Thursday, April 14, 2016

Kidney Stones(पथरी) से बचायेंगे छोटे-छोटे बदलाव

kidney stone

जब अपशिष्ट पदार्थ body से पेशाब के जरिये बाहर नही निकलते, तब वे kidney में ही collect होकर पथरी का रूप ले लेते है। कुछ बातों को समझ कर lifestyle में सुधार करना इससे बचने में help कर सकता है।

कई तरह के Kidney Stone होते है:

calcium oxalate, calcium phosphate, यूरिक एसिड, सिस्टेन और स्टूवाइट। इनमे calcium oxalate सबसे सामान्य है। कई बार kidney stones  के कण छोटे होते है, जो पेशाब के जरिये आसानी से बाहर निकल जाते है। problem इन कणों का आकार बढने से होती है। आनुवंशिक कारण, बार-बार यूरिन इन्फेक्शन या पेशाब नली के ब्लॉक होने से पथरी की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा पानी कम पीना, अस्वस्थ lifestyle व् कुछ medicine का असर भी पथरी की आशंका को बढ़ा सकता है।

नमक कम खाये

sodium अधिक खाने से kidney calcium का अधिक अवशोषण करने लगती है। इससे पेशाब में calcium की मात्रा बढ़ जाती है। sodium आमतौर पर नमक से मिलता है। ऐसे में diet में कम नमक लेना ही बेहतर रहता है। डिब्बाबंद खाध पदार्थ कम से कम खाएं। रेडी टू ईट, junk food और चायनीज फ़ूड में नमक की मात्रा अधिक होती है। भोजन में fresh जड़ी-बूटियों, मसालों,नीबू,लहसुन, अदरक और काली मिर्च आदि का इस्तेमाल करते हुए नमक की मात्रा कम रखे।

पशुजनित Protein ले कम

पशु उत्पादों में मौजूद protein में प्युरीन नामक तत्व होता है, जो पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ाता है। खासतौर पर liver और brain के हिस्सों के meat में प्युरीन protein की मात्रा सबसे अधिक होती है। पशुजनित protein के अधिक सेवन से पेशाब से अधिक calcium निकलने लगता है और साइट्रेट की मात्रा कम हो जाती है। अगर calcium की stones की problem है तो food से calcium कम करने की जरूरत नही है। हां, calcium supplements अवश्य doctor की सलाह से ही ले। चुकन्दर,ब्रोकली, भिन्डी, पालक, शकरकंद, मेवे, black tea, टमाटर, chocolate, soybean उत्पाद आदि उच्च oxalate युक्त खाध पदार्थ कम मात्रा में खाएं। अगर vitamin-c supplements लेते है तो इसकी मात्रा 1000mg से कम होनी चाहिए। vitamin-c की अधिक मात्रा stones के खतरे को बढ़ाती है। अगर problem यूरिक एसिड की है तो red meat, अंग विशेष के meat और शेलफिश खाने से बचे। इनमे प्युरीन अधिक होता है। इनके लिए kidney को अधिक मेहनत करनी पडती है। जितना अधिक यूरिक एसिड होगा, यूरिन में ph कम हो जायेगा, जिसका आशय यह है कि पेशाब में acid अधिक होगा। पशुजनित protein कम खाए और अधिक मात्रा में fruits व् vegetable का सेवन करे, इससे पेशाब में acid की मात्रा कम होगी।

LifeStyle में बदलाव

किसी भी stones से बचने के लिए अलग-अलग तरह के पोषण और lifestyle को बदलने की जरूरत होती है। इसलिए पहले stones की पहचान करे।

1-   stones के जोखिम को कम करने के लिए जरूरी है कि पर्याप्त पानी पिए। कम से कम से कम दो से तीन लीटर पानी हर रोज पीये। अगर आप कम पानी पीते है तो हर रोज एक गिलास पानी अधिक पीने से शुरुआत करते हुए धीरे-धीरे अधिक पानी पीनी शुरू करे।

2-  कृत्रिम मिठास वाले पेय पदार्थ cold drinks,चाय व् कॉफ़ी का अधिक मात्रा में सेवन कतई अच्छा नही है। इससे stones होने की आशंका बढती है।

3-  पेशाब को लम्बे समय तक रोके नही। पसीने से निकलने वाले पानी का भी ध्यान रखे। यदि पसीना अधिक आता है तो पेशाब कम होगा। इससे पेशाब के जरिये बाहर निकलने वाले पदार्थो के kidney में जमा होने की आशंका बढ़ जाती है।



    
    




Monday, April 11, 2016

Nutrient तत्वों का न खत्म करे तत्व


हम क्या खाते है, यह जितना important है, उतना ही यह भी कि हम कैसे खाते है। यह देखना जरूरी है कि हम जो खा रहे है, वह body को मिल भी रहा है या नही। कही ऐसा तो नही कि fruits,vegetable के पोषक तत्व का एक बड़ा हिस्सा कूड़े के डिब्बे में जा रहा हो या फिर पकाने में नष्ट हो रहा हो।

आप क्या जानते है कि आलू व् प्याज लम्बे समय तक रखे रहने पर अपनी पोषकता खो देते है? खेत से निकाले जाने के दो महीने बाद आलू के 50% और 4 महीने बाद 80% vitamin नष्ट हो जाते है। पालक के तो कटाई के दो दिन बाद ही 80% vitamin नष्ट हो जाते है। इसी तरह fresh मटर को एक सप्ताह तक स्टोर करने पर उसका 77% vitamin-c नष्ट हो जाता है। और कटी हुई vegetable और fruits को फ्रिज में स्टोर करने पर उनके 10 से 15% पोषक तत्व नष्ट हो जाते है।

खान-पान से जुडी चीजो का पोषक कितना secure रहेगा, यह कई बातो पर depend करता है, जिसमे से कुछ पर हमारा control नही है। पर कितनी ही बातें ऐसी है, जिनका ध्यान रख कर हम अपने भोजन को पोषणयुक्त बना सकते है। कभी जानकारी के अभाव में तो कभी लापरवाही में हम खान-पान की चीजो के पोषण का एक बड़ा भाग हर रोज कूड़े में फेंक देते है। या फिर भोजन पकाने की गलत विधि उनके पोषक तत्वों को कम कर देती है। example के लिए चावल को उबालने के बाद हम उसका पानी फेंक देते है, जिसमे चावल का 25% vitamin-b होता है। चावल को हमेशा कम पानी में भाप में पकाकर खाना चाहिए। इसी तरह कुछ लोग अंडे को कच्चा खाते है, जबकि सच यह है कि अंडो को उबालकर खाने से iron और biotin की उपलब्धता बढ़ जाती है। बैक्टीरियम सालमोनेला के संक्रमण का खतरा भी कम होता है।

इसी तरह कुछ vegetable भी है, जिन्हें कच्चा खाने की जगह उबाल कर खाना उनकी पोषकता को बढ़ाता है। मसलन गाजर और टमाटर। जहा गाजर को उबाल कर खाने से उसके पोषक तत्व को अवशोषित करना आसान हो जाता है, वही पकाकर खाए गये टमाटर में कच्चे टमाटर के तुलना में लाइकोपिन बढ़ जाता है, जो anti-oxident का काम करता है और उसमे cancer प्रतिरोधी गुण भी होते है। आलू व् शकरकंद को भी साबुत सेंक कर या उबाल कर खाना चाहिए, इससे इनके 65% vitamin नष्ट होने से बच जाते है।

प्याज और लहसुन की बात करे तो इनमे मौजूद लाभकारी सल्फोऑक्साइड तभी active होता है, जब वह हवा से संपर्क में आता है। इसलिए उन्हें पकाने से दस minute पहले काटकर खुला रख ले। यह तत्व विभिन्न रोगों से बचाता है। कम ताप पर 30 minute तक प्याज और लहसुन पकाने से  भी उनमे सल्फोऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है। इसी तरह साबुत अनाज को रात भर कम पानी में भिगोकर इस्तेमाल करे। कम आंच पर भाप में गलाए और कम तेल- मसालों में पकाए। इससे इनमे मौजूद फायटिक एसिड, जो हमारे लिए हानिकारक होता है, 50% तक कम हो जाता है। अंकुरण से भी अनाजो में इसका स्तर कम हो जाता है।

तेल हमारे खान-पान का एक जरूरी भाग है। तेल को ज्यादा देर तक गर्म न करे। 15 minute तक तेज गर्म करने से तेल के प्राकृतिक गुण नष्ट होने लगते है और trans fatty acid की मात्रा बढ़ जाती है, जो धमनियों में प्लाक बनने और heart रोगों की आंशका को बढ़ा सकता है।

भोजन पकाने की सही विधि

भाप में पकाना

भाप में भोजन को पकाना पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। fresh vegetable, चावल और दलिया को जहां तक संभव हो, कम पानी की भाप में पकाए। इसमे तेल की जरूरत नही होती, समय भी कम लगता है और पोषक तत्व भी सुरक्षित रहते है। इसी तरह कई vegetable जैसे बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली में cancer से लड़ने वाले तत्व होते है, जिन्हें अधिक पकाए जाने पर वे नष्ट होने लगते है। इन्हे कम भाप में पकाना ही उचित रहता है।

ग्रिलिंग:

इस विधि में घी या तेल का इस्तेमाल बहुत कम होता है। खाद्य पदार्थो का फ्लेवर व् टेक्सचर भी सुरक्षित रहता है।

स्टर फ्राइंग:

इसमे भी ग्रिलिंग के समान कम घी और तेल का उपयोग होता है। कम तेल के कारण खाध पदार्थ पैन में न चिपके, इसके लिए उसे लगातार धीरे-धीरे हिलाया जाता है या बीच-बीच में थोड़ा पानी छिड़का जाता है। इसमे खाध पदार्थो के पोषक तत्वों के साथ ही उनका रंग और फ्लेवर भी सुरक्षित रहता है।

भूनना (Roasting)

इस विधि में पोषक तत्व सुरक्षित रहते है और vegetable जल्दी और आसानी से पक जाती है।        roasting में भी घी और तेल का कम उपयोग होता है।

भोजन पकाने की विभिन्न विधियों में डीप फ्राइंग यानि घी या तेल में तलना सेहत को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है। डीप फ्राइंग भोजन के अधिक सेवन से body में free radicals बनते है, जो skin के कसाव को कम करते है। वे body की कोशिकाओ और उतकों को भी नुकसान पहुंचाते है। तलने से तेल और vegetable में मौजूद anti-oxident सूख जाते है और ऑक्सीडेशन की प्रकिया  बढ़ जाती है। तेल को अधिक गर्म करने से उसमे HNE भी collect होने लगता है। HNE एक    विषैला पदार्थ है,जो stroke,LDL( हानिकारक colestral) की उच्च स्तर, अल्जाइमर्स, पार्किन्सन औरliver के खतरे की आंशका को बढ़ाता है। तलने के लिए इस्तेमाल किये तेल को दोबारा इस्तेमाल    करते समय तेज गर्म करने पर भी HNE की मात्रा बढती है। 

ऐसे बढाये पोषकता 

1-  हरी पत्तेदार vegetable को काटने से पहले धो ले। इनमे पाए जाने वाले vitamin और mineral पानी में घुलनशील होते है। ऐसे में काटने के बाद धोने से उनके पोषक तत्व व्यर्थ हो जाते है।

2-  खाना बनाने के लिए स्टेनलेस स्टील या एल्युमीनियम के बर्तनों का ही प्रयोग करे। ताबे के  बर्तन में पकाने से vitamin-c,e और folic acid नष्ट हो जाते है।

3-  सरसों या जैतून के तेल में भोजन बनाये। इसमे पोषक तत्व संतुलित मात्रा में होते है। 

4-  ज्यादा भूने और तले हुए भोजन को खाने से बचे। भोजन को कम आंच में पकाए। 

Tags: Best Nutritive की सात अच्छी आदते    Veg Person रखे Nutriment का खास ध्यान

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Friday, April 8, 2016

Mutual Fund की नकल से बचें

mutual fund

बीते कुछ साल में share market ने बेहतर return दिया है। share में सीधे निवेश के अलावा mutual fund के माध्यम से भी निवेश करने का विकल्प है। माना जाता है कि सीधे निवेश की तुलना में इसमे थोड़ा कम जोखिम होता है क्योंकि इसमे fund management company के expert प्रबंधन करते है। लेकिन कई बार यह देखने को मिलता है कि निवेशक किसी share का चुनाव इसलिए कर लेते है क्योंकि उस company के share को किसी fund manager ने चुना है। ध्यान रहे कि share में निवेश करने की यह अवधारणा कई बार आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

Purpose of Fund

mutual fund का प्रबंधन fund manager company एक विशेष expert की team की बदौलत करती है। उनका काम ही यही होता है कि लम्बी अवधि में benchmark से fund को कही आगे लेकर जाएँ। इस वजह से ऐसा हो सकता है कि लाभ के लिए fund के पुरे portfolio में ही दोहराव आ जाए। लेकिन इसमे बहुत समझदारी नही है क्योकि ऐसा करने पर आप यह परखने में जुट जाते है कि fund manager क्या सोच रहा होगा जो असंभव है। mutual fund के हर स्क्रीम के पीछे एक purpose होता है। example के लिए large cap equity fund अधिकांश तौर पर large cap वाले share में निवेश करते है। angel broking private limited के vice president वैभव अग्रवाल कहते है कि हर mutual fund की स्क्रीम, जो पैसे का का निवेश करते है वह किसी खास purpose और रणनीति के तहत होती है। fund manager हो सकता है कि एक या दो साल के अंदर ही share से बाहर चला जाए जबकि आपका purpose कह रहा हो कि नही, आप पांच और उससे अधिक साल तक निवेश जारी रखे। एक खास बात जिस पर ध्यान देना चाहिए कि mutual fund हमेशा share का चुनाव नही करते। mutual fund का किसी खास share में अधिक निवेश करने का यह मतलब नही है कि यह बहुत बेहतर चुनाव है।

प्रदर्शन का मुद्दा

mutual fund द्वारा चुने गये सभी share विजेता ही रहेगे यह सोचना गलत है। यह समझने के लिए mint ने 10 share चुने जिसमे MF ने निवेश कर रखा था, लेकिन जब परखा गया तो पाया कि 10 में से six share लंबी अवधि में प्रदर्शन से काफी नीचे थे। example के लिए SBI ने पांच साल में negative four percentage सालाना ही return दिया, जबकि BSE बैंकेक्स ने समान अवधि में 7.76 प्रतिशत का return दिया। दूसरा, शीर्ष 100 share जिसमे mutual fund ने निवेश किया उनमे हर 10 में से चार share पिछले 10 साल में बेहतर प्रदर्शन नही कर रहे। वेंदाता अपने आपमें में एक example है। इसके बीते पांच साल में सालाना negative (-24%) return दिया है, जबकि 146 स्क्रीम में कुल 957 करोड़ रूपये मूल्य की शेयरधारिता है।

सम्पति और अस्थिरता

अगर किसी institute द्वारा share में बड़ी राशि निवेश की जा रही है तो उसका हर important कदम share पर खास असर डालेगा। अग्रवाल कहते है कि उधोग जगत में अगर कोई उठा-पटक आती है तो ऐसे में संस्थागत निवेशक निवेश से बाहर निकलना शुरू हो सकते है। निवेशको में उल्टी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि share में तेजी से सुधार आ जाए क्योकि संस्थागत शेयरधारिता अत्यधिक है। जानकारों का कहना है कि mutual fund जैसे संस्थान जब share की बिक्री करने लगते है तो कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। अगर वह बड़ी मात्रा में share बिक्री करते है तो कीमते और भी घट सकती है। hem securities के director गौरव जैन कहते है कि mutual fund की तरफ से इसका खुलासा करने के बाद खुदरा निवेशक ऐसी हलचल के बारे में जानने आते है।

आधिक प्रदर्शन का भय

mutual fund प्राय: खास क्षेत्र में निवेश करते है। mint द्वारा study किये गये mutual fund के 10 शीर्ष शेयरों में देखा गया कि पांच banking क्षेत्र से जुड़े है। खुदरा निवेशको के लिए यह important है कि वे सभी क्षेत्रो के शेयरों में निवेश करे क्योकि किसी खास क्षेत्र में किया निवेश लम्बी अवधि में बेहतर प्रदर्शन नही भी कर सकते है। यह परखना जरूरी है कि किस क्षेत्र का प्रदर्शन मध्यम से लेकर लम्बी अवधि में ठीक रहेगा।

सही Share का चुनाव

किसी भी company के share का चुनाव करते समय उसका कारोबार और आय की क्षमता पर जरुर गौर करे। मोतीलाल ओसवाल securities के vice president(equity advicer) योगेश मेहता कहते है कि किसी भी share का अगले दो से चार साल के लिए बेहतर प्रदर्शन का आकलन करे। इसके लिए company के कारोबार का study करे। इसके उत्पाद की मांग को परखे। न्यूनतम से मध्यम कीमत पर भी गौर करे। अगर आप खुद फैसले करने में खुद को सक्षम नही पाते है तो expert की राय लेने में संकोच न करे। उनके पास company से जुडी जानकारियां अधिक होती है जो खुदरा निवेशको के लिए आसान नही है।  हां, आप सबकुछ expert पर ही न छोड़े।





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Monday, April 4, 2016

Job Promotion की बातें Office में

job promotion

अगर आप चाहते है कि आपको time पर office में promotion मिलता रहे तो आपको छोटी-छोटी बातो पर जरुर गौर करना चाहिए। यह सच है कि हर professional promotion शब्द को जल्दी-जल्दी सुनना चाहता है। हालाकि सभी के साथ ऐसा नही हो पाता और कई बार बेहतरीन काम करने वाले भी promotion पाने से वंचित रह जाते है। इसके पीछे कई कारण हो सकते है। अगर आप तरक्की पाना चाहते है तो बेहतर होगा कि office में कुछ छोटी-छोटी चीजो को नजरंदाज न किया जाए और कुछ खास बातो का विशेष ध्यान रखा जाए-

लक्ष्य निश्चित हो

हर office में आपका boss आपसे कुछ अपेक्षाए रखता है। आपकी हर ईमानदार कोशिश आपको तरक्की की ओर बढाती है। आपको भी कोई जिम्मेदारी मिले, उसके लिए लक्ष्य निश्चित करे। boss को अपनी योजनाओ के बारे में बताएं और उद्देश्यों को पाने के लिए जुट जाए।

Feedback

अक्सर देखा गया है कि boss की तरफ से एक छोटे से भी negative feedback से झुंझलाने लगते है, वही जब boss आपके काम की तारीफ़ करते है तो आप ख़ुशी से फुले नही समाते। आपको अपनी body language से साबित करना चाहिए कि आप आलोचना भी बर्दाश्त कर सकते है। इससे आपको future में मदद मिलेगी। अगर आप negative feedback पर गौर करे तो आप उसमे सुधार के लिए सोचना शुरू करेगे तो कल से बेहतर होते चले जायेंगे।

सक्रियता

ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग अप्रैजल से कुछ महीने पहले अधिक active हो जाते है। उन्हें लगता है कि इन दिनों अधिक काम किया तो boss को याद रहेगा। study बताती है कि यह सोच गलत होती है। तरक्की जैसे अहम फैसलों में boss इस बात पर गौर करते है कि office में जब अहम मौके आये है तो employee ने कैसी भूमिका निभाई। किसी विशेष project में कौन हमेशा सबसे बेहतर रहा।

सिर्फ Marketing ही नही..

कुछ लोगो का सोचना होता है कि अपने काम की चर्चा करते रहने से वे boss के चहेते बने रहेगे। हां, कुछ कुछ यह सही भी होता है, मगर हर वक्त काम को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की habit आपको परेशानी में डाल सकती है। याद रहे, जो आपके boss है, उन्हें आपकी खूबियां और कमियों की जानकारी है और experience में वे आपसे अधिक है। हां, यदि आप अपनी योजनाओ, काम करने के ढंग आदि की boss से चर्चा करते रहते है और सफलतापूर्वक उसे निभाते है तो आपकी यही खूबी boss को effect करने के लिए काफी होती है। अपने काम की चर्चा अपने seniors के साथ करे, साथ ही उनसे अपने काम का feedback ले, और अगर काम में कोई कमी है, तो उसमे सुधार करना भी शुरू कर दे।

Allrounder बनने का प्रयास

आपने गौर किया होगा कि office में कुछ लोग ऐसे होते है, जिन्हें जो भी काम दिया जाए वे पूरी तल्लीनता से पूरा करते है। उस काम में वे अपना सौ फीसदी देते है और बेहतर परिणाम सामने आते है। career विशेषज्ञों का मानना है कि promotion का सबसे पहला हकदार वही होता है, जो किसी भी परिस्थिति में किसी भी काम को time से करने में माहिर होता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने काम के अलावा दूसरो का काम को भी समझे और allrounder बने।

Career Mapping

कोई भी company किसी को promotion देकर अतिरिक्त जिम्मेदारी तभी देती है, जब वह सुनिश्चित कर लेती है कि आपको दी गई हर भूमिका में आप fit रहते है। company आपको वह अतिरिक्त जिम्मेदारी देगी, जिसमे company का risk नही, बल्कि फायदा होगा। इसलिए आपको चाहिए कि आप अपने कौशल, ज्ञान व् दक्षता को समय से साबित कर दे कि नई जिम्मेदारी को संभालने के लिए आप पूरी तरह तैयार और सक्षम है।

छवि बनाकर रखे

तरक्की के मापदंडो में सिर्फ आपकी कार्यशैली ही नही, बल्कि office में आपका व्यवहार भी सबसे उपर होता है। आमतौर पर देखा गया है कि कई बार लोग काम तो बहुत अच्छा करते है, लेकिन अपने व्यवहार की वजह से promotion का मौका गंवा देते है। इसलिए office में अपने सभी सहयोगियों व् seniors के साथ अच्छा व्यवहार रखे। ऑफिस में होने वाली राजनीति से जितना संभव हो दूर रहने का प्रयास करे। management को हमेशा success कर्मचारी नही, प्रयत्नशील कर्मचारियों की भी जरूरत रहती है, जिन पर वह अपनी नई परियोजनाओ का भार डाल सके। ऐसे में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर अपने आगे बढने की संभावनाओ का द्वार खोलने का प्रयास करे।

Skill बढाये

अगर आप सिर्फ यह सोच-सोच के परेशान हो रहे है कि अप्रैजल का समय नजदीक आ रहा है तो कुछ नही होने वाला।  आप अपनी और रूचि के अनुसार कोई short term कर अपनी skills बढाये। ऐसा कर आप अन्य के मुकाबले काफी बेहतर दिखाई देगे। आज भले ही वर्तमान company में इसका फायदा न हो, लेकिन future में दूसरी company में किसी ऐसे काम को करने का प्रयास करे, जो आपसे उपर के cadre  का हो। अपने boss से बात करे और चुनौती को आगे बढकर स्वीकार करे। हो सकता है कि company और management आपके प्रयास को स्वीकारते हुए आपके आगे बढने का रास्ता ही खोल दे।

कब उम्मीद की जा सकती है

1-  आगे बढकर खुद जिम्मेदारी ली हो।

2-  कार्य से सम्बंधित नये सम्बन्ध स्थापित किये हो।

3-  कार्य के दौरान deadline का ध्यान रखा हो। 

4-  आपकी performance को लेकर अच्छे review मिले हो।

5-  दिए गये लक्ष्यों को पाने में सफल रहे हो या लक्ष्यों को पाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हो।

6-  team के साथ कार्य करने में सहज हो और नेतृत्व करने की क्षमता रखते हो। 

7-  company के हित में, जैसे कोई बचत आदि के बारे में कोई सुझाव दिया हो। 


  












Friday, April 1, 2016

Most Popular thing



मेरी मां मुझसे पूछा करती कि body का सबसे जरूरी हिस्सा कौन सा है। वे पूछती और जो मुझे सही लगता, मै कह देती। जब छोटी थी, तो लगता कि हमारे लिए आवाज सबसे जरूरी है। इसलिए मां ने जब पूछा तो मैंने कहा,’मेरे कान।‘

मां बोली,’नही, दुनिया में बहुत से लोग है, जो सुन नही सकते। खैर तुम इस पर सोचती रहो।‘
कुछ साल बीत गये। मां ने फिर वही सवाल पूछा। चूँकि मै पहले जवाब में गलती कर चुकी थी, अबकी बार मैंने अधिक संभलते हुए जवाब दिया। इस बार मैंने कहा, ‘दृष्टि के बिना सब बेकार है। बस अँधेरा ही अँधेरा। हमारी आँखे ही सबसे जरूरी अंग है।‘

उन्होंने कहा,’ तुम बहुत जल्दी सीख रही हो। लेकिन अभी भी तुम्हारा जवाब सही नही है। दुनिया में बहुत से लोगो को दिखायी नही देता।‘

मै फिर निरुत्तर हो गयी। उत्तर की खोज जारी थी।

माँ ने उसके बाद भी कई बार प्रश्न पूछा और अंत में कहती,’नही, लेकिन तुम बहुत जल्दी सीख रही हो।‘

फिर एक साल ऐसा आया, मेरे दादा इस दुनिया से चले गये। सब बहुत दुखी थे। रो रहे थे। यहाँ तक कि मैंने अपने पिता को भी पहली बार रोते हुए देखा। जब मै दादाजी को अंतिम प्रणाम कर रही थी। मेरी माँ ने मुझसे पूछा,’मेरी बच्ची क्या तुम जानती हो कि कौन सा अंग सबसे जरूरी होता है?’ मुझे आश्चर्य हुआ कि माँ इस समय यह पूछ रही है। मुझे लगा था कि ये मेरे और माँ के बीच चलने वाला एक खेल है।

माँ ने मेरे चेहरे की उलझन को पढ़ लिया। वे बोली,’ये प्रश्न बहुत जरूरी है। ये दिखाता है कि तुम अपनी life को भरपूर जी रही हो। आज वो दिन है, जब तुम्हे इसका उत्तर जान लेना चाहिए। body का जरूरी हिस्सा कंधा है।‘

मैंने पूछा,’क्योकि यह मेरे सिर को संभालकर रखता है।‘

माँ ने कहा,’नही। क्योकि यह किसी friend और करीबी के सिर को उस समय सहारा देता है, जब वे दुःख में होते है। हर किसी को कभी न कभी इसकी जरूरत होती है। मुझे उम्मीद है कि जब भी तुम्हे इसकी जरूरत हो, तुम्हे वह मिल जाए।‘

उस दिन पता चला कि सबसे जरूरी चीजे स्वार्थ सुख से नही जुडती, ये वो होती है जो दूसरो के काम आ सकती है।