Wednesday, August 10, 2016

Skin पर Monsoon का असर

monsoon skin effect

मानसून की फुहारें राहत लाती है तो कई तरह के skin रोग भी। गंदा पानी, पसीना न सूखना, काफी देर तक गीला रहना और अधिक नमी कई तरह की skin से जुड़ी परेशानियाँ खड़ी कर देते है। हालाँकि कुछ बातों का ध्यान रख कर इनसे आसानी से बचा जा सकता है।

दाद

यह कई तरह के फफूंद की वजह से होता है, जिनमें डर्मेटोफाइटस और yeast प्रमुख है। फफूंद मृत केरोटिन में पनपता है और धीरे-धीरे body के नम स्थानों में फैलता जाता है, जैसे पैर की एड़ी, नाख़ून, जननांग और छाती वाला भाग।

क्या करें

skin की नमी मुक्त रखें। ढीले व् हल्के सूती कपड़े पहने। doctor के बताये गये anti fungal powder व् cream का ही इस्तेमाल करें। देर तक गीला न रहें।

घरेलू उपाय

नीम की पत्तियों के उबले पानी से दाद को साफ करें। चक्रमर्द के बीजों को गंधक व् मक्खन में मिला कर लगाएं। दाद पर छह भाग नारियल तेल और एक भाग गंधक घोट कर मलहम बना लगायें।

फोड़े-फुंसी

दूषित पानी व् गंदगी में पनपे Bactria के संपर्क में आने से फोड़े-फुंसिया हो जाते है। बच्चों के अलावा diabetes, cancer या aids के पीड़ितों में इनकी problem अधिक होती है।

क्या करें

skin को साफ सुधरा रखें। रोज स्नान करें। चोट लगी जगह को गंदे पानी व् गंदगी से बचाएं। problem serious होने पर doctor को अवश्य दिखाएँ। antiseptic साबुन व् lotion का इस्तेमाल करें।

घरेलू उपाय

नीम की पत्तियों को उबाल कर इसके पानी से नहायें।

खुजली यानी रैशेज

खुजली के कई कारण हो सकते है। कई medicine की गर्मी भी खुजली कर देती है। लेकिन इस मौसम में इसका कारण impure पानी और Bactria का infection होता है। कब्ज होने पर भी खुजली की problem होने लगती है।

क्या करें

बारिश में भीगने से बचें। skin साफ व् सूखी रखें। साफ व् सूखे कपड़े पहनें। antiseptic साबुन व् lotion ही लगायें।

घरेलू उपाय

दशांग लेप, जो आर्युवेद की 10 जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है, खुजली से राहत देता है। नीम का तेल और उसका लेप भी आराम देता है। गंधक मिले गुनगुने पानी में नहाना भी फायदेमंद है।

घमौरियां

गर्मी व् उमस के समय होने वाली problem है। इससे skin पर छोटी-छोटी और लाल लाल फुंसियाँ निकलती है, जिनमे से कई बार द्रव भी निकलता है। खुजली भी बहुत होती है।

क्या करें

अधिक मसालेदार खाने से बचें। बारिश के पानी में स्नान करने से आराम मिलता है। प्रिकली हीट powder लगायें। बर्फ को 5-7 minute तक रगड़ने से भी आराम मिलता है।

घरेलू उपाय

नीम की पत्तियां उबाल कर तैयार किये गये पानी में स्नान करें। सुबह के समय नीम की 4-5 कच्ची पत्तियां चबाने से भी बहुत जल्दी आराम आने लगता है।

एथलीट फुट

पैर की उँगलियों के बीच उष्ण और नम रहने वाले हिस्से में कवक के कारण होने वाला संक्रमण। इससे पैर की skin भुरभुरी और लाल हो जाती है। खुजली, जलन, skin फटने के साथ-साथ फफोले भी पड़ सकते है।

क्या करें

बारिश में पैरों को भीगने से बचाएं। साबुन और पानी से नियमित सफाई करें। पैर की उंगलियों को सूखा रखें। antiseptic powder लगाते रहें।

घरेलू उपाय

इसका इलाज कवक-रोधी medicine है। zinc oxide का उपयोग भी किया जा सकता है। टी ट्री तेल लगाना भी आराम पहुंचाता है।





                                         Skin की सेहत पर होने वाले Problem








Monday, August 8, 2016

Skin की सेहत पर होने वाले Problem

skin problem

skin body का सबसे बड़ा अंग है और बाहरी कारको के खिलाफ सबसे पहला सुरक्षा कवच भी। अक्सर जितना ध्यान हम skin की खूबसूरती पर देते है, उतना उसकी सेहत पर नही देते। सच यह है कि कई बीमारियों का सबसे पहला संकेत हमारी skin ही देती है। skin को कैसे रखे सेहतमंद आये जानते है...

skin की देखभाल से जुड़े तमाम तरह के products जितने आज है, उतने पहले कभी नही रहे। बावजूद इसके skin सम्बन्धी problem कम नही हुई है। धूप, दूषित हवा व् पानी की पहली मार झेलने वाली हमारी skin कितनी ही बार हमारी अपनी लापरवाही का शिकार होती है। अस्वस्थ lifestyle, tension की अधिकता, hormones असंतुलन, chemical product का अधिक इस्तेमाल व् कई तरह के संक्रमण हमारी skin को नुकसान पहुंचाते रहते है और skin असमय बूढी होने लगती है।

Skin देती है रोगों का संकेत

skin को जानना व् समझना बेहद जरूरी है। body में swelling व् pain का सबसे पहला लक्षण skin पर ही दिखता है। आमतौर पर skin की problem को हम body की अंदरूनी problem से जोड़ कर नही देखते। खासतौर पर पेट व् आंतो के हिस्से में जलन व् swelling, पेट में गडबडी चेहरे पर swelling व् लाली के तौर पर दिखती है। skin पर रैशेज पड़ना रूमेटाइड का एक प्रमुख लक्षण माना जाता है। skin की विभिन्न problem के पीछे hormones में बदलाव होना बड़ी वजह होता है। इसी तरह मुंहासे अधिक होना body में insulin के स्राव की अधिकता दिखाता है।

आँखों के आसपास काले घेरे पेट की problem को दर्शाते है तो skin का नीला पड़ना body में hemoglobin की कमी का सूचक है। thyroid या रजोनिवृत्ति के समय भी चेहरे पर झाइयां बढ़ने लगती है। गला, पलक, छाती,कांख, पेट व् जांघ के निचले हिस्से पर होने वाले मस्से का एक बड़ा कारण रक्त शर्करा का बढ़ना व् hormonal असंतुलन होता है। body में vitamins की कमी भी skin को खुश्क कर देती है और skin के कसाव को कम करती है।

Skin को असमय बूढ़ा होना

समय से पहले skin की उम्रदराज दिखना यानी झुरियां, काले धब्बे, skin का ढीलापन, चेहरे पर महीन रेखाओं का उभरना skin की आम problem है। इनका मुख्य कारण lifestyle से जुडी अनियमितता है, जिसके कारण skin की खुद को ठीक करने की क्षमता कम हो जाती है। पौष्टिक आहार की कमी, tension की अधिकता और धुम्रपान skin में फ्री radicals को बढ़ा देते है, जिससे skin को नुकसान पहुंचता है। sugar की अधिकता भी skin को नुकसान पहुंचाती है।

क्या करें:

healthy lifestyle अपनाएँ। retinal based product न लगायें।

एग्जिमा

दाद, खाज, खुजली की जाति का एक रोग एग्जिमा भी है, जो ज्यादा कष्टकारी है। इसमे body में खासतौर पर चेहरा, हाथ, पैर, कान का पिछला हिस्सा व् कोहनी के हिस्से पर लाल निशान पड़ने लगते है, जिनमें खारिश भी होती है। इसका कारण body का कुछ खाद्य पदार्थो के प्रति संवेदनशील होना व् पेट सम्बन्धी गडबडी होती है। गलत खान-पान भी इसकी वजह है। इसमें छोटे-छोटे दाने भी निकलने लगते है।

क्या करें

संवेदनशील पदार्थो से दूर रहें। दानो को छीलें नही। देर तक स्नान न करें। साबुन का उपयोग न करें। रोग को ठीक करने के लिए doctor antibiotic medicine भी देते है। सूत्रनेति, कुंजल तथा जलनेति करना भी फायदा होता है। जैतून के तेल का इस्तेमाल करें। omega-3 oil से मसाज करें।

चेहरे पर मुंहासे

यह skin की सबसे आम problem है, जो चेहरे पर लाल दानों, ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और गाँठ के रूप में दिखती है। अधिक उत्तेजक व् मसालेदार भोजन करना, पोषक तत्वों की कमी व् hormonal असंतुलन के कारण ये होते है। खासतौर पर किशोरों में hormonal में बदलाव इसका प्रमुख कारण होता है। तैलीय त्वचा वालों में यह problem अधिक होती है। गलत खान-पान भी बड़ी वजह है।

क्या करें:

चेहरा साफ रखें। डर्मेटोलॉजिस्टि द्वारा बताये products का ही इस्तेमाल करें। दानो को छेड़े नही।

सोरायसिस

सोरायसिस skin की उपरी सतह का चर्म रोग है, जिसमें skin पर लाल spot बन जाते है। देखने में यह जख्म की तरह लगते है, जिनमें कई बार pain व् जोड़ के पास swelling भी देखने को मिलती है। आनुवांशिकता के अलावा पर्यावरण भी एक बड़ा कारण माना जाता है। पेट की गडबडी, immune system का अति active होना या भोजन का energy में परिवर्तित न होना भी वजह हो सकता है।

क्या करें


गले के संक्रमण से बचे। body की अंदरूनी सेहत का ध्यान रखे। vitamin A,E,D, omega-3 fatty acid body को अंदर से हील करता है। tension रहित रहें। 




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Friday, August 5, 2016

NPS( National Pension System) में निवेश कर पाए बेहतर Return

national pension system (nps)

युवा निवेशक सेवानिवृति योजना के नाम से झिझकते है। और शुरुआत में इसे कम महत्व देते है। जबकि इसकी शुरुआत पहले करने पर बाद में इसका ज्यादा फायदा उठा सकते है। national pension system(NPS), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और सार्वजनिक भविष्य निधि(PPF) सेवानिवृति के मद्देनजर निवेश के option है। लेकिन इसमे return के मामले में NPS ने ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है। और इसमे 14% तक return मिला है। pension fund नियामक PFRDA ने NPS को लेकर कई सुधार किये है जिसकी वजह से यह पहले से ज्यादा फायदेमंद और सुविधाजनक हो गया है।

क्या है NPS

NPS सेवानिवृति के मद्देनजर निवेश का option है। इसमे सालाना 6,000 रूपये जमा करना अनिवार्य है। इस राशि को आप 500 रूपये के हिसाब से 12 किस्तों में भी जमा कर सकते है। सामान्य स्थिति में इसमे जमा राशि का 60% हिस्सा 60 साल की उम्र पूरी होने पर ही निकाल सकते है। इसके बाद बची हुई राशि का दोबारा निवेश के लिए pension product खरीदना पड़ता है जिसके आधार पर आपको हर महीने pension मिलती है। हालाँकि PFRDA ने कुछ विशेष शर्तो के साथ 60 की उम्र से पहले भी आंशिक रूप से निकालने की छूट दी है। लेकिन उस स्थिति में भी 80% राशि का pension product खरीदना अनिवार्य है।

Return में आगे

EPF और PPF के मुकाबले NPS return के मामले में बहुत आगे है। EPF में 13 से 8.5% return मिलता है। वही NPS ने 14% return मिलता है। इसमे औसत return भी करीब 11% रहा जो EPF से ज्यादा है। वित्तीय जानकारों का कहना है कि NPS की राशि के कुछ हिस्से को market से जोड़ दिया जाता है। जिसकी वजह से उसपर ज्यादा return मिल रहा है। वही EPF या PPF की आंशिक राशि को market से जोड़ने की योजना का विरोध हो रहा है और अब तक इसपर कोई फैसला नही हो पाया है।

निवेश पर Tex छूट का लाभ

NPS में निवेश की राशि पर धारा 80C के तहत tax छूट मिलती है। मौजूदा समय में NPS में एक लाख रूपये तक निवेश पर tax छूट हासिल कर सकते है। हालाँकि सरकार ने बजट में धारा 80C के तहत मिलने वाली छूट का दायरा 50 हजार रूपये बढ़ाकर 1.50 लाख कर दिया है आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि NPS की निवेश राशि पर ही tax छूट मिलती है और इसके तहत सेवानिवृति के बाद मिलने वाली pension पर आयकर श्रेणी के हिसाब से tax लगता है।

कैसे करे निवेश

PFRDA ने आठ संस्थाओं को pension fund के management के लिए चुना है। इसमे SBI pension fund, reliance capital pension fund, LIC pension fund, Kotak mahindra pension fund, ICICI prudential pension fund management, बिड़ला सनलाइफ insurance, UTI retirement solutions और HDFC pension management को NPS का management दिया गया है। हालाँकि, निजी और सरकारी क्षेत्र के bank सहित गैर-बैंकिंग वित्तीय company NPS के लिए जमा स्वीकार करती है। लेकिन योजनायें pension fund प्रबंधको द्वारा ही जारी की जाती है। PFRDA ने central record keeping ( record रखने वाली) CRA के जरिये fund प्रबंधकों, NPA से जुड़ी अन्य agency पर करीब से नजर रखता है।

नया NPS ज्यादा आकर्षक

PFRDA ने NPS में एक विशेष तरह के खाता tier-2 account की सुविधा दी है। यह सामान्य NPS के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक है। इसमे अन्य बातें सामान्य NPS की तरह है। लेकिन इसमे से राशि निकालने की छूट है। इसमे खाता खुलवाते समय एक हजार रूपये जमा करना होगा और सालाना दो हजार रूपये न्यूनतम खातें में रखना होगा।

बंद NPS खाता कैसे शुरू करें

PFRDA ने NPS में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बंद पड़े खाते को दोबारा शुरू करने के लिए October 2014 में नये नियम जारी किये जो बेहद सुविधाजनक है। सामान्यत NPS ने 6,000 रूपये से कम जमा रहने पर खाता बंद हो जाता हैं। नये नियमों के मुताबिक महज 100 रूपये का शुल्क और वर्तमान साल के लिए 500 रूपये जमा कर बंद NPS खाते को दोबारा शुरू कर सकते है। वही tier-2 बंद खाते को महज 100 रूपये शुल्क के साथ दोबारा शुरू कर सकते है। इसके पहले NPS में सालाना 6,000 रूपये से कम जमा रहने पर जितने साल आपने उसमें जमा नही किया उसके हिसाब से 100 रूपये और उतने साल का न्यूनतम बकाये के साथ ही 500 रूपये वर्तमान साल के लिए शुल्क लगता था।



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Monday, August 1, 2016

कुछ भ्रांतियां जो हमें Meditation से रोकती है..

meditation

हम दिन-ब-दिन smart हो रहे है। इसलिए smartphone की तरह हमारी battery भी जल्दी खत्म हो जाती है। थोड़ा सा खुद को इस्तेमाल किया कि battery खत्म। नतीजा आलस, थकान और बोरियत। यह जानते हुए भी कि ध्यान रुपी charger से तन और मन की battery charge होती है, कुछ भ्रांतियां है, जो हमे ध्यान करने से रोकती है। आईये जानते है...

देर से होता है असर

यह सही है कि लम्बे समय के अभ्यास के बाद ध्यान करने की कुशलता बढ़ जाती है, पर body पर इसका सकारात्मक असर जल्द ही दिखाई देने लगता है। हॉवर्ड university और मेसाचुसेट्स जनरल hospital के एक संयुक्त study में आठ सप्ताह तक ध्यान के नियमित अभ्यास से मरीजों में बेचैनी, अनिद्रा, immune system, tension और रक्तचाप के स्तर पर सुधार देखने को मिला।

कठिन है Meditation

अधिकतर लोग ध्यान को जटिल मानकर इसे ऋषि-मुनियों तक सीमित करके देखते है, जबकि किसी अनुभवी मार्गदर्शक से सीखने के बाद यह एक सहज और मनोरंजक क्रिया बन जाती है। ओशो कहते है,’सहज मुद्रा में मौन बैठकर अपने विचारों के देखने से आसान काम कौन सा हो सकता है। अपने विचारो को रोके नही, उन्हें देखे। सिर्फ देखे, अच्छे-बुरे का लेबल न लगायें। यह किसी धर्म विशेष की नही, आंतरिक शांति को पाने की प्रक्रिया है। जब आप कहते है कि ‘मैं दिमाग नही हूँ केवल दर्शक हूँ, उस क्षण कई हैरान करने वाले अनुभव होते है।‘

दिमाग शांत नही होता

यदि कहा जाए कि आँखे बंद करके उछलते हुए किसी बन्दर को छोड़कर किसी भी चीज पर सोचें, तो मन बार-बार बन्दर की ओर ही भटकता है। विचार, ध्यान के दुश्मन नही है। आचार्य महाप्रज्ञ कहते है,’विचारों को आने से रोका ही नही जा सकता। ध्यान के दौरान विचार आने और उससे मुक्त होने की प्रक्रिया चलती रहती है। धीरे-धीरे अभ्यास के बाद विचार से मुक्त होने का space बढ़ जाता है। भटकते हुए मन को आप श्वास, किसी छवि या मंत्र का स्मरण कर पकड़ने की कोशिश करते है। मन, वचन और काया की एकरूपता ध्यान है। यदि ध्यान में पूरे समय मन भटकता है, तो भी मौन और काया की स्थिरता का लाभ मिलता है। आप अपने उन विचारों को देख पाते है, जिनसे अनजान थे। अपने अहं, क्रोध, लोभ या करुणा के भावों के देख पाना भी कम बड़ी उपलब्धि नही है।

कोई चमत्कार तो हुआ नही

आधुनिक गुरु दीपक चोपड़ा के अनुसार,’ अक्सर लोग complain करते है कि उन्हें कोई खास रंग या कोई मोहक छवि नही दिखी। कोई जादुई अनुभव नही हुआ। यह सही है कि ध्यान में कई तरह के अनुभव होते है, पर चमत्कारिक अनुभव ध्यान का उद्देश्य नही है। ध्यान आराम और सतर्कता का मेल है। ध्यान का असली अनुभव ध्यान के बाद होता है, जब रोज के तमाम कार्यो के बीच एक आंतरिक मौन, आनन्द व् स्थिरता हमारे साथ बने रहते है। ध्यान में इन बातों का ख्याल रखे-

बिना किसी अपेक्षा के ध्यान करे।

कई बार मन बेहद active होता है, तो कई बार तुरंत शांत हो जाता है। कई बार अच्छा लगता है, तो कई बार कुछ अनुभव नही होता। खुद को सहज रखें।

phone बंद कर दें। शांत वातावरण में ध्यान करे।

समय नही है

famous anchor ओप्रा विन्फ्री कहती है,’ ध्यान के लिए समय से अधिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। मैं हर रोज कम से कम एक बार 20 minute ट्रांसंडेटल मेडिटेशन करती हूँ। हममे खुद को recharge करने की अद्दुत शक्ति है। ध्यान से मन शांत और एकाग्र होता है। हमारी कार्यकुशलता बढ़ती है। और हम समय का बेहतर उपयोग कर पाते है।












Saturday, July 30, 2016

अनिश्चितता (Uncertainty) में Life को जीने का सलीका

Life in uncertainty

सुरक्षित दायरे से बाहर निकलना मुश्किल होता है। पर निश्चित को छोड़ने या छूट जाने का अर्थ यह नही कि हम अनिश्चितता की ओर जा रहे है। यह असीम ज्ञान और संभावनाओ की राह भी है, जिसे accept करना life जीने का सही सलीका है।

अपने medical career की शुरुआत में, मैं स्पष्ट रूप से यह जानता था कि क्या कर रहा हूँ। किस दिशा में आगे बढ़ रहा हूँ। मुझे medicine से प्यार था। मेरा future संभावनाओ से भरा हुआ हुआ था। मुझे पता था कि जिस महिला से मैं प्यार करता हूँ, उससे शादी करके america चला जाऊंगा। तब तक यह सोचा ही नही था कि life की अनिश्चितता क्या होती है और किस तरह यह एक व्यक्ति के life पर असर डाल सकती है।

विशेष तौर पर मैं यह सोचता था कि सुरक्षा मेरी मित्र है और अनिश्चितता दुश्मन। काश, आज की तरह उस समय भी मैं यह जानता कि अनिश्चितता में ज्ञान होता है, जो अदृष्ट दरवाजों को खोलता है और यही अज्ञात तत्व life को निरंतर नयापन दे सकता है। अधिकतर सभी की तरह मैं भी अप्रत्याशित घटनाओं और बदलाओं से बेचैन हो जाता था। मैं इस बात के लिए कतई तैयार नही था कि मेरी fellowship रोक दी जाएगी। या मेरी इच्छित medical विशेषज्ञता को अस्वीकार कर दिया जायेगा। या फिर मुझे मेरे life के संबल पत्नी और बच्चे से अलग होना पड़ेगा। या मुझे एक भारतीय होने के कारण अलग नजर से देखा जायेगा। बहुत वर्षो के बाद जब तन और मन के सम्बन्ध को समझा, तब जाना कि मैं खुद को उन मूर्खतापूर्ण और तीखे हमलों से कैसे बचा सकता था।

यह समझा जा सकता है कि मैं उन बुरी स्थितियों से निकलना चाहता था और मैंने स्थिरता को चुना। हालाँकि आज समझ सकता हूँ कि यह कितना घातक हो सकता था। अनिश्चितता के ज्ञान का पहला principle है कि हर चीज व् घटना के पीछे एक मकसद होता है। हालाँकि अब यह एक मुहावरा सा बन गया है, पर भारतीय वैदिक परम्परा में इसका गहराई से analysis किया गया है।
imagine करे कि आपके हाथ में एक अदृश्य धागा है, जिसे आपको आजीवन पकड़े रखना है। यह धागा आपकी life line है, जो आपको वहा ले जायेगा, जहां आपको सम्पूर्ण संतुष्टि हासिल करने के लिए जाने की जरूरत है। वहां नही, जहां आपको मन, आपके डर, आपकी अपेक्षाएं और आपकी असुरक्षा लेना जाना चाहते है। भारत में इस धागे को धर्म कहते है, जिसका अर्थ है, धारण करना। दुसरे शब्दों में, यह अदृश्य धागा भले ही नाजुक प्रतीत हो, यह आपको सर्वश्रेष्ठ दिशा की ओर ले जाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा। अदृश्य होने के कारण इसके रास्ते पर अप्रत्याशित व् आशातीत प्रतीत होते है, लेकिन जहां अनिश्चितता है, वहां ज्ञान भी छिपा होता है।

life जीने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है कि अनिश्चितताओं में छिपे ज्ञान को गले लगायें। पर यह बात तब नही पता थी जब मै 22 वर्ष का था। प्रश्न होगा कि यह कैसे किया जा सकता है? इसके लिए आप खुद को इन बातों से जोड़ें...

अपने दिल के जज्बात, life का सर्वोच्च purpose, व्यापक दृष्टिकोण की समझ, दूसरो के साथ समानुभूति, सेवा कार्यो की इच्छा, खुद को universal में अद्दितीय देख पाने की समझ, स्वयं को खुशहाल और संतुष्टि हासिल करने का अधिकारी मानना।

इन बातों से खुद को जोड़ना शुरू करें। ये गुण प्रत्येक में हैं। इन्हे अपनाकर आप अपने उन tension, दबाव, असुरक्षा और संदेहों से मुक्त हो सकते है, जो आपकों बढ़ने नही देते। यह उलझाव कितने ही तरीकों से हो सकता है। कभी-कभी यह जानते हुए भी कि कोई चीज आपके लिए ideal नही है या फिर आप क्या चाहते है, आप कम से समझौता करते है। उदासीन स्वीकृति देते है या उन राय व् मूल्यों को अपनाते है, जो आपके नही, दूसरो के बनाये हुए है। और कई बार यह बात बड़ी देर से समझ आती है कि हम पीड़ित है और स्थितियों की कठपुतली बनकर रह गये है।

यदि मैं 22 का होता, इसका अर्थ यह नही है कि life में ये problem खत्म हो जाएगी। युवावस्था में स्वतंत्र होने की प्रबल इच्छा होती है। असंतुष्टि की भावना आदर्शवाद के ईधन से पोषित हो रही होती है। लेकिन यदि आप जागरूक रहते हुए खुद को अपने स्वभाव की सर्वश्रेष्ठता से जोडकर रखते है, तो उस अदृश्य धागे को मजबूती से पकड़े रहते है। दुनियाभर की ज्ञान परम्पराओं ने यह माना है कि धर्म वास्तविक है और इस पर विश्वास किया जा सकता है। अनिश्चितताओं से भयभीत होने की जरूरत नही। यह एक मुकम्मल अनिवार्यता है, यदि आप सदियों से चली आ रही प्रक्रिया को जानना समझना चाहते है, जिसे हम ज्ञान की शरुआत कहते है।



# इस article के writer ‘दीपक चोपड़ा’ international famous भारतीय मूल के अमेरिकी writer, modern motivational गुरु व् फिजीशियन। इनकी 75 से अधिक books प्रकाशित हो चुकी है।


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