वजह है कि शराब के आदी को coffee की habits डाली जाती है। ज्यादा उत्साहजनक बात यह है कि जितना आप सीखते है, लक्ष्य को निर्धारित करने और उसे प्राप्त करने का आनन्द महसूस करना उतना ही आसान होता जाता है। ठीक वैसे ही, जैसे bike चलाने में होता है।



# इस article के writer ‘जोश हिड्स’ जो motivation writer और businessman है। ‘Why perfect timing is myth’ और ‘it is your life’, ‘live big’, उनकी famous books है।



                                               www.getmotivation.com





                         अपनी Problem का आप हैं समाधान






Sunday, September 11, 2016

Interview में Failed, आगे success कैसे !

interview

job के लिए interview प्रक्रिया के बाद वह समय काफी हताश करता है, जब पता चलता है कि selection नही हुआ। अधिकतर लोग इसके कारणों पर विचार किये बगैर आधे-अधूरे मन से दोबारा आवेदन की प्रक्रिया में जुट जाते है। किसी भी interview में असफलता के बाद आपकी तैयारी कैसी होनी चाहिए?

अपने हाल में ही ऐसे पद के लिए interview दिया था, जिसे आप सचमुच पाना चाहते थे। आप जानते है कि आपने interview के दौरान बहुत अच्छा प्रदर्शन नही किया। जब आपको पता चलता है कि वह job किसी और को मिल गई तो आप बहुत हतोत्साहित हो जाते है। परन्तु एक ख़राब interview का अर्थ नही होता कि आप बिलकुल ही असफल हो गये और आपके लिए job के सभी दरवाजे बंद हो गये है। यहाँ आत्ममंथन करते हुए अपनी सोच और कार्य प्रणाली में सुधार लाया जाना बेहद जरूरी है।

बनाएं रखें Self-Confidence

आपको कितनी ही बार interview में असफलता क्यों न मिली हो, कोशिश करनी होगी कि इसका असर आपके self-confidence पर नही पड़े, अन्यथा आपको खुद ही अपनी काबिलियत पर शक होने लगेगा। अगर job की तलाश में निकले है और interview दे रहे है तो इस सत्य को हमेशा ध्यान में रखकर चलें कि कभी भी असफलता का सामना करना पड़ सकता है। आपका interview चाहे जितना अच्छा रहा हो, लेकिन यह आशंका हमेशा रहती है कि कोई और प्रत्याशी आपसे बाजी मार न ले जाए, आवश्यक नही है कि वह आपसे बेहतर हो। interview भी एक वनडे क्रिकेट मैच की तरह होता है। आपका प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर भी depend करता है कि आपका वह दिन कैसा रहा।

असफलता के कारण

कई बार तो आपके interview में असफल होने के ऐसे कारण भी होते है, जिनसे आपका या आपके personality का कोई सम्बन्ध नही होता। जैसे आप जिस पद के लिए interview देने गये है, उसके लिए पहले से ही किसी उम्मीदवार को तय कर लिया गया हो या नियोक्ता को ऐसा महसूस हो जाए कि आप इस job को एक सीढ़ी की तरह उपयोग करने वाले हैं या आप इस पद में ज्यादा दिनों तक काम नही करेंगे। बहरहाल, कारण कोई भी हो इससे पहले कि interview की कोई असफलता आपके self-confidence को बुरी तरह से हिला कर रख दे, जरूरी है कि future के लिए आप कुछ ऐसी तैयारी कर लें, जो आगे आपके success होने की सम्भावना बढ़ा दे।

अपनी कमियों को सुधारें

आप एक बार मन ही मन पूरे interview के दौरान की गयी सारी छोटी-बड़ी घटनाओं का स्मरण करने की कोशिश करें और अंदाजा लगायें कि क्या कुछ गलती हुई या क्या-क्या problem आई, जिनका हल नही निकल पाया। एक-एक करके सारे प्रश्नों के उत्तर देने के तरीके और interviewer के साथ आपकी बातचीत की समीक्षा करें। अपनी कर्मियों की पहचान करने के बाद सोचें अगले interview में आप इन्हे कैसे सुधार पायेंगे या बातों को बेहतर ढंग से कैसे प्रस्तुत कर पायेंगे। अगर आपका उत्तर बहुत संक्षिप्त था तो आप उसे कैसे कुछ उपयोगी जानकारियों के साथ थोड़ा विस्तार के साथ समझा सकेंगे। अगर आप उत्तर देते वक्त ज्यादा लापरवाह थे तो आपको ज्यादा professional ढंग से और ज्यादा संजीदगी से उत्तर देने का अभ्यास करना चाहिए।

Feedback करेगा मदद

अगर possible हो तो interview के बाद किसी और दिन interviewer से मुलाकात करने की कोशिश करें। उनसे सलाह लें कि आप कैसे स्वयं के प्रदर्शन को future के साक्षात्कारों के लिए पहले से बेहतर कर सकते है। हालाँकि यह थोड़ा मुश्किल काम है, फिर भी आप पहले interviewer को विश्वास दिलाये कि उनका feedback आपके लिए important है। आप इसके लिए email के माध्यम से भी contact कर सकते है। interviewer की सलाहें आपके अंदर की ऐसी कर्मियों की पहचान करने में काफी सहायक होगी, जो आपको ज्ञात नही है। आप उनकी सलाह को उदाहरण के साथ पूछ कर समझने की कोशिश करें और प्राप्त जानकारी को अगले interview के लिए अपने दृष्टिकोण में शामिल करने की कोशिश करें। सलाह लेते वक्त ध्यान रखें interviewer को ऐसा बिलकुल न लगे कि आप अपनी असफलता का दोष उसके उपर मढ़ रहे है। मान लीजिये वह आपकी कोई ऐसी कमी बता रहा हो जो आपके अंदर हो ही नही तो आप सफाई देने के बजाय चुपचाप सुन लें, उसे ये एहसास होना चाहिए कि आप उससे कुछ सीखने आये है। योग्यता के साथ-साथ व्यक्ति का रवैया या उसकी प्रवृति भी बहुत important होती है, इसलिए स्वयं की कमी जानने और उसे सुधार करने करने की आपकी इच्छा कभी-कभी नियोक्ता को आपको job देने के लिए भी प्रेरित कर सकती है।

Workshop में भाग लें

कई coaching institute और college job training के लिए workshop का आयोजन कर के बताते है कि interview में कैसे सफलता पाई जाए। अपने क्षेत्र में ऐसे institute का पता लगा कर उनकी workshop में भाग लेना चाहिए। किसी अपने से ज्यादा अनुभवी दोस्त या मेंटर के साथ interview के लिए practice करें इससे आपको अपने जवाबों को मजबूत बनाने, स्वयं को अधिक पेशेवर दिखाने, ज्यादा प्रभावशाली उम्मीदवार के रूप में स्वयं को पेश करने सहायता मिलेगी। आप किसी HR professional की भी सलाह ले सकते हैं।

Future की तैयारी

future में होने वाले interview की प्रभावी रूप से तैयारी करें। शायद आपका पहला interview इसलिए अच्छा नही हुआ हो कि आपने जिस company के लिए interview दिया था, उसके बारे में आपने कोई research नही की थी या उससे सम्बंधित कोई उत्तर उचित तरीके से नही दे पाए थे। यह भी हो सकता है कि interview के दौरान पूछे जाने वाले कुछ standard question के उत्तर के बारे में आपने तैयारी नही की होगी। प्रश्नों के उत्तर देते वक्त आपके उत्तर से भी कुछ प्रश्न निकल सकते है। आपको उसके लिए भी तैयार रहना होगा। interview के दौरान पूछे जाने वाले कुछ standard प्रश्न होते ही है। इनकी तैयारी आपको पहले से कर लेनी चाहिए। कुछ ऐसे ही प्रश्न:

1-  अपने बारे में बताएं?

2-  आपकी कमजोरी/ताकत क्या है?

3-  आप अपनी मौजूदा job क्यों छोड़ना चाहते है?

4-  अपनी मौजूदा job के बारे में बताएं, आपका काम क्या है?

5-  आप ये company क्यों join करना चाहते है?

6-  हम आपका चयन क्यों करें?

7-  अब तक की आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही है?

8-  क्या आप कोई प्रश्न पूछना चाहते है?





Wednesday, September 7, 2016

Monsoon में रखें Health का ध्यान

monsoon

मानसूनी बीमारियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। डेंगू,मलेरिया,डायरिया व् टाइफॉइड के मामले सामने आने शुरू हो गये है। विशेषज्ञों के अनुसार सेहतमंद रहना है तो संतुलित भोजन खाएं और उबला हुआ पानी पियें।

मानसून में होने वाले रोगों को हवा, पानी और मच्छर से होने वाले रोगों की श्रेणियों में बांटा जाता है। मानसून सम्बन्धी रोग उन लोगो को अधिक होते है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गो को इस सम्बन्ध में खास एहतियात रखने की जरूरत होती है

पानी से होने वाले रोग

Gastroenteritis: बार-बार डायरिया होना gastroenteritis का प्रमुख लक्षण है। 24 घंटे के भीतर तीन या उससे अधिक बार पतले दस्त होने के अलावा इस स्थिति में उलटी आने, चक्कर आने, पेट में मरोड़, सिरदर्द व् तेज बुखार के लक्षण भी देखने को मिलते है।

 

Jaundice(पीलिया): पीलिया में skin पर सफेदी व् आँखों में पीलापन दिखायी देता है। इस स्थिति में पेशाब व् मल का रंग गहरा पीला हो जाता है।

 

उपाय: उबला हुआ या क्लोरीनेटेड पानी पियें। ताजे fruits व् vegetables व् घर में बना हुआ खाना खाएं। सड़क किनारे बिकने वाले खुले में रखे खाद्य पदार्थो को खाने से परहेज करें। ठंडे पानी की रेहड़ियों, रेस्तरां व् होटल इत्यादि में इस्तेमाल की जाने वाली बर्फ भी infection का प्रमुख कारण है। उबला हुआ या बोतल बंद पानी ही पियें। खाने से पहले व् शौचालय जाने के बाद हाथ जरुर धोएं।

 

मच्छर से होने वाली बीमारियाँ

 

डेंगू, मलेरिया व् चिकनगुनियाँ: इसमे 103 डिग्री तक तेज बुखार होने के साथ शरीर दर्द, उलटी व् सिरदर्द के लक्षण देखने को मिलते है। इस वजह से आँखों में दर्द, skin पर लाल चकते, खारिश और मांशपेशियों में कमजोरी भी होती है। मलेरिया में ठंड व् ठिठुरन होती है और चिकनगुनियाँ में swelling व् अकड़न के अलावा जोड़ो व् मांशपेशियों में असहनीय दर्द होता है।


उपाय: घर के आसपास बारिश का पानी collect न होने दे। सुबह और शाम के समय घर के दरवाजे व् खिड़कियाँ बंद रखे। spray,coils,मच्छर से बचाने वाली cream,liquids या मच्छरदानी का नियमित इस्तेमाल करें।

 

हवा से होने वाले रोग

 

जुकाम व् इंफ्लूएंजा: बारिश के साथ सामान्य जुकाम व् इंफ्लूएंजा का infection तेजी से फैलता है। आमतौर पर infection के contact में आने के दो से तीन दिन बाद सामान्य जुकाम के लक्षण नजर आते है। गले में खराश,सांस लेने में परेशानी, साइनस में swelling, छींक, खांसी,सिरदर्द,बुखार, मांशपेशियों में दर्द, पसीना आना व् हर समय थकावट देखने को मिलती है।

 

उपाय: छींक व् खांसते समय मुंह कवर करें। रुमाल की जगह tissue paper का इस्तेमाल करें। tissue paper को इस्तेमाल के तुरंत बाद dustbin में डाल दें। साफ-सफाई का खास ध्यान दें।

 

मानसून में इनसे करें दोस्ती

 

तुलसी: रोज तुलसी की पत्तियां खाने से viral fever,cough व् जुकाम से लड़ने की शारीरिक क्षमता बढ़ती है। आप तुलसी की पत्तियों को सलाद में मिलाकर खा सकते है। इन्हें धोकर गुड़ व् चीनी के साथ लेना भी अच्छा रहता है।

 

लहसुन: body की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने और toxin को body से बाहर का रास्ता दिखाने में लहसुन को महारत हासिल है। लहसुन को सूखा भून कर खा सकते है और सब्जी व् सूप में डाल सकते है।

 

कड़वे व् खट्टे खाद्य पदार्थ: करेला व् मेथी आदि स्वाद में भले ही कड़वे हों, पर सेहत के लिए फायदेमंद है। इसी तरह इस मौसम में खट्टे खाद्य पदार्थो को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपनी diet का हिस्सा बनाएं। body की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढेंगी।

 

आम: मानसून के दौरान अपनी diet में आम को भरपूर मात्रा में शामिल करें। यह anti-oxidant से भरपूर होता है और रोगों से लड़ने में मदद करता है। आम skin सम्बन्धी परेशानियों को दूर करता है और पाचन भी ठीक रहता है।

 

 

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                              क्यों रहता है Digestion(हाजमा) सुस्त