Sunday, October 18, 2015

लोग आपकी क्यों नही सुनते? Log Apki Kyon Nhi Sunte?





जब किसी बच्चे की बात को seriously से सुना जाता है, तो अपनी नजरो में वह थोडा और उपर उठ जाता है। लेकिन इसके लिए उन्हें सुना जाना प्रमुख और important बात है। व्यस्को पर भी यह बात लागू होती है। अगर आप अपनी बात से किसी का ध्यान कुछ देर के लिए खुद पर रोक नही पाते, तो खुद को बिलकुल अच्छा नही लगता। दरअसल इसका एक मतलब यह भी होता है कि आगे चलकर लोग आप पर ही ध्यान देना बंद कर दे।
अगर आपको लगता है कि आपकी तो कोई सुनता ही नही, तो सोचिये कि इसका कारण क्या हो सकता है? इसका मतलब यह नही है कि इसका कारण हम दुसरो में खोजने लगे, ना ही इसका इसका एक मतलब यह है कि आप गलत है। problem है संवाद की और यह सब जानते है कि संवाद एक दोतरफा प्रकिया है। इसके ध्यान में रखते हुए घर हो या office मुझे ऐसे सात कारण समझ में आते है, जिनके कारण हो सकता है कि लोग आपकी बात पर ध्यान नही देते हो-
1-  अगली बार जब आप अपनी बात किसी किसी से कहना शुरू करे, तो एक बात पर गौर करे। कही आपकी शुरुआत उलझी हुई तो नही होती? इस कारण बात पहली बार में ही जमती नही। आप बात कुछ यूँ शुरू करते है उसमे निहित सन्देश लोगो को खोजे नही मिलता। कुछ ऐसे कि मानो माला पिरोते समय एक गांठ लगाना भूल गये और पूरी बात बिखरकर रह गई।
2-  हो सकता है कि उसी समय किसी और चीज ने उनका ध्यान अपनी ओर खीच लिया
3-  वे आपकी बात में रूचि नही रखते , लेकिन वे इसे आपसे कह नही पा रहे है। 
4-  वे दिनभर इतने लोगो को सुनते है कि ना चाहते हुए भी उनका ध्यान बंट जाता है।
5-  हो सकता है कि आप जो कह रहे है, उस person की उससे जुडी कुछ निजी धारणाये हो।
6-  आपने अपनी बात कहना उस समय शुरू किया, जब person सुनने के लिए पूरी तरह तैयार नही हो पाया था।
7-  आप दुसरे person पर कुछ ज्यादा ही जवाब डाल रहे हो, क्योकि tension के चलते लोग किसी बात पर ध्यान देना बंद कर देते है।
इन सारे कारणों का हल भी निकाला जा सकता है। इसके लिए अपनी बात कहते समय आप थोड़ी सतर्कता बरतने की आदत डाले, ताकि आपकी बात से ध्यान हटाने वाली हर बाधा को आप तुरंत रफा-दफा कर सके। अगर चाहते है कि लोग आपकी बात को एक समझदार person का नजरिया मानकर ध्यान से सुने, तो अपने में कुछ तरीके से  बदलाव जरुर कर सकते है-
1-  तर्कों में अति ना करे। इसे कम करके केवल एक बिंदु बनाये। यह जरूरी है कि आप भी इस एक बिंदु से सहमत हो। फिर यदि स्पष्टा है तो कहे। फिर यह समझने की कोशिश करे कि क्या आपकी यह बात सुनी गई? अगर आपको लगता है कि वे आपकी बात नही सुन रहे, तो एक बार मुद्दे पर उनकी राय भी पूछे। किसी भी कीमत पर एक साथ बहुत सारे पक्ष- विपक्ष के साथ बात न करे, वरना वे एक-दो वाक्यों के बाद ही ध्यान देना बंद कर देगे। 
2-  कहते है बात हमेशा मौका और दस्तूर देखकर की जाती है। आप अपनी बात तब कहे, जब सुनने वालो का ध्यान एक से अधिक चीजो पर ना हो। कई बार यह मुश्किल काम ही होता है। ऐसे में यह बिलकुल ना पूछे कि क्या आपके पास एक minute है? क्योकि अधिकतर लोग नम्रता में हाँ तो कह देगे,पर आपकी बात को seriously से सुने, मुश्किल ही है।
3-  बहुत सारे लोग ऐसे होते है, जो सुनने की acting में माहिर होते है। दरअसल हर आदमी उनसे 2 minute बतियाना चाहता है। ऐसे में वह यह आदत develop कर लेते है। ऐसे लोग भी आपकी बात में रूचि ले, ऐसा चाहते है, तो उनसे अपनी बात कहिये, जिनकी बात पर वे अति व्यस्त लोग भी ध्यान देते है।
4-  जो लोग आपकी बात में रूचि दिखाए, उन्हें ही अपनी बात सुनाये, वरना उत्साह कम ही होगा। उनकी अनिच्छा होते हुए भी उन्हें आपकी बात सुननी पड़ी, इस पर नाराजगी भी हो सकती है। इससे बेहतर है कि आप उनसे पूछ ले। अगर उन्होंने ना कहा भी, तो कम से कम आपके और उनके बीच इमानदारी का रिश्ता तो कायम हो ही जायेगा।
5-  अपनी बात से किसी की दुखती रग को छू देना बहुत अच्छी बात नही है। अगर ऐसा हो, तो क्षमा मागते हुए वहां से हट जाए। उसकी भरपाई करने वाले तर्क ना दे।
6-  अगर आप गलत वक्त पर अपनी बात शुरू कर बैठे है और अचानक यह बात आपको पता चलती है, तो अपनी बात वही रोक दे। अपनी बात पूरी करने के लिए अड़े रहना अच्छा सन्देश प्रेषित नही करेगा।
7-  अपनी बात कहने के लिए बहुत ज्यादा कोशिश ना करे। कई बार ज्यादा दबाव से और विरोध ही मिलता है। इसे भांपकर अपनी बात को आगे के लिए टाल दे। इसका मन्त्र यही है कि पहले एक जुडाव बनाया जाये। थोडा निजी और serious वातावरण बनने दे। जब कोई अपने बंधे हाथ आराम से खोलकर बात करने लगे, जब कोई आपकी आँखों में देखकर बात करने लगे या मुस्कराने लगे, तो इसका मतलब एक जुड़ाव बन चुका है। अब वह आपकी बात सुनेगा भी। आशा करता हूँ कि मेरे इन तरीको से आपकी खुद से यह complain खत्म होगी कि लोग आपकी सुनते नही। ख़ुशी की राह पर आगे बढ़ते रहे।


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Thursday, October 15, 2015

अवचेतन मन की शक्ति




हम सभी के भीतर बहुत बड़ा अखूट खजाना समाया है। उसे प्राप्त करने के लिए हमे केवल मन की आंखे खोलकर देखना भर है। हमारे भीतर नियामतो का अथाह भंडार है। जिसमे से हम खुद सुखद,समृद्द और आनंदमयी जीवन जीने के लिए आवश्यक हर चीज प्राप्त कर सकते है। बहुत सी बार हम अपने में समायी संभावनाओ को इसलिए नही जान पाते; क्योकि हम अपने भीतर मौजूद असीमित ज्ञान और अनंत प्रेम के भंडार से अनभिज्ञ होते है, जबकि सत्य तो यह है कि इसमे से हम अपनी हर मनचाही चीज निकाल सकते है। 

लोहे की चुम्बक का टुकड़ा अपने भार से बारह गुना अधिक वजन उठा सकता है, लेकिन अगर हम उसके चुम्बकीय गुण को हटा दे तो यह एक तिनका भी नही उठा पायेगा। इसी तरह मनुष्य भी दो तरह के होते है। एक वे, जो चुम्बकीय गुणों से परिपूर्ण होते है, ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास और आस्था से भरे होते है तथा वे जानते है कि वे सफल होने तथा जीतने के लिए ही बने है। दुसरे वे लोग होते है, जिनमे चुम्बकीय गुण नही होता, ऐसे व्यक्तियों की संख्या समाज में अधिक पायी जाती है। वे डर और शंकाओ से भरे होते है। अवसर सामने आने पर ही वे कहते है,” अगर मै सफल नही हुआ तो क्या होगा? लोग मेरी हंसी उड़ायेगे। इस तरह के लोग जीवन में ज्यादा आगे नही जा पाते है। उनका डर उन्हें उसी जगह पर रोके रहता है, जहाँ वे है। अब हमे चिन्तन करना है कि हम दोनों प्रकारों में से किस श्रेणी में आते है अर्थात हममे चुम्बकीय गुण है या इसका आभाव है। यदि नही तो हम भी चुम्बकीय व्यक्ति बन सकते है, बशर्ते हम इसके रहस्य को समझ ले और उस पर अमल करने लगे। यह रहस्य है, हमारे अवचेतन मन में पाई जाने वाली अदभुत चमत्कारी शक्ति। अवचेतन मन की छिपी हुई शक्ति का प्रयोग करना सीखकर हम अपने जीवन में अधिक शक्ति, धन-सम्पदा, स्वास्थ्य और आनन्द पा सकते है। वास्तव में हमे इस शक्ति को हासिल करने की जरूरत नही है, यह तो हममे पहले से ही समाहित है, बस हमे यह सीखना होगा कि इसका प्रयोग कैसे किया जाये। हमारा अवचेतन मन इस बात का इंतजार करता रहता है कि हम इसे कब विकसित करे और अभिव्यक्ति दे। यदि हम अपने अवचेतन मन की क्षमता को पहचान ले तो हमारी बाहरी जगत की सभी इच्छाए साकार हो सकती है और हम अपने जीवन में अदिश अभिव्यक्ति उपयुक्तता को जानने को मार्ग खोल सकते है। अवचेतन मन में समाहित शक्तिया प्रकट करने के लिए निम्नलिखित विचार स्मरण रखने योग्य है-

1-  सभी महान व्यक्तियों का महान रहस्य यह था कि उनमे अपने अवचेतन मन की शक्तियों से संपर्क करने और उन्हें मुक्त करने की प्रतिभा थी। आप भी ऐसा ही कर सकते है।

2-  हमारे अवचेतन मन के पास सारी समस्याओ के जवाब है। यदि हम सोने से पहले अवचेतन मन से कहे,” मै सुबह छह बजे उठना चाहता हूँ” तो यह आपको ठीक उसी समय जगा देगा।

3-  हमारा अवचेतन मन हमारे शरीर का निर्माता है और हमारा उपचार कर सकता है। यदि हम हर रात आदर्श सेहत के विचार के साथ सोने जायेगे तो और हमारा वफादार सेवक यानि हमारा अवचेतन मन हमारे आदेश का पालन करेगा। हर विचार एक कारण है और हर परिस्थिति एक परिणाम है।

4-  अगर हम पुस्तक लिखना चाहते है, बढ़िया नाटक लिखना चाहते है, श्रोताओ के सामने बेहतर भाषण देना चाहते है तो यह विचार भावना और प्रेम के साथ अपने अवचेतन मन तक पहुचा दे। वह इस पर इसी के अनुरूप प्रतिक्रिया करेगा।

5-  वास्तव में, हम एक जहाज के कप्तान के तरह है। हमे केवल सही निदेश देने होगे, वरना जहाज दुघटनागस्त हो जायेगा। इसी तरह से हमे अपने अवचेतन मन को सही आदेश (विचारे और तस्वीरे) देने होगे, जो हमारे सभी अनुभवो को नियंत्रित करता है। 

6-  इस तरह का वाक्यों का प्रयोग कभी नही करना चाहिए,”मेरे पास इसके लिए पैसे नही है” या “मै ये काम नही कर सकता” हम जो सोचते है, हमारा अवचेतन मन उसी बात को सच मान लेता है  इसलिए वह यह सुनिश्चित कर लेता है कि हमारे पास कभी पैसे न रहे या वह काम करने की क्षमता न रहे, जो हम करना चाहते है। इसके बजाय दृढ़ता से कहे,”मै अपने अवचेतन मन की शक्ति से सारे काम कर सकता हूँ।”

7-  जीवन का नियम विश्वास का नियम है। विश्वास हमारे मस्तिष्क का एक विचार है। उन चीजो में विश्वास न करे, जो हमे नुकसान या चोट पहुचाये। अपने अवचेतन मन की शक्तियों में विश्वास करे। यह विश्वास रखे कि वे हमारा उपचार करेगी, प्रेरित करेगी, शक्तिशाली और समृद्द बनाएगी। अपने विचारो को बदल ले, तकदीर बदल जाएगी।



उपयुक्त विचार डॉ. जोसेफ मर्फी के विचारो से प्रेरित है। 






Monday, October 12, 2015

Meetings को न ले हल्के में




हम सबने यह महसूस किया होगा कि office की meetings में प्रत्येक दिन काफी वक्त लगता है। कभी-कभी तो काम से ज्यादा समय meetings में ही गुजर जाता है। ऐसी meetings का purpose ऐसी meetings का purpose company या organization के कामकाज से सम्बंधित नीतियों को तैयार करने से लेकर उनके implementation में आने वाली problem का समाधान तलाशना होता है। इसके अलावा output और productivity बढाने जैसे मामलो के लिए भी meetings होती है। हालाकि यह भी सच है कि कई बार ऐसी meetings दिशाविहीन होती है और बिना किसी हल के समाप्त हो जाती है। 

meetings में जाने से पहले करे तैयारी

प्रत्येक meetings का एजेंडा पहले से तय होता है और meetings से कई दिन पहले उसमे भाग लेने वाले कर्मियों को यह सर्कुलेट किया जाता है, इसलिए समय रहते एजेंडे में निहित item के बारे में अधिक से अधिक जानकारिया प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। संभव है कि आपके द्वारा निर्वहन किये जा रहे कार्यकलापो पर ही meetings आधारित हो। ऐसे में आपको समस्त update तैयार रखना चाहिए। पिछले कार्यो की detail के अतिरिक्त वर्तमान में जारी कार्यो और भावी कार्यकलापो की रूप-रेखा भी अपने साथ अवश्य रखनी चाहिए।

अगर किसी project या problem की वजह से meetings आयोजित की जा रही हो तो आपको भरसक प्रयास करना चाहिए कि अपनी तरफ से भी आप कोई हल प्रस्तुत कर सके या कम से कम सुझाव देने की स्थिति में हो।

बना सकते है Impression

meetings को कुछ लोग चाय-पानी या गपशप की जगह मान बैठते है। वे ये नही समझ पाते कि कोई ऐसी management नही होगी, जो मोटा वेतन देकर समय व्यर्थ करने के लिए अपने staff को meetings में बुलाएगी। ये भी ध्यान रखे कि कई बार meetings की recording भी होती है और उसे management देखता भी है। ऐसे गैर जिम्मेदाराना behavior का आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है, इसलिए meetings को अवसर की तरह ले और अपनी काबिलियत तथा योग्यता का परिचय देने का प्रयत्न करे।

दुसरो की important बातो को सराहे

अगर आपको किसी वक्ता की कोई बात या सुझाव पसंद आये तो उसकी बेहिचक तारीफ करे। किसी junior की कोई advice मूल्यवान हो तो बाकायदा उसका नाम लेकर उसे श्रेय दे।

Personal झगड़ो का अखाड़ा न बनाये

अगर किसी वक्ता की कोई बात आपको चुभ जाए या जाने-अनजाने में कोई personal comment कर बैठे तो बेहतर यही रहेगा कि उसके साथ किसी बहस में न उलझे। यकीन मानिए गर्मागर्मी का माहौल बनाने से किसी तरह का positive परिणाम नही निकलता, बल्कि नुकसान ही होता है।

सम्मानजनक तरीके से रखे अपनी बात

अपनी बात कहते समय meetings के chairmen और अन्य वक्ताओ के प्रति सम्मान प्रकट करे। यदि आपसे सम्बंधित कोई बात है तो वक्ता की बात खत्म होने पर chairmen से अनुमति मांगकर अपनी बात रखे। बातचीत में चालू शब्दों और भाषा का प्रयोग न करे। भरसक कोशिश करे कि बिना सबूत या साक्ष्यो के किसी भी वक्ता की बात को न काटे। प्रत्येक मुद्दे पर राय देने से भी बचना चाहिए। जोर-जोर से से बोलना या मेज पर हाथ मारते हुए अपनी बात मनवाने जैसी हरकते तो कतई न करे, पर यह भी आवश्यक है कि आवाज इतनी बुलंद हो कि सभी तक पहुचे। बातो में confidence भी झलकना चाहिए और कम शब्दों में पूरी बात रख देनी चाहिए। दोहराव से बचे और सरल भाषा तथा profession से सम्बंधित terminology का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करे। अगर कोई जिज्ञासा है तो उसे meetings के अंतिम समय के लिए बचा कर न रखे। बीच में chairmen की अनुमति से इसे सबके सामने रखने में कोई बुराई नही है। यदि जरूरी है तो अपनी बात power point presentation के जरिये रखे, पर इसे नीरस तरीके से न बनाये। इस क्रम में आकड़ो की बाजीगिरी दिखाने से भी बचे। इसका अच्छा impression नही पड़ता। अपनी उपलब्धियों या सफलता का बखान करने के क्रम में team work को नजरअंदाज न करे। उनकी भूमिका का उचित उल्लेख जरुर करे, लेकिन अपने senior या junior की complain meetings में न करे। यह ऐसी बातो के लिए उपयुक्त मंच नही है।

कैसी हो Body Language

1-       चुस्त-दुरुस्त और अलर्ट दिखे। आपके personality में किसी तरह का आलस्य या बोझिलपन नही झलकना चाहिए।

2-       chair पर बिलकुल सीधे होकर अन्य member के बराबर की उचाई पर बैठे

3-       chair पर पसर कर बैठना, बार-बार पहलू बदलना, पैर पसार कर बैठना इत्यादि से यह पता चलता है कि आपका ध्यान meeting में नही है।

4-       दोनों हाथ सामने टेबल पर रखे।

5-       भूलकर भी किसी की ओर ऊँगली दिखाकर इशारा या बाते न करे।

कुछ सामान्य Tips

1-meeting वाले दिन formal कपड़े पहने। ज्यादा color  या तडक-भड़क वाले वस्त्र तो बिलकुल न पहने। shirt के बटन बंद हो।

2-meeting शुरू होने से 10 minute पहले confess hall में अवश्य पहुच जाये। साथ में notepad और pen रखे। points note करते रहे।

3-meetings में अपने साथ सारे आवश्यक papers या reports ले जाना न भूले।

4-वक्ताओ की बात ध्यान से सुने।

5-बेवजह की टोका-टाकी करने से बचे।

6-meetings शुरू होने से पहले mobile off कर दे या silence मोड में डाल दे।

7-बार-बार mobile सन्देश न पढ़े, न जवाब दे।

8-phone सामने meeting table पर न रखे। इससे आपका और सहकर्मियों का ध्यान भटकता है।

9- अगर कोई बहुत जरूरी call हो तो confess room से बाहर जाकर संक्षिप्त बातचीत करे।

10- ऊँघना, अंगुलिया चटकाना, पैर हिलाना,इधर-उधर देखना या साथ बैठे person से व्यक्तिगत बाते करना आदि meeting के डेकोरम के विरूद्ध होता है। ऐसा न करे।