Thursday, February 11, 2016

Cyber का गलत use


देश के बच्चे जिस तेजी से internet से जुड़ रहे है, उसी तेजी से वहां चलने वाली गुंडागर्दी का शिकार भी हो रहे है। cyber की दुनिया में चंद सेकंड्स ही उन्हें मजाक का पात्र बनाने या बदनाम कर देने के लिए काफी है। ऐसे में cyber bullying(cyber दादागिरी) ऐसी नई term है, जो माता-पिता और अध्यापको के लिए चुनौती बन रही है।

दिल्ली के एक school की एक student अनामिका सिंह अब भी यह समझ नही पा रही है कि वह उन उन friends से कैसे निबटे, जिन्होंने मामूली सी बात पर उसे अपने group से बाहर कर दिया। पिछले साल अनामिका की school group की एक लडकी से कहा-सुनी हो गयी थी, उसका बदला लेने ले लिए ही उसकी class के एक group ने अनामिका को whatsapp group से delete और facebook से unfriend कर दिया। 17 वर्ष की अनामिका gossip session की अब का हिस्सा नही है।

चूँकि अब बच्चे अपना ज्यादातर समय online होकर गुजारने लगे है, इसलिए पिछले कुछ सालो में cyber bullying यानी cyber दादागिरी के आधिक मामले सामने आ रहे है। यह एक ऐसी term बन चुकी है, जो teacher और parents को परेशान कर रही है।

फोर्टिस हेल्थकेयर में मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार विज्ञान के निदेशक और मनोचिकित्सक doctor समीर पारीख कहते है,’ बदलते समय के अनुरूप ही bullying की definition को भी विस्तार दिया जाना चाहिए। इसे केवल गुस्से से जुड़ा व्यवहार ही नही कहा जा सकता। social media पर अलगाव को bullying की श्रेणी में रखना होगा।‘

online counseling center ‘mindframes’ की संस्थापक doctor बत्रा कहती है,’ ऐसी bullying का शिकार वे बच्चे होते है, जिन तक पंहुच बनाना आसान होता है। इन्हे व्यंग्यात्मक सन्देश, आलोचना करते ई-मेल्स, अपमान करती post, निजी तस्वीरों के माध्यम से bulling का शिकार बनाया जाता है’।

Online Bulling का असर

मुम्बई आधारित counsiling center mind temple की मनोचिकित्सक doctor अंजली छाबडिया कहती है,’ cyber bullying का शिकार हुए बच्चे घबराहट, तनाव,डर, अकेलापन, आत्मसम्मान में कमी की गिरफ्त में आ जाते है।‘ doctor अंजली कहती है कि bullying से पीड़ित बच्चें school जाने की इच्छा नही दिखाता। इसकी वजह से उसके grade ख़राब हो जाते है और वह नशे की ओर जा सकता है, drugs ले सकता है या फिर खुद को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

दूसरी ओर, अभिभावकों को ऐसी स्थिति में समझ नही आता कि क्या करे? अनामिका की माँ कहती है,’ बतौर अभिभावक हम खुद को असहाय पाते है, क्योकि हमे यह ठीक नही लगता कि बच्चे की लड़ाई में दखल दे।‘

कुछ मामलो में सलाहकार parents को school जाने की सलाह देते है। एक मामले में अभिभावकों ने मामले को इसी तरह निपटाया। उनके बच्चो को उसकी class का एक student facebook पर अजीबोगरीब comment देकर परेशान कर रहा था। comment कुछ ऐसे थे,’ ये तो लडकी दिखता है’ लडके कभी इतने गोरे नही होते है’,’ ये इतना मोटा क्यों है?’

इस मामले में पीड़ित बच्चे का इलाज करने वाली मनोचिकित्सक doctor सीमा हिंगोरानी ने बताया,’ यह बच्चा हर दिन अपने रंग, वजन को लेकर इस तरह के comment पढ़ता था। बुलीज को इस बात का अंदाजा भी नही था कि उसकी इन हरकतों का उस बच्चे के मनोविज्ञान पर कितना गहरा असर पड़ रहा है।‘

यह सब दो माह तक चलता रहा। जब बच्चे के parents ने उसके grade कम होते देखे, school जाने में वह परेशान करने लगा, उसका आत्मविश्वास गिरने लगा तो उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें महसूस हुआ कि कुछ गडबड है। इसके बाद उन्होंने बच्चे को ले जाकर doctor की सलाह ली और करीब चार माह तक उसकी counseling चली। अब भी उसे दो माह की और थेरेपी लेने की सलाह दी गई है। जब इस बच्चे के अभिभावक मुद्दे को school के समक्ष ले गये तो bullying करने वाले बच्चे की भी counseling की गई।

रोकथाम के उपाय

स्पेसिलिस्ट कहते है कि cyber bullying से बचने का सबसे असरदार तरीका है सतर्क रहना। example के लिए दिल्ली public school, गुडगाँव ने एक anti bullying स्क्वाड और कमेटी बनाई है, जो student, counselor, principal और अभिभावकों को मिलाकर बनाई गई है। school की छात्र सलाहकार रेणुका फर्नांडिस कहती है,’ हम अपने school में bullying को संजीदगी से लेते है और इसे कम करने के लिए सख्त से सख्त नियम बनाते है।‘

मुंबई हीरानंदानी foundation school की principal कल्याणी पटनायक कहती है,’ आज के समय में बच्चो के internet के प्रति जूनून पर रोकथाम लगाना अध्यापको के लिए कठिन हो गया है।‘ उनका school नियमित तौर पर counsiling session चलाता है। इसमे बच्चो को internet के नुकसानों से आगाह किया जाता है। specialist मानते है कि इस problem से निबटने में अभिभावकों का हस्तक्षेप और दिशानिर्देश अहम रोल अदा कर सकते है। parents को बच्चो को online सूचनाओ के आदान-प्रदान के खतरों से आगाह करना चाहिए, उन्हें online account की निजता की अहमियत बतानी चाहिए, और cyber bullying के प्रति जागरूक करना चाहिए। doctor छाबडिया कहती है,’ इस प्रकिया को रोकने के लिए पीड़ित और बुली, दोनों को counsiling दिए जाने की आवश्यकता है। तभी यह क्रम बंद हो सकता है।‘ doctor छाबडिया का यह भी मानना है कि cyber बुलीज हमेशा ही प्रतिक्रिया का इंतजार करते है, इसलिए ऐसी post पर ध्यान ना देना ही उचित रहता है। हालाकि कई मामलो में नजरंदाज करना काफी मुश्किल रहता है। ऐसे समय में अगर कोई बच्चा लिखी गई post से काफी आहत है तो उसे माता-पिता, अध्यापक, सलाहकार, थेरेपिस्ट या internet सेवा प्रदाता से यह बात share करना चाहिए। अगर जान से मारे जाने का खतरा है, शारीरिक हिंसा या अन्य कोई हिंसात्मक गतिविधि हुई है या या हो सकती है तो ऐसे में पुलिस को सुचना देना आवश्यक है।








                                          

Friday, February 5, 2016

Life की ये छोटी-छोटी बातें


1-      एक माली था। वह अपना काम बड़ी लगन से करता था। एक दिन वह अपने सुंदर से बगीचे से गुजर रहा था। उसने एक खतपतवार देखी। वह थका हुआ था, तो उसने उसे निकाला नही। अगले दिन उसे किसी रिश्तेदार के पास कही दूर जाना पड़ा। वह दो हफ्ते बाद लौटा। उसने देखा कि उसका पूरा बगीचा खरपतवार से ढका है, उसके दुसरे सभी पौधे नष्ट हो गये है।

सीख: हम भी अगर समय पर दिमाग में बैठे गलत विचार दूर नही करते तो उस जैसे कई विचार अंकुरित होकर अन्य विचारो को कमजोर कर देते है।

2-      एक आदमी साइकिल की दुकान पर काम कर रहा था। एक साइकिल ठीक होने को आयी थी, जिसे ठीक करने के बाद उसने अच्छी तरह साफ भी कर दिया। अब साइकिल पूरी तरह नई दिख रही थी।
उसके दुसरे साथी उसका मजाक उड़ाने लगे। वह कह रहे थे कि यह उसका काम नही है।
अगले दिन जब मालिक साइकिल लेने आया तो वह साइकिल देखकर खुश हो गया। उसने मैकनिक को तुरंत अपने यहाँ job दे दी।

सीख: अच्छी मेहनत कभी व्यर्थ नही जाती।

3-      एक जगह दो भाई रहते थे। छोटी उम्र में ही माता-पिता चल बसे। वे अपने खेतो में बड़ी मेहनत से काम करते। कुछ वर्षो बाद बड़े भाई की शादी हो गई और फिर दो बच्चो के साथ उसका चार लोगो का परिवार हो गया। दुसरे भाई की अभी शादी नही हुई थी। वे दोनों उपज को बराबर बांट लेते।

   एक दिन जब छोटा वाला भाई खेत में काम कर रहा था तो उसे विचार आया कि यह सही नही है कि वह बराबर बंटवारा करे। मै अकेला हूँ और मेरी जरूरते भी बहुत नही है। मेरे भाई का परिवार बड़ा है। उसकी जरूरते अधिक है। अपने दिमाग में इसी विचार के साथ वह रात अपने यहाँ से अनाज का एक बोरा ले जाकर भाई के खेत में चुपचाप रखने लगा। इसी दौरान, बड़े भाई ने सोचा, यह सही नही है कि हम हर चीज का बराबर बंटवारा करे। मेरे पास मेरा ध्यान रखने के लिए पत्नी और बच्चे है। मेरे भाई का तो कोई परिवार नही है। future में उसकी कौन देखभाल करेगा। मुझे उसे अधिक देना चाहिए। इस विचार के साथ वह हर दिन एक अनाज का बोरा लेता और अपने भाई के खेत में रख देता। ऐसा ही चलता रहा। दोनों भाई हैरान थे कि उनका अनाज कम क्यों नही हो रहा।

एक दिन, एक- दुसरे के खेतो में जाते समय उनकी मुलाकात हो गयी। उन्हें पता चला कि आखिर इतने समय से क्या हो रहा रहा था। वे ख़ुशी से एक-दुसरे के गले लगकर रोने लगे।

सीख: सच्चे मन से किये गये भलाई के काम में कभी अपना नुकसान नही होता है।











Thursday, February 4, 2016

Everything ठीक करने की कोशिश क्यूँ?


आप कुछ भी करे, कही भी जाए, आपका दिमाग आपके साथ जाता है। ऐसे में आप अपने प्रयास से ही संतुष्ट नही रहते, तो हर समय हैरान, परेशान ही बने रहते है। चीजो को अपने control में लेने की बैचेनी साथ नही छोडती। problem का समाधान करने की आदत अच्छी है, पर इसका क्या कोई अंत है? क्या जरूरी है कि हर छोटी या गैर जरूरी बात पर उर्जा और समय खर्च किया जाए?

हर चीज को control और ठीक करने की कोशिश brain को शांत नही होने देती। हमे हर समय busy रखती है। सर्वश्रेष्ठ स्थितियों होने के बावजूद बेहतर से बेहतर खोजने का प्रयास हमे खुश नही नही रहने देता। प्रश्न उठता है कि क्या अपनी स्थितियों में बदलाव करना, बेहतरी की ओर ले जाना गलत है? ‘अपनी बेहतरी के लिए हमेशा प्रयास करे, पर यह कोशिश स्वाभाविक होनी चाहिए। भीतरी असुरक्षा और हीन भावनाओ की उपज नही।‘ यह कहना है professional motivational जुडी सैजमैन का। अपनी website three principal में वे मन, चेतना और विचार इन तीन की ताकत को सम्पूर्ण बेहतरी का मन्त्र मानती है। वे कहती है,’ लोगो में जोश, समझ, प्रेरणा या skill की कमी नही होती। उनकी परिस्थितियां भी संतोषजनक होती है, बावजूद वे अपनी जिन्दगी को चुनौतीपूर्ण बनाये रखते है। problem यह है कि हम बाहरी कारणों को दोष देते है, जबकि गलती हमारी अपनी समझ में होती है।‘

जुडी सैजमैन के अनुसार, हर चीज को control करने की कोशिश करना व्यर्थ है। वे ऐसे लोगो के कुछ लक्षण बताती है,जो उन्हें जीवन में खुशियों से दूर करते है। उनके अनुसार,ऐसे लोग जो बाहरी परिस्थितियों को ख़ुशी की वजह मानते है, उन्हें खुश करना मुश्किल होता है। वे हर समय कुछ न कुछ चिंता करने लायक ढूंढ ही लेते है। आत्म संदेह दूसरो के भले प्रयास को देखने नही देता। ऐसे लोग हीन भावनाओ की शिकार होने के कारण हर समय दूसरो के प्रति आंशकित रहते है।

स्वीकार करना सीखे

‘the little book of big change’ की लेखिका Dr. एमी जॉनसन अपने लेख ‘let go of control: how  to learn the art of surrender’ में कहती है,’ हम चीजो को control करने की कोशिश करते है, क्योकि हम उस स्थिति को सोचते रहते है कि क्या होगा यदि हमने अमुक काम नही किया। हर चीज को ठीक करने की प्रवृति के मूल में हमारा डर छुपा होता है। हर चीज को साधने की कोशिश चित्त को एकाग्र नही होने देती। हम अतीत से future और फिर उसी में भटकते रहते है।‘ एमी कहती है,’ इस प्रवृति से बाहर आने के लिए जरूरी है स्थितियों को स्वीकार करना। खुद से पूछना कि आपका वास्तविक डर क्या है। कही आप अव्यवहारिक चीजो पर दिमाग तो नही लगा रहे। ऐसी बाते जो आपके control में ही नही है। हर चीज को control में करना इस universal से मिलने वाले सहयोग पर विश्वास न रखना है।








Monday, February 1, 2016

Change himself लेकिन आराम से


जिन्दगी है तो चुनौतियां है। चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए अपने को बदलना भी कई बार जरूरी हो जाता है। कही ये बदलाव आप पर भारी तो नही पड़ रहा? क्या आप बदलाव के लिए सही रास्ता अपना रहे है?

वास्तव में ‘self confidence’ के सही मायने क्या है?

मेरे विचार से इसका अर्थ है कि हम अपनी सुरक्षित ‘यथास्थिति’ को छोडकर एक ऐसे रास्ते का रूख करते है, जो बिलकुल नया होता है। प्राय: इसका अर्थ होता है कि हमे भय और संदेह पर विजय पाना है। इसे करने के दो रास्ते है- एक आसान और एक मुश्किल।

आप किसे चुनेगे: आसान या मुश्किल

मुश्किल तरीका यह है कि नये रास्ते पर फौरन चल पड़े, खुद को नये रास्ते के लिए सामंजस्य बिठाने का समय दिए बगैर। उदहारण के लिए, अगर आप ज्यादा exercise करना चाहते है तो मुश्किल रास्ता यह होगा कि आप हर सुबह आधे घंटे दौड़ लगाना शुरू कर दे। यह positive बदलाव को कमजोर करने का एक सुनिश्चित तरीका है। बदलाव के तीन स्तरों को अपनाने का आसान रास्ता है- comfort, stretch और stress.

1-  comfort यानि सुभीता हमारे अंदर गहरे जमी हुई आदतों का क्षेत्र है।

2-  stress अर्थात तनाव तब होता है, जब चुनौतियां इतनी ज्यादा बड़ी होती है कि उनके सामने हम पराजित- सा महसूस करते है।

3-  stretch अर्थात विस्तार या फैलाव वह क्षेत्र है, जिसमे निरंतर परिवर्तन होता है।


चलिए मान लेते है कि आप चाहते है, आपका body ज्यादा लचीला हो और आप इसके लिए नियमित रूप से strech exercise शुरू करते है। अगर strech करते समय आप अपने comfort जोन से आगे बढ़ते है तो कुछ नही होगा। लेकिन वही दूसरी तरफ जब आप अपनी मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव डालते है तो आपके चोटिल होने का खतरा बढ़ जाता है। हालाकि अगर आप एक ऐसी स्थिति की ओर बढ़ते है, जहां थोड़ी असुविधा महसूस होती है तो आपके लचीलेपन में वृद्दि होती है।
comfort जोन का अपना महत्व होता है, उदहारण के लिए, जब आप stretch करते है तो stretch की अवस्था में तब तक रहे, जब तक आप सहज न महसूस करने लगे। उसके बाद ही मांसपेशियों और लिंगामेंट को बढाने के क्रम में किसी को stretch जोन में फिर से प्रवेश करना चाहिए।

परिवर्तन का सबसे उत्कृष्ट तरीका है- stress से बचते हुए comfort और stretch के बीच बारी बारी से आना-जाना आजमाते रहे। strech जोन में असहजता का अहसास हो सकता है, क्योकि नये हुनर और व्यहार थोड़े अटपटे लग सकते है। यह बदलाव का एक पुरानी को नई आदतों के साथ लेकर चलता है। इसे ऐसे करके देखे-

1-  अपने हाथो को एक साथ मिलाइए।

2-  अब इसे ऐसे कीजिये कि जो अंगूठा पहले नीचे था, अब उपर आ जाए। ऐसा करने के बाद थोडा अटपटा लगा न!

3-  यह एक important क्षण होता है, जिसे हम उलझन की स्थिति कहते है, जब हम पुराने के साथ नये को मिलाते है।

4-  उलझन की अवस्था के बाद brain नये इनपुट को सुव्यवस्थित करना शुरू कर देता है और परिणामस्वरूप brain में नये रास्ते बनने शुरू हो जाते है। ‘उलझन या भम्र’ का एक मतलब ‘ एक साथ बांधना’ भी होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि एक नई आदत डालने के क्रम में पुरानी आदतों का नए के साथ मिलन आवश्यक है।

stretch जोन brain की सेहत पर दूरगामी प्रभाव डालता है। strech जोन में जाना आपके लिए अच्छा है। यह brain को healthy रखता है। यह पता चला है कि अगर हम नई चीजो को सीखना ( जो हमारे brain को नए विचारो के लिए रास्ते बनाने की चुनौती देती है) जारी नही रखते तो brain का क्षय होना शुरू हो जाता है, जिसकी परिणति डिमेंशिया, अल्जाईमर्स और brain के दुसरे रोगों के रूप में होती है।

एक study के अनुसार, लगातार strech करना और खुद को चुनौती देते रहना हमे वजन कम करने में भी मदद देता है। शोधकर्ताओं ने लोगो से हर दिन कुछ अलग करने को कहा, जैसे कि- नये रेडियो स्टेशन सुनना आदि। उन्होंने पाया कि जिन लोगो ने ऐसा किया, उनका वजन कम हुआ या फिर उनका वजन नही बढ़ा। ऐसा क्यों है, निश्चित रूप से पता नही, लेकिन वैज्ञानिको का अनुमान है कि अपने रूटीन से बाहर निकल कर चीजे करने से अमूमन हममे ज्यादा जागरूकता आती है।

आपका झुकाव किस जोन में है?

1-  क्या आप comfort को बहुत important देते है? बदलाव पसंद नही? अगर ऐसा है तो आप उन लोगो में से हो सकते है, जो ज्यादातर comfort जोन में रहना चाहते है।

2-  क्या आपको सीखना और आगे बढना पसंद है? तब आप उन लोगो में से हो सकते है, जो अपना ज्यादातर समय stretch जोन में बिताना चाहते है।

3-  अगर आप अकसर तनावग्रस्त और थका-हारा सा महसूस करते है तो सकता है कि आप stress जोन में रह रहे है।

उलझन से होते हुए विकास की ओर बढने में अनजान चीजो को गले लगाने की जरूरत होती है। यह अनभिज्ञता’ हमे जीवन में कुछ नया पाने और उस तरीके से आगे बढने में मदद करती है, जिसकी कल्पना हमने पहले कभी नही की थी।

हमारे जीवन में important है ये तीन जोन

1-  comfort जोन ‘शीतनिद्रा’ की अवस्था है। सर्दियों में जमीन के उपर कोई अंकुरण नही देखा जा सकता है, लेकिन पृथ्वी के अंदर जड़े बढती रहती है। ये मिट्टी को भेद कर बाहर आने और सूर्य के प्रकाश का आस्वाद लेने के लिए तैयार हो रही होती है। यह अवस्था रचनात्मक प्रयासों में बहुत आम होती है। इसे हम brain के तरंगित होने यानि इस विचार के जन्म लेने से ठीक पहले अनुभव कर सकते है।

2-  हमे उस समय stress जोन में रहने की जरूरत रहती है जब हमारा कोई सामना एक नई परिस्थिति से होता है, जिस पर बहुत जल्दी control पाने की आवश्यकता होती है।

3-  stretch जोन रचनात्मकता और नवप्रवर्तन का जोन है। आप तब तक नवप्रवर्तन नही कर सकते, जब तक कि आप विस्तार के इच्छुक न हो और अनजान राहों से गुजरते हुए नये की ओर प्रस्थान करने की इच्छा नही रखते।




# इस article के writer मैरी जैक्श जो जेन मास्टर, writer, motivation speaker और blogger.

खुशहाल जिन्दगी जीने हेतु व्याहारिक सूत्रों के लिए प्रेरित करना उन्हें अच्छा लगता है।











Wednesday, January 27, 2016

Fattiness (मोटापा) बीमारी का घर


हमारे देश में ज्यादातर लोग इस बात को स्वीकार नही करते कि उनकी तोंद बढ़ रही है। शायद वे इस बात से भी अनजान है कि कमर का बढ़ता आकार उनके health के लिए काफी हानिकारक है। देश और दुनिया के स्तर पर हुए कई research साफ तौर पर यह कहते है कि पेट के उभार का सीधा सम्बन्ध उच्च रक्तचाप, heart सम्बन्धी और मधुमेह से है।

दुनिया भर में हुए research में यह सामने आया कि पुरुषो में तोंद ज्यादा होती है। वही महिलाओ में कुल्हे के आसपास अधिक मांस होता है। india में यह आंकड़ा कुछ उल्टा है।  यहाँ छ राज्यों( rural व् urban राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र और कर्नाटक) में 7000 लोगो पर किये गये research से सामने आया है कि india में पुरुषो की तुलना महिलाओ की तोंद अधिक है। पेट पर उभरा यह मांस 50 वर्ष की आयु के बाद हर चार में से एक माहिला के health के लिए खतरा बन रहा है। online journal BMJ open में एक महीने पहले इस study की report छापी गई है। इसके अनुसार study में शामिल लोगो में से 14% ओवरवेट यानि तय सीमा से अधिक वजन वाले लोग थे। इनमे हर तीन में से एक की तोंद (35.4 इंच से अधिक कमर पुरुषो में, 31.4 इंच से अधिक कमर महिलाओ में) थी। लगभग दो तिहाई(69%) तोंद वाली महिलाये अमीर family की थी, जबकि करीबन आधी यानि 46% महिलाए माध्यमवर्गीय व् निम्न मध्यमवर्गीय family से थी।

बीमारियों से सम्बन्ध

ज्यादा परेशान करने वाले तथ्य उस study से पता चलते है, जो अब तक प्रकाशित नही हुआ है। यह study all india institute of medical science यानि AIIMS दिल्ली ने किया है। यह 20 से 60 साल के आयु वर्ग के 500 से अधिक लोगो पर किया गया। इस study में सामने आया कि पेट पर बढ़ता मांस महिलाओ के लिए कई बीमारियाँ की जद में आने का खतरा बन सकता है। इस study में शामिल रहे AIIMS में अतिरिक्त professor doctor नवल विक्रम कहते है,’ हमने इस study में पाया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और heart सम्बन्धी बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ी तोंद वाले पुरुषो में 12 गुना व् महिलाओ में 20  गुना अधिक हो जाता है।

पेट पर जो मांस जमा है, उसके स्वरूप से भी बीमारियों के खतरे से आगाह किया जा सकता है। गुडगाँव के मेदांता hospital में clinical एवं priventive cardilogy के अध्यक्ष doctor आर आर कासलीवाल कहते है,’ आंत्र से निकलता fat, खून में fatty acids release करता है। यह blood glucose और रक्तचाप को बढ़ाते है, बल्कि कुछ estrojan sensitive cancer जैसे रजोनिवृति के बाद breast और गर्भाशय के cancer के खतरे को बढ़ा देते है।‘

कैसे बढ़ी problem

फोर्टिस सी-डॉक के अध्यक्ष doctor अनूप मिश्रा (जिन्होंने AIIMS में अपने कार्यकाल के दौरान अध्ययन करने वाले दल की अध्यक्षता की थी) के अनुसार,’ india में हमने जो अध्ययन किया, उसमे पुरुषो के कमर का size 78cm निर्धारित किया था और महिलाओ के लिए 72cm. जो भी इससे कम इससे अधिक कमर वाले पाए गये, वे अच्छा वजन होने के बावजूद भी कम से कम एक metabolism बीमारी की जद में आने के खतरे में थे।‘

कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय study भी बढती कमर और heart सम्बन्धी बीमारियों व् मधुमेह के सम्बन्ध को स्वीकार करते है। अमेरिका में हुए एक study में 45,000 महिलाओ का 16 साल के लिए study किया गया। इसमें पाया गया कि बढ़ी कमर वाली महिलाये(35 इंच या इससे अधिक कमर) heart attack से मरने के दोगने खतरे में थी, अपेक्षा उन महिलाओ से, जिनकी कमर 28 इंच से कम थी। यह research नर्सेज health study में छपा था। doctor विक्रम कहते है,’ जब हमारा body fat collect करता है तो उसके कई कारण हो सकते है। यह आनुवंशिक हो सकता है या फिर हार्मोन्स के कारण भी। हालाकि सबसे प्रमुख कारण खान-पान पर नियंत्रण है। अच्छे वजन वाले fit लोगो की भी तोंद हो सकती है, इसलिए packet वाले भोजन से बचना चाहिए और शारीरिक तौर पर अधिक परिश्रमी होना चाहिए, ताकि body शेप में रहे।‘ tension पर control और पूरी नीद भी इसमे अहम रोल अदा करती है। doctor कासलीवाल कहते है,’ कुल मिलाकर सब कुछ healthy lifestyle पर निर्भर करता है। जिस तरह से आप  जीते है,’ वह आपके स्वास्थ्य पर भी झलकता है। इसलिए जितना जल्दी आप tension free life जीना आरम्भ करेगे, उतनी जल्दी आपका body सही आकार में आ जायेगा।‘

Fat होने की वजह

1-  अगर आप प्रतिदिन 6 से 7 घंटे की नीद नही ले रहे है।
2-  trans fat वाला food, packet वाला खाना, प्रिजरवेटिव वाला food अधिक मात्रा में कर रहे है।
3-  fruits और vegetable का पर्याप्त मात्रा में सेवन नही कर रहे।
4-  दिन में दो गिलास से ज्यादा शराब पी रहे है।
5-  अत्यधिक tension में है और शारीरिक श्रम नही कर रहे है।
बढ़ता खतरा

आंत्र द्वारा निकला fat body के भीतर ही जमा होता जाता है। पेट के भीतर यह liver, kidni और आंत के आसपास जमा हो जाता है। इसके कारण metabolic बदलाव होते है, जो टोटल colestral बढ़ता है और HDL यानि अच्छा colestral कम हो जाता है। इससे रक्तचाप बढ़ता है और body की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

पांच तरीके Flat पेट के लिए

personal trainer शालिनी भार्गव कहती है कि पेट को flat करने में समय लगता है। इसके लिए आपको वचनबद्ध एकाग्र और धैर्यवान बनना होगा। इसके लिए ये उपाय अपनाये-
1-  पेट की fat कम करने में सबसे कारगर है एरोबिक व्यायाम। पेट के व्यायाम करे।
2-  स्टेबिलिटी ball और doubles की मदद से catch करे।
3-  पेट का मध्य भाग पेट की bones से बना होता है। यह bones आपकी कमर और उसके निचले भाग की bones को मिलाकर करीब 15 bones से मिली होती है, इसलिए प्लेक्स करे।
4-  जब भी चले या बैठे तो सीधे बैठे। जब भी चले या व्यायाम करे तो पेट को अंदर की ओर सिकोड़े।
5-  अधिक से अधिक fiber खाए। प्रतिदिन 10 ग्राम fiber लेने से पेट में 4% कम fat जमा होगी। दो सेब या दो cup ब्रोकली आपको 10 ग्राम fiber दे सकते है।