Sunday, January 17, 2016

Change the Thought of Preconception(पूर्वाग्रह)


निजी और पेशेवर जिन्दगी में धारणाये काफी मायने रखती है। हमारी प्रवृति का अंश होने के कारण इनसे पूरी तरह बचा नही जा सकता, लेकिन इनके होने वाले प्रभाव को जरुर कम कर सकते है। लम्बे समय तक पूर्व बनी धारणाओं के साथ जीने का अर्थ है- पूर्वाग्रह का जन्म। पूर्वाग्रह हमे सहज होने से रोकते है, सामाजिकता का दायरा संकुचित करते है। नतीजा, हम जिन्दगी का एक अरसा फिजूल की दिमागी कसरत में गंवा बैठते है।

कैसे बनते है पूर्वाग्रह

हम जब भी किसी person से मिलते है, तो जाने-अनजाने उसके हाव-भाव और आचार-विचार पर गौर करते है। इसके हमारे भीतर उस person के प्रति एक धारणा बनती है। यह positive या negative रूप में हमारे मन के किसी कोने में बैठ जाती है। फिर जब भी हम किसी नये person से मिलते है, कोई धारणा बनाते है, तो पुरानी धारणाये पुष्ट होती है, तो हम उसका आधार बनने वाली बातो को ‘मापदंड’ मान लेते है। फिर उस ‘मापदंड’ के दायरे में आते ही अनजान-से-अनजान person के बारे में भी राय कायम कर लेते है। अपने ‘मापदंडो’ के प्रति यह विश्वास ही पूर्वाग्रह है।

पूर्वाग्रह को पीछे छोड़े

·         हमारे पूर्वाग्रह कई बार सटीक साबित होते है। लेकिन इस बात को हमे किसी सार्वभोमिक सत्य की तरह नही अपनाना चाहिए। जीवन में एक-सी नजर आने वाली बातो का निष्कर्ष हमेशा 2+2 के परिणाम जैसा हो, यह जरूरी नही है। यही वजह है कि  एक पल में एक person काफी लोगो के लिए अच्छा भी होता है और बुरा भी।

·         विवेक और चिंतन प्रक्रिया को क्रियाशील रखकर पूर्वाग्रह से मुक्ति संभव है। इनकी क्रियाशीलता हमे वर्तमान में ही सोचने-समझने को प्रेरित करती है। हर नई स्थिति को नये तरीके से देखने के लिए प्रेरित करती है।

·         आध्यात्मिक गुरु श्री चिन्मय खुश रहने के लिए आकलन से बचने पर जोर देते है। वह कहते है कि जब आप हर person या चीज का अपनी दृष्टि से आकलन करने लगते है, तब आप खुशियों से दूर होने लगते है। इसलिए कभी किसी से मिले, तो उसे समझने से ज्यादा जानने का प्रयास करे। analysis तभी कारगर होता है, जब वह पर्याप्त जानकारियों पर आधारित हो। इसलिए निरपेक्ष भाव से पहले ज्यादा जानने का प्रयास करे।

भ्रम का भंवर है पूर्वाग्रह

·         पूर्वाग्रह काफी हद तक अंधविश्वास जैसे होते है, क्योकि इनके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नही होता। इस वजह से कई बार हम अच्छे लोगो को भी नाकाबिल या ख़राब मान बैठते है। आइन्स्टाइन की एक मशहूर उक्ति है, हर person प्रतिभावान है। लेकिन जब आप किसी मछली की काबिलियत पेड़ पर चढने की उसकी क्षमता से आंकते है, तो जीवन इसी भ्रम में बीतता है कि वह नाकाबिल है।

·         पूर्वाग्रह की बुनियाद में संदेह की प्रचुरता होती है, जिसके कारण निजी और पेशेवर जिन्दगी शंकाओ भंवर में उलझने लगती है।


·         कभी-कभी अलग-अलग वर्ग, क्षेत्र या भाषा विशेष के लोगो के बीच tension की बाते सुनने को मिलती है। इनकी बुनियाद में आमतौर पर पूर्वाग्रह ही होते है, जो एक-दुसरे से जुड़ने से रोकते है।






Tuesday, January 12, 2016

Swami Vivekananda स्वामी विवेकानंद




स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन् 1863 (विद्वानों के अनुसार मकर संक्रान्तिसंवत् १९२०)[6] को कलकत्ता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेन्द्र को भी अँग्रेजीपढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढर्रे पर चलाना चाहते थे। परन्तु उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की महिला थीं। उनका अधिकांश समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था। नरेन्द्र की बुद्धि बचपन से ही बड़ी तीव्र थी

बचपन से ही नरेन्द्र अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि के तो थे ही नटखट भी थे। अपने साथी बच्चों के साथ वे खूब शरारत करते और मौका मिलने पर अपने अध्यापकों के साथ भी शरारत करने से नहीं चूकते थे। उनके घर में नियमपूर्वक रोज पूजा-पाठ होता था धार्मिक प्रवृत्ति की होने के कारण माता भुवनेश्वरी देवी कोपुराण,रामायण, महाभारत आदि की कथा सुनने का बहुत शौक था। कथावाचक बराबर इनके घर आते रहते थे। नियमित रूप से भजन-कीर्तन भी होता रहता था। परिवार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव से बालक नरेन्द्र के मन में बचपन से ही धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार गहरे होते गये। माता-पिता के संस्कारों और धार्मिक वातावरण के कारण बालक के मन में बचपन से ही ईश्वर को जानने और उसे प्राप्त करने की लालसा दिखायी देने लगी थी। ईश्वर के बारे में जानने की उत्सुकता में कभी-कभी वे ऐसे प्रश्न पूछ बैठते थे कि इनके माता-पिता और कथावाचक पण्डितजी तक चक्कर में पड़ जाते थे।

1881 में नरेंद्र पहली बार रामकृष्ण से मिले, जिन्होंने नरेंद्र के पिता की मृत्यु पश्च्यात मुख्य रूप से नरेंद्र पर आध्यात्मिक प्रकाश डाला। 

जब William Hastie जनरल असेंबली संस्था में William Wordsworth की कविता पर्यटनपर भाषण दे रहे थे, तब नरेंद्र ने अपने आप को रामकृष्ण से परिचित करवाया था
जब वे कविता के एक शब्द “Trance” का मतलब समझा रहे थे, तब उन्होंने अपने विद्यार्थियों से कहा की वे इसका मतलब जानने के लिए दक्षिणेश्वर में स्थित रामकृष्ण से मिले उनकी इस बात ने कई विद्यार्थियों को रामकृष्ण से मिलने प्रेरित किया, जिसमे नरेंद्र भी शामिल थे

स्वामी विवेकानन्द अपना जीवन अपने गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर चुके थे। उनके गुरुदेव का शरीर अत्यन्त रुग्ण हो गया था। गुरुदेव के शरीर-त्याग के दिनों में अपने घर और कुटुम्ब की नाजुक हालत व स्वयं के भोजन की चिन्ता किये बिना वे गुरु की सेवा में सतत संलग्न रहे।

वे व्यक्तिगत रूप से नवम्बर 1881 में मिले, लेकिन नरेंद्र उसे अपनी रामकृष्ण के साथ पहली मुलाकात नहीं मानते, और ना ही कभी किसी ने उस मुलाकात को नरेंद्र और रामकृष्ण की पहली मुलाकात के रूप में देखा. उस समय नरेंद्र अपनी आने वाली F.A.(ललित कला) परीक्षा की तयारी कर रहे थे जब रामकृष्ण को सुरेन्द्र नाथ मित्र के घर अपना भाषण देने जाना था, तब उन्होंने नरेंद्र को अपने साथ ही रखा परांजपे के अनुसार, ”उस मुलाकात में रामकृष्ण ने युवा नरेंद्र को कुछ गाने के लिए कहा था और उनके गाने की कला से मोहित होकर उन्होंने नरेंद्र को अपने साथ दक्षिणेश्वर चलने कहा
31 मई, 1883 को वह अमेरिका गए 11 सितंबर, 1883 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में उपस्थित होकर अपने संबोधन में सबको भाइयों और बहनों कह कर संबोधित किया इस आत्मीय संबोधन पर मुग्ध होकर सब बड़ी देर तक तालियां बजाते रहेवहीं उन्होंने शून्य को ब्रह्म सिद्ध किया और भारतीय धर्म दर्शन अद्वैत वेदांत की श्रेष्ठता का डंका बजाया उनका कहना था कि आत्मा से पृथक करके जब हम किसी व्यक्ति या वस्तु से प्रेम करते हैं, तो उसका फल शोक या दुख होता है. अत: हमें सभी वस्तुओं का उपयोग उन्हें आत्मा के अंतर्गत मान कर करना चाहिए या आत्म-स्वरूप मान कर करना चाहिए ताकि हमें कष्ट या दुख न हो

अमेरिका में चार वर्ष रहकर वह धर्म-प्रचार करते रहे तथा 1887 में भारत लौट आएभारतीय धर्म-दर्शन का वास्तविक स्वरूप और किसी भी देश की अस्थिमज्जा माने जाने वाले युवकों के कर्तव्यों का रेखांकन कर स्वामी विवेकानंद सम्पूर्ण विश्व के जननायक बन गए

वे केवल सन्त ही नहीं, एक महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे। अमेरिका से लौटकर उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा था-"नया भारत निकल पड़े मोची की दुकान से, भड़भूँजे के भाड़ से, कारखाने से, हाट से, बाजार से; निकल पडे झाड़ियों, जंगलों, पहाड़ों, पर्वतों से।" और जनता ने स्वामीजी की पुकार का उत्तर दिया। वह गर्व के साथ निकल पड़ी। गान्धीजी को आजादी की लड़ाई में जो जन-समर्थन मिला, वह विवेकानन्द के आह्वान का ही फल था। इस प्रकार वे भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के भी एक प्रमुख प्रेरणा-स्रोत बने। उनका विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहीं बड़े-बड़े महात्माओं व ऋषियों का जन्म हुआ, यही संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं-केवल यहीं-आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिये जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है। उनके कथन-"उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ। अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।"

विवेकानंद ओजस्वी और सारगर्भित व्याख्यानों की प्रसिद्धि विश्व भर में है। जीवन के अन्तिम दिन उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या की और कहा-"एक और विवेकानन्द चाहिये, यह समझने के लिये कि इस विवेकानन्द ने अब तक क्या किया है।" उनके शिष्यों के अनुसार जीवन के अन्तिम दिन 4 जुलाई 1902 को भी उन्होंने अपनी ध्यान करने की दिनचर्या को नहीं बदला और प्रात: दो तीन घण्टे ध्यान किया और ध्यानावस्था में ही अपने ब्रह्मरन्ध्र को भेदकर महासमाधि ले ली। बेलूर में गंगा तट पर चन्दन की चिता पर उनकी अंत्येष्टि की गयी। इसी गंगा तट के दूसरी ओर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का सोलह वर्ष पूर्व अन्तिम संस्कार हुआ था।

उनके शिष्यों और अनुयायियों ने उनकी स्मृति में वहाँ एक मन्दिर बनवाया और समूचे विश्व में विवेकानन्द तथा उनके गुरु रामकृष्ण के सन्देशों के प्रचार के लिये 130 से अधिक केन्द्रों की स्थापना की।






Sunday, January 10, 2016

Fear के आगे Happy



विक्टर फ्रेंकल ने एक कॉन्संटेशन कैप में 3 साल बिताये। उन्होंने 39 books लिखी है, जिनमे ‘mens search for ultimate meaning’ भी है, जो अमेरिका की सबसे प्रभावशाली एक करोड़ books में शुमार है।

पॉल एलन के साथ बिल गेट्स ने पहली company ट्राफ़-ओ-डाटा शुरू की थी, जो विफल रही। उन्होंने दोबारा कोशिश की और microsoft की उत्पत्ति हुई।

स्टीवन स्पीलबर्ग, यूनिवर्सिटी ऑफ़ सदर्न कैलीफोर्निया स्कूल of थिएटर, फिल्म और टेलीवीजन में दाखिला पाने में  तीन बार विफल रहे थे। एक अन्य स्कूल में दाखिला मिलने के बाद उन्होंने निर्देशन सीखने के लिए बीच में ही पढाई छोड़ दी।

मशहूर लेखिका जे.के.रोलिंग एक तलाकशुदा सिंगल मदर थी और school में पढ़ाने के दौरान ही उन्होंने ‘हैरी पॉटर’ नामक novel लिखना शुरू किया था। इस novel की success ने उन्हें अरबपति बना दिया।

success person विपरीत परिस्थितियों में तरक्की करने के कारण ही सफल हुए है। दृढ़ निश्चय और जूनून की बदौलत वे बड़ी से बड़ी बाधाये पार करने के लिए हर जरुरी कोशिश करते है। वे कठिन वक्त का सामना करना चाहते है, अपनी सीमाओं से उपर उठते है और रास्ते में आयी चुनौतियों का सामना करने से अधिक सशक्त बुद्दिमान होते जाते है। सबसे important है कि वे खुद पर भरोसा करते है। success person भय के साथ अपना नाता नये  सिरे से जोड़ते है। आप भी ऐसा कर सकते है।

विपरीत कार्य करे

वही करे, जिसे आप नही करना नही चाहते। जितनी जल्दी आप किसी कार्य में रूकावट महसूस करेगे, उतनी ही जल्दी आपको अपने भय पर बात करने या इससे निकलने की जरूरत महसूस होगी। जब आपका बिस्तर से बाहर निकलने का मन न करे तो जबरदस्ती बिस्तर से बाहर निकल जाए। जब किसी समारोह में जाने का मन न हो तो उसमे जरुर भाग ले। काम मन का नही तो पहले उसे ही करे। विपरीत काम करना turning point बन सकता है। इससे आपके लिए अगला कदम आसान हो जाता है।

समर्पण

problem पर छिद्रान्वेषण न करे। इनका सटीक समाधान तलाशे। इस भय को मिटा दे कि समाधान की दिशा गलत होगी। सपने कभी खुबसूरत लुभावने पैकेज में बंधकर नही आते। अवसर के द्वार तभी खुलते है, जब आप सर्वश्रेष्ठ प्रयास से काम को अंजाम देते है। सपने तभी साकार होते है, जब आप जोखिम उठाते है। जो चीजे आपको पीछे खीचती है, उन्हें सहजता से स्वीकार करे,उनके प्रति समर्पण करे और आगे बढ़ते रहे।

आधी-अधूरी जिन्दगी न जिए

अगला बड़ा खतरा मोल लेने से नही डरे, बल्कि खेदभरी जिन्दगी जीने से डरे। अपने तोहफे या प्रतिभा का इस्तेमाल नही होने से डरे न कि लज्जित होने या मुर्ख कहलाने से। सुकूनदायी दायरे में फंस जाने की स्थिति से डरे और अगली अच्छी पहल करने से न घबराए।

डर का सामना करे

भय को हावी न होने दे। खुद को चुनौती से निपटने के लिए तैयार रखे। मुश्किल लगने वाले कामो में सफलता हासिल करे। खुद को गलत साबित करे। खुद के ख़ारिज होने के भय से उबरे। विदेश दौरे पर जाए। language सीखे। जिस काम के बारे में आप पहले सोचते थे कि आपके लिए impossible है, उसे करते हुए अपने भय पर विजय पाए। जैसे ही आप भय पर हावी होने लगेगे, खुद में बदलाव महसूस करने लगेगे।

शुरुआत तो करे

एक ऐसी नई स्थिति बनाये, जिसमे आपको काम करने की असमर्थता महसूस हो। अपनी सीमाए निर्धारित करे। सम्मान पाने की चाहत रखे। क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाए। नई जीवनशैली अपनाए। दूसरो पर निर्भर कम करे। इन सबकी आज से ही शुरुआत करे।

परिवेश ही सब कुछ होता है

अपने सभी नुकसानदेय रिश्तो से निजात पा ले। उनमे अपनी energy खपाना बंद कर दे। तय करे कि वे कौन-कौन पांच लोग है, जिन पर आपको सबसे ज्यादा समय बर्बाद करना पड़ता है? उधमी, लेखक और वक्ता जिम रोम बताते है, आप उन पांच लोगो का औसत है।

खुद को साहसी व्यक्तियों के बीच रखे। ऐसे लोगो के साथ वक्त बिताये, जिनमे हार का सामना करने का माद्दा है और जो कुछ अलग करना चाहते है। ऐसे लोगो की संगत करे, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए जीते है। दूसरो की मदद करते है।

अपनी शान बनाये रखे

बहाने न बनाये। समय बर्बाद करना छोड़े। आप कुशल है, उपयोगी है और सशक्त है। खुद की जिम्मेदारी ले। अतीत की success को याद करके उत्साह और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढे। खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश करे। दूसरो को भी ऐसा करने में मदद करे।

अपने धन का सदुपयोग करे

फिजूलखर्ची पर लगाम दे। कर्ज से उबरे। प्रत्येक अनावश्यक खरीद के पीछे अपर्याप्त का भय जुड़ा रहता है। मै परिपूर्ण नही हूँ। मेरे पास पर्याप्त साधन नही है। जरूरी नही कि आपके पास हर नया गैजेट या जूता हो।

भय को भरोसे में बदले
डर की बजाय उन परिणामो पर फोकस करे, जिन्हें आप पाना चाहते है। बड़ी चुनौतियों ले। इस बात का भरोसा रखे कि आप बेहतर कर सकते है। आपके आज के चुनाव ही आपका भविष्य है। भय के साथ अपने रिश्ते को पुन: परिभाषित करे।


# इस article, टेस मार्शल की है, जो कि लेखिका, life coach व् blogger है। काउंसिलिंग साइकोलॉजी में एमए की पढाई। जोखिम लेने में यकीन रखती है।


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Tuesday, January 5, 2016

Veg Person रखे Nutriment का खास ध्यान

   
veg food में protein की मात्रा ही कम नही होती, दुसरे जरूरी पोषक तत्व भी है, जो पर्याप्त मात्रा में body को नही मिल पाते। अगर शाकाहारी है तो आपके लिए diet में थोडा सा बदलाव करके पोषक तत्वों का संतुलन बनाना जरूरी हो जाता है।

Iron

body में iron की जरूरत हीमोग्लोबिन के लिए होती है। इसकी कमी से एनीमिया होता है। iron अच्छी रोग प्रतिरोधी क्षमता के लिए भी जरूरी है।

कैसे ले: गुडगाँव स्थित कोलंबिया एशिया hospital में डाइटीशियन हनी टंडन के अनुसार,’ chicken, egg और सार्डीन मछली में iron प्रचुर मात्रा में होता है। मांसाहारी उत्पादों की तुलना में body वनस्पति उत्पादों से मिलने वाले iron को पूरी तरह ग्रहण भी नही कर पाता, इसलिए शाकाहारियो को आयरनयुक्त उत्पाद अधिक मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है। स्प्राउट्स, तिल, सूरजमुखी व् सीता-फल के बीज,बींस,मशरूम,अनाज,काजू,बादाम और अखरोट में iron अधिक होता है। शरीर iron को ढंग से ग्रहण कर सके, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में vitamin-c लेना भी जरूरी है। अनार और मौसमी का जूस मिला कर ले। सलाद में मेवे व् संतरे को शामिल करे। ब्रोकली  और आलू खाए।

Vitamin B12

यह vitamin लाल रक्त कोशिकाओ के निर्माण और दिमाग के विकास के लिए जरूरी है। शुरुआत में इसकी कमी से  body में pain, कमजोरी, थकावट व् मानसिक उलझन के रूप में दिखती है। बाद में दिमाग पर असर पड़ने लगता है।

कैसे ले: मुंबई में नानावटी super स्पेशलिटी hospital में डाइटीशियन उषा सिसोदिया कहती है,’vitamin b-12 शाकाहारी उत्पादों में कम पाया जाता है। कुछ प्रोसेस्ड सोया products व् ब्रेड में ये होता है। कुछ खास दुकानों पर मिलने वाले नोरी सीवीड में भी यह प्रचुरता में होता है, जिसे सलाद,सूप और सब्जियों में मिलाकर ले सकते है। कमी अधिक होने पर supplements लेना ही बेहतर होता है।

जिंक

घावो को जल्द भरने, इम्यून system को मजबूत बनाने और क्षतिगस्त DNA की मरम्मत करने के लिए जिंक की जरूरत होती है। यह test व् सुगंध की क्षमता बनाये रखता है। इसकी कमी से  कम भूख, बाल गिरने व् डायरिया के रूप में दिखती है। लम्बे समय तक ऐसा रहने पर depression की आशंका बढ़ जाती है।

कैसे खाए: Dr. टंडन के अनुसार,’ साबुत अनाज,बींस,दाले,मूंगफली,सोया व् डेयरी उत्पादों में जिंक पर्याप्त मात्रा में होता है। काजू में iron व् जिंक दुसरे मेवो की तुलना में ज्यादा होते है। सूप व् सलाद में सीताफल के बीज और वीट जर्म ले।

Vitamin A

आँखे, thyroid harmons प्रकिया,cell की वृद्दि और अच्छी skin के लिए vitamin-A जरूरी होता है। इसकी कमी से इम्यून सिस्टम धीमा होने, अनिद्रा, थकावट और वजन कम होने जैसे लक्षण दिखने लगते है।

कैसे खाए: vitamin-A के लिए संतरी रंग की सब्जियां व् फल के अलावा गाजर,अखरोट, शकरकंद के साथ हरी पत्तेदार vegetable खाए।

Omega-3 फैटी एसिड्स

दिमाग के विकास के लिए omega-3 फैटी एसिड्स जरूरी है। इसमे एंटी एजिंग गुण होते है, जो free radicals को कम करके skin को बुढा होने से रोकते है। free radicals heart व् cancer रोगों की आशंका भी बढ़ा देते है।

कैसे ले: हर रोज सात अखरोट और एक चम्मच अलसी के बीज diet में शामिल करे।









Friday, January 1, 2016

Knowledge भरा पहला मरहम


किसी बीमारी या accident के बाद मरीज के लिए पहला घंटा बहुत important होता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे ‘golden hour’ कहते है। इस समय पीड़ित को दिया गया सही उपचार स्थिति को काबू कर लेता है। आकड़ो की माने तो देश में 10.1% मौते सही प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण होती है। daily होने वाली कई छोटी-बड़ी बाते है, जिनमे शुरूआती उपचार में हुई गलती परेशानी बढ़ा देती है।

Internally चोट लगने पर

क्या न करे: कई बार अचानक ठोकर लगने, कोई भारी सामान गिरने या सीढियों से फिसल जाने के कारण घुटने या टखने की मांसपेशियों में भीतरी चोट लग जाती है, सुजन आ जाती है और दर्द रहता है। कई बार लोग उस हिस्से की गर्म चीज से सिकाई करना शुरू कर देते है। ऐसा न करे। इससे रक्त संचार तेज हो जाता है और सुजन बढ़ जाती है।

क्या करे: ऐसी स्थिति में उस हिस्से की बर्फ से सिकाई करे। बर्फ की सिकाई से सूजन भी कम होगी और दर्द में भी राहत मिलेगी।

शरीर दर्द

क्या न करे: अक्सर हम दर्द होने पर एस्प्रिन व् आईब्रुफेन ले लेते है। ये medicine वास्तविक मर्ज पर असर नही करती, बस दर्द के अहसास को कम कर देती है। हर स्थिति के लिए दर्द की दवा भी अलग होती है। खुद से दवा लेते रहना हालत को गंभीर बना सकता है। लम्बे समय तक बिना किसी doctor के सलाह के medicine लेना अन्य अंगो पर भी बुरा असर डालता है।

क्या करे: दर्द होने पर बाम से मालिश करे। ऐसा करते समय body से दर्द निवारक ऐंडोफ्रिन का स्राव होता है और दर्द में राहत मिलती है। आराम न मिलने पर doctor से संपर्क करे।

Heart Attack व् Stroke

क्या न करे: heart attack या स्ट्रोक आने की स्थिति में अक्सर लोग विशेष hospital में जाने की हडबडाहट में शुरूआती एक घंटा गवा देते है, खासकर heart attack व् स्ट्रोक में शुरुआती  उपचार न मिल पाना स्थिति को गंभीर बना देता है।

क्या करे: यदि आप किसी आपातकालीन स्थिति में फंस जाए तो स्वयं या किसी की मदद द्वारा सबसे पहले एमरजेंसी नंबर पर फोन करके एम्बुलेंस बुलवाए या हो सके तो स्वयं ही नजदीकी hospital पहुंच जाए। heart attack में मरीज के मुह में 300mg water सोल्युबल एस्प्रिन रख दे, यह blood को पतला करने का काम करती है। यदि एस्प्रिन नही है तो disprin भी रख सकते है। वैसे heart रोगियों को नाइटोग्लिसरीन की गोली हमेशा साथ रखनी चाहिए।
स्ट्रोक की स्थिति इससे अलग है। इसमे व्यक्ति का हाथ, पैर या मुंह थोडा मुड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में एस्प्रिन या डिस्प्रिन नही देनी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके, व्यक्ति को तुरंत doctor के पास ले जाए।

गलती से जहरीला पदार्थ खा लेना

क्या न करे:  यदि आपके परिवार के किसी सदस्य ने गलती से कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है तो खुद doctor बनकर व्यक्ति को किसी तरह का syrup पीने के लिए न दे।

क्या करे: मरीज को बहुत सारा नमक वाला पानी पिलाकर उल्टी करवाने की कोशिश करे। फिर तुरंत doctor को बुला ले या उपचार सेण्टर पर संपर्क करे। जहर ज्यादा है तो स्थिति को नजरंदाज न करे, तुरंत hospital ले जाए।

पैनिक अटैक

क्या न करे: दुसरे को पैनिक में देखकर आप पैनिक में न आये। अपना अंदाजा लगाने से बेहतर है मरीज से ही पूछ ले कि वह क्या चाह रहा है।

क्या करे: सबसे पहले व्यक्ति को शांत जगह ले जाकर शांत करने की कोशिश करे। उसका ध्यान श्वास गति की तरफ क्रेंदित करवाए। फिर मरीज को कोई थका देने वाली activity जैसे हाथो को उपर उठाकर रखने या किसी काम में व्यस्त करने की कोशिश करे। श्वास गति control होने दे।

कटने या घाव होने पर

क्या न करे: अक्सर चोट लगने पर blood को रोकने के लिए उस हिस्से को दबा देते है या फिर कपड़े व् पट्टी से कसकर बांध देते है। ऐसा करने से चोट वाली जगह पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या करे: अगर चोट लगी है और बहुत खून बह रहा है तो सबसे पहले कटे हुए भाग को पानी के नल के नीचे ले जाए। ऐसा करने से blood तो रुकता ही है, साथ ही कीटाणु भी निकल जाते है। blood नही रूक रहा है तो पानी का बहाव को तेज कर दे, इससे blood का बहाव रूक जायेगा। अधिक बड़ा घाव होने पर उसे पानी से साफ करके ice pack लगाये, blood रूक जायेगा। इसके बाद ही antibiotic cream लगाकर पट्टी बांधे। ध्यान रहे, पट्टी बहुत कसी हुई नही, बल्कि हल्की बंधी होनी चाहिए। हवा लगने से जख्म जल्दी ठीक होता है।

जलने पर

क्या न करे: कई बार लोग आग की चपेट में आये व्यक्ति को कम्बल से ढककर आग बुझाने के बाद भी उसे उसे कपड़े से लपेटे रहते है। ऐसा करने से कपड़ा जले भाग से चिपक सकता है। जलने पर मक्खन या बर्फ न लगाए।

क्या करे: जले भाग पर पानी डाले। जले हुए हिस्से को 20-25 minute तक पानी के नीचे रखे। ऐसा करने से आग के कारण body में गई ऊष्मा के अन्दुरुनी कोशिकाओ को नुकसान पहुँचाने की आशंका कम हो जाती है और skin पर गहरा दाग भी नही पड़ता।

नकसीर फूटने पर

क्या न करे: गर्मियों में नाक से खून बहने लगता है। ऐसा तेज धूप लगने, उच्च रक्तचाप या नाक में किसी तरह का संक्रमण होने से होता है। इस स्थिति में लोग सिर पीछे की तरफ झुका कर बैठ जाते है। इससे blood आना बंद नही होता, साथ ही उसके गले के रास्ते सांस की नली में जाने की आशंका बढ़ जाती है, जो खतरनाक हो सकता है।

क्या करे: अपने सिर को सीधा रखे और अंगूठे व् ऊँगली से नाक के दोनों नथुनों को बंद कर ले।  ऐसा कम से कम 15 minute तक करे और मुंह से साँस ले। सिर पर ठंडा पानी डाले। यदि blood बंद नही हो रहा है तो तुरंत doctor से संपर्क करे।

सडक दुर्घटना

क्या न करे: accident की स्थिति में अक्सर लोग घबरा जाते है। खुद शांत रहे और पीड़ित को भी शांत रहने दे। स्थिति देखकर फैसला ले। समय ख़राब न करे।

क्या करे: accident में ज्यादातर मौते साँस में अवरोध आने की वजह से होती है, इसलिए सबसे पहले नाक और मुंह के आगे हाथ करके मरीज की साँस की गति को देखे। अगर साँस धीमे चल रहा है तो देख ले कि कही कुछ फंसा न हो। artificial breeding के जरिये oxygen भी दे सकते है। फिर उसके हाथ, पैर, सिर को हिलाकर के देखे। तुरंत ambulance बुलाये।

आँख में कचरा जाना या खुजली होना

क्या न करे: आँख में कचरा चले जाने पर खुजली करने की इच्छा होती है। ऐसी स्थिति में आँखों को रगड़ना नही चाहिए। इससे कचरा और अंदर जा सकता है। साथ ही इन्फेक्शन अधिक फ़ैल सकता है।

क्या करे: आँखों को तुरंत ठन्डे पानी से धोये। ऐसा करने से कचरा निकल जायेगा और इन्फेक्शन फैलेगा नही। उसके बाद भी अगर आँख में लाली व् दर्द देर तक बने हुए है तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करे।

दौरा पड़ना

क्या न करे: एक सामान्य अवधारणा है कि दौरा पड़ने पर मरीज के मुंह में चम्मच, कपड़ा पेन्सिल फंसा दे, ताकि वह अपनी जीभ न काट ले। कुछ लोग जूता भी सुंघाते है। ऐसा कुछ भी नही नही करना चाहिए। मरीज के मुंह में कपड़ा फंसाने से उसे साँस लेने में तकलीफ होगी, साथ ही जो वस्तु मुंह में रखी है, उसके गले में फंसने की आंशका भी बढ़ जाती है।

क्या करे: दौरा सीमित समय के लिए होता है। ऐसी हालत में सबसे पहले साथ वाले व्यक्ति को अपना धेर्य बनाये रखे। मरीज को पानी, आग, धारदार वस्तु, सीढी या अन्य कोई वस्तु जो नुकसान पंहुचा सकती है, उससे दूर रखकर खुली जगह पर लिटा देना चाहिए। मरीज के मुंह में कपड़ा नही फंसाना चाहिए। oxygen का प्रवाह ठीक होने से स्थिति जल्दी सामान्य हो जाती है। मरीज को करवट लेकर लिटाये। दौरा 3 minute से अधिक होने पर तुरंत doctor के पास ले जाए। अगर व्यक्ति की साँस चलती हुई महसूस नही हो रही है तो उस स्थिति में अपनी हथेली से व्यक्ति की छाती पर दवाब दे। हथेली के अंतिम भाग को छाती के बीच में रखे। फिर दुसरे हाथ को पहले हाथ पर रखकर एक minute में 100 से अधिक दवाब दे।

घर में जरुर रखे

1-  सिरदर्द, सर्दी-जुकाम, हाथ-पैर व् कमर दर्द के लिए बाम। चोट पर लगाने के लिए एंटीसेप्टिक tube.

2-  पट्टी, ऐदहेसिव बैंडेज, छोटी कैची और स्टिकिग प्लास्टर।

3-  खून बहने से रोकने के लिए solution.

4-  skin के लिए एंटी फंगल cream, ऐलोबिरा जेल, जले पर लगाए जाने वाली दवा।

5-  दर्द निवारक दवाये। ये दवाये doctor की सलाह से ही किट में रखे और एमरजेंसी में ही ले।

6-  disposable ग्लब्स, pocket mask, antiseptic वाइप्स, thermometer व् हाथ धोने का साबुन।

7-  बाहर का खाना व् अधिक चिकनाईयुक्त खाने से अक्सर पेट दर्द, मरोह, कब्ज, गैस, बदहजमी जैसी तकलीफे होती है। इनके लिए हाजमा करने वाली medicine व् चूर्ण रखे।

8-  डायरिया व् डिहाइड्रेशन से राहत पाने के लिए electoral का packet