Thursday, February 4, 2016

Everything ठीक करने की कोशिश क्यूँ?


आप कुछ भी करे, कही भी जाए, आपका दिमाग आपके साथ जाता है। ऐसे में आप अपने प्रयास से ही संतुष्ट नही रहते, तो हर समय हैरान, परेशान ही बने रहते है। चीजो को अपने control में लेने की बैचेनी साथ नही छोडती। problem का समाधान करने की आदत अच्छी है, पर इसका क्या कोई अंत है? क्या जरूरी है कि हर छोटी या गैर जरूरी बात पर उर्जा और समय खर्च किया जाए?

हर चीज को control और ठीक करने की कोशिश brain को शांत नही होने देती। हमे हर समय busy रखती है। सर्वश्रेष्ठ स्थितियों होने के बावजूद बेहतर से बेहतर खोजने का प्रयास हमे खुश नही नही रहने देता। प्रश्न उठता है कि क्या अपनी स्थितियों में बदलाव करना, बेहतरी की ओर ले जाना गलत है? ‘अपनी बेहतरी के लिए हमेशा प्रयास करे, पर यह कोशिश स्वाभाविक होनी चाहिए। भीतरी असुरक्षा और हीन भावनाओ की उपज नही।‘ यह कहना है professional motivational जुडी सैजमैन का। अपनी website three principal में वे मन, चेतना और विचार इन तीन की ताकत को सम्पूर्ण बेहतरी का मन्त्र मानती है। वे कहती है,’ लोगो में जोश, समझ, प्रेरणा या skill की कमी नही होती। उनकी परिस्थितियां भी संतोषजनक होती है, बावजूद वे अपनी जिन्दगी को चुनौतीपूर्ण बनाये रखते है। problem यह है कि हम बाहरी कारणों को दोष देते है, जबकि गलती हमारी अपनी समझ में होती है।‘

जुडी सैजमैन के अनुसार, हर चीज को control करने की कोशिश करना व्यर्थ है। वे ऐसे लोगो के कुछ लक्षण बताती है,जो उन्हें जीवन में खुशियों से दूर करते है। उनके अनुसार,ऐसे लोग जो बाहरी परिस्थितियों को ख़ुशी की वजह मानते है, उन्हें खुश करना मुश्किल होता है। वे हर समय कुछ न कुछ चिंता करने लायक ढूंढ ही लेते है। आत्म संदेह दूसरो के भले प्रयास को देखने नही देता। ऐसे लोग हीन भावनाओ की शिकार होने के कारण हर समय दूसरो के प्रति आंशकित रहते है।

स्वीकार करना सीखे

‘the little book of big change’ की लेखिका Dr. एमी जॉनसन अपने लेख ‘let go of control: how  to learn the art of surrender’ में कहती है,’ हम चीजो को control करने की कोशिश करते है, क्योकि हम उस स्थिति को सोचते रहते है कि क्या होगा यदि हमने अमुक काम नही किया। हर चीज को ठीक करने की प्रवृति के मूल में हमारा डर छुपा होता है। हर चीज को साधने की कोशिश चित्त को एकाग्र नही होने देती। हम अतीत से future और फिर उसी में भटकते रहते है।‘ एमी कहती है,’ इस प्रवृति से बाहर आने के लिए जरूरी है स्थितियों को स्वीकार करना। खुद से पूछना कि आपका वास्तविक डर क्या है। कही आप अव्यवहारिक चीजो पर दिमाग तो नही लगा रहे। ऐसी बाते जो आपके control में ही नही है। हर चीज को control में करना इस universal से मिलने वाले सहयोग पर विश्वास न रखना है।








Monday, February 1, 2016

Change himself लेकिन आराम से


जिन्दगी है तो चुनौतियां है। चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए अपने को बदलना भी कई बार जरूरी हो जाता है। कही ये बदलाव आप पर भारी तो नही पड़ रहा? क्या आप बदलाव के लिए सही रास्ता अपना रहे है?

वास्तव में ‘self confidence’ के सही मायने क्या है?

मेरे विचार से इसका अर्थ है कि हम अपनी सुरक्षित ‘यथास्थिति’ को छोडकर एक ऐसे रास्ते का रूख करते है, जो बिलकुल नया होता है। प्राय: इसका अर्थ होता है कि हमे भय और संदेह पर विजय पाना है। इसे करने के दो रास्ते है- एक आसान और एक मुश्किल।

आप किसे चुनेगे: आसान या मुश्किल

मुश्किल तरीका यह है कि नये रास्ते पर फौरन चल पड़े, खुद को नये रास्ते के लिए सामंजस्य बिठाने का समय दिए बगैर। उदहारण के लिए, अगर आप ज्यादा exercise करना चाहते है तो मुश्किल रास्ता यह होगा कि आप हर सुबह आधे घंटे दौड़ लगाना शुरू कर दे। यह positive बदलाव को कमजोर करने का एक सुनिश्चित तरीका है। बदलाव के तीन स्तरों को अपनाने का आसान रास्ता है- comfort, stretch और stress.

1-  comfort यानि सुभीता हमारे अंदर गहरे जमी हुई आदतों का क्षेत्र है।

2-  stress अर्थात तनाव तब होता है, जब चुनौतियां इतनी ज्यादा बड़ी होती है कि उनके सामने हम पराजित- सा महसूस करते है।

3-  stretch अर्थात विस्तार या फैलाव वह क्षेत्र है, जिसमे निरंतर परिवर्तन होता है।


चलिए मान लेते है कि आप चाहते है, आपका body ज्यादा लचीला हो और आप इसके लिए नियमित रूप से strech exercise शुरू करते है। अगर strech करते समय आप अपने comfort जोन से आगे बढ़ते है तो कुछ नही होगा। लेकिन वही दूसरी तरफ जब आप अपनी मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव डालते है तो आपके चोटिल होने का खतरा बढ़ जाता है। हालाकि अगर आप एक ऐसी स्थिति की ओर बढ़ते है, जहां थोड़ी असुविधा महसूस होती है तो आपके लचीलेपन में वृद्दि होती है।
comfort जोन का अपना महत्व होता है, उदहारण के लिए, जब आप stretch करते है तो stretch की अवस्था में तब तक रहे, जब तक आप सहज न महसूस करने लगे। उसके बाद ही मांसपेशियों और लिंगामेंट को बढाने के क्रम में किसी को stretch जोन में फिर से प्रवेश करना चाहिए।

परिवर्तन का सबसे उत्कृष्ट तरीका है- stress से बचते हुए comfort और stretch के बीच बारी बारी से आना-जाना आजमाते रहे। strech जोन में असहजता का अहसास हो सकता है, क्योकि नये हुनर और व्यहार थोड़े अटपटे लग सकते है। यह बदलाव का एक पुरानी को नई आदतों के साथ लेकर चलता है। इसे ऐसे करके देखे-

1-  अपने हाथो को एक साथ मिलाइए।

2-  अब इसे ऐसे कीजिये कि जो अंगूठा पहले नीचे था, अब उपर आ जाए। ऐसा करने के बाद थोडा अटपटा लगा न!

3-  यह एक important क्षण होता है, जिसे हम उलझन की स्थिति कहते है, जब हम पुराने के साथ नये को मिलाते है।

4-  उलझन की अवस्था के बाद brain नये इनपुट को सुव्यवस्थित करना शुरू कर देता है और परिणामस्वरूप brain में नये रास्ते बनने शुरू हो जाते है। ‘उलझन या भम्र’ का एक मतलब ‘ एक साथ बांधना’ भी होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि एक नई आदत डालने के क्रम में पुरानी आदतों का नए के साथ मिलन आवश्यक है।

stretch जोन brain की सेहत पर दूरगामी प्रभाव डालता है। strech जोन में जाना आपके लिए अच्छा है। यह brain को healthy रखता है। यह पता चला है कि अगर हम नई चीजो को सीखना ( जो हमारे brain को नए विचारो के लिए रास्ते बनाने की चुनौती देती है) जारी नही रखते तो brain का क्षय होना शुरू हो जाता है, जिसकी परिणति डिमेंशिया, अल्जाईमर्स और brain के दुसरे रोगों के रूप में होती है।

एक study के अनुसार, लगातार strech करना और खुद को चुनौती देते रहना हमे वजन कम करने में भी मदद देता है। शोधकर्ताओं ने लोगो से हर दिन कुछ अलग करने को कहा, जैसे कि- नये रेडियो स्टेशन सुनना आदि। उन्होंने पाया कि जिन लोगो ने ऐसा किया, उनका वजन कम हुआ या फिर उनका वजन नही बढ़ा। ऐसा क्यों है, निश्चित रूप से पता नही, लेकिन वैज्ञानिको का अनुमान है कि अपने रूटीन से बाहर निकल कर चीजे करने से अमूमन हममे ज्यादा जागरूकता आती है।

आपका झुकाव किस जोन में है?

1-  क्या आप comfort को बहुत important देते है? बदलाव पसंद नही? अगर ऐसा है तो आप उन लोगो में से हो सकते है, जो ज्यादातर comfort जोन में रहना चाहते है।

2-  क्या आपको सीखना और आगे बढना पसंद है? तब आप उन लोगो में से हो सकते है, जो अपना ज्यादातर समय stretch जोन में बिताना चाहते है।

3-  अगर आप अकसर तनावग्रस्त और थका-हारा सा महसूस करते है तो सकता है कि आप stress जोन में रह रहे है।

उलझन से होते हुए विकास की ओर बढने में अनजान चीजो को गले लगाने की जरूरत होती है। यह अनभिज्ञता’ हमे जीवन में कुछ नया पाने और उस तरीके से आगे बढने में मदद करती है, जिसकी कल्पना हमने पहले कभी नही की थी।

हमारे जीवन में important है ये तीन जोन

1-  comfort जोन ‘शीतनिद्रा’ की अवस्था है। सर्दियों में जमीन के उपर कोई अंकुरण नही देखा जा सकता है, लेकिन पृथ्वी के अंदर जड़े बढती रहती है। ये मिट्टी को भेद कर बाहर आने और सूर्य के प्रकाश का आस्वाद लेने के लिए तैयार हो रही होती है। यह अवस्था रचनात्मक प्रयासों में बहुत आम होती है। इसे हम brain के तरंगित होने यानि इस विचार के जन्म लेने से ठीक पहले अनुभव कर सकते है।

2-  हमे उस समय stress जोन में रहने की जरूरत रहती है जब हमारा कोई सामना एक नई परिस्थिति से होता है, जिस पर बहुत जल्दी control पाने की आवश्यकता होती है।

3-  stretch जोन रचनात्मकता और नवप्रवर्तन का जोन है। आप तब तक नवप्रवर्तन नही कर सकते, जब तक कि आप विस्तार के इच्छुक न हो और अनजान राहों से गुजरते हुए नये की ओर प्रस्थान करने की इच्छा नही रखते।




# इस article के writer मैरी जैक्श जो जेन मास्टर, writer, motivation speaker और blogger.

खुशहाल जिन्दगी जीने हेतु व्याहारिक सूत्रों के लिए प्रेरित करना उन्हें अच्छा लगता है।











Wednesday, January 27, 2016

Fattiness (मोटापा) बीमारी का घर


हमारे देश में ज्यादातर लोग इस बात को स्वीकार नही करते कि उनकी तोंद बढ़ रही है। शायद वे इस बात से भी अनजान है कि कमर का बढ़ता आकार उनके health के लिए काफी हानिकारक है। देश और दुनिया के स्तर पर हुए कई research साफ तौर पर यह कहते है कि पेट के उभार का सीधा सम्बन्ध उच्च रक्तचाप, heart सम्बन्धी और मधुमेह से है।

दुनिया भर में हुए research में यह सामने आया कि पुरुषो में तोंद ज्यादा होती है। वही महिलाओ में कुल्हे के आसपास अधिक मांस होता है। india में यह आंकड़ा कुछ उल्टा है।  यहाँ छ राज्यों( rural व् urban राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र और कर्नाटक) में 7000 लोगो पर किये गये research से सामने आया है कि india में पुरुषो की तुलना महिलाओ की तोंद अधिक है। पेट पर उभरा यह मांस 50 वर्ष की आयु के बाद हर चार में से एक माहिला के health के लिए खतरा बन रहा है। online journal BMJ open में एक महीने पहले इस study की report छापी गई है। इसके अनुसार study में शामिल लोगो में से 14% ओवरवेट यानि तय सीमा से अधिक वजन वाले लोग थे। इनमे हर तीन में से एक की तोंद (35.4 इंच से अधिक कमर पुरुषो में, 31.4 इंच से अधिक कमर महिलाओ में) थी। लगभग दो तिहाई(69%) तोंद वाली महिलाये अमीर family की थी, जबकि करीबन आधी यानि 46% महिलाए माध्यमवर्गीय व् निम्न मध्यमवर्गीय family से थी।

बीमारियों से सम्बन्ध

ज्यादा परेशान करने वाले तथ्य उस study से पता चलते है, जो अब तक प्रकाशित नही हुआ है। यह study all india institute of medical science यानि AIIMS दिल्ली ने किया है। यह 20 से 60 साल के आयु वर्ग के 500 से अधिक लोगो पर किया गया। इस study में सामने आया कि पेट पर बढ़ता मांस महिलाओ के लिए कई बीमारियाँ की जद में आने का खतरा बन सकता है। इस study में शामिल रहे AIIMS में अतिरिक्त professor doctor नवल विक्रम कहते है,’ हमने इस study में पाया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और heart सम्बन्धी बीमारियाँ होने का खतरा बढ़ी तोंद वाले पुरुषो में 12 गुना व् महिलाओ में 20  गुना अधिक हो जाता है।

पेट पर जो मांस जमा है, उसके स्वरूप से भी बीमारियों के खतरे से आगाह किया जा सकता है। गुडगाँव के मेदांता hospital में clinical एवं priventive cardilogy के अध्यक्ष doctor आर आर कासलीवाल कहते है,’ आंत्र से निकलता fat, खून में fatty acids release करता है। यह blood glucose और रक्तचाप को बढ़ाते है, बल्कि कुछ estrojan sensitive cancer जैसे रजोनिवृति के बाद breast और गर्भाशय के cancer के खतरे को बढ़ा देते है।‘

कैसे बढ़ी problem

फोर्टिस सी-डॉक के अध्यक्ष doctor अनूप मिश्रा (जिन्होंने AIIMS में अपने कार्यकाल के दौरान अध्ययन करने वाले दल की अध्यक्षता की थी) के अनुसार,’ india में हमने जो अध्ययन किया, उसमे पुरुषो के कमर का size 78cm निर्धारित किया था और महिलाओ के लिए 72cm. जो भी इससे कम इससे अधिक कमर वाले पाए गये, वे अच्छा वजन होने के बावजूद भी कम से कम एक metabolism बीमारी की जद में आने के खतरे में थे।‘

कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय study भी बढती कमर और heart सम्बन्धी बीमारियों व् मधुमेह के सम्बन्ध को स्वीकार करते है। अमेरिका में हुए एक study में 45,000 महिलाओ का 16 साल के लिए study किया गया। इसमें पाया गया कि बढ़ी कमर वाली महिलाये(35 इंच या इससे अधिक कमर) heart attack से मरने के दोगने खतरे में थी, अपेक्षा उन महिलाओ से, जिनकी कमर 28 इंच से कम थी। यह research नर्सेज health study में छपा था। doctor विक्रम कहते है,’ जब हमारा body fat collect करता है तो उसके कई कारण हो सकते है। यह आनुवंशिक हो सकता है या फिर हार्मोन्स के कारण भी। हालाकि सबसे प्रमुख कारण खान-पान पर नियंत्रण है। अच्छे वजन वाले fit लोगो की भी तोंद हो सकती है, इसलिए packet वाले भोजन से बचना चाहिए और शारीरिक तौर पर अधिक परिश्रमी होना चाहिए, ताकि body शेप में रहे।‘ tension पर control और पूरी नीद भी इसमे अहम रोल अदा करती है। doctor कासलीवाल कहते है,’ कुल मिलाकर सब कुछ healthy lifestyle पर निर्भर करता है। जिस तरह से आप  जीते है,’ वह आपके स्वास्थ्य पर भी झलकता है। इसलिए जितना जल्दी आप tension free life जीना आरम्भ करेगे, उतनी जल्दी आपका body सही आकार में आ जायेगा।‘

Fat होने की वजह

1-  अगर आप प्रतिदिन 6 से 7 घंटे की नीद नही ले रहे है।
2-  trans fat वाला food, packet वाला खाना, प्रिजरवेटिव वाला food अधिक मात्रा में कर रहे है।
3-  fruits और vegetable का पर्याप्त मात्रा में सेवन नही कर रहे।
4-  दिन में दो गिलास से ज्यादा शराब पी रहे है।
5-  अत्यधिक tension में है और शारीरिक श्रम नही कर रहे है।
बढ़ता खतरा

आंत्र द्वारा निकला fat body के भीतर ही जमा होता जाता है। पेट के भीतर यह liver, kidni और आंत के आसपास जमा हो जाता है। इसके कारण metabolic बदलाव होते है, जो टोटल colestral बढ़ता है और HDL यानि अच्छा colestral कम हो जाता है। इससे रक्तचाप बढ़ता है और body की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

पांच तरीके Flat पेट के लिए

personal trainer शालिनी भार्गव कहती है कि पेट को flat करने में समय लगता है। इसके लिए आपको वचनबद्ध एकाग्र और धैर्यवान बनना होगा। इसके लिए ये उपाय अपनाये-
1-  पेट की fat कम करने में सबसे कारगर है एरोबिक व्यायाम। पेट के व्यायाम करे।
2-  स्टेबिलिटी ball और doubles की मदद से catch करे।
3-  पेट का मध्य भाग पेट की bones से बना होता है। यह bones आपकी कमर और उसके निचले भाग की bones को मिलाकर करीब 15 bones से मिली होती है, इसलिए प्लेक्स करे।
4-  जब भी चले या बैठे तो सीधे बैठे। जब भी चले या व्यायाम करे तो पेट को अंदर की ओर सिकोड़े।
5-  अधिक से अधिक fiber खाए। प्रतिदिन 10 ग्राम fiber लेने से पेट में 4% कम fat जमा होगी। दो सेब या दो cup ब्रोकली आपको 10 ग्राम fiber दे सकते है। 





Friday, January 22, 2016

Professional हो आपका नजरिया


Entrance exam और interview में success होकर आपने मनपसन्द job हासिल कर ली। अब अपने हुनर और कौशल को प्रदर्शित करने की बारी है। दरअसल पहली job एक ऐसा आधार है, जो carrier की नीव रखती है। साथ ही यह जीवन का एक नया फेज है, जिसमे आप student life से निकलकर profession दुनिया में कदम रखते है। इस बदलाव के समय में जरूरी है कि आप सजग, सहज और सबल रहे। आईये जानते है job मिल जाने के बाद office में किन बातो का ख्याल रखना चाहिए।

पहला impression हो अच्छा

‘first impression is a last impression’ ये कहावत तो आपने सुनी होगी। यह बात तो सौ फीसदी सच है। job के शुरूआती दिनों में आपकी जैसी छवि बनती है, उसी के आधार पर लोग आपके काम का आकलन करते है। हालाकि अपनी छवि को बदला भी जा सकता है, लेकिन तब इसके लिए काफी मेहनत करनी पडती है। इसलिए आप हर तरह से  अच्छे और मेहनती होने का परिचय दे। आपके हाव-भाव और पहनावे से एक पेशेवर की झलक आनी चाहिए।

समय के हो पाबंद

सबसे अहम है समय की पाबंदी। इस बात का खास ध्यान रखे कि आप office कभी देर से न पहुंचे। job join करने के बाद नये कर्मचारियों पर HR और boss की विशेष नजर रहती है, इसलिए इस बात का ध्यान रहे कि office पहुंचने में देर न हो। भले ही तय समय से कुछ पहले office पहुंच जाए। college में पहला period निकल जाने के बाद पहुंचना चल जाता था, लेकिन office में यह रवैया नही चल सकता।

माहौल के हिसाब से चले

हर office का अपना अलग अंदाज और माहौल होता है, अलग संस्कृति होती है। job मिलने के बाद सबसे पहले आप अपने office के तौर- तरीके सीखे। वहां के माहौल का अध्ययन करे और उसके अनुसार ही अपना व्यवहार रखे। दूसरो के काम में ताक-झांक न करे और अपने काम से मतलब रखे।

Professional हो नजरिया

आपको इस बात का अंदाजा होगा कि carrier में सफलता के लिए professional नजरिया रखना कितना जरूरी है। लेकिन professionalism का मतलब होता क्या है? शायद ही कोई शिक्षण संस्थान professionalism सीखाता है। यह आपको खुद सीखना होगा। दूसरो को देखकर, उनके संपर्क में आकर। professional नजरिया रखने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप अपनी संस्था के सांस्कृतिक मानदंडो को समझे और उनका अनुसरण करे। अपने सहकर्मियों के साथ विनम्रता के साथ पेश आये। जिन्हें नही पसंद करते, उनके साथ भी विनम्र रहे। आपके साथ अच्छा व्यवहार न करने वाले लोगो के साथ भी विनम्रता से ही पेश आये। इसमे आप कही ज्यादा पेशेवर दिखेगे।
professional नजरिया रखने के लिए यह भी जरूरी है कि आप काम को गम्भीरता से ले। यदि कोई गलती हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी ले। समय पर काम पूरा करके देने की कोशिश करे, लेकिन यदि पूरा न कर पाए तो उसकी जानकारी समय रहते जरुर दे।

काम समझे

आप अपना काम जिम्मेदारी के साथ और professionally करे, इसके लिए जरूरी है कि आपको अपने काम की समझ हो। कई बार उत्साह में freshers कुछ का कुछ कर बैठते है, इसलिए पहले अपने boss के साथ बैठकर अपना काम अच्छी तरह समझ ले। कही शंका हो तो उसे भी दूर करे। यदि कुछ नया करना चाहते है तो अपने ideas boss के साथ share करे। कही ऐसा न हो कि उत्साह में आकर आप दूसरो के काम भी अपने हाथ में ले ले और team का माहौल ख़राब हो जाए। नई job में इसकी सम्भावना ज्यादा रहती है, इसलिए उनसे जाने कि आपकी जिम्मेदारियां क्या है।

रहे HR के संपर्क में

job join करने के एक महीने बाद तक कुछ कागजी प्रकियाए और फॉर्म भरने का काम चलता रहता है। इसके लिए सजग रहे और अपने सभी जरूरी दस्तावेजो की copy अपने पास रखे। इस बात का भी ध्यान रखे कि आपकी उपस्थिति लग रही है या नही। यदि आपके लिए अब तक उपस्थिति लगाने की प्रकिया पूरी नही हो पाई है तो HR से इस बारे में बात कर ले, ताकि वेतन में कटौती न हो।

कम ले छुट्टिया

college में आपने खूब क्लास बंक की होगी, पर अब आपको अपनी यह आदत बदलनी होगी। boss और HR ऐसे कर्मियों को बिलकुल पसंद नही करते, जो बार-बार छुट्टिया लेते है। इस तरह आप उनकी गुड-बुक में भी शामिल नही हो पायेगे। इसलिए जब तक जरूरी न हो, अतिरिक्त छुट्टिया न ले।

Gossip का हिस्सा न बने

job मिलने के बाद office में आपके नये दोस्त भी बनेगे। नये दोस्त आपको अपने साथ gossip का हिस्सा भी बनाने का कोशिश करेगे। ऐसे में बेहतर यह होगा कि आप एक professional डेकोरेम का पालन करे। उनकी बाते सिर्फ सुने, कोई प्रतिक्रिया न दे। सहज रहे और कहे कि आपको इस बारे में कोई जानकारी नही।

यदि आपको लगता है कि इसके बारे में manager को बताना चाहिए तो जरुर बताये, लेकिन उस person का नाम न बताये। साथ ही office के friends के बीच कभी personal बाते न करे।

Feedback ले

feedback लेना आपके काम का ही हिस्सा है। आज के समय में तो यह HR system का हिस्सा बन चुका है। आपके काम का आकलन कर आपका reporting manager अच्छी बातो के साथ negative comment भी करता है। negative feedback आपके अनदेखे अंधेरे पक्षों को उजागर करता है। यदि संभव हो तो आगे बढकर अपने senior officer से कुछ खास point को स्पष्ट करने के लिए कहे, ताकि वे आपसे क्या चाहते है, इसे आप स्पष्ट तरीके से समझ सके। इससे आपको उस मोर्चे पर सुधार करने में मदद मिलेगी।

न दिखाए जल्दबाजी

हो सकता है कि आपके दफ्तर का समय 5 बजे खत्म हो जाता है, लेकिन यदि अतिरिक्त आधे घंटे रुकने से जरूरी अधुरा काम पूरा हो जाता है तो आप office time के बाद भी थोड़ी देर जरुर रुके। इसका मतलब यह नही है कि आप अपनी personal जिदगी के प्रति संवेदनशील न रहे, लेकिन office का काम सिर्फ इसलिए अधुरा न छोड़े, क्योंकि आपके घर जाने का समय हो गया है।

Positive हो Behaviour

व्यक्ति का आचार, विचार व् behaviour उसके personality को दर्शाता है। job में कदम रखने वाले freshers के लिए तो ये विशेष गुण खास मायने रखते है। दरअसल ये वह गुण है, जो उनके carrier की दिशा व् दशा तय करने में मददगार साबित होते है। आमतौर पर जब कोई युवा किसी company में पहली job या training के लिए जाता है तो workplace के माहौल से पूर्णतया अनभिज्ञ होता है। खुद को ऐसे माहौल में ढालना और अपने व्यवहार से seniors के दिलो तक पहुचने की खूबी ही उनकी राह आसान करती है। वैसे यह काम मुश्किल भी नही है। बस इसके लिए कुछ बाते ध्यान रखना जरूरी है। जैसे-

·         office में ऊँची आवाज में बात न करे।

·         अंहकार न पाले, इससे office का माहौल negative होता है।

·         office के समय में फोन पर कम से कम निजी बाते करे। फ़ोन की आवाज भी धीमी रखे। फोन साइलेंट मोड पर भी रख सकते है।

·         आपके behaviour में भी ऐसी खूबियां दिखनी चाहिए, जो company की growth में मददगार हो।

·         आपके हाव-भाव में यह दिखना चाहिए कि आप अच्छे श्रोता है।

·         boss की बाते सुनकर उनके विचारो को अमल में लाने की कोशिश करे।

·         company की बेहतरी के लिए कुछ योजनाये हो तो वे भी share करे।

·         office में काम करने वाले सभी कर्मियों का सम्मान करे, खासकर महिलाओ के साथ अपना आचरण मर्यादित रखे।

·         अपने पद की गरिमा बनाये रखे।                                                                                                                                                                                                                                

work Place में इन गलतियों से बचे





   
   












          

Monday, January 18, 2016

Problem: कितनी सच,कितनी झूठ


एक bus driver bus चला रहा था। लम्बा रूट था, bus सामान्य रूप से रास्ता तय कर रही थी। passenger चढ़ उतर उतर रहे थे। अगले स्टॉप पर एक हट्टा-कट्टा person bus में चढ़ा। देखने में वह पहलवान की तरह लग रहा था। जब उससे टिकट लेने के लिए कहा तो वह conductor की ओर देखकर बोला, ‘मै टिकट नही लेता!’ यह कहकर वह पीछे की सीट पर बैठ गया।

conductor ने कुछ नही कहा, पर वह दुखी हो गया। अगले दिन भी ऐसा ही हुआ। उसने टिकट लेने से मना कर दिया। लगातार ऐसा ही चलता रहा। conductor डर के कारण चुप रहता। driver को यह अच्छा नही लग रहा था कि एक गरीब conductor का इस तरह वह व्यक्ति फायदा उठा रहा है। अंत में जब उससे रहा नही गया तो उसने body building course में दाखिला ले लिया और वह जुडो- कराटे सीखने लगा। छ माह में वह मजबूत बन गया और अपने बारे में अच्छा महसूस करने लगा।

अगले दिन जब वह person दोबारा आया तो conductor ने टिकट के बारे में पूछा। व्यक्ति ने फिर वही जवाब दिया। driver bus रोककर खड़ा हो गया। वह व्यक्ति से बोला, तुम क्यों नही दोगे पैसे?
व्यक्ति ने हैरानी से driver की ओर देखा और कहा- ‘मेरे पास bus pass है।‘


हंसी आ रही है ना, पर हम भी ऐसा ही करते है। भूल जाते है कि problem का हल करने की दिशा में मेहनत, समय और संसाधन लगाने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना जरूरी होता है कि वास्तव में problem है भी या नही। बिना स्थिति को समझे कदम बढ़ाना कई बार अपने व् दूसरो के लिए problem बन जाता है।