Tuesday, March 8, 2016

Failure को अलविदा


खुद पर विश्वास करना सभी का महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए। कुछ मूल क्षमताये सभी के भीतर होती है, जैसे प्यार, विश्वास, ईमानदारी, खुद पर भरोसा आदि। ये बातें सुकून की ओर ले जाती है। धीरे-धीरे आप गौर करना, सही decision लेना, सराहना और आगे बढना सीख जाते है। ऐसे लोग अच्छे दिनों में हवा में नही उड़ते और कठिन दिनों में ढेर नही होते।

कई लोग बड़े-बड़े झटके झेलने के बाद भी success होने का हुनर सीख लेते है। उनके चेहरे पर एक मुस्कान हमेशा झलकती रहती है। ख़ुशी, खुद को खास समझने की और यह विश्वास कि वे आने वाला कल बेहतर बना लेगे।

कभी-कभी career में पिछड़ना भी बेहतरी का संकेत होता है। कुछ लोग अपनी unsuccess को भी success में बदलने में कामयाब हो जाते है। दरअसल उन्हें सैटबैक यानि झटका लगना और failure का भेद पता होता है। दोनों को समान समझने की भूल नही करना चाहिए। धक्का पहुंचना या झटका लगना पूरी तरह टूटना नही है, कुछ निशान और हिम्मत बचे ही रहते है, जो किसी भी स्थिति में फिर से खड़े होने का आत्मविश्वास देते है। यकीन मानिए कि कई ऐसी बाते है, जिन्हें बड़े leader भी नजरंदाज कर जाते है। success कोई टीका नही, जिससे कभी भी unsuccess का मुंह न देखना पड़े। success के साथ पीछे हटने की चुनौतियां भी बराबर आती रहेगी। हालाकिं इनका सामना करने से न केवल आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि आप दिनों दिन अधिक मजबूत होते चले जायेगे।

खुद को Success देखे

खुद से प्यार करने वाले लोग अपने आप को हर स्थिति में बेहतर पाते है। उन पर झटको का असर कम होता है। वे उनसे जल्दी उबरकर आगे बढ़ जाते है। ऐसे लोग, जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि अच्छी होती है, संबंधो में मजबूती होती है, उनकी सफल होने की सम्भावना भी अधिक होती है। आप आत्मसम्मान बढाने के लिए जितने प्रयास करेगे, जिन्दगी में गिरने पर कम घाव पायेगे। आज आत्मसम्मान पर बहुत सी books है। किसी अच्छी book का चयन करे और उसमे लिखी बातो का अपनाना शुरू करे।

Weakness और उनसे लड़ना

अधिकतर व्यस्क जानते है कि वे कहाँ पीछे है। मगर आज के कड़े प्रतियोगी माहौल में अपनी कमजोरियों को accept करना भी पिछड़ने जैसा संकेत देने लगता है। लेकिन अपनी कमजोरियों की पहचान करनी ही होगी। कोई भी superman या superwoman नही होता। हम आईने के सामने खड़े होकर अपनी खामियों को साफ-साफ देख सकते है। भले ही वह गुस्सैल स्वभाव हो या तुनकमिजाजी। खुद को स्वीकार करना ही success की ओर बढना है।

डर से मुकाबला

tension को दूर करने वाली विभिन्न medicine के बिक्री आंकड़ो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर depression के मरीजो में लगातार इजाफा हो रहा है। चिंताओ से छुटकारा पाने के लिए medicine का सहारा सही है या गलत, मगर निस्संदेह इन्हे नियमित रूप से लेना निदान नही है। यह आपको समझना होगा कि व्यग्रता, tension आदि एक naturally प्रतिक्रिया है। कार्यस्थल पर काम के दबाव को कम करना एक अच्छी पहल हो सकती है। भले इसके लिए शुरुआत में medicine फिर exercise या बाहर कही जाकर relax होने होने जैसे उपाय हो सकते है। अपनी शरीर की सुने। उन इन स्थितियों को पहचाने जो चिंतित करती है।

अपने काम में मगन रहे

कोई भी धक्का तब अधिक गहराई से असर दिखाता है, जब वह किसी सदमे की तरह होता है। अगर आपको इन हालातो का अंदाजा पहले ही हो तो मुश्किल जरुर कुछ कम हो सकती है। सिर्फ भाग्य के भरोसे न बैठे रहे। और ऐसा भी न सोचें कि आप हर खतरा झेल लेगे। अपने कार्यो को मन से करे। वह करे, जो आप कर सकते है।

Family के साथ

आज कई family में पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी है। दोनों एक-दुसरे के साथी है। जीवनसाथी के कार्यस्थल में अच्छा-बुरा जो भी चल रहा है, उसके लिए उनके भागीदार बने। हम सभी जहाँ प्रोत्साहन मिलने पर चहक उठते है, वही निराशा में मुरझा जाते है। अगर आपका साथी आपके कार्य में रूचि लेता व् प्रोत्साहित करता है, आपके पास घर में ही एक भरोसेमंद सहारा है।

मददगार Team का हिस्सा

हर team का अपना एक अंदाज व् वातावरण होता है। अगर आप एक अच्छी team का हिस्सा है, तो यकीन माने, member न सिर्फ आपका आदर करेगा, बल्कि हर कोई आपकी बात पर गौर भी करेगा। लगातार मिल रही success का श्रेय team को दिया जाता है, न किसी एक को। किसी भी बड़े धक्के के खिलाफ team का हिस्सा होना संजीवनी का काम करता है।

काम से इतर अपनी रुचियाँ ढूंढे

काम और मस्ती के बीच के तालमेल को आपको समझना होगा। आपका brain और body संतुलन की मांग करते है। research कहते है कि कार्यस्थल पर महज अपनी डेस्क से उठकर कुछ चहलकदमी करना भर आपके blood pressure और दिल की धडकन को काबू रख सकता है। मनोरंजन के लिए भी समय निकाले।



 # इस article के writer दीपक चोपड़ा international ख्याति प्राप्त भारतीय मूल के अमेरिकी writer, modern motivational गुरु व् physician है। उनका प्रिय subject मेटाफिजिक्स है। वह 75 से अधिक books लिख चुके है।



     



Friday, March 4, 2016

Disease से डरें नही, लड़े


health से जुड़े लेखो में आपने imunity शब्द कई बार पढ़ा होगा। immunity यानि body की रोगों से लड़ने की क्षमता। वह रक्षा कवच, जो खांसी-जुकाम और पेट व् liver के संक्रमण से तो दूर रखता ही है, साथ ही cancer जैसे रोगों से भी body का बचाव करता है।

बार-बार बीमार पड़ने के कारण क्या आपको अक्सर school,college या office से छुट्टिया लेनी पडती है? मौसम में जरा-सा बदलाव भी खांसी-जुकाम का कारण बन जाता है? हालाकिं इसके कई और भी कारण हो सकते है, लेकिन एक प्रमुख वजह immune system का कमजोर होना है, जो body की रोगों से लड़ने की क्षमता को कम कर देता है।

Immunity क्या है?

immunity यानि प्रतिरोधक क्षमता, जो body को विभिन्न कीटाणुओं व् virus के संक्रमण से बचाती है। immune system वह अंदरूनी ताकत है, जिसमे body की कोशिकाए, उतक व् अंग भाग लेते है तथा संक्रमित कीटाणुओं या रोगवाहको की पहचान कर उन्हें नष्ट करने में help करते है। साधारण शब्दों में body का वह naturally system, जो body को रोगों से दूर रखता है और body की किसी रोग से शीघ्र बाहर निकलने में help करता है।

immunity बढाने में body के लिंफेटिक system की बड़ी भूमिका होती है, जिसमे अस्थि-मज्जा, तिल्ली, थायमस और लिम्फ नोड्स आते है। लिंफोसाइट्स और ल्यकोसाइट्स, ये छोटी सफेद रक्त कोशिकाए होती है, जो body को रोगों से बचाती है। body में बी-सेल और टी-सेल दो तरह के लिंफोसाइट्स होते है। बी-सेल body में उन antibody का निर्माण करते है, जो बेक्टीरिया व् toxin पर हमला करते है। वही टी-सेल संक्रमित और कैंसरजनित कोशिकाओ को नष्ट करते है। immunity बढाने की प्रकिया में इसी पुरे तंत्र को मजबूत करने की जरूरत होती है।

क्यों नही लड़ पाते रोगों से

हमारा immune system एक दिन में कमजोर नही होता। लम्बे समय तक अस्वस्थ जीवनशैली व् असंतुलित खान-पान body की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर कर देते है। समय-असमय खाना, बहुत अधिक junk food खाना, धुम्रपान करना, शराब का सेवन व् अन्य नशे की लत, शारीरिक शारीरिक व्यायाम न करना, vitamin व् खनिज पदार्थो की कमी होना, ज्यादा तनाव, नीद पूरा न होना, प्रदुषण व् कुछ बीमारियां body के immune system को कमजोर बना देते है।

छोटे बच्चो का immune system मां के गर्भ से ही बनना शुरू हो जाता है। यही वजह है कि गर्भवती महिलाओ को अधिक से अधिक पौष्टिक आहार के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जाता है। प्रत्यक्ष व् अप्रत्यक्ष धुम्रपान से बचने की सलाह दी जाती है। युवाओं के मुकाबले बच्चो और बुजुर्गो का immune system कमजोर होता है। इसी कारण वे बदलते मौसम में रोगों के चपेट में अधिक आते है। हालांकि अस्वस्थ दिनचर्या और व्यायाम की कमी के कारण युवा भी कम उम्र में जीवनशैली से जुड़े रोगों की चपेट में आ रहे है। युवाओं में immune system के कमजोर होने के कारण धुम्रपान, शराब, अधिक तनाव और शारीरिक गतिविधियां न करना है।

क्यों जरूरी है body का मजबूत होना

immune system कमजोर होने पर person रोगों के प्रति अधिक सवेंदनशील हो जाता है। इससे केवल सर्दी, जुकाम या खांसी आदि रोग ही जल्दी-जल्दी नही होते, बल्कि सांस की problem, ह्रदय रोग, cancer आदि होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। कई बार आनुवंशिक रोगों या कुछ खास medicine को लम्बे समय तक लेते रहना भी body के रक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है। immune system हो जाने पर body की क्षतिगस्त अंगो की मरम्मत करने की क्षमता घट जाती है। ऐसे लोगो में allergy,liver,cancer, पेट व् रक्त सम्बन्धी विकार हो सकते है।

मानसून और Immunity

बदलते मौसम के समय body की मजबूती कई तरह के रोगों से दूर रखती है, पर मानसून का मौसम immunity पर खासा असर डालता है। इस मौसम में उमस व् वातावरण की नमी मच्छर, किटाणु व् जीवाणुओं के पनपने के लिए अनुकूल होती है। जिनकी immunity कमजोर होती है, उनके बीमार पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है। इस मौसम में जिन लोगो को मधुमेह, सांस की दिक्कत या लंबी बीमारी है, उन्हें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। आसपास साफ-सफाई, पोषक तत्वों से युक्त घर पर बने खाने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से मौसमी संक्रमण से दुरी बनाई जा सकती है। फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थो के सेवन से पेट सम्बन्धी problem को control करने में मदद मिलती है। इसके अलावा तैलीय खाना, ज्यादा मसालेदार खाना, junk food और सोडे से युक्त पेय पदार्थो से परहेज करना चाहिए।

यूं बढाये body की ताकत

·         immune system को मजबूत करने के लिए संतुलित व् सम्पूर्ण भोजन करे। खाने में vitamin और खनिज लवणों को प्रचुरता में शामिल करे। हरी सब्जियां, दालें, सलाद और साबुत अनाज के साथ-साथ fruits का सेवन करे। भोजन प्रचुर मात्रा में नियमित समय पर करे। अधिक बसा वाले भोजन से परहेज करे।

·         धुल-मिट्टी व् प्रदूषित वातावरण से बचे। आसपास की साफ-सफाई के साथ-साथ व्यक्तिगत सफाई का भी ध्यान रखे। रोज नहाए व् साफ-सुथरे कपड़े पहने। खाना खाने से पहले अच्छी तरह से हाथ धोये।
·         immunity बढाने में व्यायाम की भी positive भूमिका होती है। नियमित व्यायाम न सिर्फ शारीरिक तौर पर, बल्कि मानसिक रूप से भी body को मजबूत बनाता है। योगासन से मानसिक तनाव कम होती है और एकाग्रता बढती है।

·         अपनी नीद से कोई समझौता न करे। जल्दी सोने व् जल्दी उठने की आदत डाले। हर रोज कम से कम 6-7 घंटे की नीद ले। इस प्रक्रिया में रात में देर से सोकर सुबह देर से उठना भी गलत है। नीद immunity को दुरुस्त रखने में मदद करती है।

·         junk food, तले हुए खाद्य पदार्थो, प्रोसेस्ड या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, चीनी युक्त आहार, सोडा, कैफीन, शराब, धुम्रपान और नशीले पदार्थो से दुरी बनाये।

·         मोटापा immunity की क्षमता कमजोर करता है। वजन को control रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाए।

Vitamin-D का महत्व

vitamin-d immunity बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। study के मुताबिक vitamin-d की कमी ऑटोइम्यून बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ा देती है और अति सवेंदनशील immune system अपने ही body की कोशिकाओ व् अंगो को नुक्सान पहुंचाने लगता है।

immune system को सही रखने में vitamin-d बहुत आवश्यक है, लेकिन चिंता का विषय ये है कि भारतीयों में vitamin-d की कमी बहुत ज्यादा पायी जाती है। diabetes foundation of india ने अनुमान लगाया है कि 80% भारतीय vitamin-d की कमी से जूझ रहे है। ये कमी भारत के सभी आयु वर्गों में 50 से 90% पाई गई है।

सभी medical specialist मानते है कि अगर खाद्य पदार्थ उपयुक्त मात्रा में vitamin-d को पूरा नही कर पाते तो स्वस्थ रहने के लिए doctor की सलाह लेकर vitamin-d supplement लेने चाहिए। ये सबसे किफायती और सभी के लिए आसान तरीका है। इसके अलावा नियमित सूरज की रोशनी से भी पर्याप्त vitamin-d मिलने में मदद मिलती है।

खाने में शामिल करे

1-  हर्बल या green tea, अंकुरित दाल व् काले चने, ताजे fruit व् उनका juice, मशरूम, शकरकंदी, कददू, पीली व् लाल शिमला मिर्च.मेवे, vitamin-c युक्त चीजे जैसे संतरा, नीबू, आंवला और अदरक आदि।

2-  vitamin-A युक्त चीजे जैसे गाजर, मुली, मेवे, मछली, गाढ़ी हरे पत्तेदार सब्जियां

3-  vitamin-d युक्त समुद्री खाना जैसे टूना और सैमन इत्यदि या विशेषज्ञों की राय से vitamin-d supplement, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ, हल्दी, सरसों, हींग, अजवाइन, कड़ी पत्ता, मुलैठी, दालचीनी, कालीमिर्च, धनिया व् पुदीने का इस्तेमाल।









Wednesday, February 24, 2016

Believe to Your Path


किसी और के जैसा होने की कामना करना, जो हम है उसे व्यर्थ करना है।“

                                                       एस.जी.एरिकसन

मै इस बात की परवाह नही करता कि दुसरे मेरे काम के बारे में क्या सोचते है, लेकिन मै इस बात का बहुत ध्यान रखता हूँ कि मै अपने काम के बारे में क्या सोचता हूँ। यही चरित्र है।“

                                                  थियोडोर रूजवेल्ट  
   
प्रवाह के साथ बहना आसान होता है। मुश्किल प्रवाह से विपरीत बहने में होती है। यही वजह है कि रोज के छोटे-बड़े काम हो या फिर life से जुड़े बड़े फैसले, भेड़चाल में चलते रहना हमे सुरक्षित और सही लगने लगता है। लेकिन फिर कुछ बड़ा न कर पाने की complain और बेचैनी क्यों?

आपका life आपके अपने experience की यात्रा है, किसी दुसरे की नही। इसलिए दूसरो के पथ का सम्मान करना, उनसे प्रभावित होना एक बात है, पर दूसरो की देखा-देखी उनके हर कदम पर अपना कदम रखना भेड़चाल से अधिक कुछ नही। यह सही है कि ऐसा करके भी हम किसी मंजिल तक पहुंचते ही है, पर वह मंजिल हमारी अपनी नही होती। भेड़चाल हमे अच्छी लगती है, क्योकि ये हमे सुरक्षा का एहसास कराती है।

खुद के प्रति अनिश्चितता और अनभिज्ञता हमारी इस भेड़चाल की प्रवृति को बढ़ा देते है। और फिर पढाई, career, पहनावे और यहाँ तक कि रिश्तो से जुड़े फैसले हम दूसरो की देखादेखी करने लगते है। हर कदम पर दूसरो से तुलना करते है।

science teacher की अपनी job बीच में छोडकर निन्जा expert बनने वाले इजमाइल आर्किन अपने blog 30 year old निन्जा पर लिखते है,’ अपने इच्छित लक्ष्यों तक पहुचने के लिए खुद को accept करना होता है। यह समझना होता है कि जो दूसरो के लिए सही है, वह जरूरी नही आपके लिए भी सही रहे। खुद पर यकीन रखकर ही जाना जा सकता है कि आपका अपना पथ भी बेहद खुबसुरत है।‘

कैसे चुने अपनी राह

1-  आज जो भी बनना चाहते है, उस राह में चुनौतियों होगी ही। किसी भी person या बात को इतना हावी न करे कि आप अपनी राह न देख सके।

2-  life के फैसले अपनी पसंद-नापसंद के आधार पर ले, दूसरो को खुश करने के लिए नही। यह समझना जरूरी है कि हमे हर person को पसंद करने और उसे खुश करने की जरूरत नही है। इस तरह यह भी कतई जरूरत नही है दुसरे सभी हमे पसंद करे। खुद में सहज रहे।

3-  अंतिम फैसले तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय ले। life कोई प्रतियोगिता नही है। यदि आपके हमउम्र या सहकर्मी आज आपसे आगे प्रतीत हो रहे है तो कल आप उनसे आगे हो सकते है। दूसरो से compare करके खुद को छोटा न करे।

4-  खुद को positive लोगो के साथ रखे। ऐसे लोग, जो आपको प्रेरणा देते है, आपको समझते है।

5-  जब आप खुद को स्वीकारते है, तो इच्छित मार्ग की ओर कदम बढ़ाना आसान हो जाता है। खुद में मौजूद अच्छे गुणों को देखे। धीरे-धीरे आप खुद को सहज और संतुष्ट महसूस करने लगेगे।


  










Monday, February 22, 2016

Hard Time (मुश्किल समय) का जवाब


अनहोनियां जीवन की कडवी हकीकत है, जिन्हें एक दुसरे से जोडकर हम और बड़ा कर लेते है। मनोविज्ञान में इस वस स्वभाव को ‘कलस्टरिंग इल्यूजन’ कहते है, जिससे problem से निपटना कठिन हो जाता है। सच यह है कि hard time में घबराने की जगह अगर शांति से विचार करे तो बहुत हद तक स्थितियां हमारे अनुकूल हो जाती है।

unsuccess हम सभी के जीवन में आती है और जब वे आती है तो लगता है कि अब कभी खत्म ही नही होगी। एक के बाद एक इन unsuccess से हमारा मनोबल कमजोर हो जाता है। जब बारिश आती है तो अपने साथ सब कुछ बहाकर ले जाती है। यानी दुःख या सुख, जीवन में कुछ भी स्थिर नही रहता। लेकिन हमे लगता है कि हम ही अकेले है, जो इन असफलताओ से जूझ रहे है, जबकि सच ये है कि हर person इस तरह के experience से गुजरता है। मान लीजिये आप अच्छी भली job कर रहे और अचानक आपकी job छूट जाती है, तभी आप देखते है कि सिलेंडर की गैस खत्म होने वाली है, घर में राशन भी कम ही है।

कई बार ऐसा होता है कि अनहोनी जीवन में लगातार घटती चली जाती है। हर घटना अलग होती है, लेकिन हमारा brain इन घटनाओ को खुद-ब-खुद एकसाथ जोड़ने लगता है। वे घटनाए, जिनमे कोई समानता नही होती। इसे एक example से समझा जा सकता है। एक थैले में लाल,नीले, हरे और पीले रंग के कंचे collect कीजिये। हरे रंग के दस कंचे ले लीजिये, ताकि किसी एक रंग की प्रधानता न रहे। जैसे ही आप ये कंचे थैले से निकालकर एक कांच के बर्तन में डालेगे, तो आपको रंगों के अलग-अलग pattern या design नजर आयेगे। यह बिना किसी क्रम के बनाये गये group जैसा लगता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हमारे brain को समूह पहले नजर आता है और अलग-अलग कंचो का अस्तित्व बाद में। अगर आप अलग-अलग रंग के कंचो पर गौर करे, तो वे भी आपको पूरी स्पष्टता से नजर आयेगे और इस काम में आपको ज्यादा जहमत भी नही उठानी पड़ेगी। यह तकनीक हमे बॉगल और स्क्रैबल जैसे word बनाने से जुड़े खेलो का बेहतर खिलाडी बनाती है।
मुसीबतों का पहाड़, tension को लेकर हमारी संवेदनशीलता से भी जुड़ा है। इसे इस तरह समझे। आप हर रोज सीढ़िया चढ़ते है। चूँकि रोजाना का काम है, तो इसका दबाव आपको महसूस नही होता। पर यदि एक दिन पहले आपने स्क्वेट्स( एक तरह की exercise) किये है, जिससे मांसपेशिया अकड गयी है, तो अब चढने के लिए एक कदम उठाना भी भारी दिखने लगता है। चूँकि हमारा body बड़ी तकलीफ के साथ जूझ रहा होता है, ऐसे में हम हर अगले छोटे tension के लिए संवेदनशील हो जाते है। यही बात हमारी सोचने की प्रकिया पर भी लागू होती है। problem इसी तरह आती है, पर हमे यह तलाशना होता है कि हम उनका समाधान कैसे करेगे।

Hard Time में बेकार चिंताओं बोझ हटाए

1-  इस प्रकिया का पहला चरण है खुद को शांत और स्थिर बनाना। शांत भाव से ही आप अपनी problem से बाहर आने का रास्ता खोज सकते है। problem को भावना से जोडकर नही, बल्कि तटस्थ भाव से देखे। अपनी problem के बारे में अगर आप लिखे तो इससे बेहतर कुछ और नही हो सकता। एक सूची बनाये और अपनी problem की गंभीरता को देखते हुए उनके बारे में सिलसिलेवार तरीके से लिखे। problem की स्पष्टता कम करती है।

2-  कई बार सहज लगने वाली चीजे भी बिगड़ जाती है। लेकिन सकारात्मकता नही छोड़े। हालात होगे ये विश्वास बनाये रखे। हमारा brain बहुत शक्तिशाली होता है। आपको ये जानकर ये हैरानी होगी की success या unsuccess के बीच फर्क सिर्फ इतना होता है उसे किस नजरिये से देखा जा रहा है।

3-  आमतौर पर बहुत ज्यादा संघर्ष कर लेने पर हमे लगता है कि कोई इंसान या फिर कोई वस्तु ही हमारे दुःख का कारण है। हमारी unsuccess या फिर उसका जश्न मनाने वाले जब हमारे सामने होते है, तो हार मानकर छुप जाए या फिर अपनी स्थितियां बेहतर बनाने के लिए दोगने उत्साह से जुट जाए।

4-  हुनर या समय का management सीखने के लिए हम खुद को भूतकाल में तो नही ले जा सकते। हमे इन्हे समय के साथ सीखते रहना होता है। हम अपने अपमान या unsuccess को मिटा नही सकते, लेकिन ये जरुर सुनिश्चित कर सकते है कि यही छोटी-छोटी unsuccess हमारी तरक्की की तस्वीर को और यादगार बना दे।





‘’इस article के writer ‘एरिक थॉमस’ अमेरिका में ‘हिप हॉप प्रीचर’ के नाम से प्रसिद्द है। writer है और पूर्व फुटबॉल खिलाडी रह चुके है।‘’






Friday, February 19, 2016

Linkedin Profile में रखे इन बातो का ध्यान


1-  Linkedin profile बनाते हुए इस बात का ध्यान रखे कि उसमे ऐसे keywords का इस्तेमाल किया गया हो, जिससे आपका profile ढूंढने पर हमेशा दिखाई दे।

2-  Linkedin का अर्थ है business, job और इससे जुड़े लोग। यहा अपना नाम पूरा लिखा हो। friend क्या बुलाते है, इससे यहा कोई फर्क नही पड़ता।

3-  ऐसा न हो यहा आप किसी party या फिर सैर-सपाटे की तस्वीर upload कर दे। विभिन्न सर्वे में यह बात साफ हुई है कि profession तस्वीर को अन्य के मुकाबले 7 गुना अधिक लोग देखते है।

4-  जानकारी post करते हुए इस बात का ख्याल रखे कि वह ऐसे डिज़ाइन की गई हो कि अधिक लोगो को नजरो में आये। शब्द सीमा का अच्छे से इस्तेमाल करे।

5-  अपने काम को दिखाए। youtube के link यहा post करे। इसके अलावा power point आदि भी विकल्प है।

6-  HR manager job के लिए योग्य उम्मीदवार ढूढने वक्त आपकी location को भी तवज्जो देते है। इसलिए आप कहा रहते है, इसका जिक्र भी साफ-साफ करे।

7-  linkedin.com/in/nealschaffer जैसा लिंक इस्तेमाल करे, न कि linkedin.com/pub/neal-schaffer/4az89/145

8-  अगर आप अपनी रूचि के क्षेत्र का ध्यान रखेगे तो लोगो को आपको ढूंढने में आसानी होगी।
9-  सम्बंधित क्षेत्र की कुछ अनुशंसाये वाकई आपको job दिलवाने में मदद करेगी।

10-अपने states को नियमित रूप से update करते रहे। अपनी industry से जुडी खबरों को साझा करते रहे। 50.5% user का ही profile 100 फीसदी पूर्ण बना होता है। वही सिर्फ 42% user ही अपने profile को नियमित रूप से update करते है।

11-आपके profile से अधिक से अधिक linkedin connection जुड़े रहने चाहिए। इससे आपका profile अधिक से अधिक लोगो की नजरो से होकर गुजरेगा।

12-अपने profile से ऐसी चीजो को भी जोड़े, जो आपनी job की दावेदारी को अधिक मजबूत करती हो, जो test score, courses certification आदि। शुरूआती दौर में सिर्फ job की खोज को वरीयता न दे। यहाँ यह दिखे कि आप काम के experience कमाना चाहते है।

13-linkedin group में हर minute में बहुत सी चर्चाएँ होती रहती है। सम्बंधित group का हिस्सा बने और उनमे सक्रिय रहे।

14-profile में email address, facebook/twitter के link भी दे।